नैनीताल/रामनगर (ब्यूरो रिपोर्ट)। देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) में अब जंगल सफारी का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। अगर आप भी छुट्टियों में कॉर्बेट की हसीन वादियों में बाघों (Tigers) का दीदार करने या सोशल मीडिया के लिए 'रील्स' (Reels) और 'स्टोरी' (Stories) बनाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपको थोड़ा मायूस कर सकती है, लेकिन वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह किसी खुशखबरी से कम नहीं है।READ ALSO:-मेरठ का कपसाड़ कांड: एक मां की चिता, अगवा बेटी का इंतजार और 19 घंटे का वह 'महा-संग्राम' जिसने सिस्टम को हिला दिया
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पार्क प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए सफारी के दौरान पर्यटकों द्वारा मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगा दिया है। अब पर्यटक अपनी जिप्सी में मोबाइल लेकर जंगल के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइंस का पालन करते हुए लिया गया है।
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क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? (The Reason Behind The Ban)
\r\n\r\nकॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित नेशनल पार्क है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, पर्यटन का स्वरूप बदला है और 'इको-टूरिज्म' (Eco-Tourism) की जगह 'सेल्फी-टूरिज्म' ने ले ली है। पार्क प्रशासन और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स ने मोबाइल फोन को जंगल के लिए एक बड़ा खतरा माना है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें हैं:
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1. वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव (Behavioral Changes in Wildlife)
\r\n\r\nअक्सर देखा गया है कि सफारी के दौरान पर्यटक बाघ या हाथी को देखते ही मोबाइल निकालकर शोर मचाने लगते हैं। कई बार उत्साह में मोबाइल से तेज आवाज में म्यूजिक बजाया जाता है या रील बनाने के चक्कर में जानवरों के बहुत करीब जाने की कोशिश की जाती है। मोबाइल की रिंगटोन और कृत्रिम आवाजें जंगल के प्राकृतिक सन्नाटे को भंग करती हैं, जिससे वन्यजीव आक्रामक हो सकते हैं या तनाव (Stress) में आ सकते हैं।
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2. लोकेशन शेयरिंग और भीड़ (Location Sharing & Overcrowding)
\r\n\r\nमोबाइल फोन का सबसे बड़ा दुरुपयोग 'लोकेशन शेयरिंग' के रूप में सामने आया है। जैसे ही किसी एक जिप्सी को बाघ दिखाई देता था, पर्यटक और गाइड तुरंत मोबाइल से दूसरे ड्राइवरों को कॉल या मैसेज करके लोकेशन बता देते थे। इसके परिणामस्वरूप, कुछ ही मिनटों में वहां दर्जनों जिप्सियां इकट्ठा हो जाती थीं। इससे बाघ का रास्ता ब्लॉक हो जाता था और जंगल में 'ट्रैफिक जाम' जैसी स्थिति बन जाती थी, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
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3. फ्लैश और सेल्फी का खतरा (Flash & Selfie Hazard)
\r\n\r\nमोबाइल से फोटो खींचते समय अक्सर पर्यटक अनजाने में फ्लैश लाइट (Flash Light) जला देते हैं। रात की सफारी या कम रोशनी में यह फ्लैश जानवरों की आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है और उन्हें भड़का सकता है। इसके अलावा, सेल्फी लेने के चक्कर में पर्यटक जिप्सी से बाहर लटकने या नीचे उतरने का जोखिम उठाते हैं, जिससे जानलेवा हादसे हो सकते हैं।
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क्या है नया नियम? (What are the New Rules?)
\r\n\r\nकॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) के उप निदेशक राहुल मिश्रा ने नई व्यवस्था की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने जा रहा है।
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- \r\n गेट पर जमा होंगे फोन: पर्यटकों को सफारी जोन (बिजरानी, ढिकाला, झिरना, ढेला आदि) में प्रवेश करने से पहले अपने मोबाइल फोन प्रवेश द्वार (Entry Gate) पर जमा कराने होंगे या अपनी निजी गाड़ी में लॉकर में रखने होंगे।\r\n \r\n
- \r\n चेकिंग अभियान: सफारी गेट पर वन विभाग के कर्मचारी सघन चेकिंग करेंगे। अगर किसी पर्यटक के पास कपड़े या बैग में छिपाया हुआ मोबाइल मिलता है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n DSLR को हरी झंडी: प्रशासन ने फोटोग्राफी के शौकीनों को राहत दी है। अगर आपके पास प्रोफेशनल कैमरा (DSLR या Mirrorless) है, तो आप उसे ले जा सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि प्रोफेशनल कैमरे का इस्तेमाल करने वाले लोग आमतौर पर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के नियमों का पालन करते हैं और शोर नहीं मचाते।\r\n \r\n
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उल्लंघन करने पर दोहरी मार: पर्यटक और ड्राइवर दोनों नपेंगे
\r\n\r\nइस बार प्रशासन ने नियमों को लागू करने के लिए 'सामूहिक जिम्मेदारी' (Collective Responsibility) का फॉर्मूला अपनाया है। अगर जंगल के अंदर किसी पर्यटक के पास मोबाइल पाया गया, तो सजा सिर्फ उसे नहीं मिलेगी, बल्कि उसे ले जाने वाले जिप्सी ड्राइवर और नेचर गाइड को भी भुगतना होगा।
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- \r\n पर्यटक पर जुर्माना: मोबाइल के साथ पकड़े जाने पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और पार्क से तुरंत बाहर निकाला जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n ड्राइवर/गाइड पर एक्शन: चूंकि पर्यटकों को नियमों का पालन कराना गाइड और ड्राइवर की जिम्मेदारी है, इसलिए उल्लंघन होने पर ड्राइवर की जिप्सी का रजिस्ट्रेशन और गाइड का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है।\r\n \r\n
