मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस और ड्रग्स विभाग की संयुक्त टीम ने एक बेहद खौफनाक और जानलेवा फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इंसानी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर करोड़ों रुपये छापने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने एक गुप्त गोदाम पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान गोदाम से करीब 1 करोड़ रुपये की एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) दवाएं और नामी कंपनियों के ब्यूटी व कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का भारी जखीरा बरामद किया गया है। मौके से रीपैकिंग करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना 4 सगे भाइयों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है, जो एक्सपायर्ड सामान की डेट और रैपर बदलकर उन्हें नए जैसा बनाकर चार राज्यों के बाजारों में सप्लाई कर रहे थे।
\r\n\r\nऐसे होता था जिंदगी से खिलवाड़ का पूरा खेल
\r\n\r\nपुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (ड्रग्स विभाग) की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। पकड़े गए आरोपी दवा और कॉस्मेटिक कंपनियों के डिपो से उस स्टॉक को औने-पौने दामों में या सांठगांठ करके उठा लेते थे, जिसे नियमानुसार 'नष्ट' (Destroy) किया जाना होता था।
\r\n\r\nकंपनी डिपो से एक्सपायर्ड सामान को डंप या नष्ट करने के बजाय आरोपी उसे सीधे मेरठ स्थित अपने गुप्त गोदाम में लाते थे। गोदाम के भीतर आधुनिक स्कैनर, हाई-टेक प्रिंटर और रीपैकिंग मशीनें लगाई गई थीं। इन मशीनों की मदद से एक्सपायर्ड दवाओं की पट्टियों (Strips), बोतलों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के डिब्बों से पुरानी मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट को मिटा दिया जाता था या फिर हूबहू असली जैसे दिखने वाले नए फर्जी लेबल व क्यूआर कोड छापकर चिपका दिए जाते थे। इसके बाद इन्हें ब्रांड न्यू पैकेजिंग में पैक करके बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता था।
\r\n\r\nपिता ने किराए पर लिया था गोदाम, 4 बेटे चला रहे थे सिंडिकेट
\r\n\r\nमामले का खुलासा करते हुए एसपी देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि यह गोदाम शाहनवाज नाम के व्यक्ति का है, जिसे सलीमुद्दीन नाम के शख्स ने किराए पर ले रखा था। सलीमुद्दीन के चार बेटों— असलम, सद्दाम, अकरम और अशरफ ने मिलकर इस गोदाम को नकली और एक्सपायर्ड दवाओं के रीपैकिंग सेंटर में तब्दील कर दिया था।
\r\n\r\nचारों सगे भाई मिलकर इस पूरे सिंडिकेट को संभालते थे। असलम और सद्दाम डिपो से माल लाने और छपाई का काम देखते थे, जबकि अकरम और अशरफ तैयार माल की पैकेजिंग और सप्लाई नेटवर्क को मैनेज करते थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले एक साल से इस गोदाम में बेखौफ होकर यह जानलेवा धंधा चलाया जा रहा था और रोजाना लाखों रुपये की एक्सपायर्ड सामग्री प्रोसेस की जा रही थी।
\r\n\r\nचार राज्यों में फैला था सप्लाई नेटवर्क
\r\n\r\nगिरफ्तार भाइयों से की गई शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि मेरठ के इस गोदाम से तैयार नकली और रीपैक की गई दवाओं व ब्यूटी प्रोडक्ट्स की खेप केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी भेजी जा रही थी।
\r\n\r\nयह गिरोह हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली और एनसीआर (NCR) के छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और लोकल ब्यूटी पार्लरों तक अपने एजेंटों के जरिए यह सामान सप्लाई करता था। असली ब्रांड्स की आड़ में सस्ते दामों पर माल देने का लालच देकर यह गिरोह थोक दुकानदारों को अपना शिकार बनाता था।
\r\n\r\nड्रग्स विभाग की जांच: मौके से बरामद हुए हाई-टेक उपकरण
\r\n\r\nछापेमारी की सूचना मिलते ही ड्रग्स विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर अतुल उपाध्याय और ड्रग इंस्पेक्टर संतोष पटेल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने गोदाम के अंदर रखी दवाओं और कॉस्मेटिक्स के सैंपल लिए।
\r\n\r\nअधिकारियों को मौके से भारी मात्रा में नामी कंपनियों की लाइफ-सेविंग एंटीबायोटिक्स, सिरप, स्किन क्रीम, फेसवॉश और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स मिले, जिनकी एक्सपायरी डेट काफी समय पहले खत्म हो चुकी थी। इसके अलावा गोदाम से हजारों की संख्या में खाली रैपर, फर्जी होलोग्राम, स्कैनर, कोडिंग मशीनें, केमिकल सॉल्वेंट (डेट मिटाने के लिए) और रीपैकिंग उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
\r\n\r\nट्रकों में भरकर आता और जाता था सामान, ग्रामीणों से भी होगी पूछताछ
\r\n\r\nस्थानीय निवासियों और ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि इस गोदाम में अक्सर देर रात बड़े-बड़े ट्रकों में भरकर सामान लाया जाता था और फिर छोटे-बड़े ट्रकों व पिकअप गाड़ियों में लादकर माल बाहर भेजा जाता था। गांव के लोगों को लगता था कि यह किसी प्रामाणिक कंपनी का सामान्य लॉजिस्टिक गोदाम है।
\r\n\r\nग्रामीणों ने यह भी जानकारी दी कि गोदाम के अंदर स्थानीय गांव के कुछ नवयुवक भी मजदूरी और पैकिंग के काम पर रखे गए थे। एसपी देहात अभिजीत कुमार का कहना है कि पुलिस उन सभी स्थानीय युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी जो इस गोदाम में काम करते थे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी थी या वे केवल मजदूरी कर रहे थे।
\r\n\r\nकड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
\r\n\r\nपुलिस ने चारों आरोपी भाइयों— असलम, सद्दाम, अकरम और अशरफ के खिलाफ धोखाधड़ी, जान जोखिम में डालने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (Drugs and Cosmetics Act) की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ड्रग्स विभाग भी आरोपियों के लाइसेंस और डिपो से जुड़े कनेक्शन की अलग से जांच कर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इस रैकेट में शामिल दवा कंपनियों के कुछ कर्मचारियों या डिपो प्रबंधकों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
\r\n\r\nDisclaimer (अस्वीकरण):
\r\n\r\nयह समाचार रिपोर्ट पुलिस विभाग द्वारा जारी आधिकारिक बयानों, ड्रग्स विभाग की प्राथमिक जांच रिपोर्ट और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। खबर का उद्देश्य पाठकों को स्वास्थ्य संबंधी धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना है। मामले में नामजद आरोपियों पर दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय माननीय न्यायालय के अधीन है। किसी भी दवा या कॉस्मेटिक उत्पाद को खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट और प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें।