उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले के सरूरपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक बड़े और चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुख्यात गैंगस्टर उधम सिंह को बड़ी राहत दी है। फर्जी दस्तावेजों और धोखे के सहारे जमानत हासिल करने के आरोप में वांटेड चल रहे एक लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर उधम सिंह की गिरफ्तारी पर उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है। पुलिस और एसटीएफ की टीमें जहां एक तरफ उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थीं, वहीं कोर्ट के इस फैसले से पुलिस महकमे को बड़ा झटका लगा है।READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक वारदात: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशा चौहान की पति ने चाकू से गोदकर की हत्या, खुद को भी किया घायल
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, एसएसपी मेरठ और थाना सरूरपुर पुलिस को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और कैसे एक खूंखार अपराधी ने कानून की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया।
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कैसे हुई थी कुख्यात गैंगस्टर उधम सिंह की फर्जी दस्तावेजों से जमानत?

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मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र के कस्बा करनावल का रहने वाला उधम सिंह उत्तर प्रदेश का एक चिह्नित अपराध माफिया है। वह खूंखार डी-50 गैंग (D-50 Gang) का सरगना है और उस पर हत्या, डकैती, लूट, और रंगदारी जैसे 70 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। पिछले करीब 4 साल 8 महीने से वह उन्नाव जेल में बंद था। 26 मार्च 2026 को उसे जेल से जमानत पर रिहा किया गया था। लेकिन जेल से बाहर आते ही उसकी जमानत विवादों में घिर गई।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब जसड़ सुल्ताननगर निवासी अनवर ने 9 अप्रैल 2026 को सरूरपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। अनवर ने पुलिस को बताया कि उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात शेखर नामक एक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे बिना किसी दलाली या कमीशन के लोन दिलाने का झांसा दिया। लोन पास कराने के बहाने शेखर ने अनवर से उसका पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लिए। इसके बाद शेखर उसे कचहरी ले गया और कुछ कागजातों पर लोन के नाम पर हस्ताक्षर करा लिए।
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कुछ समय बाद अनवर को पता चला कि उसका कोई लोन स्वीकृत नहीं हुआ है, बल्कि उसके दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल गैंगस्टर उधम सिंह की जमानत कराने के लिए किया गया है। जब अनवर ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। अनवर को भनक तक नहीं थी कि उसके निर्दोष दस्तावेजों का इस्तेमाल वेस्ट यूपी के एक इतने बड़े डॉन की जेल से रिहाई के लिए किया जा रहा है।
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जमानत रद्द और पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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जैसे ही इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ, मेरठ पुलिस एक्शन में आ गई। सरूरपुर थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने मामले की रिपोर्ट न्यायालय को भेज दी। सच्चाई सामने आने के बाद कोर्ट ने तुरंत एक्शन लेते हुए गैंगस्टर उधम सिंह की जमानत रद्द कर दी और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया।
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जमानत रद्द होते ही उधम सिंह अंडरग्राउंड हो गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाना शुरू किया। शुरुआत में एसएसपी मेरठ की ओर से उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। इसके बाद डीआईजी ने इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार कर दी। जब इसके बावजूद वह पुलिस के हाथ नहीं लगा, तो 5 जून 2026 को एडीजी मेरठ जोन ने गैंगस्टर उधम सिंह पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और मिली राहत

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पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश और एक लाख के इनाम से बचने के लिए गैंगस्टर उधम सिंह के वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उधम सिंह के अधिवक्ताओं ने सरूरपुर पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि विवादित एफआईआर का अवलोकन करने पर यह प्रतीत नहीं होता कि इसमें ऐसा कोई स्पष्ट आरोप है कि किसी ने झूठा दस्तावेज तैयार करने के उद्देश्य से शिकायतकर्ता (अनवर) के हस्ताक्षर की जालसाजी की हो। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जब कोई व्यक्ति जमानतदार बनता है, तो मजिस्ट्रेट सत्यापन के समय उसे स्पष्ट रूप से बताते हैं कि वह किसके लिए और किस प्रकार का बॉन्ड भर रहा है। इन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर उधम सिंह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई अब 17 जुलाई 2026 को तय की गई है।
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यूपी एसटीएफ और पुलिस की दबिश जारी, नेपाल भागने की आशंका

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भले ही कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई हो, लेकिन उधम सिंह की मुश्किलें अभी पूरी तरह कम नहीं हुई हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जेल से रिहा होने के बाद वह सबसे पहले देहरादून गया, फिर चंडीगढ़ और गोवा होते हुए उसके नेपाल (Nepal) भागने की आशंका जताई जा रही है।
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हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उधम सिंह काठमांडू के किसी कसीनो में मौज-मस्ती कर रहा है। उसे पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF), मेरठ पुलिस की स्वाट टीमें और उत्तराखंड तथा दिल्ली में कई टीमें लगातार सक्रिय थीं। पुलिस उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कराने की तैयारी में थी ताकि वह देश छोड़कर किसी अन्य मुल्क में न भाग सके। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेरठ पुलिस को अपना जवाब दाखिल करने के लिए मजबूत सबूतों को इकट्ठा करना होगा।
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फर्जी दस्तावेजों से जमानत हासिल करने के मामले में फंसे एक लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर उधम सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत ने मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली और जमानत सत्यापन प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब व्यक्ति को लोन का झांसा देकर उसके आधार कार्ड और अन्य कागजातों का दुरुपयोग करना एक गंभीर अपराध है। अब सभी की निगाहें 17 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यूपी सरकार और पुलिस को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा। देखना यह होगा कि क्या कानून के शिकंजे से यह कुख्यात माफिया बच पाएगा या फिर पुलिस उसे सलाखों के पीछे वापस भेजने में कामयाब होगी।
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