केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग की गौतमबुद्ध नगर टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद स्थित एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में 'मेसर्स अफिया स्टील इस्पात प्राइवेट लिमिटेड' (M/s Afia Steel Ispat Private Limited) के निदेशक जावेद अख्तर को गिरफ्तार किया गया है। उन पर बिना माल की आपूर्ति किए फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हड़पने का गंभीर आरोप है। मेरठ की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special CJM) कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।READ ALSO:-ऑपरेशन 'ब्लैक बिल': बरेली में 20 करोड़ के GST घोटाले का 'मास्टरमाइंड' योगेश शर्मा गिरफ्तार; गाजियाबाद की पॉश सोसायटी में छिपा था मेरठ का नटवरलाल
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यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कहानी है एक आदतन अपराधी की, जिसने सरकार की आँखों में धूल झोंकने के लिए देश भर में फर्जी कंपनियों का एक जाल बिछा रखा था।
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1. गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी: कैसे शिकंजे में आया मास्टरमाइंड?

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दिनांक 29 जनवरी 2026 को मेरठ की विशेष अदालत में उस वक्त हलचल मच गई जब CGST विभाग के निरीक्षक अनिल कुमार ने आरोपी जावेद अख्तर को पेश किया। दस्तावेजों के अनुसार, विभाग को खुफिया जानकारी मिली थी कि मेसर्स अफिया स्टील इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (GSTIN: 09AAPCA8783J1ZS) बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े में लिप्त है।
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जांच में सामने आया कि जावेद अख्तर (निवासी: 3/19, राजेंद्र नगर, सेक्टर-2, साहिबाबाद, गाजियाबाद) ने लगभग 11.90 करोड़ रुपये (11,90,05,998/-) का अवैध ITC क्लेम किया था। यह क्लेम उन फर्मों के बिलों पर किया गया जो या तो अस्तित्व में ही नहीं थीं या जिनका रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द हो चुका था।
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गिरफ्तारी का आधार (Grounds of Arrest):

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    धारा: 132(1)(c) और 132(1)(i) CGST एक्ट, 2017।
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    अपराध: बिना माल की वास्तविक आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी करना और उनका उपयोग करना।
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    कार्रवाई: विभाग ने धारा 69 के तहत गिरफ्तारी की कार्रवाई की। आरोपी के भाई, हुज़ैर अख्तर को गिरफ्तारी की सूचना दी गई।
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2. फर्जी फर्मों का 'मकड़जाल': गुजरात से लेकर दिल्ली तक नेटवर्क

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रिमांड एप्लीकेशन (केस सं0-181/2023) में अभियोजन पक्ष ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला कि जावेद अख्तर की कंपनी ने 10 से अधिक संदिग्ध और फर्जी फर्मों से माल खरीदने का दिखावा किया। जब विभाग ने इन फर्मों का सत्यापन (Verification) किया, तो हकीकत कुछ और ही निकली।
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आइये, एक-एक करके उन फर्जी कंपनियों का पोस्टमार्टम करते हैं जिनके जरिए यह खेल खेला गया:
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(A) मेसर्स श्री नाथजी इस्पात इंडस्ट्रीज (अहमदाबाद, गुजरात)

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    दावा: इस फर्म से लाखों का माल खरीदा गया।
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  • \r\n
    हकीकत: गुजरात राज्य कर विभाग ने पुष्टि की कि यह फर्म अपने पते पर मौजूद ही नहीं है (Non-existent)।
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  • \r\n
    स्टेटस: इसका रजिस्ट्रेशन 20.10.2020 को ही रद्द हो चुका था, फिर भी इसके नाम पर बिल काटे गए।
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  • \r\n
    घोटाला: लगभग 13.38 लाख रुपये का फर्जी ITC पास किया गया।
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(B) मेसर्स जी.एन. स्टील कॉर्पोरेशन (गुरुग्राम, हरियाणा)

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    खेल: इस फर्म ने जावेद की कंपनी को 2021-22 और 2022-23 में भारी मात्रा में बिल जारी किए।
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  • \r\n
    खुलासा: BIFA (Business Intelligence and Fraud Analytics) टूल ने पकड़ लिया कि इस फर्म ने भी फर्जी तरीके से ITC लिया और आगे पास किया।
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  • \r\n
    घोटाला: लगभग 2.70 करोड़ रुपये का अवैध ITC क्लेम किया गया।
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(C) मेसर्स महाकाल ट्रेडर्स (पूर्वी दिल्ली)

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  • \r\n
    पता: गाजीपुर डेयरी फार्म, दिल्ली।
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  • \r\n
  • \r\n
    जांच: जब अधिकारी पते पर पहुंचे, तो वहां कोई फर्म नहीं मिली। पंजीकृत मोबाइल नंबर भी बंद था।
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  • \r\n
    घोटाला: लगभग 50.17 लाख रुपये का चूना लगाया गया।
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  • \r\n
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(D) मेसर्स इनाया एंटरप्राइजेज (गाजियाबाद)

