खबरीलाल विशेष रिपोर्ट | मवाना (मेरठ): उत्तर प्रदेश सरकार लगातार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और महिला सुरक्षा के प्रति कटिबद्ध होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई बार सरकारी विभागों के निर्माण कार्य ही बेटियों की सुरक्षा के लिए अनजाने में बड़ा खतरा पैदा कर देते हैं। ऐसा ही एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला मेरठ जिले की मवाना तहसील से सामने आया है। यहां नगर पालिका परिषद के एक निर्माण कार्य के चलते कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की सैकड़ों छात्राओं की सुरक्षा दांव पर लग गई है।READ ALSO:-डीएम का सख्त एक्शन: गैस बुकिंग के 3-4 दिन के अंदर सुनिश्चित हो LPG सिलेंडर की होम डिलीवरी, PNG उपभोक्ताओं के लिए लागू हुआ यह नया नियम
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इस गंभीर मसले को उठाते हुए शनिवार को मवाना तहसील में आयोजित 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' के अवसर पर नामित सभासद अर्जुन काली ने स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने एसडीएम (SDM) मवाना और क्षेत्राधिकारी (CO) मवाना को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर छात्राओं की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि आखिर क्या है यह पूरा मामला और कैसे एक स्टेडियम का निर्माण स्कूल की बच्चियों के लिए मुसीबत बन सकता है।
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क्या है पूरा मामला और कहां हो रही है चूक?
\r\n\r\nमवाना नगर पालिका क्षेत्र में तहसील ग्राउंड के ठीक पास 'कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय' स्थित है। यह कोई सामान्य स्कूल नहीं है, बल्कि एक पूर्णतः आवासीय (Residential) विद्यालय है, जहां ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से आने वाली लगभग 150 से 200 छात्राएं न केवल दिन में पढ़ती हैं, बल्कि रात में विद्यालय के छात्रावास (Hostel) में ही निवास करती हैं। एक आवासीय बालिका विद्यालय होने के नाते इसकी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होनी चाहिए।
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लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। नामित सभासद अर्जुन काली ने ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों को बताया कि नगर पालिका परिषद मवाना द्वारा विद्यालय से बिल्कुल सटी हुई दीवार के बराबर में एक 'ओपन स्टेडियम' (Open Stadium) का निर्माण कराया जा रहा है। इस स्टेडियम को भव्य रूप देने के लिए विद्यालय की दीवार के साथ-साथ दर्शकों के बैठने के लिए ऊंची सीढ़ियां (पेढ़ियां) बनवाई जा रही हैं।
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सबसे बड़ी समस्या यह है कि विद्यालय की वर्तमान बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) पहले से ही काफी कम ऊंचाई की है। अब जब उस छोटी दीवार के ठीक पीछे स्टेडियम की ऊंची सीढ़ियां बन जाएंगी, तो कोई भी बाहरी व्यक्ति या असामाजिक तत्व बहुत ही आसानी से उन सीढ़ियों पर चढ़कर स्कूल की दीवार फांद सकता है और सीधे स्कूल व छात्रावास परिसर के अंदर कूद सकता है। इससे स्कूल की चारदीवारी का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
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नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का रहता है जमावड़ा
\r\n\r\nयह आशंका केवल हवा-हवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस कारण और पुराना इतिहास है। सभासद अर्जुन काली ने प्रशासन को आगाह करते हुए बताया कि जिस तहसील ग्राउंड में यह निर्माण हो रहा है, वहां पहले भी कई बार नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग चुका है।
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ज्ञापन में स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी कई बार नशा करने वाले कुछ संदिग्ध व्यक्तियों ने तहसील ग्राउंड की तरफ से इस आवासीय बालिका विद्यालय में घुसपैठ करने की कोशिश की थी। उस समय गनीमत रही कि कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई। लेकिन अब अगर स्टेडियम की सीढ़ियां दीवार के सहारे बन जाती हैं, तो रात के अंधेरे में या दिन के समय भी ऐसे असामाजिक तत्वों को स्कूल में घुसने के लिए एक तरह से 'सीढ़ी' ही मिल जाएगी। 150 से अधिक बच्चियों के छात्रावास में किसी भी अवांछित व्यक्ति का प्रवेश एक बड़ी और अप्रिय घटना (Untoward Incident) को जन्म दे सकता है।
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'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का दिया हवाला
\r\n\r\nसभासद ने अपने ज्ञापन में उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य समाज में जनजागरण लाना और बेटियों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान करना है, ताकि वे निर्भय होकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।
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यदि सरकारी मशीनरी (नगर पालिका) द्वारा कराए जा रहे किसी विकास कार्य से ही बेटियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, तो यह सरकार की मंशा के बिल्कुल विपरीत है। विकास और खेल-कूद की सुविधाएं (स्टेडियम) जरूरी हैं, लेकिन वह किसी भी कीमत पर बच्चियों की सुरक्षा से समझौता करके नहीं बननी चाहिए।
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ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें: "पहले दीवार, फिर स्टेडियम"
\r\n\r\nछात्राओं की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभासद अर्जुन काली ने प्रशासन के सामने एक बेहद व्यावहारिक और स्पष्ट समाधान रखा है। उन्होंने एसडीएम और सीओ मवाना से मांग की है कि:
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- \r\n निर्माण कार्य की समीक्षा: सबसे पहले विद्यालय की दीवार के पास हो रहे स्टेडियम के निर्माण कार्य की सुरक्षा के नजरिए से तुरंत समीक्षा की जाए।\r\n \r\n
- \r\n दीवार की ऊंचाई बढ़ाना: स्टेडियम की सीढ़ियों का निर्माण पूरा होने से पहले कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की बाउंड्री वॉल को पर्याप्त रूप से ऊंचा और मजबूत कराया जाए।\r\n \r\n
- \r\n कटीले तारों की फेंसिंग: आवश्यक हो तो ऊंची दीवार के ऊपर कटीले तार (Barbed wire fencing) भी लगाए जाएं ताकि कोई भी व्यक्ति सीढ़ियों के सहारे दीवार फांदने की हिम्मत न कर सके।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा की गारंटी: जब स्कूल परिसर पूरी तरह से सुरक्षित हो जाए, उसके बाद ही स्टेडियम का शेष निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाए।\r\n \r\n
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प्रशासन से अपील की गई है कि बेटियों के भविष्य और उनकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में तत्काल और उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित अनहोनी को समय रहते टाला जा सके।
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प्रशासन के पाले में गेंद
\r\n\r\nशनिवार को 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' पर दिए गए इस महत्वपूर्ण ज्ञापन के दौरान सभासद अर्जुन काली के साथ क्षेत्र के कई अन्य जागरूक नागरिक भी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से नवनीत चौहान, मोहित शर्मा, वंश जाटव, और गणपत जाटव आदि शामिल थे।
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अब देखना यह होगा कि मवाना तहसील प्रशासन और नगर पालिका परिषद इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी जल्दी हरकत में आती है। क्या प्रशासन स्टेडियम के निर्माण से पहले बच्चियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल की दीवार ऊंची कराएगा? 'खबरीलाल' की टीम इस पूरे घटनाक्रम और प्रशासन के अगले कदम पर लगातार नजर बनाए रखेगी। क्षेत्र की हर प्रामाणिक खबर और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें खबरीलाल (Khabreelal) न्यूज़ पोर्टल के साथ।
Sabse pehle comment karne wale banein.