मेरठ, जिसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी और अब 'स्मार्ट सिटी' कहा जाता है, उसकी चमक-दमक वाली सड़कों के पीछे एक घिनौना सच छिपा है। यह सच है प्रशासनिक लापरवाही का, ठेकेदारों की मनमानी का और आम जनता की बेबसी का।
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शहर का दिल कहे जाने वाले बेगमपुल (Begum Pul) इलाके में, जहां दिन-रात हजारों गाड़ियों का शोर और व्यापार की चहल-पहल रहती है, ठीक उसी की नाक के नीचे सैकड़ों लोग पिछले एक महीने से 'घुट-घुट कर' जीने को मजबूर हैं। मामला वार्ड-52 की 'जीवन ज्योति नर्सिंग होम वाली गली' का है। यहां विकास के नाम पर विनाश की ऐसी कहानी लिखी गई है कि अब स्थानीय निवासियों का सब्र का बांध टूट चुका है।
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सीवर लाइन डालने के लिए सड़क खोदी गई, लेकिन उसे न तो मुख्य लाइन से जोड़ा गया और न ही सड़क दोबारा बनाई गई। नतीजा? एक हंसता-खेलता मोहल्ला अब कीचड़, गंदगी और बीमारियों का घर बन गया है।
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क्या है पूरा मामला? (The Core Issue)

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बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने महापौर (Mayor) और नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) को एक लिखित शिकायत और चेतावनी पत्र भेजा है।
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ख़बरीलाल के पास मौजूद शिकायती पत्र के अनुसार: करीब एक महीने पहले, नगर निगम के ठेकेदारों ने जीवन ज्योति नर्सिंग होम वाली गली में नई सीवर लाइन डालने का काम शुरू किया था। उस समय निवासियों को लगा था कि पुरानी सीवर समस्याओं से मुक्ति मिलेगी और उनका जीवन स्तर सुधरेगा। जेसीबी मशीनें आईं, सड़कें खोदी गईं और पाइप डाले गए।
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लेकिन, कहानी में मोड़ तब आया जब पाइप डालने के बाद ठेकेदार और उसके मजदूर रातों-रात गायब हो गए।
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    अधूरा काम: सीवर लाइन को अभी तक 'मेन लाइन' (Main Hole) से कनेक्ट नहीं किया गया है।
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    मलबा और गंदगी: सड़क खोदने से निकला टन भर मलबा और मिट्टी गली में ही फैला दी गई है।
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    सड़क गायब: सड़क नाम की चीज अब वहां नहीं बची है, सिर्फ ऊबड़-खाबड़ गड्ढे हैं।
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"साहब! हमारे बुजुर्ग गिर रहे हैं..." - निवासियों का दर्द

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इस समस्या का सबसे मानवीय और दर्दनाक पहलू यह है कि इसका सीधा असर समाज के सबसे कमजोर वर्ग यानी बुजुर्गों और बीमारों पर पड़ रहा है।
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बुजुर्गों की फजीहत: गली के निवासियों ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है— "गली में रहने वाले बुजुर्ग लोगों को अत्यधिक दिक्कत हो रही है।" कल्पना कीजिए उस 70 वर्षीय बुजुर्ग की जिसे शाम को टहलने के लिए घर से निकलना हो, लेकिन दरवाजे के बाहर ही मिट्टी के ढेर और खुले गड्ढे उसका स्वागत कर रहे हों। कई बुजुर्ग तो घरों में कैद होकर रह गए हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने से उनके गिरकर चोटिल होने का डर हर पल बना रहता है।
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बीमारों के लिए आफत: इस गली की पहचान 'जीवन ज्योति नर्सिंग होम' से होती है। यानी यह रास्ता मरीजों, एंबुलेंस और तीमारदारों के लिए भी इस्तेमाल होता है। सोचिए, अगर किसी मरीज को इमरजेंसी में लाना हो और एंबुलेंस इस टूटी सड़क में फंस जाए, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या नगर निगम प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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सफाई व्यवस्था ध्वस्त: नालियां बनीं बीमारी का घर

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पुनीत शर्मा द्वारा भेजे गए पत्र में एक और गंभीर समस्या की ओर इशारा किया गया है— "नालियां चोक हैं।"
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जब सड़क की खुदाई हुई, तो उसका मलबा नालियों में जा गिरा। सफाई न होने के कारण अब नालियों का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है।
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    संक्रमण का खतरा: गंदे पानी के जमा होने से मच्छरों का लार्वा पनप रहा है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
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    बदबू: पूरी गली में सीवर और गंदे पानी की असहनीय बदबू फैली हुई है, जिससे लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है।
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    हाइजीन जीरो: घर के बाहर निकलते ही जूतों में गंदगी लगती है, जो घरों के अंदर तक पहुंच रही है।
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प्रशासन को खुली चुनौती: "एक बार मौका-मुआयना तो कीजिए"

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आमतौर पर सरकारी फाइलों में शिकायतें दब जाती हैं, लेकिन इस बार बेगमपुल के निवासियों और पुनीत शर्मा ने प्रशासन को सीधे मौके पर आने की चुनौती दी है।
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पत्र में लिखा गया है:

