मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में बुधवार की देर रात मेरठ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने न केवल सट्टा माफियाओं की कमर तोड़ दी, बल्कि स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र (Brahmpuri Police Station) के माधवपुरम इलाके में चल रहे एक बड़े सट्टा रैकेट का एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (SP City Ayush Vikram Singh) की स्पेशल टीम ने पर्दाफाश किया है।READ ALSO:-'कच्चा बादाम' गर्ल के प्यार पर लगा 'फर्जीवाड़े' का दाग: प्रेमी आकाश संसंवाल जेल में, मुलाकात के दौरान सलाखों के पीछे 1 घंटे तक रोते रहे दोनों
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसे गुप्त ऑपरेशन में पुलिस ने मौके से 29 सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान सट्टे के अड्डे से 57 हजार रुपये नकद, 30 मोबाइल फोन और भारी मात्रा में सट्टे की पर्चियां बरामद की गई हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय ब्रह्मपुरी थाने की पुलिस को अंत तक नहीं लगने दी गई, जिससे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

एक अनजान कॉल और एसपी सिटी का एक्शन प्लान

\r\n\r\n
इस पूरी कार्रवाई की पटकथा बुधवार की देर रात एक अनजान फोन कॉल से लिखी गई। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह के सरकारी नंबर पर एक कॉल आई। फोन करने वाले शख्स ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के माधवपुरम में एक मकान के अंदर खुलेआम सट्टे का कारोबार चल रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कॉलर ने एसपी सिटी को बताया कि, "साहब, यहां रोज जुआरियों और सट्टेबाजों का जमावड़ा लगता है। मोहल्ले की बहन-बेटियों का निकलना दूभर हो गया है। शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती क्योंकि स्थानीय पुलिस की मिलीभगत है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सूचना बेहद सटीक और गंभीर थी। एसपी सिटी ने तुरंत मामले की संवेदनशीलता को समझा। आमतौर पर ऐसी सूचनाएं संबंधित थाने को फॉरवर्ड कर दी जाती हैं, लेकिन शिकायत में 'पुलिस की मिलीभगत' का जिक्र था। इसलिए, एसपी सिटी ने एक अलग रणनीति अपनाई। उन्होंने स्थानीय थाने को सूचित करने के बजाय अपनी खुद की स्पेशल टीम (SOG और सर्विलांस टीम के भरोसेमंद सिपाही) को एक्टिव किया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

गोपनीयता ऐसी कि परिंदा भी पर न मार सके

\r\n\r\n
एसपी सिटी ने सबसे पहले अपने स्तर पर मुखबिरों के जरिए सूचना की पुष्टि करवाई। खबर पक्की थी—माधवपुरम के उस मकान में वाकई 'महफिल' सजी थी। इसके बाद देर रात ही एक गुप्त टीम का गठन किया गया। टीम के सदस्यों को भी आखिरी वक्त तक यह नहीं बताया गया कि रेड कहां मारनी है, ताकि सूचना लीक न हो सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जैसे ही एसपी सिटी की स्पेशल टीम माधवपुरम स्थित उस संदिग्ध मकान पर पहुंची, वहां हड़कंप मच गया। पुलिस की गाड़ियां देखते ही सट्टा लगा रहे लोगों में भगदड़ मच गई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    छतों से कूदने लगे आरोपी: पुलिस को देखते ही कई सट्टेबाज अपनी जान की परवाह किए बिना छतों से कूदने लगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दीवारें फांदने की कोशिश: कुछ ने पीछे की दीवारों को फांदकर भागने की कोशिश की।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    घेराबंदी: लेकिन पुलिस की टीम ने पहले ही मकान को चारों तरफ से घेर लिया था। भागने की तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस ने मौके से 29 लोगों को दबोच लिया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बरामदगी देख पुलिस भी रह गई दंग

\r\n\r\n
पकड़े गए आरोपियों की तलाशी लेने पर पुलिस को बड़े पैमाने पर सट्टे के सबूत मिले। मौके से बरामद सामान इस बात की तस्दीक कर रहा था कि यह धंधा काफी समय से और बड़े स्तर पर चल रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कैश: पुलिस ने मौके से 57,000 रुपये नकद बरामद किए। यह रकम उस दिन की 'कलेक्शन' बताई जा रही है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मोबाइल फोन: 30 मोबाइल फोन जब्त किए गए। इन फोनों के जरिए ऑनलाइन सट्टा लगवाया जा रहा था और खाईबाड़ी की जा रही थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दस्तावेज: सट्टे की पर्चियां, हिसाब-किताब के रजिस्टर और पेन भी बरामद हुए हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
सभी 29 आरोपियों को पुलिस वैन में भरकर सीधे थाने लाया गया। पूरी रात थाने में अफरा-तफरी का माहौल रहा। पकड़े गए लोगों के परिजन थाने के बाहर जमा हो गए और सिफारिशों का दौर शुरू हो गया, लेकिन पुलिस ने किसी की एक न सुनी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर जांच की तलवार

