खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरे भारतवर्ष में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है और अब यह अपने सबसे उग्र रूप में नजर आ रहा है। झुलसा देने वाली गर्मी के बाद आसमान से बरस रही यह राहत अब कई राज्यों के लिए आफत का रूप लेती जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार, 6 जुलाई को लेकर एक बेहद ही गंभीर और व्यापक मौसम बुलेटिन (Weather Forecast Bulletin) जारी किया है। मौसम विभाग के राडार और सैटेलाइट इमेजरी से जो संकेत मिल रहे हैं, वे स्पष्ट रूप से बताते हैं कि अगले 10 से 12 घंटे देश के बड़े हिस्से के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।READ ALSO:-आगामी कांवड़ यात्रा-2026 की तैयारियां तेज: श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम यातायात के लिए बिजनौर-हरिद्वार पुलिस की हाई-लेवल समन्वय बैठक संपन्न
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आईएमडी (IMD) की इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 15 प्रमुख राज्यों में अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। इन राज्यों में तेज बारिश, बादलों की भयानक गड़गड़ाहट, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने (Lightning Strike) की अत्यधिक संभावना जताई गई है। हवाओं की गति 40 से लेकर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो कमजोर संरचनाओं और पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संबंधित राज्यों को सतर्क कर दिया है।
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दिल्ली-एनसीआर: आसमान में छाएंगे काले बादल, उमस भरी गर्मी से मिलेगी बड़ी राहत

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम) के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से उमस और चिपचिपी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। लेकिन 6 जुलाई का दिन दिल्लीवालों के लिए मौसम के मोर्चे पर बड़ी राहत लेकर आने वाला है।
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    बारिश का मिजाज: मौसम विभाग के अनुसार, सुबह से ही आसमान में घने बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। दिन के समय कई इलाकों में हल्की से मध्यम झमाझम बारिश होने का अनुमान है। कुछ विशिष्ट पॉकेट्स में तेज गरज-चमक के साथ भारी बारिश का झोंका भी आ सकता है।
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    तापमान और जनजीवन: इस बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। हालांकि, तेज बारिश की स्थिति में दिल्ली की सड़कों पर, विशेषकर अंडरपास और निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) हो सकता है, जिससे पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल से तराई बेल्ट तक मानसून का रौद्र रूप

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देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता चरम पर है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वी यूपी (पूर्वांचल) तक बादलों का डेरा है।
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    चेतावनी वाले जिले: मौसम विभाग ने देवरिया, मऊ, बलिया, गाजीपुर और चंदौली जैसे पूर्वी जिलों में झमाझम बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, तराई क्षेत्रों जैसे बरेली, पीलीभीत, बहराइच और श्रावस्ती में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Downpour) का अलर्ट है।
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    कृषि पर प्रभाव: यह बारिश धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है, लेकिन लगातार बारिश के कारण ग्रामीण अंचलों में कच्चे मकानों के गिरने और जलभराव का खतरा भी मंडरा रहा है। प्रशासन ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है।
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बिहार: वज्रपात (बिजली गिरने) का सबसे बड़ा खतरा, घरों में रहें सुरक्षित

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बिहार में मानसून की बारिश अक्सर आकाशीय बिजली के भयंकर कहर के साथ आती है। 6 जुलाई को लेकर मौसम विभाग (IMD Patna) ने एक दर्जन से अधिक जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया है।
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    प्रभावित क्षेत्र: गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, जहानाबाद, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, बांका, जमुई, लखीसराय और अरवल में मूसलाधार बारिश के साथ तेज आंधी चलने की संभावना है।
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    प्रशासनिक निर्देश: बिहार आपदा प्रबंधन ने विशेष रूप से किसानों और चरवाहों को चेतावनी दी है कि वे बारिश के दौरान खेतों में या पेड़ों के नीचे बिल्कुल न जाएं। राज्य में वज्रपात से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए 'इंद्रवज्र' ऐप के जरिए भी अलर्ट भेजे जा रहे हैं।
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राजस्थान और मध्य प्रदेश: रेगिस्तान में भी मूसलाधार, मालवा में जलभराव के आसार

