गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। भारत सिटी (Bharat City) टाउनशिप के बी-1 टावर की 9वीं मंजिल से तीन सगी बहनों ने कूदकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में जहां इस घटना को 'कोरियन गेम' (Korean Game) के टास्क से जोड़कर देखा जा रहा था, वहीं 10 घंटे की गहन छानबीन के बाद पुलिस के सामने जो सच आया, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। यह मामला सिर्फ एक सुसाइड का नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में खोती मासूमियत, आइडेंटिटी क्राइसिस (Identity Crisis) और उलझे हुए पारिवारिक रिश्तों की एक दर्दनाक दास्तान है।READ ALSO:-मेरठ SSP ट्रांसफर: विपिन ताडा बने कानपुर के जॉइंट सीपी, अब 'सिंघम' अविनाश पांडे संभालेंगे मेरठ की कमान; 24 IPS अफसरों का तबादला
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
गाजियाबाद 3 बहनों की आत्महत्या (Ghaziabad 3 Sisters Suicide) के इस मामले में मृतकाओं की पहचान 16 साल की निशिका, 14 साल की प्राची और 12 साल की पाखी के रूप में हुई है। पुलिस को कमरे से एक डायरी मिली है, जिसने इन बच्चियों की 'दोहरी जिंदगी' का राज खोला है।
\r\n\r\n

 Image

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

वह काली रात: 3 फरवरी, रात 2 बजे का खौफनाक मंजर

\r\n\r\n
घटना 3 फरवरी की रात की है। पिता चेतन गुर्जर, उनकी दो पत्नियां और बच्चे घर में मौजूद थे। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, रात के करीब 1:30 से 2:00 बजे के बीच तीनों बहनें अपने कमरे से निकलीं। वे उस कमरे में गईं जहां उनकी मां सो रही थीं। उन्होंने मां के गालों को चूमा, भावुक होकर 'आई लव यू' कहा और फिर अपने कमरे की तरफ लौट गईं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसके बाद तीनों बहनें उस खाली कमरे में गईं जिसे 'पूजा का कमरा' कहा जाता था। वहां केवल राधा-कृष्ण की तस्वीर थी। उन्होंने कमरे को अंदर से लॉक किया। बालकनी पर चढ़ने के लिए प्लास्टिक के दो स्टेप वाले स्टूल लगाए और एक-एक करके 9वीं मंजिल से नीचे छलांग लगा दी।
\r\n\r\n

 Image

\r\n\r\n
तीनों के गिरने की तेज आवाज सुनकर गार्ड और पड़ोसी दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। खून से लथपथ हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कोविड काल, स्कूल छूटना और 'कोरियन कल्चर' की लत

\r\n\r\n
पुलिस की जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू इन बच्चियों का 'कोरियन कल्चर' (Korean Culture) के प्रति हद से ज्यादा लगाव था। यह सिर्फ पसंद नहीं, बल्कि एक जुनून बन चुका था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    वर्चुअल दुनिया में बदलाव: 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद हुए, तो बच्चियों के हाथ में मोबाइल आ गया। शुरुआत कोरियन फिल्मों और वेब सीरीज देखने से हुई।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    पहचान का संकट: सबसे पहले बड़ी बहन निशिका इस कल्चर में ढली। धीरे-धीरे प्राची और पाखी भी उसे फॉलो करने लगीं। परिवार के मुताबिक, बच्चियां खुद को भारतीय नहीं, बल्कि 'कोरियन' मानने लगी थीं।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    भाषा और रहन-सहन: यूट्यूब (YouTube) की मदद से उन्होंने कोरियन भाषा सीख ली थी। वे घर में आपस में हिंदी के बजाय कोरियन भाषा में बात करती थीं। उनका पहनावा, खाने की पसंद और यहां तक कि लड़कों की पसंद भी कोरियन हो चुकी थी। वे अपना नाम भी बदल चुकी थीं और कोरियन नाम से एक-दूसरे को बुलाती थीं।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

यूट्यूब चैनल और पिता की सख्ती

\r\n\r\n
जांच में सामने आया कि तीनों बहनों ने मिलकर एक यूट्यूब चैनल बनाया था, जिस पर वे कोरियन कल्चर पर आधारित कंटेंट और रील्स (Reels) बनाकर अपलोड करती थीं। 2022 से निशिका सोशल मीडिया पर एक्टिव थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पिता चेतन गुर्जर को जब इस बात का पता चला, तो उन्होंने सख्ती दिखाई। घटना वाली रात भी पिता ने बच्चों को डांटा था और उनसे मोबाइल छीन लिया था। पिता का कहना है कि वे बच्चों को इस आभासी दुनिया से बाहर निकालना चाहते थे। शायद यही डांट और मोबाइल छिनने का डर बच्चियों को बर्दाश्त नहीं हुआ। एक महीने पहले ही उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल डिलीट कर दिया था, लेकिन मोबाइल और गेम की लत नहीं छूटी थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सुसाइड नोट और डायरी के पन्नों का सच

\r\n\r\n
पुलिस ने घटनास्थल से एक डायरी बरामद की है, जिसके 18 पन्नों में सुसाइड नोट और उनकी मनस्थिति का जिक्र है। यह डायरी गाजियाबाद 3 बहनों की आत्महत्या केस में सबसे अहम सबूत है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डायरी में लिखा है:

\r\n\r\n
\r\n
"मम्मी-पापा सॉरी… हम गेम नहीं छोड़ पा रहे हैं। अब आपको एहसास होगा कि हम गेम और इस दुनिया से कितना प्यार करते थे, जिसे आप छुड़वाना चाहते थे।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
डायरी के पन्ने यह बताते हैं कि बच्चियां वास्तविकता से पूरी तरह कट चुकी थीं। उन्हें लगता था कि वे जिस 'कोरियन दुनिया' को स्क्रीन पर देख रही हैं, वही उनका असली सच है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

उलझे हुए पारिवारिक रिश्ते और आर्थिक तंगी

\r\n\r\n
इस त्रासदी के पीछे सिर्फ मोबाइल की लत नहीं, बल्कि परिवार का तनावपूर्ण माहौल भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। पिता चेतन गुर्जर शेयर ट्रेडिंग (Share Trading) का काम करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय में उन्हें कारोबार में करीब 2 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    दो शादियां और कलह: चेतन ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी से बच्चे नहीं हुए, तो उन्होंने पत्नी की सगी छोटी बहन (साली) से शादी कर ली। घर में दोनों पत्नियां साथ रहती थीं। इतना ही नहीं, एक साल से उनकी तीसरी बहन भी उसी घर में रह रही थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पढ़ाई छूटी: आर्थिक तंगी और बच्चियों की पढ़ाई में रुचि कम होने के कारण उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया था। निशिका 4थी, प्राची 3री और पाखी 2री कक्षा तक ही पढ़ी थीं। पिता सोच रहे थे कि हालात सुधरने पर दोबारा एडमिशन कराएंगे, लेकिन घर में 24 घंटे रहने से बच्चियों का पूरा ध्यान मोबाइल पर शिफ्ट हो गया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    छोटी बहन से दूरी: तीनों बड़ी बहनों ने अपनी 4 साल की छोटी बहन को भी कोरियन सिखाना शुरू कर दिया था। पिता ने जब यह देखा और डांटा, तो उन्होंने छोटी बहन से बात करना पूरी तरह बंद कर दिया और खुद को आइसोलेट (Isolate) कर लिया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुलिस जांच में 5 बड़े सवाल जो उलझा रहे गुत्थी

\r\n\r\n
भले ही प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या लग रही हो, लेकिन घटनाक्रम और मौके के हालात कई सवाल खड़े कर रहे हैं। पुलिस इन 5 बिंदुओं पर गहराई से जांच कर रही है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
1. गिरने की दिशा और दूरी: तीनों बच्चियों ने 9वीं मंजिल (करीब 85 फीट ऊंचाई) से छलांग लगाई। विज्ञान के नियम के अनुसार, गिरने वाले शवों की दूरी और दिशा में समानता होनी चाहिए थी। लेकिन यहां एक शव दीवार से 1 फीट, दूसरा 8 फीट और तीसरा 9 फीट दूर मिला। इतनी ऊंचाई से दीवार से सटकर (1 फीट दूर) गिरना संदिग्ध है। क्या उन्हें धक्का दिया गया या वे खुद कूदीं?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
2. रेलिंग और बालकनी की बनावट: जिस बालकनी से कूदने की बात कही जा रही है, वहां रेलिंग के बाहर खड़े होने की जगह नहीं थी। सामने वाले फ्लैट के निवासी का दावा है कि उसने एक बच्ची को रेलिंग पर बैठे देखा था। बिना संतुलन खोए वहां बैठना और फिर कूदना जांच का विषय है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
3. शवों की पोजीशन: यदि तीनों बच्चियां एक साथ या एक के बाद एक बैठकर कूदीं, तो उनके शवों के गिरने की दिशा एक होनी चाहिए थी। अलग-अलग दूरी यह इशारा करती है कि कूदने के तरीके में अंतर था या उनके साथ जोर-जबरदस्ती की गई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
4. घटना से पहले झगड़ा और गालियां: पड़ोसियों के बयानों ने मामले को नया मोड़ दिया है। पड़ोसियों के मुताबिक, घटना से पहले फ्लैट में जोर-जोर से झगड़े की आवाजें आ रही थीं। चेतन की पत्नियां अभद्र गालियां दे रही थीं और उनका इशारा पति की तरफ था। क्या सुसाइड से पहले घर में कोई बड़ा क्लेश हुआ था?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
5. पुलिस के सामने संदिग्ध व्यवहार: मौके पर पहुंचे एक पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस कमिश्नर के सामने दोनों पत्नियां नहीं आईं। उन्होंने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था। वहीं, पिता चेतन एक ऑफिसर के पैर पकड़ने की कोशिश कर रहा था और जोर-जोर से रो रहा था। यह व्यवहार सामान्य नहीं लगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