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इस नियम के बाद अब जिप्सी चालक खुद ही पर्यटकों को मोबाइल ले जाने से रोक रहे हैं, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी का सवाल है।
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पर्यटकों के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' (Digital Detox Experience)
\r\n\r\nपार्क प्रशासन इस प्रतिबंध को एक सकारात्मक पहल के रूप में देख रहा है। इसे 'डिजिटल डिटॉक्स' का नाम दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है, "हम चाहते हैं कि पर्यटक जंगल को अपनी आंखों से देखें, न कि 6 इंच की मोबाइल स्क्रीन से। जब आप मोबाइल में उलझे रहते हैं, तो आप जंगल की आवाज़ें, हवा की सरसराहट और पक्षियों की चहचहाहट को मिस कर देते हैं। यह नियम पर्यटकों को प्रकृति से सीधे जोड़ने का एक प्रयास है।"
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जिम कॉर्बेट पार्क: एक नजर में (About Jim Corbett National Park)
\r\n\r\nयह नियम जिन क्षेत्रों में लागू होगा, उनके बारे में जानना भी जरूरी है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी स्थापना 1936 में हुई थी। पहले इसका नाम हैली नेशनल पार्क था।
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- \r\n स्थान: नैनीताल जिला, उत्तराखंड।\r\n \r\n
- \r\n कुल क्षेत्रफल: लगभग 1318 वर्ग किलोमीटर।\r\n \r\n
- \r\n मुख्य आकर्षण: रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, 600 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां।\r\n \r\n
- \r\n सफारी जोन:\r\n\r\n
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- \r\n ढिकाला (Dhikala): सबसे प्रसिद्ध और बड़ा जोन, जहां नाइट स्टे की सुविधा है।\r\n \r\n
- \r\n बिजरानी (Bijrani): बाघ दिखने की सबसे ज्यादा संभावना वाला जोन।\r\n \r\n
- \r\n झिरना (Jhirna): साल भर खुला रहने वाला जोन।\r\n \r\n
- \r\n ढेला (Dhela): नया इको-टूरिज्म जोन।\r\n \r\n
- \r\n दुर्गादेवी (Durgadevi): पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग।\r\n \r\n
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इन सभी जोन्स में सफारी के दौरान अब मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
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पर्यटकों के मन में उठते सवाल (FAQs for Tourists)
\r\n\r\nQ: अगर इमरजेंसी हुई तो क्या करेंगे?
\r\n\r\nA: हर सफारी जिप्सी के साथ एक प्रशिक्षित नेचर गाइड होता है। इसके अलावा वन विभाग की पेट्रोलिंग गाड़ियां वायरलेस सेट (Wireless Sets) से लैस होती हैं। किसी भी आपात स्थिति में गाइड तुरंत वन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। पर्यटकों को अपने पास फोन रखने की आवश्यकता नहीं है।
\r\n\r\nQ: क्या हम GoPro या एक्शन कैमरा ले जा सकते हैं?
\r\n\r\nA: अभी तक के निर्देशों के अनुसार, केवल स्टिल फोटोग्राफी (DSLR/Mirrorless) पर स्पष्ट छूट है। एक्शन कैमरों और वीडियो कैमरों पर स्थिति जोन के हिसाब से भिन्न हो सकती है, इसलिए बुकिंग के समय या गेट पर पूछताछ करना बेहतर है।
\r\n\r\nQ: क्या हम अपनी यादें संजो नहीं पाएंगे?
\r\n\r\nA: आप डीएसएलआर कैमरा ले जा सकते हैं। अगर आपके पास कैमरा नहीं है, तो आप जंगल को अपनी यादों में संजोएं। कई बार बिना कैमरे की सफारी ज्यादा यादगार होती है क्योंकि आपका पूरा ध्यान प्रकृति पर होता है।
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विशेषज्ञों की राय
\r\n\r\nवाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट और फोटोग्राफर्स ने इस कदम का स्वागत किया है। वरिष्ठ वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सुमित वर्मा कहते हैं, "यह एक बहुत जरूरी कदम था। रणथंभौर और काजीरंगा जैसे अन्य पार्कों में भी मोबाइल के कारण समस्याएं देखी गई हैं। मोबाइल फोन जंगल के अनुशासन को तोड़ते हैं। जब पर्यटक रील बनाने के बजाय जंगल को महसूस करेंगे, तो उन्हें असली रोमांच का पता चलेगा।"
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वहीं, स्थानीय होटल एसोसिएशन के कुछ लोगों का मानना है कि इससे युवाओं में थोड़ी निराशा हो सकती है जो सोशल मीडिया के लिए ही ट्रैवल करते हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह जिम कॉर्बेट की ब्रांड वैल्यू को बढ़ाएगा।
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जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में मोबाइल बैन का फैसला वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह हमें याद दिलाता है कि हम जंगल में 'मेहमान' हैं, और हमें मेजबान (वन्यजीवों) के नियमों का पालन करना चाहिए। 2026 तक सरकार का लक्ष्य वी2वी (V2V) टेक्नोलॉजी से सड़कों को सुरक्षित बनाना है, वहीं जंगलों में 'नो-नेटवर्क, नो-मोबाइल' पॉलिसी से जानवरों को सुरक्षित बनाने की कवायद है।
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अगर आप अगली बार कॉर्बेट जाएं, तो अपना फोन होटल के कमरे में छोड़ें और अपनी आंखों व दिल के शटर को खुला रखें। यकीन मानिए, जंगल आपको वो दिखाएगा जो कोई मोबाइल कैमरा कैप्चर नहीं कर सकता।
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नोट: जिम कॉर्बेट जाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट से लेटेस्ट गाइडलाइंस जरूर चेक करें, क्योंकि नियम समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं।