उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का मोदीनगर कस्बा। यहां की संजयपुरी कॉलोनी आम दिनों में शांत रहती है, लेकिन सोमवार की रात और मंगलवार की सुबह के बीच यहां जो घटा, उसने न केवल इस कॉलोनी को, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक घर की चारदीवारी के भीतर पति-पत्नी के बीच प्यार और तकरार का रिश्ता कब 'खूनी जंग' में तब्दील हो गया, इसका अंदाजा उस बुजुर्ग मां को भी नहीं लगा जो नीचे के कमरे में सो रही थी।READ ALSO:-मेरठ में रूह कंपा देने वाली वारदात: लिव-इन पार्टनर ने गला घोंटकर महिला को उतारा मौत के घाट, बच्चों के साथ भी रची थी खौफनाक साजिश
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महज खाने के स्वाद को लेकर शुरू हुई एक बहस का अंत इतना भयावह होगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। एक पत्नी, जिसे हिंदू धर्म में 'अन्नपूर्णा' का दर्जा दिया जाता है, उसी ने सब्जी काटने वाले चाकू से अपने सुहाग, अपने पति की जीभ काटकर उसे जीवन भर के लिए खामोश करने की कोशिश की। घटना इतनी वीभत्स है कि सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं। बेड पर पड़ा जीभ का मांस का टुकड़ा और फर्श पर बिखरा खून इस बात की गवाही दे रहा है कि गुस्से का आवेग इंसान को किस हद तक हैवान बना सकता है।
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वह 'काली रात' और खाने की मेज का विवाद

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सोमवार, 20 जनवरी 2026। सर्दियों की रात थी। संजयपुरी कॉलोनी में रहने वाला विपिन (26 वर्ष) अपनी फैक्ट्री की शिफ्ट खत्म करके थका-हारा घर लौटा था। विपिन, जो अपनी मेहनत-मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करता है, उम्मीद कर रहा था कि घर पहुंचकर सुकून की रोटी मिलेगी। घर में उसकी पत्नी ईशा और मां गीता उसका इंतजार कर रहे थे।
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करीब 10 महीने पहले, मार्च 2025 में विपिन और ईशा की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी। ईशा मेरठ के मलियाना की रहने वाली है। शादी के शुरुआती दिन अच्छे बीते, लेकिन धीरे-धीरे छोटी-मोटी बातों पर किचकिच शुरू हो गई थी। फिर भी, किसी को अंदाजा नहीं था कि नफरत इस स्तर तक पहुंच जाएगी।
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रात के करीब 9 बजे विपिन घर पहुंचा। मां गीता ने बताया कि घर का माहौल सामान्य था। ईशा ने खाना बनाया था। सास, बेटे और बहू ने एक साथ बैठकर कुछ देर बातें कीं। यह वह समय था जब सब कुछ ठीक लग रहा था। मां गीता खाना खाकर अपने कमरे में सोने चली गईं, यह सोचकर कि बेटा-बहू अब आराम करेंगे।
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विवाद की चिंगारी: विपिन और ईशा अपने कमरे में (ऊपर की मंजिल पर) चले गए। रात करीब 11 बजे दोनों ने खाना खाना शुरू किया। खाने का पहला निवाला मुंह में डालते ही विपिन के चेहरे के भाव बदल गए। शायद सब्जी में नमक कम था या मसाला ज्यादा, या फिर वह स्वाद नहीं था जिसकी विपिन को उम्मीद थी। विपिन ने सहज भाव से या शायद थोड़ी झुंझलाहट में कह दिया, "तुम खाना अच्छा नहीं बना पाती हो। आज भी खाने में कोई स्वाद नहीं है। दिनभर घर में रहती हो, कम से कम खाना तो ढंग का बना लिया करो।"
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विपिन का यह वाक्य बारूद के ढेर पर चिंगारी जैसा साबित हुआ। ईशा, जो शायद पहले से किसी बात को लेकर मानसिक तनाव या गुस्से में थी, इस आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर सकी। उसने पलटकर जवाब दिया, "मैं दिनभर तुम्हारी और तुम्हारी मां की गुलामी करती हूं, फिर भी तुम्हें कमी ही दिखती है। खुद बनाकर खा लिया करो।"
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देखते ही देखते, खाने की थाली एक तरफ रह गई और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। आवाजें ऊंची होने लगीं। बहस गालियों में और फिर हाथापाई में बदल गई। नीचे के कमरे में सो रही मां गीता की नींद खुल गई। उन्होंने नीचे से ही आवाज लगाकर डांटा, "अरे, रात को क्यों लड़ रहे हो? सो जाओ, सुबह बात करना।"
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मां की डांट सुनकर थोड़ी देर के लिए ऊपर सन्नाटा छा गया। मां को लगा कि मामला शांत हो गया है और वे दोबारा सो गईं। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ऊपर कमरे में ईशा का गुस्सा शांत नहीं हुआ है, बल्कि वह एक ज्वालामुखी की तरह अंदर ही अंदर धधक रहा है।
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प्रतिशोध की आग और वह खूनी हमला

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रात के 1 बज चुके थे। कॉलोनी में गहरा सन्नाटा था। विपिन और ईशा के कमरे में भी चुप्पी थी, लेकिन यह तूफान से पहले की शांति थी। पुलिस सूत्रों और विपिन के इशारों (क्योंकि वह बोल नहीं पा रहा है) के आधार पर जो कहानी सामने आई है, वह रूह कंपाने वाली है।
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झगड़े के बाद विपिन शायद बेड पर लेट गया था या कमरे में बैठा था। ईशा उठी और कमरे से बाहर निकली। विपिन को लगा कि वह पानी पीने या वॉशरूम जा रही है। लेकिन ईशा सीधे किचन की तरफ गई। वहां स्लैब पर रखा वह चाकू, जिससे कुछ घंटे पहले उसने सब्जी काटी थी, उसकी नजर उस पर पड़ी। उसने उस धारदार चाकू को उठाया। उसकी आंखों में अब पत्नी का प्रेम नहीं, बल्कि प्रतिशोध की आग थी।
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चाकू हाथ में लिए ईशा वापस कमरे में लौटी। विपिन कुछ समझ पाता, इससे पहले ही ईशा ने उस पर हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि ईशा ने विपिन के ऊपर हावी होकर उसे दबोच लिया। विपिन ने बचाव की कोशिश की, लेकिन ईशा ने पूरी ताकत से उसका जबड़ा पकड़ा।
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उस वक्त ईशा ने जो शब्द कहे, वे अब इस केस की सबसे खौफनाक गवाही बन गए हैं। उसने कहा, "तुम्हारी जुबान बहुत चलती है न? मेरे खाने की बुराई करती है... आज मैं इस जुबान को ही काट दूंगी। न रहेगी जुबान, न तुम कुछ बोल पाओगे।"
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क्रूरता की हद: इसके बाद जो हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। ईशा ने जबरदस्ती विपिन का मुंह खोला। विपिन छटपटाता रहा, लेकिन गुस्से में पागल पत्नी ने सब्जी काटने वाले चाकू को उसके मुंह में डाला और उसकी जीभ (Tongue) को पकड़कर रेत दिया। एक ही झटके में जीभ का आगे का मांसल हिस्सा कटकर अलग हो गया।
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खून का एक तेज फव्वारा विपिन के मुंह से निकला। बिस्तर, चादर और ईशा के हाथ खून से सन गए। जीभ का वह कटा हुआ टुकड़ा, जिससे विपिन कुछ पल पहले स्वाद की शिकायत कर रहा था, अब बेजान होकर बेड पर गिर पड़ा था।
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"आं... आं..." - एक बेटे की बेबस चीख और मां का दर्द

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जीभ कटते ही विपिन की आवाज चली गई। वह दर्द से तड़प उठा, लेकिन उसके गले से सिर्फ "आं... आं..." और घुरघुराने की आवाजें निकल रही थीं। मुंह से बहते खून को हाथों से रोकने की नाकाम कोशिश करते हुए वह कमरे से बाहर भागा। वह सीढ़ियों से गिरते-पड़ते नीचे अपनी मां के कमरे की तरफ दौड़ा।
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मां गीता, जो दोबारा सोने की कोशिश कर रही थीं, ने दरवाजे पर भारी धक-धक सुनी। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, सामने का दृश्य देखकर उनकी चीख निकल गई। उनका जवान बेटा खून से लथपथ खड़ा था। उसकी शर्ट पूरी तरह लाल हो चुकी थी और वह अपने मुंह की तरफ इशारा कर रहा था।
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मां ने घबराते हुए पूछा, "बेटा, क्या हुआ? ये खून कैसा?" विपिन बोल नहीं पा रहा था। उसने अपना मुंह खोलकर दिखाया। अंदर का दृश्य देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। मुंह के अंदर जीभ की जगह सिर्फ मांस का लोथड़ा और बहता खून था।
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गीता ने बदहवास होकर शोर मचाना शुरू कर दिया। "बचाओ! बचाओ! मेरे बेटे को मार डाला!" उनकी आवाज रात के सन्नाटे को चीरती हुई दूर तक गई।
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दरवाजा बंद, बाहर तड़पता पति

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इधर, वारदात को अंजाम देने के बाद ईशा ने तुरंत अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उसने खुद को उसी कमरे में कैद कर लिया जहां उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। शायद उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, या फिर वह पुलिस और भीड़ के डर से छिप गई।
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गीता की चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी जाग गए। संजयपुरी कॉलोनी के लोग भागते हुए विपिन के घर पहुंचे। वहां का मंजर देखकर हर कोई सन्न रह गया। पड़ोसियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाई। उन्होंने विपिन को संभाला और एक वाहन का इंतजाम किया।
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पड़ोसी लगातार ऊपर के कमरे का दरवाजा पीटते रहे। "ईशा, दरवाजा खोल! ये तूने क्या कर दिया?" लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। ईशा ने पूरी रात दरवाजा नहीं खोला। वह अंधेरे कमरे में बैठी रही।
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अस्पताल की दौड़ और मेडिकल स्थिति

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पड़ोसी और परिजन विपिन को लेकर तुरंत मोदीनगर के जीवन अस्पताल पहुंचे। वहां के डॉक्टरों ने जब विपिन के मुंह की स्थिति देखी तो वे भी हैरान रह गए। खून का रिसाव बहुत ज्यादा था। जीभ का एक बड़ा हिस्सा (Anterior part of the tongue) कट चुका था।
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प्राथमिक उपचार देकर खून रोकने की कोशिश की गई, लेकिन मामला गंभीर था। जीभ एक अत्यंत संवहनी अंग (highly vascular organ) है, जिसमें रक्त वाहिकाओं का जाल होता है। वहां चोट लगने पर भारी रक्तस्राव (Hemmorhage) होता है जिससे मरीज की जान भी जा सकती है और खून फेफड़ों में जाने (Aspiration) का खतरा भी रहता है।
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मोदीनगर के डॉक्टरों ने रिस्क न लेते हुए विपिन को तुरंत मेरठ के सुभारती अस्पताल (Subharti Medical College) के लिए रेफर कर दिया। परिजन समझदारी दिखाते हुए बेड पर पड़े जीभ के कटे हुए टुकड़े को भी बर्फ में रखकर साथ ले गए, इस उम्मीद में कि शायद प्लास्टिक सर्जरी के जरिए उसे वापस जोड़ा जा सके।
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वर्तमान मेडिकल स्थिति: ताजा जानकारी के अनुसार, सुभारती अस्पताल में विपिन का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी की गई है, लेकिन जीभ का जुड़ना और उसका वापस सामान्य रूप से काम करना (Functionality) बहुत मुश्किल है। विपिन की बोलने की क्षमता (Speech) हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है। उसे स्वाद (Taste) का अनुभव भी शायद अब पहले जैसा न हो। फिलहाल उसकी हालत स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है।
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सुबह होते ही 'मॉब जस्टिस' (भीड़ का न्याय)

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रात भर विपिन का परिवार और कुछ पड़ोसी अस्पताल में थे, जबकि कुछ लोग घर पर ही ईशा की निगरानी कर रहे थे। मंगलवार की सुबह होते-होते यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे मोदीनगर में फैल गई। "एक पत्नी ने पति की जीभ काट दी" - यह सुनते ही लोगों का हुजूम विपिन के घर के बाहर जमा हो गया।
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सुबह करीब 8-9 बजे, जब ईशा ने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर आई, तो उसे सहानुभूति की जगह नफरत का सामना करना पड़ा। वहां मौजूद महिलाओं और पुरुषों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। भीड़ ने कानून का इंतजार नहीं किया।
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महिलाओं ने ईशा को घेर लिया। उसे बालों से पकड़कर खींचा गया, थप्पड़ मारे गए और गालियां दी गईं। ईशा रोती रही, हाथ जोड़ती रही, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इस बीच, खबर पाकर ईशा के मायके (मलियाना, मेरठ) से उसका एक रिश्तेदार भी वहां पहुंचा था। भीड़ ने उसे भी नहीं बख्शा। लोगों का आरोप था कि मायके वालों ने ही लड़की को ऐसे संस्कार दिए हैं या उसे शह दी है। उस रिश्तेदार की भी भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी।
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पुलिस का आगमन और कानूनी पेंच

