लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्थानीय राजस्व प्रशासन की मनमानी का एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले 'जवाहर इंटर कॉलेज' के बाहर PWD द्वारा बिना किसी स्पष्ट योजना के जबरन एक नाले की खुदाई की जा रही है। सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि इस नाले के पानी की निकासी (Water Outlet) का कोई मास्टर प्लान प्रशासन के पास नहीं है।READ ALSO:-बिजनौर में रक्षक बना भक्षक: धामपुर में डॉक्टर पर महिला कर्मचारी से दुष्कर्म, जबरन गर्भपात और 'धर्म परिवर्तन' का गंभीर आरोप
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स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि सरकारी नाले का पानी जानबूझकर स्कूल की व्यक्तिगत संपत्ति में भरने की साजिश रची जा रही है, जिससे स्कूल भवन और वहां पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों की जान को भारी खतरा पैदा हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों की इस तानाशाही के खिलाफ अब स्कूल प्रबंधन ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाने का कड़ा फैसला लिया है।
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एक नज़र में पूरा विवाद 

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विवरण
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महत्वपूर्ण जानकारी
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स्थान
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जवाहर इंटर कॉलेज परिसर के बाहर
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विवाद का मुख्य कारण
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बिना जल निकासी योजना (Outlet) के PWD द्वारा नाले की खुदाई
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विरोध करने वाले
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प्रिंसिपल के.पी. सिंह और अध्यापक निर्दोष जी
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मौके पर मौजूद अधिकारी
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नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी
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स्कूल को पिछला नुकसान
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जलभराव से 2-3 पेड़ गिरे, छत क्षतिग्रस्त, पूरी चारदीवारी ढही
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प्रबंधन का अगला कदम
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अधिकारियों के नाम से हाईकोर्ट (High Court) में मुकदमा
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अधिकारियों की मौजूदगी में मनमानी: किसी के पास नहीं जवाब

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घटनाक्रम के अनुसार, आज फिर से PWD के ठेकेदारों और कर्मचारियों ने भारी अमले के साथ जवाहर इंटर कॉलेज के ठीक बाहर नाले की खुदाई का काम शुरू कर दिया। इस बेतरतीब खुदाई का स्कूल के प्रिंसिपल श्री के.पी. सिंह और अध्यापक श्री निर्दोष जी ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने काम को रोकने की मांग की और प्रशासन से सवाल-जवाब किए।
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मौके पर राजस्व विभाग के कई बड़े अधिकारी—नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी—भी मौजूद थे। जब स्कूल प्रशासन ने इन अधिकारियों से एक सीधा और वाजिब सवाल पूछा कि "इस नाले का गंदा पानी आखिर किस मुख्य नाले में जाकर गिरेगा या उसकी निकासी कहाँ होगी?" तो वहां मौजूद किसी भी अधिकारी के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। सभी अधिकारी चुप्पी साधे रहे और उनकी मौजूदगी में ठेकेदार द्वारा जबरन खुदाई का काम जारी रखा गया। अधिकारियों का यह रवैया उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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क्या सरकारी नाला स्कूल की निजी संपत्ति में बहाएगा पानी?

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इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही खड़ा हो गया है कि क्या कोई भी सरकारी विभाग बिना किसी मास्टर प्लान के कहीं भी नाला खोद सकता है? और क्या सरकारी नाले का गंदा पानी किसी स्कूल की व्यक्तिगत और निजी संपत्ति में भरा जा सकता है?
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बिना निकासी के नाला खोदने का सीधा मतलब है कि बरसात के दिनों में या सामान्य दिनों में भी नाले का सारा ओवरफ्लो पानी स्कूल परिसर के अंदर घुसेगा। इससे न केवल स्कूल में भयंकर जलभराव (Waterlogging) होगा, बल्कि मच्छरों के पनपने से बच्चों में डेंगू, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलने का भी भारी खतरा पैदा हो जाएगा। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार स्कूल परिसरों को जलभराव और गंदगी से मुक्त रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन यहाँ प्रशासन खुद समस्या पैदा कर रहा है।
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पिछली तबाही का खौफ: जब गिरी थी दीवार और छत

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स्कूल प्रबंधन का यह डर और विरोध कोई हवा-हवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक खौफनाक इतिहास है। प्रशासन की इसी तरह की लापरवाही और बिना सोचे-समझे किए गए निर्माण कार्यों का खामियाजा जवाहर इंटर कॉलेज पहले भी भुगत चुका है।
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    पेड़ों का गिरना: पूर्व में हुए जलभराव और नींव में पानी रिसने के कारण स्कूल परिसर में लगे 2 से 3 विशाल पेड़ जड़ से उखड़ कर गिर गए थे।
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    छत और दीवार को नुकसान: उन पेड़ों के गिरने की वजह से स्कूल के भवन की छत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इतना ही नहीं, पानी के भराव से स्कूल की पूरी चारदीवारी (Boundary Wall) भरभरा कर गिर गई थी, जिससे स्कूल को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था।
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    बाल-बाल बचे थे बच्चे: गनीमत यह रही कि जब पेड़ों और दीवार के गिरने का वह हादसा हुआ, तब कोई बच्चा उसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा एक बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था।
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इतने भारी नुकसान और पिछली चेतावनियों के बावजूद PWD और राजस्व विभाग ने कोई सबक नहीं सीखा है और एक बार फिर से स्कूल की नींव को पानी से खोखला करने की तैयारी कर ली है।
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अब हाईकोर्ट में होगा अधिकारियों पर सीधा केस

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लगातार की जा रही अपीलों और विरोध के बावजूद जब नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी ने स्कूल प्रबंधन की एक न सुनी, तो अंततः स्कूल ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
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स्कूल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के इस संस्थान और बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। इस तानाशाही और अवैध निर्माण कार्य के खिलाफ शीघ्र ही उच्च न्यायालय (High Court) में एक मुकदमा दायर किया जाएगा। इस मुकदमे में PWD के जिम्मेदार इंजीनियरों के साथ-साथ मौके पर मौजूद उन सभी अधिकारियों (नायब तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी) को नामजद (By Name) पार्टी बनाया जाएगा, जिनकी मौजूदगी और मूक सहमति से यह गैरकानूनी खुदाई की जा रही है।
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शिक्षा विभाग और डीएम से हस्तक्षेप की मांग

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स्थानीय नागरिकों और छात्रों के अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार एक तरफ 'पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया' का नारा देती है और स्कूलों के कायाकल्प (Operation Kayakalp) की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ PWD जैसे विभाग स्कूलों की इमारतों को गिराने और वहां जलभराव करने पर तुले हुए हैं।
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अभिभावकों ने जिलाधिकारी (DM) और राज्य के शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांग है कि बिना सही निकासी (Outlet) के नाले का निर्माण तुरंत रोका जाए और स्कूल को भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान की लिखित जिम्मेदारी तय की जाए।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह न्यूज़ रिपोर्ट प्राप्त सूचनाओं, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और स्कूल प्रशासन (जवाहर इंटर कॉलेज) द्वारा लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा राजस्व अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इस खबर का उद्देश्य किसी विभाग या व्यक्ति की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि जनहित और स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को उजागर करना है। मामले की अंतिम सत्यता और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की वैधता माननीय न्यायालय और सक्षम जांच एजेंसियों के अधीन है।
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