उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut news) जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते दबाव और परीक्षा के तनाव के चलते एक और होनहार मेडिकल छात्रा ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। मेरठ में एक BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) छात्रा ने पेपर अच्छा न होने के कारण उपजे डिप्रेशन (Depression) के चलते फांसी लगाकर सुसाइड (Meerut BAMS student suicide) कर लिया। यह घटना शहर के लालकुर्ती थाना क्षेत्र की है, जहां रविवार की रात छात्रा का शव उसकी दादी के घर पर कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और परिवार में कोहराम मचा हुआ है।READ ALSO:-सपना चौधरी को 'नागिन डांस' में कड़ी टक्कर देने वाले मशहूर हरियाणवी गायक पेप्सी शर्मा का हार्ट अटैक से निधन, शोक में डूबी म्यूजिक इंडस्ट्री
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डॉक्टर बनने का था सपना, डिप्रेशन ने ले ली जान जानकारी के मुताबिक, आत्महत्या करने वाली 22 वर्षीय छात्रा का नाम अरीबा था। अरीबा के पिता कासिम मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित जाटव गेट के निवासी हैं। वे शहर में ही अपना एक आयुर्वेदिक क्लीनिक चलाते हैं। पिता कासिम का सपना था कि उनकी बेटी भी एक सफल डॉक्टर बने और चिकित्सा के क्षेत्र में परिवार का नाम रोशन करे। कासिम की तीन बेटियां हैं, जिनमें अरीबा सबसे बड़ी थी। बड़ी बेटी होने के नाते परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं।
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पिता कासिम ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर अरीबा का एडमिशन पास ही के हापुड़ जिले में स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में कराया था। अरीबा वहां से BAMS (BAMS student Areeba) की पढ़ाई कर रही थी और वह द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। वह प्रतिदिन घर से ही पढ़ाई के लिए कॉलेज अप-डाउन करती थी। परिजनों ने बताया कि अरीबा पढ़ाई में अच्छी थी और डॉक्टर बनने के अपने सपने को लेकर काफी गंभीर थी। लेकिन पिछले कुछ समय से वह भारी मानसिक तनाव से गुजर रही थी।
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 अरीबा की मौत के बाद घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

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डेढ़ महीने से गुमसुम थी अरीबा, तीसरे सेमेस्टर का पेपर गया था खराब परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, अरीबा के सुसाइड का मुख्य कारण पढ़ाई और परीक्षा का भारी तनाव था। करीब डेढ़ महीने पहले उसके तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं हुई थीं। अरीबा का एक पेपर उसकी उम्मीदों के मुताबिक अच्छा नहीं गया था। इस खराब पेपर ने अरीबा के मन में गहरा डर और निराशा पैदा कर दी थी। उसे लगने लगा था कि शायद वह इस परीक्षा में असफल हो जाएगी या उसके अंक बहुत कम आएंगे।
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परीक्षा के बाद से ही अरीबा ने अपने परिवार वालों से बातचीत करना काफी कम कर दिया था। वह अक्सर गुमसुम और खोई-खोई सी रहने लगी थी। परिवार के सदस्यों ने कई बार उससे उसकी परेशानी का कारण पूछने और उसे समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन अरीबा अपने डिप्रेशन से बाहर नहीं आ सकी। मेडिकल की पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता अंततः उस पर इतनी हावी हो गई कि उसने मौत को गले लगाना ही एकमात्र रास्ता मान लिया।
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रविवार शाम की वह खौफनाक दास्तान: दादी के घर जाकर उठाया कदम रविवार की शाम तक किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि अरीबा इतना बड़ा और खौफनाक कदम उठाने जा रही है। रविवार देर शाम अरीबा ने अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाया। उस वक्त भी वह सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी। खाना खाने के बाद उसने अपनी मां से कहा कि उसका मन नहीं लग रहा है और वह अपनी दादी के घर जा रही है।
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अरीबा की दादी का घर उनके निवास स्थान से करीब 3 किलोमीटर दूर लालकुर्ती थाना (Lalkurti police Meerut) क्षेत्र के बकरी मोहल्ले में स्थित है। पोती होने के नाते अरीबा का अक्सर अपनी दादी के घर आना-जाना लगा रहता था, इसलिए परिवार के किसी भी सदस्य को उसके जाने पर कोई शक नहीं हुआ। दादी के घर पहुंचने के बाद अरीबा ने अपनी दादी के साथ भी कुछ देर तक सामान्य रूप से बातचीत की। इसके बाद वह यह कहकर कमरे में चली गई कि उसे कुछ काम है और आराम करना है।
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आधे घंटे तक नहीं खुला दरवाजा, टूटी उम्मीदें दादी के घर में अपने कमरे में जाने के बाद जब करीब 30 मिनट तक अरीबा बाहर नहीं आई, तो दादी को कुछ चिंता होने लगी। उन्होंने कमरे के दरवाजे पर जाकर अरीबा को कई बार आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका के चलते दादी घबरा गईं और उन्होंने देखा कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था।
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दादी की घबराहट देखकर आसपास के पड़ोसी और मोहल्ले के लोग तुरंत वहां इकट्ठा हो गए। लोगों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद कमरे का दरवाजा खुलवाया। दरवाजा खुलते ही सामने का दृश्य देखकर हर किसी की रूह कांप गई। 22 वर्षीय अरीबा का शव कमरे में छत के पंखे से लटक रहा था। यह भयानक मंजर देखकर दादी वहीं बदहवास होकर गिर पड़ीं।
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अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित, परिवार में पसरा मातम आनन-फानन में मोहल्ले वालों ने इस घटना की सूचना अरीबा के माता-पिता को दी। सूचना मिलते ही माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य भागते हुए लालकुर्ती स्थित दादी के घर पहुंचे। बेटी को फंदे से लटका देख पिता कासिम और मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों और पड़ोसियों की मदद से अरीबा को तुरंत पंखे से नीचे उतारा गया।
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उसे गंभीर अवस्था में साकेत स्थित सुशीला जसवंत राय अस्पताल (Sushila Jaswant Rai Hospital) ले जाया गया। परिजनों को एक छोटी सी उम्मीद थी कि शायद अरीबा की सांसें अभी चल रही हों, लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद ही अरीबा को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल पहुंचने से काफी पहले ही अरीबा की मौत हो चुकी थी। बेटी की मौत की खबर सुनते ही मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे घर में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते परिवार की सारी खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। मृत घोषित किए जाने के बाद भारी मन से परिजन अरीबा के शव को वापस अपने घर ले आए।
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पुलिस की कार्रवाई: परिजनों के इनकार के बाद भी हुआ पोस्टमॉर्टम सुशीला जसवंत राय अस्पताल प्रशासन और स्थानीय लोगों के माध्यम से लालकुर्ती पुलिस को इस सुसाइड (student depression suicide Meerut) की सूचना मिली। घटना की गंभीरता को देखते हुए लालकुर्ती थाना पुलिस की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और परिजनों व दादी से विस्तार से पूछताछ की।
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शुरुआत में पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की कानूनी कार्रवाई शुरू की। लेकिन दुख में डूबे परिजनों ने पहले किसी भी तरह की पुलिस कार्रवाई या पोस्टमॉर्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनकी बेटी डिप्रेशन में थी और यह एक स्पष्ट सुसाइड का मामला है, इसलिए वे शव की चीर-फाड़ नहीं कराना चाहते।
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इस स्थिति में लालकुर्ती थाना क्षेत्र की सीओ (CO) नवीना शुक्ला (CO Naveena Shukla) ने खुद मोर्चा संभाला। सीओ नवीना शुक्ला ने शोकाकुल परिवार को कानूनी प्रक्रियाओं की अनिवार्यता समझाई। उन्होंने बताया कि अप्राकृतिक मौत के मामलों में मौत के सही कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम कराना कानूनी रूप से बेहद जरूरी होता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह का कोई संदेह न रहे। पुलिस अधिकारियों के काफी समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार परिजन पोस्टमॉर्टम कराने के लिए राजी हो गए। इसके बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम हाउस भेज दिया।
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सीओ का बयान और आगे की जांच इस पूरे मामले पर लालकुर्ती सीओ नवीना शुक्ला ने आधिकारिक बयान देते हुए बताया, "रविवार रात हमें सूचना मिली थी कि एक मेडिकल छात्रा ने फांसी लगा ली है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की है। शुरुआती पूछताछ और जानकारी में यही बात सामने आ रही है कि छात्रा अपनी बीएएमएस की परीक्षा के परिणाम और खराब पेपर को लेकर भारी मानसिक तनाव (डिप्रेशन) में थी। परिवार ने पहले पोस्टमॉर्टम कराने से मना किया था, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद वे तैयार हो गए हैं। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया गया है। फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अगर परिवार की तरफ से कोई लिखित तहरीर या शिकायत मिलती है, तो उसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"
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यह घटना एक बार फिर समाज और अभिभावकों के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा करती है कि बच्चों पर पढ़ाई और करियर का इतना दबाव नहीं होना चाहिए कि वे अपनी जिंदगी ही खत्म करने पर मजबूर हो जाएं। परीक्षा के अंक जीवन से बड़े नहीं होते। अगर कोई छात्र मानसिक तनाव या डिप्रेशन का शिकार है, तो परिजनों को उसके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक की सलाह भी लेनी चाहिए। मेरठ पुलिस (Meerut local news) अब इस मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की औपचारिकताएं पूरी करेगी।
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