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इस वर्ष मानसून का पैटर्न थोड़ा अलग है और यह उन क्षेत्रों में भी भारी बारिश दे रहा है, जो आमतौर पर सूखे रहते हैं।
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    राजस्थान का हाल: पश्चिमी राजस्थान के रेतीले और सीमावर्ती जिलों में मौसम पूरी तरह मेहरबान है। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्री गंगानगर में तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यह इन क्षेत्रों के जलस्तर और कृषि के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
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    मध्य प्रदेश का हाल: एमपी के पश्चिमी हिस्से में, विशेषकर मालवा-निमाड़ अंचल में जोरदार बारिश की संभावना है। धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर और बुरहानपुर जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है।
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पहाड़ी राज्य (उत्तराखंड और हिमाचल): भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का मंडराता खौफ

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पहाड़ों पर बारिश का मतलब केवल सुहावना मौसम नहीं, बल्कि कई बार यह जिंदगी और मौत का सवाल बन जाता है। हिमाचल प्रदेश और देवभूमि उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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    खतरे की घंटी: मौसम विभाग ने दोनों राज्यों के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट दिया है। पहाड़ों की मिट्टी ढीली होने के कारण भूस्खलन (Landslides) और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का खतरा अपने चरम पर है।
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    यात्रियों के लिए एडवाइजरी: चार धाम यात्रा पर गए श्रद्धालुओं या हिल स्टेशनों का रुख करने वाले पर्यटकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे मौसम साफ होने तक सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें। रात के समय पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जानलेवा साबित हो सकता है।
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पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी व्यापक बारिश

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इन प्रमुख राज्यों के अलावा, देश के कई अन्य हिस्सों में भी मानसून अपनी पूरी ताकत दिखा रहा है।
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    पश्चिम बंगाल: राज्य के लगभग हर हिस्से में बारिश का अलर्ट है। राजधानी कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्व-पश्चिम बर्दवान, मेदिनीपुर, मालदा, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और जलपाईगुड़ी सहित दर्जनों जिलों में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की जाएगी।
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    महाराष्ट्र: विदर्भ और मराठवाड़ा इलाकों के साथ-साथ कोंकण तट पर भी तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी।
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    अन्य राज्य: हरियाणा, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ गरज-चमक और वर्षा का पूर्वानुमान है।
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IMD की 5 सूत्रीय सख्त इमरजेंसी एडवाइजरी (क्या करें और क्या न करें)

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आगामी 10 घंटों की संवेदनशीलता को देखते हुए, मौसम विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने आम जनता के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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    पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी: तेज हवा (60 kmph) के दौरान पुराने पेड़ों के गिरने और बिजली के तार टूटने का खतरा सर्वाधिक होता है। ऐसे में इनके नीचे शरण लेने की भूल बिल्कुल न करें।
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    पक्के मकानों में लें शरण: यदि आप बाहर हैं और अचानक मौसम बिगड़ता है, तो तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर की तलाश करें। टीन शेड या छप्पर के नीचे खड़े होना खतरनाक हो सकता है।
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  5. \r\n
    इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग रोकें: बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली चमकने के दौरान टीवी, कंप्यूटर, और चार्जर में लगे मोबाइल का उपयोग न करें। मेन स्विच बंद कर देना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    जलभराव वाले क्षेत्रों में वाहन न ले जाएं: कार या बाइक चलाते समय अगर रास्ते में पानी भरा हो, तो जोखिम न लें। अक्सर पानी के नीचे खुले मैनहोल या गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं।
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  9. \r\n
    किसानों के लिए विशेष निर्देश: किसान भाई खराब मौसम में खेत-खलिहान में काम करने से बचें। अपनी मवेशियों (पालतू जानवरों) को भी सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर बांधें।
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  10. \r\n
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मौसम की यह करवट आगामी 10 घंटों तक अपना प्रभाव दिखाएगी। इसलिए बेवजह घरों से बाहर निकलने से बचें, सतर्क रहें और मौसम विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले तात्कालिक अलर्ट्स (Nowcasts) पर लगातार नजर बनाए रखें। आपकी जागरूकता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।