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  • \r\n
    लोकेशन: हिंडन विहार, गाजियाबाद।
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  • \r\n
    रिपोर्ट: 25.11.2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यह फर्म अधूरे पते पर रजिस्टर थी। यह एक क्लासिक तरीका है जिसे 'फर्जी फर्म' बनाने वाले अपनाते हैं ताकि वे पकड़े न जाएं।
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  • \r\n
    घोटाला: सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा यहीं हुआ, जिसमें 2.04 करोड़ रुपये का ITC पास किया गया।
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(E) मेसर्स महालक्ष्मी ट्रेडर्स (गाजियाबाद)

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  • \r\n
    पता: जी.टी. रोड, गाजियाबाद।
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  • \r\n
  • \r\n
    स्थिति: इस फर्म का भी पता नहीं मिल सका। विभाग का मानना है कि ऐसी फर्में केवल कागजों पर बनाई जाती हैं।
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    घोटाला: लगभग 2.91 करोड़ रुपये का फर्जी ITC।
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(अन्य फर्मों में के.एस. स्टील कॉर्पोरेशन, एम.के. एंटरप्राइजेज और एक्यूरेट ट्रेडिंग कंपनी शामिल हैं, जिनका विवरण नीचे दी गई तालिका में है।)
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3. BIFA टूल: वो तकनीक जिसने खोली पोल

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इस पूरे ऑपरेशन में GST विभाग के BIFA (Business Intelligence and Fraud Analytics) टूल ने अहम भूमिका निभाई। दस्तावेजों में स्पष्ट लिखा है कि विश्लेषणात्मक उपकरणों ने दिखाया कि कैसे इन फर्मों के बीच केवल कागजी लेनदेन हो रहा था।
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    सर्कुलर ट्रेडिंग: माल कहीं नहीं जा रहा था, बस बिल एक फर्म से दूसरी फर्म में घूम रहे थे।
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  • \r\n
  • \r\n
    अस्तित्वहीन फर्में: जिन फर्मों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका था, जावेद अख्तर की कंपनी उनसे भी व्यापार दिखा रही थी।
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4. आदतन अपराधी (Habitual Offender): पुराना इतिहास

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अदालत में पेश दस्तावेजों और पुरानी फाइलों (File No. 651/2021-22) से यह साफ हो गया कि जावेद अख्तर कानून के लिए नया नहीं है।
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  • \r\n
    पुराना केस (2021): जावेद अख्तर के खिलाफ पहले भी लगभग 11 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला (केस सं0 486/2021) माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।
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  • \r\n
  • \r\n
    पुरानी फर्म: उस समय वह 'मेसर्स यूनिवर्सल एंटरप्राइजेज' (M/s Universal Enterprises) का प्रोपराइटर था।
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  • \r\n
  • \r\n
    मोडस ऑपरेंडी: तब भी DGGI मेरठ जोनल यूनिट ने उसे धारा 132(1)(c) के तहत पकड़ा था।
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  • \r\n
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अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने अदालत में जोर देकर कहा, "अभियुक्त अद्यतन (Habitual) अपराधी है। यदि इसे जमानत मिली, तो यह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।"
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5. कोर्ट रूम ड्रामा: क्या हुआ 29 जनवरी 2026 को?

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मेरठ की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special CJM) श्रीमती दुर्गेश नंदिनी की अदालत में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
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अभियोजन पक्ष (Prosecution)-स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर लक्ष्य कुमार सिंह और उनकी सहयोगी, एडवोकेट श्रीमती वंदना सिंह की दलीलें:
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  1. \r\n
    बड़ा सिंडिकेट: यह केवल एक व्यक्ति का काम नहीं है। रिमांड एप्लीकेशन में कहा गया, "अग्रिम विवेचना के दौरान इस सिंडिकेट में शामिल अन्य अभियुक्तों के नाम प्रकाश में आने की संभावना है।"
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    सबूत: विभाग ने 'INS-02' मीमो में डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज पेश किए।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    जांच जारी: विवेचक (Investigating Officer) ने कहा कि जांच अभी चल रही है, इसलिए आरोपी को जेल भेजना जरूरी है।
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  6. \r\n
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बचाव पक्ष (Defense) की दलीलें:

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  1. \r\n
    इनकार: जावेद अख्तर के वकील ने कहा, "मेरे मुवक्किल ने कोई GST चोरी नहीं की है। वे मैन्युफैक्चरिंग का काम करते हैं।"
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  2. \r\n
  3. \r\n
    दस्तावेजों का अभाव: उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) की प्रति उन्हें नहीं दी गई।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    याचना: उन्होंने रिमांड निरस्त करने की मांग की।
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  6. \r\n
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न्यायालय का आदेश (The Verdict):

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मजिस्ट्रेट ने केस डायरी और उपलब्ध सबूतों (विशेषकर 11.90 करोड़ की चोरी और फर्जी फर्मों की रिपोर्ट) का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया:
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"अभियुक्त जावेद अख्तर का रिमाण्ड 14 दिन के लिए स्वीकार किये जाने योग्य है... अभियुक्त को अग्रिम नियत तिथि 11.02.2026 को जिला कारागार से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाये।" 
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6. घोटाले का गणित: किस फर्म से कितना फर्जीवाड़ा?