साली, पत्नी और तीसरी बहन का त्रिकोण

\r\n\r\n
चेतन के पारिवारिक जीवन में भारी उथल-पुथल थी। मई 2025 में चेतन का अपनी पहली पत्नी से भयंकर झगड़ा हुआ था। पत्नी का आरोप था, "मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, मेरी बहन से शादी कर ली। अब तीसरी बहन को भी घर में रख लिया है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस झगड़े के बाद पहली पत्नी घर छोड़कर चली गई थी, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट टीलामोड थाने में दर्ज कराई गई थी। बाद में चेतन उसे दिल्ली से वापस लाया था। यह तनाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: क्यों बच्चे बन रहे हैं अनजान संस्कृति के शिकार?

\r\n\r\n
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि गाजियाबाद 3 बहनों की आत्महत्या जैसा मामला 'फैंटेसी वर्ल्ड' (Fantasy World) में जीने का परिणाम है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    एस्केपिज्म (Escapism): जब वास्तविक जीवन में तनाव (पढ़ाई का अभाव, आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह) होता है, तो बच्चे मोबाइल की दुनिया में सुकून तलाशते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कोरियाई लहर (Hallyu Wave): आज के दौर में के-पॉप और के-ड्रामा का क्रेज युवाओं में सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन जब यह मनोरंजन से आगे बढ़कर 'जुनून' बन जाए, तो यह खतरनाक है। ये बच्चियां अपनी वास्तविकता को नकार कर कोरियन पहचान में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थीं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सोशल आइसोलेशन: स्कूल न जाने और घर में बंद रहने से उनका सामाजिक दायरा खत्म हो गया था। उनके लिए मोबाइल ही उनकी दुनिया, उनका दोस्त और उनका परिवार बन गया था।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आगे की कार्रवाई

\r\n\r\n
एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) आलोक प्रियदर्शी ने कहा, "अभी तक की जांच और साक्ष्यों (डायरी, मोबाइल हिस्ट्री) के आधार पर यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। मोबाइल में कोरियन कंटेंट और गेम के सबूत मिले हैं। हालांकि, फॉरेंसिक टीम शवों के गिरने की दूरी और एंगल की जांच कर रही है। पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अगर किसी भी तरह की साजिश सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
गाजियाबाद की यह घटना हर माता-पिता के लिए एक चेतावनी है। 12 से 16 साल की उम्र बेहद नाजुक होती है। घर में दो पत्नियों के बीच का तनाव, आर्थिक तंगी और उस पर से बच्चों का स्कूल से ड्रॉपआउट होना—इन सबने मिलकर एक ऐसा माहौल बनाया जहां बच्चियों ने मौत को अपनी 'फैंटेसी दुनिया' का आखिरी पड़ाव मान लिया। गाजियाबाद 3 बहनों की आत्महत्या का केस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया में कितना अकेला छोड़ रहे हैं। क्या हम उनकी स्क्रीन के पीछे छिपी उदासी को देख पा रहे हैं?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस की तफ्तीश जारी है, और उम्मीद है कि जल्द ही उन सवालों के जवाब मिल जाएंगे जो अभी पहेली बने हुए हैं।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
(नोट: यदि आप या आपका कोई अपना मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया भारत सरकार की हेल्पलाइन 'किरण' (1800-599-0019) पर संपर्क करें। आत्महत्या समाधान नहीं है।)
विज्ञापन
विज्ञापन