\r\n\r\n
इस रेड ने ब्रह्मपुरी पुलिस की साख पर बड़ा बट्टा लगा दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि जिस मकान में 29 लोग जुटने थे, 30 मोबाइल फोन से सट्टा चल रहा था, और जहां रोज भीड़ लगती थी, वहां की खबर स्थानीय बीट सिपाही या 'फैंटम' (चीता पुलिस) को क्यों नहीं थी?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
स्थानीय लोगों ने एसपी सिटी को बताया कि फैंटम पुलिस की गाड़ियां अक्सर उस गली से गुजरती थीं। आरोप है कि पुलिसकर्मी वहां आते थे, झांकते थे और फिर बिना कोई कार्रवाई किए चले जाते थे। यह सीधा संकेत है कि या तो पुलिस लापरवाह थी या फिर सट्टा माफियाओं को खाकी का संरक्षण प्राप्त था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ब्रह्मपुरी पुलिस की भूमिका की जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दे दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर जांच में किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता पाई गई, तो उस पर निलंबन की गाज गिरना तय है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मेरठ में सट्टा: एक सामाजिक नासूर

\r\n\r\n
मेरठ में सट्टा और जुआ कोई नई समस्या नहीं है। लिसाड़ी गेट, ब्रह्मपुरी, और कोतवाली जैसे इलाकों में सट्टे का कारोबार छिप-छिप कर चलता रहता है। यह अवैध धंधा न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी ছিন্ন-भिन्न कर रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सट्टे का आधुनिक रूप: पहले जहां सट्टा पर्चियों पर चलता था, वहीं अब यह हाईटेक हो गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    व्हाट्सएप ग्रुप: सट्टेबाज व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए नंबर और रकम की बुकिंग करते हैं।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    ऑनलाइन पेमेंट: लेन-देन के लिए पेटीएम और गूगल पे जैसे ऐप्स का इस्तेमाल होता है, ताकि कैश पकड़े जाने का जोखिम कम हो।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    खाईबाड़ी: एक मुख्य 'सट्टा किंग' होता है जो छोटे एजेंटों के जरिए पूरे शहर से पैसा इकट्ठा करता है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद: माधवपुरम जैसे रिहायशी इलाकों में सट्टे के अड्डे चलने से सबसे बुरा असर युवाओं और किशोरों पर पड़ता है। जल्दी अमीर बनने की चाह में वे अपनी गाढ़ी कमाई इस दलदल में फंसा देते हैं। हारने पर वे अपराध का रास्ता चुनते हैं, जिससे शहर में चोरी, छीनैती और लूट की घटनाएं बढ़ती हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कानूनी पहलू: क्या है सजा का प्रावधान?

\r\n\r\n
भारत में 'सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867' (Public Gambling Act, 1867) के तहत सट्टा खेलना और खिलवाना दोनों अपराध हैं। हालांकि, यह कानून काफी पुराना है और इसमें सजा के प्रावधान बहुत सख्त नहीं हैं, फिर भी यूपी पुलिस अब ऐसे मामलों में गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) और गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई कर रही है, ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    धारा 13: जुआ खेलते हुए पकड़े जाने पर जुर्माना और जेल।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    धारा 3/4: जुआ घर (Gambling House) चलाने पर सख्त सजा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ पुलिस अब इन आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। अगर इनका पुराना इतिहास मिला, तो इन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें इनकी अवैध संपत्ति कुर्क करने तक का प्रावधान है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह: एक्शन मोड में

\r\n\r\n
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी उन्होंने कंकरखेड़ा और देहली गेट थाना क्षेत्रों में कई बड़े खुलासे किए हैं। हाल ही में एक 'सॉल्वर गैंग' (परीक्षा में नकल कराने वाला गिरोह) को पकड़ने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस कार्रवाई के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया है कि अपराध चाहे किसी भी स्तर पर हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, उन्होंने अपने ही विभाग के भ्रष्ट तत्वों को भी चेता दिया है कि 'अंदर की खबर' रखने वालों की अब खैर नहीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जनता से अपील: जागरूक बनें

\r\n\r\n
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने आसपास हो रही ऐसी अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पहचान गुप्त रखने का वादा किया गया है। नागरिक 'यूपी 112' या सीधे अधिकारियों के सीयूजी नंबर पर कॉल करके सूचना दे सकते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ब्रह्मपुरी में हुई यह कार्रवाई यह साबित करती है कि अगर पुलिस चाह ले, तो कोई भी अपराधी कानून की नजर से बच नहीं सकता। 29 सट्टेबाजों की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है, लेकिन असली जीत तब होगी जब इस धंधे को संरक्षण देने वाली 'काली भेड़ों' को बेनकाब किया जाएगा। माधवपुरम के निवासी अब राहत की सांस ले रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी गलियां अब जुआरियों के आतंक से मुक्त रहेंगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ के ब्रह्मपुरी में एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह की अगुवाई में एक गोपनीय छापेमारी के दौरान 29 सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 57 हजार रुपये और 30 मोबाइल बरामद किए। स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के शक के चलते उन्हें इस ऑपरेशन से दूर रखा गया था, जिसकी अब जांच चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन