पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला एक बार फिर जघन्य अपराध और उसके बाद सुलगती सियासत का केंद्र बन गया है। सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव (Kapsad Village) की फिजाओं में इस वक्त बारूद जैसी गंध और अनहोनी का डर घुला हुआ है। खबरीलाल की टीम जब ग्राउंड जीरो की ओर बढ़ी, तो वहां का मंजर बेहद अलग था। जहां दो दिन पहले तक गलियां गुलजार थीं, वहां आज केवल पुलिस के बूटों की आवाज और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है।Read also:-मेरठ में 'महाभारत', दलित बेटी के अपहरण पर उबाल; SP से भिड़े विधायक अतुल प्रधान, सांसद चंद्रशेखर को गाजियाबाद में रोका, 10 थानों की फोर्स तैनात
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एक दलित परिवार पर टूटा कहर अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो चुका है। अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की जिस निर्ममता से हत्या की गई और उनकी बेटी रूबी का अपहरण किया गया, उसने न केवल पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की सियासत को गरमा दिया है। हालात इस कदर संवेदनशील हैं कि प्रशासन ने पूरे गांव को एक अभेद्य किले (Fortress) में तब्दील कर दिया है। नगीना से सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) के आने की आहट मात्र से ही पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है, वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं के काफिले को टोल प्लाजा पर ही रोककर वापस लौटाया जा रहा है।
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खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर उस काली रात को क्या हुआ था, क्यों प्रशासन ने मीडिया तक को बैन कर दिया है, और इस हत्याकांड के बाद पश्चिमी यूपी की दलित राजनीति में कैसा उबाल आ रहा है।
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वह खौफनाक वारदात जिसने कपसाड़ को दहला दिया:-

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मां का बलिदान और बेटी का अपहरण

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कपसाड़ गांव की यह घटना किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहला देने के लिए काफी है। खबरीलाल को मिली जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले गांव के ही कुछ दबंग और अपराधी प्रवृत्ति के तत्वों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत अनुसूचित जाति के परिवार को निशाना बनाया। अपराधियों का मुख्य उद्देश्य युवती रूबी का अपहरण करना था।
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चश्मदीदों और स्थानीय सूत्रों से खबरीलाल को पता चला है कि जब बदमाशों ने रूबी को जबरन उठाने की कोशिश की, तो एक मां का कलेजा कांप उठा। सुनीता, जो अपनी बेटी को अपनी जान से ज्यादा प्यार करती थी, दरिंदों के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई। उसने अपनी बेटी को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। लेकिन अपराधियों के सिर पर खून सवार था। बेटी के अपहरण में बाधा बन रही मां सुनीता की उन्होंने निर्मम हत्या कर दी।
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यह हत्या केवल एक जान लेना नहीं था, बल्कि कानून के इकबाल को सीधी चुनौती थी। मां की लाश के पास से ही वे उसकी बेटी रूबी को घसीटते हुए ले गए और अंधेरे में ओझल हो गए। इस घटना ने पूरे गांव को सन्न कर दिया है। एक तरफ घर में मां का शव पड़ा था, और दूसरी तरफ बेटी का कोई अता-पता नहीं था।
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 Kapsad on High Alert: Village Sealed After MP Chandrashekhar Ravan’s Visit Alert, Media and Leaders Stopped

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दलित समाज में भारी आक्रोश

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इस जघन्य वारदात के बाद से ही कपसाड़ गांव के दलित समाज में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना है। खबरीलाल से बातचीत में दबी जुबान में कुछ ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम किए होते या पूर्व में मिल रही धमकियों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज सुनीता जिंदा होती और रूबी अपने घर में सुरक्षित होती। हत्या और अपहरण के इस 'डबल अटैक' ने गांव के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है।
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गांव बना छावनी - सील किए गए सारे रास्ते

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घटना की गंभीरता को देखते हुए और खुफिया विभाग (LIU) की रिपोर्ट के आधार पर मेरठ पुलिस प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं। प्रशासन को आशंका है कि बाहरी तत्वों के प्रवेश से गांव में जातीय हिंसा भड़क सकती है या कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
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अटेरना पुल: पुलिस का अभेद्य चेकपोस्ट

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सरधना और कपसाड़ को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित अटेरना पुल (Aterna Bridge) इस समय किसी अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर जैसा नजर आ रहा है। खबरीलाल के रिपोर्टर ने देखा कि:
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    बैरिकेडिंग: पुलिस ने पुल के दोनों ओर कई लेयर की बैरिकेडिंग कर दी है। लोहे के बैरियर लगाकर रस्सियों से रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।
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    वाहनों पर रोक: दोपहिया वाहन हो या चार पहिया, किसी भी गाड़ी को पुल पार करने की अनुमति नहीं है।
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    सघन तलाशी: जो इक्का-दुक्का लोग पैदल आ-जा रहे हैं, उनकी भी सघन तलाशी ली जा रही है और आधार कार्ड चेक करने के बाद ही, यदि वे स्थानीय निवासी हैं, तो उन्हें जाने दिया जा रहा है।
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एसपी देहात का कैंप और पुलिस का पहरा

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हालात की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसपी देहात (SP Rural) ने खुद मौके पर डेरा डाल दिया है। वे पल-पल की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। गांव के भीतर पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियां तैनात किए जाने की सूचना है। गांव की हर गली, हर नुक्कड़ पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। छतों से भी निगरानी की जा रही है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व माहौल खराब न कर सके।
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 Kapsad on High Alert: Village Sealed After MP Chandrashekhar Ravan’s Visit Alert, Media and Leaders Stopped

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बाहरी व्यक्तियों की 'नो एंट्री'

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पुलिस ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी बाहरी व्यक्ति (Outsider) को गांव में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसमें रिश्तेदार, सामाजिक कार्यकर्ता और दूर-दराज के लोग शामिल हैं। प्रशासन का तर्क है कि भीड़ जमा होने से जांच प्रभावित हो सकती है और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
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मीडिया पर भी पहरा - लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को रोका

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आम तौर पर ऐसी घटनाओं में मीडिया की भूमिका अहम होती है, लेकिन कपसाड़ मामले में प्रशासन ने एक कड़ा और विवादास्पद कदम उठाते हुए मीडिया कर्मियों (Media Personnel) की एंट्री पर भी रोक लगा दी है।
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क्यों रोका गया मीडिया को?

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांव में हालात "बेहद संवेदनशील" (Highly Sensitive) हैं। कैमरों और मीडिया के जमावड़े से पीड़ित परिवार पर दबाव बढ़ सकता है या बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से जातीय तनाव फैल सकता है। हालांकि, दबी जुबान में चर्चा है कि प्रशासन अपनी कमियों को छुपाने और मामले को 'हाई प्रोफाइल' होने से बचाने के लिए मीडिया को दूर रख रहा है।
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खबरीलाल सहित कई अन्य न्यूज़ चैनलों और अखबारों के रिपोर्टर अटेरना पुल पर खड़े हैं, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा रही। यह 'ब्लैकआउट' जैसी स्थिति ग्रामीणों के मन में और अधिक संशय पैदा कर रही है कि आखिर गांव के भीतर चल क्या रहा है।
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सियासत का 'सुपर शो' - चंद्रशेखर और सपा का शक्ति प्रदर्शन

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित और ओबीसी वोट बैंक का समीकरण हमेशा से अहम रहा है। कपसाड़ की घटना ने इस समीकरण को फिर से साधने का मौका दे दिया है। जैसे ही यह खबर फैली, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
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नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का 'अलर्ट'

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भीम आर्मी चीफ और नगीना से नवनिर्वाचित सांसद चंद्रशेखर आजाद (रावण) का दलित समाज में एक अलग प्रभाव है। उनकी कार्यशैली हमेशा से आक्रामक रही है। जैसे ही उन्हें पता चला कि एक दलित मां की हत्या हुई है और बेटी अगवा है, उन्होंने गांव पहुंचने का एलान कर दिया।
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    प्रशासन की धड़कनें बढ़ीं: चंद्रशेखर के आने की सूचना मात्र से ही मेरठ प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। प्रशासन जानता है कि चंद्रशेखर के साथ हजारों युवाओं की भीड़ चलती है, और यदि वे गांव में पहुंच गए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है।
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    सीलिंग का मुख्य कारण: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गांव को इतनी सख्ती से सील करने के पीछे मुख्य कारण चंद्रशेखर को रोकना ही था। पुलिस किसी भी कीमत पर उन्हें पीड़ित परिवार तक पहुंचने से पहले ही रोकना चाहती है ताकि कोई बड़ा आंदोलन खड़ा न हो सके।
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समाजवादी पार्टी का महिला प्रतिनिधिमंडल और टोल पर टकराव

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दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने भी इस मुद्दे पर योगी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सपा ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देने और हकीकत जानने के लिए एक उच्च स्तरीय महिला प्रतिनिधिमंडल भेजा।
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काशी टोल प्लाजा पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: जैसे ही सपा नेताओं का काफिला मेरठ की सीमा में दाखिल होने लगा, पुलिस ने उन्हें काशी टोल प्लाजा (Kashi Toll Plaza) पर ही रोक लिया। यहां पुलिस और सपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
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रोके गए प्रमुख सपा नेता:

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    मृदुला यादव (सपा महिला जिला अध्यक्ष): उन्होंने पुलिस कार्रवाई को तानाशाही बताया और कहा कि एक महिला होने के नाते वे पीड़ित परिवार का दर्द बांटने जा रही थीं।
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    इशरत जहां (प्रदेश उपाध्यक्ष): उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दलित विरोधी है और अपराधियों को संरक्षण दे रही है।
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    नजमा (महानगर अध्यक्ष): उन्होंने कहा कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय नेताओं को रोकने में अपनी ऊर्जा लगा रही है।
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    सांसद सुमन लाल और राजलक्ष्मी: अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया।
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पुलिस का तर्क: एसपी ट्रैफिक और मौके पर मौजूद अन्य अधिकारियों ने सपा नेताओं को हवाला दिया कि गांव में धारा 144 लागू है और उनके जाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद भी पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
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पुलिस जांच और आगे की चुनौती

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इन तमाम राजनीतिक सरगर्मियों के बीच असली सवाल अब भी वही है - कातिल कहां हैं और रूबी कहां है?
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मुकदमा और दबिश

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पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर हत्या (IPC 302/BNS 103), अपहरण और एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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    टीमें गठित: मेरठ एसएसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की कई संयुक्त टीमें गठित की हैं।
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    सर्विलांस: संदिग्धों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए हैं। गांव के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
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    दबिश: पुलिस की टीमें मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, शामली और अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
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प्रशासन का दावा

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पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उन्हें अहम सुराग हाथ लगे हैं। उनका कहना है कि यह रंजिश और एकतरफा प्रेम प्रसंग या पुरानी दुश्मनी का मामला हो सकता है, लेकिन असली सच आरोपियों की गिरफ्तारी और रूबी की बरामदगी के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है और वादा किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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सामाजिक चिंतन - आखिर कब तक?

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कपसाड़ की घटना ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। हाथरस, लखीमपुर और अब कपसाड़ - ये नाम केवल जगहों के नहीं, बल्कि उस दर्दनाक हकीकत के गवाह हैं जहां कमजोर तबके को ताकतवर लोगों की हिंसा का शिकार होना पड़ता है।
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एक मां, जिसने अपनी बेटी को बचाने के लिए जान दे दी, उसका बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस रूबी को सही-सलामत वापस ला पाएगी? क्या राजनीतिक रोटियां सेंकने के बजाय हमारे नेता उस परिवार को वास्तविक न्याय दिला पाएंगे?
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फिलहाल कपसाड़ गांव में मातम पसरा है। हर घर की कुंडी भीतर से बंद है। लोग डरे हुए हैं कि कहीं पुलिस की सख्ती या अपराधियों की वापसी का कहर उन पर न टूट पड़े।
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न्याय की आस और सुलगते सवाल

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खबरीलाल की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल स्थिति यह है कि कपसाड़ एक किले में तब्दील है, नेता सड़कों पर हैं, पुलिस बैरिकेड्स पर है, और एक परिवार अपने घर के चिराग (बेटी) की वापसी की राह देख रहा है।
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प्रशासन की पहली प्राथमिकता रूबी को सुरक्षित बरामद करना होनी चाहिए। राजनीतिक दलों को रोका जाना प्रशासनिक मजबूरी हो सकती है, लेकिन न्याय में देरी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी। जैसे-जैसे सूरज ढल रहा है, सरधना में तनाव बढ़ता जा रहा है। देखना होगा कि आने वाले 24 घंटे इस केस में क्या नया मोड़ लेकर आते हैं।
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हमसे जुड़े रहें: इस खबर पर पल-पल की अपडेट के लिए Khabreelal.com को रिफ्रेश करते रहें। खबरीलाल आपको सबसे पहले बताएगा कि पुलिस को आरोपियों की तलाश में क्या सफलता मिली।
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FAQ: कपसाड़ कांड से जुड़े अहम सवाल (खबरीलाल एक्सक्लूसिव)

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Q1: कपसाड़ गांव में क्या हुआ है?
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Ans: मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में बदमाशों ने एक दलित युवती रूबी का अपहरण किया और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की हत्या कर दी।
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Q2: गांव को सील क्यों किया गया है?
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Ans: तनावपूर्ण माहौल और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद व अन्य नेताओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव को सील किया गया है।
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Q3: क्या पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है?
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Ans: पुलिस लगातार दबिश दे रही है और मुकदमा दर्ज कर जांच जारी है, लेकिन अभी तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी या युवती की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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Q4: सपा नेताओं को कहां रोका गया?
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Ans: सपा के महिला प्रतिनिधिमंडल को मेरठ के काशी टोल प्लाजा पर पुलिस द्वारा रोक लिया गया।
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