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"संभव हो तो एक बार आप लोग मौका-मुआयना कर लें तो आप आम जन की समस्या को समझ सकेंगे। आसपास की सभी गलियों की यही स्थिति है। सभी निवासी त्रस्त हैं।"
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यह पंक्ति प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। यह बताती है कि एसी कमरों में बैठकर 'स्मार्ट सिटी' की प्लानिंग करने वाले अधिकारियों को जमीनी हकीकत का कोई अंदाजा नहीं है। वार्ड 52, जो शहर के वीआईपी इलाकों में गिना जाता है, अगर वहां यह हाल है, तो शहर की मलिन बस्तियों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
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ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों? (The Corruption Angle)

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इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल उस 'ठेकेदार' पर उठता है जिसे यह काम सौंपा गया था।
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    एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी काम क्यों रुका हुआ है?
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    क्या ठेकेदार को बिना 'कम्प्लीशन सर्टिफिकेट' (Completion Certificate) के भुगतान कर दिया गया है?
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    सीवर लाइन को मेन लाइन से जोड़े बिना काम को अधूरा छोड़ने पर नगर निगम के जेई (JE) और एई (AE) ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
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सूत्रों की मानें तो नगर निगम में ठेकेदारों और निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही जनता को यह दिन देखने पड़ रहे हैं। ठेकेदार एक जगह गड्ढा खोदते हैं और फिर दूसरी साइट पर काम शुरू कर देते हैं, जबकि पुरानी साइट के लोग महीनों धूल फांकते रहते हैं।
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पुनीत शर्मा और व्यापार संघ की भूमिका

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बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा का इस मुद्दे को उठाना यह दर्शाता है कि यह समस्या अब सिर्फ रिहायशी नहीं, बल्कि व्यापारिक भी बन चुकी है।
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बेगमपुल मेरठ का सबसे बड़ा बाजार है। अगर यहां की गलियों और अप्रोच रोड की हालत खराब होगी, तो ग्राहकों का आना कम होगा। गंदगी और बदबू के कारण कोई भी ग्राहक दुकान पर खड़ा होना पसंद नहीं करेगा। पुनीत शर्मा ने साफ कर दिया है कि अगर नगर निगम ने उनकी "विनम्र निवेदन" को नहीं सुना, तो यह आंदोलन सड़कों पर भी उतर सकता है।
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निवासियों की मांगें (Demands of the People)

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वार्ड 52 के निवासियों ने अपने शिकायती पत्र के माध्यम से नगर निगम के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:
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    तत्काल कनेक्शन: जो सीवर लाइन डाली गई है, उसे तुरंत प्रभाव से मेन लाइन से जोड़ा जाए ताकि सीवर चालू हो सके।
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  3. \r\n
    सड़क निर्माण: खोदी गई सड़क को समतल किया जाए और इंटरलॉकिंग टाइल्स या आरसीसी (RCC) सड़क का निर्माण तुरंत शुरू हो।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    नाली सफाई: चोक पड़ी नालियों की सफाई करवाई जाए ताकि जलभराव की स्थिति खत्म हो।
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  7. \r\n
    जवाबदेही: काम में देरी करने वाले ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाए और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।
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  8. \r\n
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'स्मार्ट सिटी' या 'गड्ढा सिटी'?

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मेरठ को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करोड़ों का फंड मिला है। जगह-जगह सौंदर्यीकरण के बोर्ड लगे हैं। लेकिन बेगमपुल की यह गली उस स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोलती है।
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विकास का मतलब सिर्फ प्रमुख चौराहों पर रंगीन लाइटें लगाना नहीं होता। विकास का मतलब है कि एक आम नागरिक अपने घर से बिना कीचड़ में सने बाहर निकल सके। विकास का मतलब है कि एक बुजुर्ग बिना गिरे सड़क पर चल सके। विकास का मतलब है कि सीवर का पानी नाली में बहे, सड़क पर नहीं।
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नगर निगम, मेरठ (Meerut Nagar Nigam) के लिए यह शर्मनाक है कि शहर के केंद्र बिंदु में ऐसी बदहाली है। मेयर और नगर आयुक्त को यह समझना होगा कि जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।
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जीवन ज्योति नर्सिंग होम वाली गली के निवासी अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। शिकायत पत्र भेज दिया गया है। तस्वीरें (संलग्न: गली की फोटो 5) प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं। अब गेंद नगर निगम के पाले में है।
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क्या नगर निगम कुंभकर्णी नींद से जागेगा? या फिर बेगमपुल की जनता को अपने हक के लिए नगर निगम कार्यालय का घेराव करना पड़ेगा?
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ख़बरीलाल (Khabreelal.com) इस मुद्दे पर अपनी नजर बनाए रखेगा। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक वार्ड 52 की यह सड़क बन नहीं जाती और निवासियों को न्याय नहीं मिल जाता।
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अगर आपके वार्ड या गली में भी ऐसी ही समस्या है, तो हमें फोटो और वीडियो के साथ भेजें। ख़बरीलाल आपकी आवाज बनेगा।
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