भारतीय छावनी परिषदों (Cantt Boards) का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा रहा है और आज भी इन क्षेत्रों में सड़कों, चौराहों और बाजारों के नाम उसी औपनिवेशिक युग (Colonial Era) की याद दिलाते हैं। लेकिन अब गुलामी की इस मानसिकता और अंग्रेजी राज की निशानियों को पूरी तरह से मिटाने के लिए छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है।READ ALSO:-मेरठ में इंसानियत शर्मसार: सब्जी लेने निकली 13 साल की मासूम को टेंपो में किया अगवा, जंगल में जबरन शराब पिलाई और फिर की दरिंदगी!
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कैंट बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह की अध्यक्षता में हाल ही में संपन्न हुई बोर्ड बैठक में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि अंग्रेजों के जमाने के बाजारों और मोहल्लों के पुराने नामों को अब पूरी तरह से चलन से बाहर किया जाएगा और उनके स्थान पर नए भारतीय महापुरुषों के नामों को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
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कागजों में 1947 में ही हो गया था बदलाव, लेकिन जुबान पर रहे अंग्रेज!

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यह एक दिलचस्प और हैरान करने वाला तथ्य है कि देश को आजादी मिलने के तुरंत बाद, साल 1947 में ही रक्षा संपदा और छावनी परिषद के कागजों (Official Records) में इन ब्रिटिशकालीन नामों को बदल दिया गया था। भारतीयकरण की दिशा में कदम उठाते हुए कई इलाकों को नए नाम दे दिए गए थे, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और जागरूकता की कमी के कारण ये नए नाम कभी आम जनता की जुबान पर नहीं चढ़ सके। लोग आज भी पुराने नामों का ही इस्तेमाल कर रहे थे।
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अब इन नामों को दी जाएगी नई पहचान:

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    ब्रिटिश इन्फेंट्री (लाल कुर्ती) बनी जवाहर नगर: अंग्रेजों की पैदल सेना (Infantry) जहां रहती थी, उसे 'लाल कुर्ती' कहा जाता था। कागजों में इसका नाम बदलकर 'जवाहर नगर' कर दिया गया था, लेकिन अब इसे धरातल पर पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
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    ब्रिटिश केवलरी (रजबन) बना शिवाजी नगर: ब्रिटिश घुड़सवार सेना (Cavalry) के इलाके को रजबन बाजार के नाम से जाना जाता था। इसे मराठा साम्राज्य के वीर शासक छत्रपति शिवाजी के नाम पर 'शिवाजी नगर' का नाम दिया गया था, जिसे अब मुख्य पहचान दी जाएगी।
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    रॉयल आर्टिलरी बाजार (तोपखाना) बना सुभाष बाजार: अंग्रेजी तोपखाने के इस इलाके का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर 'सुभाष बाजार' किया गया था। अब इस बाजार को इसी नए नाम से पुकारा और पहचाना जाएगा।
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नए नामों को आम जनमानस तक पहुंचाने का 'मास्टर प्लान'

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बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों में नाम बदलना काफी नहीं है, जब तक आम जनता उसे अपनी दिनचर्या में शामिल न करे। इसलिए बोर्ड ने एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। इन सभी क्षेत्रों (जवाहर नगर, शिवाजी नगर, और सुभाष बाजार) के प्रमुख चौराहों, प्रवेश द्वारों और बाजारों के अंदर बेहद आकर्षक और बड़े आकार के होर्डिंग (Hoardings) और साइन बोर्ड (Sign Boards) लगाए जाएंगे। इन बोर्ड्स पर इन इलाकों के ऐतिहासिक महत्व और उनके नए भारतीय नामों को प्रमुखता से लिखा जाएगा, ताकि वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति के दिमाग में यह नया नाम रजिस्टर हो सके और धीरे-धीरे पुराने नाम प्रचलन से पूरी तरह बाहर हो जाएं।
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विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर: 60 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर पास

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नाम बदलने के इस ऐतिहासिक फैसले के साथ-साथ, कैंट बोर्ड की इस बैठक में छावनी क्षेत्र के विकास, साफ-सफाई और प्रशासनिक कार्यों के सुदृढ़ीकरण के लिए खजाना भी खोल दिया गया है। बैठक में करोड़ों रुपये के महत्वपूर्ण प्रस्तावों और टेंडरों को आधिकारिक मंजूरी दी गई:
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1. सफाई व्यवस्था पर सबसे बड़ा फोकस (करीब 34 करोड़ का बजट):