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हंगामे की सूचना मिलते ही मोदीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एसएचओ (SHO) आनंद प्रकाश ने अपनी टीम के साथ भीड़ को तितर-बितर किया और ईशा को हिरासत में लिया। पुलिस ने उसे भीड़ के गुस्से से बचाया।
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ईशा का बयान: पुलिस हिरासत में और भीड़ की मार खाने के बाद ईशा ने अपना बचाव करने की कोशिश की। रोते हुए उसने कहा, "मैं कोई राक्षस नहीं हूं। मैं सुबह से शाम तक घर का काम करती हूं। ये लोग मुझे दासी समझते हैं। विपिन आए दिन मेरे साथ शराब पीकर मारपीट करता था (हालांकि शराब की पुष्टि अभी नहीं हुई है)। कल रात भी उसने मेरे हाथ के खाने को फेंक दिया और मुझे बहुत मारा। मुझे भी गुस्सा आ गया और यह सब हो गया।"
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हालांकि, पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा (Self Defense) और जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने (Grievous Hurt) में अंतर होता है। विपिन निहत्था था और उस वक्त खाना खा रहा था, जबकि ईशा विशेष रूप से किचन से चाकू लेकर आई थी, जो 'इरादे' (Intent) को दर्शाता है।
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कानूनी धाराएं (BNS - भारतीय न्याय संहिता): पुलिस के अनुसार, अभी तक विपिन के परिवार की ओर से औपचारिक लिखित शिकायत (Tahrir) नहीं मिली है क्योंकि वे अस्पताल में व्यस्त हैं। जैसे ही तहरीर मिलेगी, निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज हो सकता है:
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    धारा 118 (1) BNS: स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना (Voluntarily causing grievous hurt)। जीभ काटना 'स्थायी विरूपण' (Permanent disfiguration) की श्रेणी में आता है, जिसके लिए आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
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    धारा 109 BNS: हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) - यदि यह साबित होता है कि चोट से जान जा सकती थी।
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    घरेलू हिंसा अधिनियम: विपिन की तरफ से भी घरेलू हिंसा का मामला बन सकता है।
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पुलिस ने उस चाकू को बरामद कर लिया है जिससे वार किया गया था। फॉरेंसिक टीम ने बेड से खून के नमूने और चादर भी जब्त कर ली है।
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सामाजिक विश्लेषण - आखिर क्यों टूट रहा है सब्र का बांध?

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गाजियाबाद की यह घटना कोई सामान्य अपराध नहीं है, यह हमारे समाज के गिरते मानसिक स्वास्थ्य और सहनशीलता (Tolerance) की कमी का एक भयावह उदाहरण है।
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    घरेलू हिंसा का दूसरा पहलू: हम अक्सर मानते हैं कि घरेलू हिंसा केवल महिलाओं के साथ होती है। लेकिन एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े और ऐसी घटनाएं बताती हैं कि पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार हो रहे हैं। विपिन का केस इसका प्रमाण है। एक पुरुष, जो शारीरिक रूप से पत्नी से ज्यादा ताकतवर हो सकता था, वह एक अचानक हुए हमले में असहाय हो गया।
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    गुस्सा नियंत्रण (Anger Management): क्या 'खाने में स्वाद न होना' जीभ काटने का कारण हो सकता है? नहीं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह गुस्सा उस एक पल का नहीं था। यह महीनों से जमा हो रहा कुंठा (Frustration) और संवादहीनता (Lack of Communication) का परिणाम था। 10 महीने की शादी में अगर बात यहां तक पहुंची, तो इसका मतलब है कि उनके बीच भावनात्मक जुड़ाव पूरी तरह खत्म हो चुका था।
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    विवाह संस्था पर संकट: यह घटना अरेंज मैरिज और लव मैरिज दोनों ही व्यवस्थाओं में कपल्स के बीच बढ़ते तनाव (Stress) और एडजस्टमेंट (Adjustment) की कमी को दर्शाती है। छोटी-छोटी बातें अब जानलेवा साबित हो रही हैं।
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एक जीभ कटी, पर गूंगा हुआ पूरा समाज

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आज मोदीनगर के उस घर में सन्नाटा है, लेकिन अस्पताल में विपिन की खामोश चीखें बहुत कुछ कह रही हैं। विपिन की जीभ शायद डॉक्टरों की कोशिशों से थोड़ी बहुत ठीक हो जाए, लेकिन इस रिश्ते का जो कत्ल हुआ है, उसे दुनिया का कोई डॉक्टर नहीं जोड़ सकता।
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ईशा अब सलाखों के पीछे जाएगी, उसका जीवन भी बर्बाद हो चुका है। विपिन की मां, जिन्होंने बुढ़ापे में बेटे की शादी के सपने देखे थे, अब कोर्ट-कचहरी और अस्पताल के चक्कर काटेंगी।
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यह घटना हर उस दंपती के लिए एक चेतावनी है जो गुस्से के आवेश में अपने साथी को चोट पहुंचाने से पहले परिणाम नहीं सोचते। एक पल का गुस्सा, पूरी जिंदगी की बर्बादी। फिलहाल, पुलिस विपिन के होश में आने और उसके लिखित बयान का इंतजार कर रही है, जिसके बाद इस 'कलयुगी पत्नी' पर कानून का शिकंजा कसा जाएगा।
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