खबरीलाल डेस्क
भारत में अपना घर खरीदने का सपना देखने वाले करोड़ों आम नागरिकों और छोटे निवेशकों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार और इनकम टैक्स विभाग द्वारा देश के कर ढांचे को सरल और सुगम बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, आयकर विभाग ने नए इनकम टैक्स नियम (New Income Tax Rules) के तहत एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री से जुड़े नियमों में बड़े और अहम बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।READ ALSO:-मेरठ के सेंट्रल मार्केट पर मंडराया ध्वस्तीकरण का खौफ: छिनने वाली है हजारों की रोजी-रोटी, दहशत से व्यापारियों की मौत; DM से लगाई 'परिवार बचाने' की गुहार
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इस ड्राफ्ट में सबसे प्रमुख सुझाव यह है कि अब 20 लाख रुपये से कम कीमत वाली अचल संपत्ति (Immovable Property) के लेन-देन पर स्थायी खाता संख्या यानी पैन कार्ड (PAN Card) की जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा। अगर सरकार इस प्रस्ताव को अंतिम रूप से मंजूरी दे देती है, तो कम बजट में घर, प्लॉट या कृषि भूमि खरीदने वाले लाखों लोगों के लिए पूरी कागजी प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी आसान और पारदर्शी हो जाएगी। आइए, इस पूरे प्रस्तावित नियम, इसके पीछे के कारणों और आम आदमी से लेकर रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ने वाले इसके दूरगामी प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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वर्तमान नियम क्या हैं और क्या हो रही थी परेशानी?

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आयकर अधिनियम, 1961 के तहत वर्तमान में जो नियम लागू हैं, उनके अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में 10 लाख रुपये से अधिक कीमत की कोई अचल संपत्ति (जैसे कि मकान, फ्लैट, खाली प्लॉट, या व्यावसायिक दुकान) खरीदता या बेचता है, तो प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के समय दोनों पक्षों (खरीदार और विक्रेता) को अपना पैन नंबर (PAN Number) देना अनिवार्य होता है।
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10 लाख रुपये की यह सीमा कई वर्षों पहले तय की गई थी। उस समय 10 लाख रुपये में टियर-2 और टियर-3 शहरों में आसानी से एक अच्छी प्रॉपर्टी मिल जाया करती थी। इस नियम का मूल उद्देश्य रियल एस्टेट सेक्टर में काले धन (Black Money) के प्रवाह को रोकना और बड़े ट्रांजेक्शन पर आयकर विभाग की नजर बनाए रखना था।
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हालांकि, पिछले एक दशक में महंगाई (Inflation) और विकास के कारण पूरे देश में जमीनों और मकानों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। आज के समय में छोटे से छोटे कस्बे में भी एक साधारण प्लॉट या मकान की कीमत 10 लाख रुपये से ऊपर चली जाती है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों के लोग, किसान या वे लोग जिनकी आय कर योग्य (Taxable) सीमा से कम है और जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, उन्हें 10 से 15 लाख रुपये की छोटी प्रॉपर्टी खरीदने में भी भारी कागजी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
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नए इनकम टैक्स नियम में क्या बदलाव प्रस्तावित है?

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इस जमीनी हकीकत और आम जनता की परेशानियों को समझते हुए, प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए इनकम टैक्स नियम के ड्राफ्ट में इस 10 लाख रुपये की अनिवार्य सीमा को दोगुना बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है।
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इस नए प्रस्ताव का सीधा और स्पष्ट मतलब यह है कि:

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    यदि आप कोई भी घर, प्लॉट या जमीन खरीदते हैं जिसकी सरकारी वैल्यू (Circle Rate) और एग्रीमेंट वैल्यू 20 लाख रुपये से कम है, तो आपको सेल डीड (Sale Deed) या रजिस्ट्री के कागजात में पैन कार्ड दर्ज करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होगी।
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    यह नियम खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए समान रूप से लागू होगा।
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    20 लाख रुपये या उससे अधिक की प्रॉपर्टी डील पर पहले की तरह ही पैन कार्ड देना अनिवार्य बना रहेगा।
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उम्मीद की जा रही है कि अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ और इस ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई, तो ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष से देश भर में लागू हो सकते हैं।
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किन लोगों को मिलेगा इस राहत का सबसे बड़ा फायदा?

