खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली (Personal Finance Desk):
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भारत में हर तीज-त्योहार, शादी-ब्याह और मांगलिक अवसरों पर सोने की खरीदारी करना हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है। लेकिन इसके साथ ही आयकर विभाग (Income Tax Department) के छापों और जांच को लेकर आम नागरिकों के मन में यह सवाल हमेशा बना रहता है कि आखिर घर में किस सीमा तक सोना रखना पूरी तरह से सुरक्षित है।
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​हाल ही में नागपुर स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए देश भर के करदाताओं के लिए स्थिति बिल्कुल शीशे की तरह साफ कर दी है। ट्रिब्यूनल ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति के आवासीय परिसर से सोने के आभूषण या सिक्के बरामद होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह पूरा सोना उसकी 'ब्लैक मनी' या अघोषित आय है। जांच अधिकारियों को संपत्ति के मालिकाना हक, उसकी खरीद के स्रोत (Source) और परिवार के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को ध्यान में रखना अनिवार्य है।
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​क्या था चार्टर्ड अकाउंटेंट निर्मल कुमार अग्रवाल का पूरा मामला?

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​इनकम टैक्स नियमों और गोल्ड लिमिट की इस पूरी बहस को समझने के लिए नागपुर के मशहूर चार्टर्ड अकाउंटेंट निर्मल कुमार अग्रवाल के घर हुई आयकर कार्रवाई के घटनाक्रम को समझना बेहद जरूरी है:
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    आयकर विभाग की कार्रवाई: 26 जुलाई 2016 को आयकर विभाग की टीम ने सीए निर्मल कुमार अग्रवाल के घर पर छापेमारी (Search & Seizure) की थी।
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    बरामदगी: इस कार्रवाई के दौरान उनके घर से लगभग 2.434 किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद हुए थे, जिनकी उस समय बाजार दर के हिसाब से अनुमानित कीमत लगभग 90.59 लाख रुपये थी। इसके अलावा घर से 7.06 लाख रुपये नकद भी मिले थे।
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    विभागीय जब्ती: जांच टीम ने 2.434 किलो में से करीब 1.314 किलोग्राम आभूषण और 5 लाख रुपये कैश मौके पर ही जब्त (Seize) कर लिए थे।
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    अधिकारी का रुख: शुरुआती आकलन में आयकर अधिकारी (Assessing Officer) ने आभूषणों के एक बड़े हिस्से (लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की ज्वेलरी) को अघोषित आय मानकर टैक्स और जुर्माने की देनदारी में जोड़ दिया था।
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अग्रवाल परिवार ने इस मनमाने आकलन के खिलाफ अपीलीय मंच का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपीलों के बाद मामला सुलझते-सुलझते आखिर में केवल 3.86 लाख रुपये की ज्वेलरी के स्रोत (Source) को लेकर कानूनी विवाद रह गया था।
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​ITAT के दो सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष: पत्नी का सोना और पुरुष की सीमा

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​मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए ITAT नागपुर पीठ ने दो बेहद अहम कानूनी पहलुओं पर अपनी मुहर लगाई:
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​1. पत्नी के गहने पति की अघोषित संपत्ति नहीं

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​कार्रवाई में जब्त ज्वेलरी में से करीब 55.8 ग्राम सोना निर्मल अग्रवाल की पत्नी के नाम दर्ज था। परिवार ने ट्रिब्यूनल के समक्ष यह पक्ष रखा कि यह ज्वेलरी पत्नी को उनके माता-पिता द्वारा दोनों बेटियों के जन्म के अवसर पर उपहार (Gifts) के रूप में दी गई थी। मूल्यांकन रिपोर्ट (Valuation Report) में भी इन गहनों को पत्नी के नाम पर ही दिखाया गया था।
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    ट्रिब्यूनल का फैसला: ITAT ने इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि मकान मालिक या परिवार के मुखिया के घर में मौजूद हर गहना उसी की निजी संपत्ति नहीं माना जा सकता। यदि यह साबित हो जाता है कि ज्वेलरी परिवार की महिला सदस्य की है और उसके पीछे का सामाजिक या पारिवारिक कारण संतोषजनक है, तो उसे गृहस्वामी की अघोषित आय में नहीं जोड़ा जा सकता।
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2. पुरुष सदस्य के लिए 100 ग्राम की छूट का नियम

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​निर्मल कुमार अग्रवाल के नाम पर कुल 121.5 ग्राम सोने की ज्वेलरी दर्शायी गई थी।
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    ​इसमें से 72.6 ग्राम सोना उन्होंने साल 2008 से 2011 के दौरान बैंकिग चैनल (चेक/ऑनलाइन) के जरिए खरीदा था, जिसका पूरा ब्योरा उनकी किताबों और टैक्स खातों (Books of Accounts) में दर्ज था।
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    ​शेष बचा केवल 48.9 ग्राम सोना, जिसका कोई लिखित बिल या रसीद उपलब्ध नहीं थी।
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    ट्रिब्यूनल का फैसला: ट्रिब्यूनल ने कहा कि सीए अग्रवाल शादीशुदा हैं और उनकी दो बेटियां हैं। ऐसे में 48.9 ग्राम सोने की अनिर्धारित मात्रा पूरी तरह से सामान्य और सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल है। साथ ही, यह मात्रा CBDT के निर्देश संख्या 1916 (Instruction No. 1916) के तहत एक पुरुष सदस्य के लिए तय की गई 100 ग्राम की निर्धारित सीमा से भी काफी कम है। इसलिए इस पर टैक्स लगाना सरासर गलत है।
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CBDT Instruction 1916: जानें किसके लिए कितना सोना रखना है सेफ

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​केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देश संख्या 1916 के अनुसार, अगर आयकर विभाग किसी के घर पर सर्च या सर्वे की कार्रवाई करता है, तो नीचे बताई गई मात्रा तक सोने के आभूषण मिलने पर उन्हें जब्त (Seize) नहीं किया जा सकता:
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पारिवारिक सदस्य (Family Member)
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आभूषणों की अनुमत्य सीमा (Safe Gold Limit)
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विवाहित महिला (Married Female)
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500 ग्राम (500 Grams)
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अविवाहित महिला (Unmarried Female)
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250 ग्राम (250 Grams)
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पुरुष सदस्य (Male Member)
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100 ग्राम (100 Grams)
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क्या 100 या 500 ग्राम सोना रखने पर कभी सवाल नहीं पूछा जाएगा?

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​इस फैसले के बाद कई लोगों के मन में यह गलतफहमी पैदा हो सकती है कि क्या बिना किसी आय के प्रमाण के भी हर व्यक्ति 100 ग्राम या 500 ग्राम सोना घर में रख सकता है?
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सच यह है:
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CBDT का निर्देश संख्या 1916 मुख्य रूप से जब्ती से छूट (Immunity from Seizure) प्रदान करता है, न कि पूरी तरह से जांच से। इसका मतलब यह है कि यदि आपके घर से तय सीमा के भीतर सोना मिलता है, तो आयकर अधिकारी उसे जब्त कर अपने साथ नहीं ले जा सकते।
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​हालांकि, यदि आपके पास उस सोने को खरीदने की घोषित आय (Declared Income) का कोई जरिया नहीं है और अधिकारी को संदेह होता है, तो वह आपसे उसके स्रोत के बारे में सवाल पूछ सकते हैं। यदि आपके पास विरासत (Inheritance), वसीयत (Will) या उपहार (Gift) का कोई तार्किक आधार है, तो आपको पूरी राहत मिल जाती है।
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​आयकर कार्रवाई से बचने के लिए संभालकर रखें ये 4 दस्तावेज

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​भविष्य में आयकर विभाग की किसी भी पूछताछ या जांच से बचने के लिए आपको अपने पास मौजूद सोने से जुड़े निम्नलिखित दस्तावेज हमेशा सुरक्षित रखने चाहिए:
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    पक्के बिल और इनवॉइस (Purchase Bills): जब भी आप सोना या आभूषण खरीदें, तो हमेशा ज्वैलर से जीएसटी (GST) युक्त पक्का बिल लें और भुगतान बैंक ट्रांसफर या क्रेडिट कार्ड से करने का प्रयास करें।
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    गिफ्ट डीड (Gift Deed): यदि आपको शादी, सालगिरह या बच्चे के जन्म पर रिश्तेदारों या माता-पिता से बड़ा उपहार मिला है, तो एक साधारण गिफ्ट डीड या लिखित पत्र जरूर बनवाकर रखें।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    वसीयत या विरासत के दस्तावेज (Will & Family Settlement): यदि आपको आभूषण पूर्वजों या सास-ससुर से विरासत में मिले हैं, तो पारिवारिक बंटवारे या वसीयत की कॉपी संभालकर रखें।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    अकाउंट्स बुक्स और आईटीआर (ITR Records): यदि आपकी आय अच्छी है और आप नियमित रूप से आईटीआर (ITR) फाइल करते हैं, तो अपनी बैलेंस शीट में आभूषणों की जानकारी का स्पष्ट उल्लेख करें।
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ITAT नागपुर का यह फैसला देश के करोड़ों करदाताओं और स्वर्ण प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी नजीर प्रस्तुत करता है। इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय परंपराओं में उपहार और स्त्रीधन (Stree Dhan) के महत्व को आयकर कानून से अलग करके नहीं देखा जा सकता। घर में सीमित मात्रा में सोना रखना पूरी तरह से लीगल है, बशर्ते आपके पास उसके स्रोत की बुनियादी और तार्किक जानकारी मौजूद हो। अपने वित्तीय रिकॉर्ड्स को दुरुस्त रखकर आप किसी भी आयकर संकट से खुद को बचा सकते हैं।
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​Disclaimer (डिस्क्लेमर):

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यह समाचार रिपोर्ट इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) नागपुर के न्यायिक आदेशों, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देश संख्या 1916 और प्रचलित आयकर नियमों के आधार पर पाठकों की सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए तैयार की गई है। इसे किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष कानूनी या कर सलाह (Tax Advice) न माना जाए। अपने गहनों, आय और टैक्स रिटर्न से जुड़े किसी भी विशिष्ट निर्णय के लिए हमेशा अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या आयकर सलाहकार से परामर्श लें।