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    वार्डों की सफाई: छावनी क्षेत्र के वार्ड संख्या 4, 5, 6, 7 और 8 में अगले दो वर्षों तक सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए आगरा की एक निजी फर्म को 20 करोड़ 37 लाख रुपये का टेंडर दिया गया है।
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    आर्मी एरिया की सफाई: सैन्य क्षेत्रों (Army Areas) को स्वच्छ और संक्रमण मुक्त रखने के लिए आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराने का एक वर्ष का ठेका 13 करोड़ 39 लाख रुपये में स्वीकृत किया गया है।
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2. मैनपावर और आउटसोर्सिंग (19 करोड़ का ठेका):

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    कैंट बोर्ड कार्यालय के सुचारू संचालन और विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसका दो वर्ष का टेंडर लखनऊ की प्रसिद्ध फर्म 'क्यू सिक्योरिटीज' को 19 करोड़ 10 लाख रुपये में दिया गया है।
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3. निर्माण और रखरखाव कार्य:

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    सड़क निर्माण: छावनी क्षेत्र की जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण और नई सड़कों के निर्माण का टेंडर 'जीत कंस्ट्रक्शन' के पक्ष में फाइनल किया गया है।
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    भवनों की मरम्मत: कैंट फंड (Cantt Fund) के अंतर्गत आने वाले सरकारी भवनों और परिसरों के जीर्णोद्धार और मरम्मत कार्य के लिए 7 करोड़ रुपये के भारी-भरकम ठेके पर सहमति बनी है।
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    पर्यावरण संरक्षण: जल संरक्षण (Water Conservation) को बढ़ावा देने के लिए, छावनी क्षेत्र में लगे वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) उपकरणों की मरम्मत और उनके अपग्रेडेशन के लिए 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
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    अन्य आय: कैंट क्षेत्र के पेड़ों से फल तोड़ने का ठेका भी 24,100 रुपये में नीलाम किया गया।
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पर्यावरण और स्वच्छता के दो सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर मुहर

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छावनी परिषद ने केवल रूटीन कामों तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि शहर की दो सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान की दिशा में भी मजबूत कदम उठाए हैं:
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आबू नाले की सफाई (Abu Nala Cleaning Plan): आबू नाला शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाला एक प्रमुख नाला है, जो लंबे समय से गंदगी, सिल्ट और जलभराव का कारण बना हुआ है। बोर्ड अध्यक्ष ने इसकी स्थिति में वास्तविक और जमीनी सुधार लाने के लिए अधिकारियों को एक 'व्यापक चरणबद्ध योजना' (Phased Comprehensive Plan) तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। अब इस नाले की सफाई टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी ताकि बरसात के दिनों में छावनी और शहर के लोगों को जलभराव से मुक्ति मिल सके।
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नमामि गंगे के तहत नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP): केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'नमामि गंगे योजना' के तहत छावनी और आस-पास के क्षेत्रों के गंदे पानी को नदियों में सीधे गिरने से रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। कंकरखेड़ा डिस्टलरी के पास एक नया और आधुनिक एसटीपी (Sewage Treatment Plant) स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि सेना ने इस पर्यावरण हितैषी कार्य के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि इस एसटीपी के निर्माण के लिए सेना की जमीन की आवश्यकता पड़ती है, तो सेना इसके लिए जमीन देने को पूरी तरह से तैयार है। यह नागरिक प्रशासन और सैन्य बलों के बीच एक बेहतरीन तालमेल का उदाहरण है।
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कैंट बोर्ड की यह बैठक इस मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें अतीत की गुलामी की निशानियों को मिटाने के साथ-साथ भविष्य के आधुनिक और स्वच्छ छावनी क्षेत्र की नींव भी रखी गई है। जवाहर नगर, शिवाजी नगर और सुभाष बाजार जैसे नाम अब सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों और रोजमर्रा की जिंदगी में धड़केंगे। वहीं एसटीपी और आबू नाले की सफाई जैसे प्रोजेक्ट्स से आम जनजीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
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