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यह प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से देश के निम्न-मध्यम वर्ग, छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण आबादी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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1. छोटे शहरों और कस्बों के खरीदार: महानगरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) में भले ही 20 लाख रुपये में कोई प्रॉपर्टी न मिले, लेकिन भारत के टियर-2, टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों में आज भी 12 लाख से 18 लाख रुपये के बीच छोटे प्लॉट या 1BHK घर आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के समय कम कागजी प्रक्रिया (Paperwork) से गुजरना पड़ेगा।
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2. ग्रामीण भारत और किसान वर्ग: गांवों में खेती की जमीन या आवासीय भूखंडों का लेन-देन अक्सर 20 लाख रुपये के दायरे में ही होता है। कई किसानों और ग्रामीणों के पास आज भी पैन कार्ड नहीं होता है क्योंकि उनकी कृषि आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है। जब वे 12-15 लाख की जमीन खरीदते थे, तो उन्हें सिर्फ इसके लिए पैन कार्ड बनवाना पड़ता था या फॉर्म 60 भरना पड़ता था। नए नियम से उन्हें इस झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
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3. कम आय वर्ग (Low Income Group): जो लोग वर्षों की बचत के बाद अपना पहला छोटा आशियाना खरीदते हैं, उनके लिए यह नियम 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) को बढ़ावा देगा।
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गिफ्ट की गई प्रॉपर्टी और जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) पर नए नियम

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इस ड्राफ्ट में केवल सीमा बढ़ाने का ही प्रस्ताव नहीं है, बल्कि सिस्टम में मौजूद कुछ खामियों (Loopholes) को बंद करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कुछ अहम और सख्त बदलावों की भी सिफारिश की गई है।
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वर्तमान नियमों में कुछ ऐसे ग्रे एरिया (Grey areas) थे जिनका फायदा उठाकर लोग टैक्स से बच जाते थे। ड्राफ्ट के अनुसार, अब निम्नलिखित मामलों को भी पैन अनुपालन (PAN Compliance) के कड़े दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है:
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    गिफ्ट की गई प्रॉपर्टी (Gifted Property): अक्सर लोग स्टाम्प ड्यूटी और टैक्स से बचने के लिए महंगी प्रॉपर्टी को रिश्तेदारों या अन्य लोगों को 'गिफ्ट' डीड के जरिए ट्रांसफर कर देते हैं। नए नियम के तहत, यदि गिफ्ट में दी जा रही प्रॉपर्टी की वैल्यू 20 लाख रुपये से अधिक है, तो उस ट्रांसफर में भी पैन कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
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    जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA): जब कोई जमीन का मालिक अपनी जमीन किसी बिल्डर को फ्लैट या हिस्सेदारी के बदले विकसित करने के लिए देता है, तो उसे जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट कहा जाता है। ऐसे सौदे करोड़ों रुपये के होते हैं। नए ड्राफ्ट में यह साफ किया गया है कि यदि JDA के तहत जमीन या फ्लैट के ट्रांसफर की वैल्यू तय सीमा से ज्यादा है, तो ऐसे सभी मामलों में पैन कार्ड अनिवार्य होगा।
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इन सख्तियों का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकार छोटे और आम खरीदारों को तो राहत दे, लेकिन बड़े और जटिल सौदों (Complex Transactions) के माध्यम से होने वाली टैक्स चोरी और काले धन के इस्तेमाल पर अपनी पैनी नजर बनाए रखे।
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रियल एस्टेट सेक्टर और बाजार पर इस फैसले का प्रभाव

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अर्थशास्त्रियों और मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि नए इनकम टैक्स नियम का यह ड्राफ्ट भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) के लिए एक बहुत ही सकारात्मक कदम साबित होगा।
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अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) को मिलेगा बढ़ावा: सरकार का हमेशा से 'सभी के लिए आवास' (Housing for All) पर जोर रहा है। 20 लाख रुपये तक की छूट मिलने से छोटे शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मांग में तेजी देखने को मिल सकती है। बिल्डर्स भी टियर-2 और टियर-3 शहरों में 15 से 20 लाख रुपये की कीमत वाले छोटे घरों का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित होंगे, क्योंकि इसके खरीदारों के लिए अब कागजी कार्रवाई आसान हो जाएगी।
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रजिस्ट्री कार्यालयों में सुगमता: पैन कार्ड न होने या उसमें नाम की स्पेलिंग गलत होने जैसी छोटी-छोटी तकनीकी समस्याओं के कारण अक्सर रजिस्ट्री कार्यालयों (Registrar Offices) में आम लोगों के काम अटक जाते थे। 20 लाख की लिमिट होने से इन दफ्तरों पर बोझ कम होगा और छोटे लेन-देन तेजी से पूरे हो सकेंगे।
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टैक्स एक्सपर्ट्स और विश्लेषकों का क्या कहना है?

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देश के जाने-माने टैक्स एक्सपर्ट्स और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (CAs) ने आयकर विभाग के इस ड्राफ्ट का खुले दिल से स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह बदलाव पूरी तरह से समय की मांग और वर्तमान बाजार की स्थितियों के अनुकूल है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि "10 लाख रुपये की सीमा बहुत पहले तय की गई थी। पिछले 10-15 वर्षों में महंगाई दर (Inflation Rate) और कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (Construction Cost) में भारी इजाफा हुआ है। ऐसे में 10 लाख रुपये की सीमा पूरी तरह से अव्यावहारिक (Impractical) हो चुकी थी। 20 लाख रुपये की नई प्रस्तावित सीमा मौजूदा बाजार स्थितियों के बहुत करीब समझी जा रही है।"
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इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों को देखते हुए भविष्य में मेट्रो शहरों के लिए इस सीमा को 30 से 50 लाख रुपये तक अलग से स्लैब बनाकर परिभाषित किया जाना चाहिए, क्योंकि मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों में 20 लाख रुपये में एक कमरा मिलना भी मुश्किल होता है।
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पैन कार्ड (PAN Card) की प्रॉपर्टी लेन-देन में ऐतिहासिक भूमिका
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इस पूरे विषय को गहराई से समझने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि प्रॉपर्टी के लेन-देन में पैन कार्ड को अनिवार्य क्यों किया गया था। भारत में इनकम टैक्स रूल्स, 1962 के नियम 114B (Rule 114B) के तहत कुछ विशिष्ट उच्च-मूल्य वाले लेन-देन (High-value transactions) के लिए पैन नंबर देना अनिवार्य किया गया है। इसमें बैंक खाता खोलना, 50 हजार से ज्यादा नकद जमा करना, और अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री शामिल है।
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रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से बेनामी संपत्तियों (Benami Properties) और काले धन (Black Money) को खपाने का सबसे बड़ा जरिया माना जाता था। लोग फर्जी नामों से या बिना ट्रैक हुए नकद देकर संपत्तियां खरीद लेते थे। जब सरकार ने 10 लाख रुपये से ऊपर की प्रॉपर्टी पर पैन अनिवार्य किया, तो इससे आयकर विभाग के लिए संपत्ति के असली मालिक की पहचान करना और उसकी आय के स्रोत (Source of Income) का पता लगाना आसान हो गया।
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पैन कार्ड के इस्तेमाल से प्रॉपर्टी का पूरा डेटा सीधे सरकार के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में रिफ्लेक्ट होने लगा। हालांकि, इस शानदार सिस्टम ने बड़े चोरों को तो पकड़ा, लेकिन महंगाई बढ़ने के साथ-साथ यह 10 लाख की छोटी लिमिट आम गरीब आदमी के लिए भी परेशानी का सबब बन गई। यही कारण है कि अब इस सीमा को तर्कसंगत (Rationalize) बनाते हुए 20 लाख किया जा रहा है।
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यह नियम कब से लागू होगा?

