उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में इन दिनों घरेलू गैस (LPG) उपभोक्ताओं का धैर्य जवाब दे रहा है। चिलचिलाती धूप में गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें, महिलाओं और बुजुर्गों के चेहरों पर झलकती निराशा और कर्मचारियों के साथ होती तीखी नोकझोंक—यह दृश्य आजकल मेरठ की कई गैस एजेंसियों का आम हिस्सा बन गया है।READ ALSO:-देशभर में 'कुदरत का कहर': 20 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ ओलावृष्टि का तांडव; यूपी के 38 जिलों में 'येलो अलर्ट', जानें आपके शहर का हाल
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हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जहाँ जिला प्रशासन और पूर्ति विभाग (Supply Department) जिले में पर्याप्त गैस स्टॉक होने का दावा करते नहीं थक रहा है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से लेकर शहर के पॉश इलाकों तक, गैस की किल्लत और वितरण प्रणाली की खामियों ने एक बड़े 'गैस संकट' (Gas Crisis) की पोल खोल दी है। इस संकट के पीछे कालाबाजारी, फर्जी बुकिंग और सिस्टम की नाकामी का एक बड़ा नेक्सस काम कर रहा है।
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ग्राउंड जीरो का हाल: एजेंसियों पर बेकाबू होती भीड़ और झड़पें
\r\n\r\nईद जैसे प्रमुख त्योहार के बीत जाने के बाद भी गैस एजेंसियों पर भीड़ घटने का नाम नहीं ले रही है। उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि त्योहार के बाद आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, लेकिन स्थिति और भी बदतर हो गई है।
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- \r\n सूरजकुंड की सविता गैस एजेंसी का हाल: शनिवार को सूरजकुंड स्थित सविता गैस एजेंसी पर हालात तब बेकाबू हो गए जब घंटों से लाइन में लगे उपभोक्ताओं का सब्र टूट गया। गैस न मिलने और कर्मचारियों के टालमटोल वाले रवैये के कारण उपभोक्ताओं और एजेंसी कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प हो गई। मौके पर जमकर हंगामा हुआ, जिसे शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।\r\n \r\n
- \r\n हापुड़ अड्डा और अन्य क्षेत्रों की स्थिति: हापुड़ अड्डा स्थित तिरंगा गैस एजेंसी और हापुड़ रोड स्थित रमन गैस एजेंसी पर भी शनिवार को उपभोक्ताओं की भारी भीड़ जमा रही। लोग सुबह से ही अपना काम-काज छोड़कर सिलेंडर की आस में लाइनों में खड़े नजर आए। विशेष रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में स्थित एजेंसियों पर दबाव अत्यधिक देखा जा रहा है।\r\n \r\n
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प्रशासन के दावे: कागजों में 'ऑल इज वेल'
\r\n\r\nजहाँ सड़कों पर जनता परेशान है, वहीं प्रशासनिक अधिकारी आंकड़ों का हवाला देकर स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहे हैं।
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- \r\n जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) का बयान: जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह का स्पष्ट कहना है कि मेरठ जिले में घरेलू गैस का कोई संकट नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।\r\n \r\n
- \r\n डीएम का आदेश: स्थिति को नियंत्रित करने और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की मांग पूरी करने के लिए जिलाधिकारी (DM) की ओर से 20 प्रतिशत कॉमर्शियल (व्यावसायिक) गैस के वितरण का कोटा भी तय किया जा चुका है।\r\n \r\n
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लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि स्टॉक पर्याप्त है और कॉमर्शियल कोटा निर्धारित है, तो फिर घरेलू उपभोक्ता परेशान क्यों हैं? इसका जवाब 'कालाबाजारी' के उस काले खेल में छिपा है, जो शहर की मुख्य सड़कों से लेकर तंग गलियों तक धड़ल्ले से चल रहा है।
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कालाबाजारी का 'सिंडिकेट': घरेलू गैस से पक रहे रेस्टोरेंट के पकवान
\r\n\r\nगैस एजेंसी संचालक भले ही अपने स्तर से किसी भी प्रकार की कालाबाजारी से पूरी तरह इनकार कर रहे हों, लेकिन पूर्ति विभाग की हालिया कार्रवाइयों ने इस सफेद झूठ से पर्दा उठा दिया है।
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घरेलू गैस सिलेंडर (जो सब्सिडी वाले होते हैं और केवल घरों में इस्तेमाल के लिए होते हैं) का अवैध रूप से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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- \r\n FIR और कानूनी कार्रवाई: लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब पूर्ति विभाग ने छापामारी की, तो तीन गैस एजेंसियों के खिलाफ सीधे तौर पर मुकदमा दर्ज कराया गया। हद तो तब हो गई जब एक एजेंसी के हॉकर (डिलीवरी मैन) को ही सिलेंडर की कालाबाजारी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया और उस पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई।\r\n \r\n
- \r\n ठेलों से लेकर रेस्टोरेंट तक: पूर्ति विभाग ने हापुड़ रोड पर तीन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर 11 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए। इन सबके बावजूद शहर के मुख्य मार्गों, चौराहों और गलियों में चाट-पकौड़ी के ठेलों, ढाबों और बड़े रेस्टोरेंट में धड़ल्ले से लाल रंग के (घरेलू) सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है।\r\n \r\n
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कालाबाजारी का गणित: एक व्यावसायिक (नीले रंग का) सिलेंडर घरेलू सिलेंडर की तुलना में काफी महंगा होता है। मुनाफाखोर रेस्टोरेंट मालिक और भ्रष्ट हॉकर/एजेंसी कर्मचारी मिलकर इस अंतर का फायदा उठाते हैं। आम आदमी के हिस्से का सिलेंडर ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है, जिससे एजेंसियों पर 'आर्टिफिशियल शॉर्टेज' (कृत्रिम कमी) पैदा हो जाती है।
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'फर्जी बुकिंग' का महाघोटाला: बिना मांगे आ रहे सिलेंडर के मैसेज
\r\n\r\nभीड़ और कालाबाजारी से भी बड़ा और गंभीर मामला 'फर्जी बुकिंग' (Fake Booking) का सामने आया है। यह सीधे तौर पर एक साइबर और सिस्टमैटिक फ्रॉड है।
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कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्होंने पिछले कई महीनों से अपने कनेक्शन पर कोई गैस सिलेंडर बुक नहीं कराया है, लेकिन उनके मोबाइल नंबर पर अचानक 'सिलेंडर सफलतापूर्वक डिलीवर हो गया' का मैसेज आ जाता है।
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- \r\n मवाना खुर्द का मामला: मवाना खुर्द की निवासी माया त्यागी का मामला इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल (CM Portal) पर शिकायत दर्ज कराते हुए गंभीर आरोप लगाया है कि गैस एजेंसी के लोग खुद ही उनके नाम पर बुकिंग कर रहे हैं और वह सिलेंडर ब्लैक में बेच रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n जांच के आदेश: मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है और यह जांच सीधे जिला पूर्ति अधिकारी के पास पहुंच गई है।\r\n \r\n
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यह कैसे होता है? जानकारों के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं के पास एक से अधिक कनेक्शन हैं या जो नियमित रूप से गैस नहीं लेते, भ्रष्ट कर्मचारी उनके डेटा का दुरुपयोग करते हैं। सिस्टम में फर्जी तरीके से बुकिंग दिखाई जाती है और सब्सिडी वाला सिलेंडर निकाल कर ऊंचे दामों पर बाजार में खपा दिया जाता है।
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25 दिन का नियम और उपभोक्ताओं की बेबसी
\r\n\r\nगैस एजेंसियों पर बढ़ती भीड़ का एक और तकनीकी कारण '25 दिन का अंतराल' (25 Days Gap Rule) है। नियमानुसार, एक घरेलू गैस सिलेंडर बुक करने के बाद दूसरी बुकिंग के लिए 25 दिन का इंतजार करना अनिवार्य है। लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ता कुछ ही दिनों बाद एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं।
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उपभोक्ता क्यों लौट रहे हैं?
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- \r\n डिलीवरी में विफलता: उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग तो कर देते हैं, लेकिन कई दिनों तक हॉकर सिलेंडर लेकर घर नहीं पहुंचता। मजबूरन उन्हें खुद एजेंसी जाना पड़ता है।\r\n \r\n
- \r\n कंप्यूटर का 'झूठ': जब उपभोक्ता एजेंसी पहुंचकर हंगामा करते हैं, तो कर्मचारी कंप्यूटर का रिकॉर्ड दिखाते हैं कि "आपका सिलेंडर तो कुछ दिन पहले ही डिलीवर हो चुका है।" यहीं से बहस और हाथापाई शुरू होती है, क्योंकि उपभोक्ता को सिलेंडर मिला ही नहीं होता है (यह फर्जी बुकिंग और हॉकर की हेराफेरी का ही नतीजा है)।\r\n \r\n
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प्रशासन का एक्शन प्लान और कंट्रोल रूम
\r\n\r\nबढ़ते बवाल और मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंची शिकायतों के बाद अंततः जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
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- \r\n कंट्रोल रूम की स्थापना: जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पूर्ति विभाग के कार्यालय में एक विशेष 'कंट्रोल रूम' (Control Room) बनाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n शिकायत पर त्वरित कार्रवाई: उपभोक्ता गैस न मिलने, हॉकर द्वारा अतिरिक्त पैसे मांगने या कालाबाजारी की शिकायत इस कंट्रोल रूम में कर सकते हैं। DSO ने सख्त चेतावनी दी है कि कालाबाजारी या फर्जी बुकिंग की शिकायत सत्य पाए जाने पर संबंधित एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने से लेकर कड़ी आपराधिक कार्रवाई तक की जाएगी।\r\n \r\n
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व्यवस्था में 'सर्जरी' की दरकार
\r\n\r\nमेरठ का यह गैस संकट केवल सिलेंडरों की कमी का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में लगे दीमक का जीता-जागता प्रमाण है। जब तक घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह से बंद नहीं होगा और हॉकरों की मनमानी पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक आम आदमी यूं ही कतारों में खड़ा पिसता रहेगा। प्रशासन को कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर सख्त 'सर्जिकल स्ट्राइक' करनी होगी। माया त्यागी जैसे जागरूक उपभोक्ताओं की शिकायतें इस भ्रष्ट तंत्र को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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