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पाठकों की समझ के लिए, यहाँ उस राशि का विवरण दिया जा रहा है जिसका अवैध लाभ आरोपी ने उठाया:
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क्रम सं.
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फर्जी फर्म का नाम
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स्थान (राज्य)
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फर्जी ITC राशि (लगभग)
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1.
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श्री नाथजी इस्पात इंडस्ट्रीज
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गुजरात
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₹ 13,38,911
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2.
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जी.एन. स्टील कॉर्पोरेशन
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हरियाणा
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₹ 2,70,38,625
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3.
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पूरबधनी एंटरप्राइजेज
\r\n
\r\n
गुजरात
\r\n
\r\n
₹ 5,96,602
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4.
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महाकाल ट्रेडर्स
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\r\n
दिल्ली
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\r\n
₹ 50,17,517
\r\n
\r\n
5.
\r\n
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इनाया एंटरप्राइजेज
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\r\n
उत्तर प्रदेश
\r\n
\r\n
₹ 2,04,89,065
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\r\n
6.
\r\n
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महालक्ष्मी ट्रेडर्स
\r\n
\r\n
उत्तर प्रदेश
\r\n
\r\n
₹ 2,91,83,648
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\r\n
7.
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\r\n
एम.के. एंटरप्राइजेज
\r\n
\r\n
गुजरात
\r\n
\r\n
₹ 59,68,814
\r\n
\r\n
8.
\r\n
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के.एस. स्टील कॉर्पोरेशन
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\r\n
दिल्ली
\r\n
\r\n
₹ 75,17,120
\r\n
\r\n
9.
\r\n
\r\n
ए.एस. ट्रेडर्स
\r\n
\r\n
दिल्ली
\r\n
\r\n
₹ 40,46,622
\r\n
\r\n
10.
\r\n
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एक्यूरेट ट्रेडिंग कंपनी
\r\n
\r\n
महाराष्ट्र
\r\n
\r\n
₹ 81,48,533
\r\n
\r\n
कुल
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\r\n
\r\n
 
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\r\n
₹ 11,90,05,998/-
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7. कानूनी पेचीदगियां: धारा 132 क्या कहती है?

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जावेद अख्तर पर CGST Act, 2017 की धारा 132(1)(c) और 132(1)(i) के तहत आरोप लगे हैं। यह धाराएं बेहद सख्त हैं:
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  • \r\n
    धारा 132(1)(c): यह उन लोगों पर लगती है जो इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाते हैं, बिना माल या सेवाओं की वास्तविक प्राप्ति के। यानी बिल तो ले लिया, लेकिन माल नहीं खरीदा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सजा का प्रावधान: चूँकि घोटाले की राशि 5 करोड़ रुपये से अधिक है, इसलिए यह गैर-जमानती (Non-bailable) और संज्ञेय (Cognizable) अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
    \r\n
  • \r\n
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अब आगे क्या?

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जावेद अख्तर अब 11 फरवरी 2026 तक जेल की सलाखों के पीछे रहेंगे। इस दौरान CGST विभाग अपनी जांच को तेज करेगा। सूत्रों का कहना है कि विभाग अब उन मास्टरमाइंड्स की तलाश में है जो दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र में बैठकर ये बोगस कंपनियां (Shell Companies) बनाते थे।
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यह गिरफ्तारी उन सभी व्यापारियों के लिए एक चेतावनी है जो फर्जी बिलिंग के जरिए रातों-रात अमीर बनने का सपना देखते हैं। 'डेटा माइनिंग' और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के दौर में अब टैक्स चोरी करना नामुमकिन होता जा रहा है।
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हमारी नजर इस खबर पर बनी हुई है। जैसे ही इस सिंडिकेट के अन्य नाम सामने आएंगे, हम आपको अपडेट करेंगे।
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(अस्वीकरण: यह रिपोर्ट न्यायालय के सार्वजनिक दस्तावेजों और रिमांड आवेदन पर आधारित है। आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि न्यायालय द्वारा उसे दोषी सिद्ध न कर दिया जाए।)
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प्रमुख तिथियां एक नजर में (Key Timeline):

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    गिरफ्तारी की तारीख: 29 जनवरी 2026
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  • \r\n
  • \r\n
    न्यायालय में पेशी: 29 जनवरी 2026
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  • \r\n
  • \r\n
    रिमांड अवधि: 14 दिन
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  • \r\n
  • \r\n
    अगली सुनवाई: 11 फरवरी 2026
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    स्थान: जिला कारागार / विशेष CJM न्यायालय, मेरठ।
    \r\n
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