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यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि आयकर विभाग द्वारा जारी किया गया यह दस्तावेज अभी केवल एक 'ड्राफ्ट' (Draft Proposal) है। यह अभी कोई अंतिम कानून नहीं बना है। सरकार की काम करने की एक पारदर्शी प्रक्रिया होती है।
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सरकार ने इन नए नियमों को जनता, स्टेकहोल्डर्स, टैक्स प्रोफेशनल्स और रियल एस्टेट संगठनों के सामने 'सार्वजनिक सुझावों और प्रतिक्रिया' (Public Feedback and Consultation) के लिए रखा है। एक तय समय सीमा तक लोग इस ड्राफ्ट पर अपनी आपत्तियां या सुझाव सरकार को भेज सकते हैं।
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इन सभी फीडबैक्स का बारीकी से अध्ययन करने के बाद, वित्त मंत्रालय और सीबीडीटी (CBDT) इसमें आवश्यक संशोधन कर सकते हैं। इसके बाद इसे अंतिम गजट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) के जरिए नोटिफाई किया जाएगा। वित्तीय हलकों में इस बात की प्रबल संभावना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले आगामी आम बजट में इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है और ये नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो सकते हैं।
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घर या जमीन खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

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भले ही नए इनकम टैक्स नियम के तहत 20 लाख तक की प्रॉपर्टी पर पैन कार्ड की अनिवार्यता खत्म होने जा रही हो, लेकिन एक जागरूक नागरिक और खरीदार के रूप में आपको प्रॉपर्टी डील करते समय कुछ बुनियादी बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए:
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    सर्किल रेट (Circle Rate) का ध्यान रखें: प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हमेशा उस क्षेत्र के सरकारी रेट (सर्किल रेट) या उससे अधिक पर ही होनी चाहिए। यदि आप सर्किल रेट से कम पर प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) के तहत आपको और विक्रेता दोनों को भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
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  3. \r\n
    नकद लेन-देन से बचें: आयकर अधिनियम की धारा 269SS के तहत, आप अचल संपत्ति के लेन-देन में 20,000 रुपये या उससे अधिक की नकद राशि (Cash) न तो स्वीकार कर सकते हैं और न ही भुगतान कर सकते हैं। हमेशा बैंक ट्रांसफर, चेक या डिमांड ड्राफ्ट (DD) का ही उपयोग करें। ऐसा न करने पर 100% तक का जुर्माना लग सकता है।
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    टीडीएस (TDS) के नियम: यदि आप 50 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो खरीदार के रूप में यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 1% TDS (सेक्शन 194IA के तहत) काट कर सरकार को जमा करें और विक्रेता को फॉर्म 16B दें।
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    कानूनी जांच (Title Search): प्रॉपर्टी खरीदने से पहले किसी अच्छे वकील से उस जमीन या मकान की कानूनी जांच (Title Clearances) जरूर करवाएं ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके।
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निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि नए इनकम टैक्स नियम के तहत 20 लाख रुपये से कम की प्रॉपर्टी डील पर पैन कार्ड की अनिवार्यता को समाप्त करने का ड्राफ्ट प्रस्ताव सरकार का एक बेहद सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है। यह बदलाव जमीनी हकीकत और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे न केवल छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों के खरीदारों को कागजी उलझनों से भारी राहत मिलेगी, बल्कि निम्न-मध्यम वर्ग के लिए अपना आशियाना खरीदना भी आसान हो जाएगा।
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इसके साथ ही, गिफ्ट डीड और जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) को पैन के सख्त दायरे में लाने का फैसला यह सुनिश्चित करेगा कि इस राहत का दुरुपयोग टैक्स चोरी के लिए न हो सके। कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव अनुपालन (Compliance) को आसान बनाने और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता (Transparency) लाने के बीच एक बेहतरीन संतुलन स्थापित करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कब इस बहुप्रतीक्षित ड्राफ्ट को अंतिम रूप देकर इसे आधिकारिक कानून का रूप देती है, ताकि 1 अप्रैल 2026 से करोड़ों देशवासी इस ऐतिहासिक छूट का लाभ उठा सकें।
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आयकर विभाग ने नए इनकम टैक्स नियम का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें 20 लाख रुपये से कम कीमत वाली प्रॉपर्टी के लेन-देन पर पैन कार्ड (PAN) देने की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में यह सीमा 10 लाख रुपये है। इस बदलाव से मुख्य रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के घर खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, टैक्स चोरी रोकने के लिए गिफ्ट की गई प्रॉपर्टी और जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) को पैन के दायरे में लाने का सख्त प्रावधान भी किया गया है। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की उम्मीद है।