हरिद्वार (विशेष आध्यात्मिक रिपोर्ट): देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार और मोक्षदायिनी मां गंगा के तट पर बसे हरिद्वार शहर ने एक बार फिर आध्यात्मिक इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अपना नाम गहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया है। भारतीय सनातन परंपरा, प्राचीन विज्ञान और आस्था के एक अद्भुत संगम का साक्षी बनते हुए हरिद्वार के श्री साई शिव गंगा धाम में विश्व के सबसे विशाल पारद (Mercury) शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक अनुष्ठान संपन्न हुआ है।READ ALSO:-हापुड़ वालों की चमकेगी किस्मत! गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 5000 हेक्टेयर में बनेंगे 4 औद्योगिक गलियारे और 3 हाई-टेक टाउनशिप, निवेश का नया हब बनेगा 'मिनी एनसीआर'
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5211 किलोग्राम वजनी इस अलौकिक शिवलिंग की स्थापना केवल एक धार्मिक आयोजन या कर्मकांड मात्र नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, साधना, गूढ़ पारद विज्ञान और मानव कल्याण की एक विराट परिकल्पना का साकार रूप है। तीन दिनों तक चले इस भव्य और दिव्य समारोह में वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज, चहुंओर संतों का आशीर्वाद और हजारों श्रद्धालुओं की भक्ति ने पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक ऊर्जा के 'महाकुंभ' में तब्दील कर दिया।
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1. 5211 किलो का अलौकिक पारद शिवलिंग: प्राचीन विज्ञान का चमत्कार
\r\n\r\nसनातन धर्म और आयुर्वेद (विशेषकर रस शास्त्र) में 'पारद' (पारे) को भगवान शिव का ही स्वरूप माना गया है। तरल अवस्था में रहने वाले पारे को ठोस रूप देना और उसे शिवलिंग के आकार में ढालना एक अत्यंत जटिल और रहस्यमयी प्रक्रिया है।
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हरिद्वार में स्थापित इस पारद शिवलिंग का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का एक अनूठा उदाहरण है।
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- \r\n निर्माण सामग्री: इस विशालकाय शिवलिंग के निर्माण में शुद्ध पारे (Mercury) के साथ-साथ चांदी, स्वर्ण (Gold) और 108 प्रकार की अत्यंत दुर्लभ और पवित्र जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र: यह 5211 किलो का शिवलिंग केवल पूजा-अर्चना का केंद्र भर नहीं है। भारतीय शास्त्रों के अनुसार, सिद्ध पारद शिवलिंग ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) को आकर्षित करता है। इसके सान्निध्य में मात्र कुछ पल बैठने से ध्यान, आत्मचिंतन और चेतना जागरण की अवस्था प्राप्त होती है और मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का तीव्र संचार होता है।\r\n \r\n
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2. ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी का एक दशक का कठोर तप
\r\n\r\nइस अद्भुत और अकल्पनीय पारद शिवलिंग के निर्माण के पीछे किसी एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी की लगभग एक दशक (10 वर्ष) लंबी कठोर तपस्या, निरंतर अनुसंधान और पारद विज्ञान (Science of Alchemy) के उनके गहन अध्ययन की कहानी छिपी है।
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रघुनाथ गुरुजी ने प्राचीन शास्त्रों में छिपे पारे को बांधने (संस्कारित करने) के सूत्रों का बारीकी से अध्ययन किया। उनका स्पष्ट मानना है कि वर्तमान के तनावपूर्ण और भौतिकतावादी युग में मानवता को शांति की आवश्यकता है। यह पारद शिवलिंग केवल एक मूर्ति नहीं है, बल्कि एक ऐसा 'ऊर्जा ट्रांसमीटर' है, जो अपने आसपास के पूरे वातावरण को शुद्ध और स्पंदित करता है। गुरुजी के इसी संकल्प ने आज हरिद्वार की धरती पर इस विशालकाय शिवलिंग के रूप में आकार लिया है।
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यह संपूर्ण महा-अनुष्ठान गुरु गोरक्षनाथ महाराज की महान नाथ परंपरा, गुजरात के गिरनार पर्वत के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के पावन आशीर्वाद और भारत के प्रख्यात वैज्ञानिक व पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. विजय भटकर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
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3. तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह: संतों और गणमान्य हस्तियों का महासंगम
\r\n\r\nपारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा का यह अनुष्ठान तीन दिनों तक पूरे विधि-विधान के साथ चला। देश के कोने-कोने से आए 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, साधकों और प्रबुद्ध जनों ने इस आयोजन में भाग लेकर धर्मलाभ उठाया। गंगा के तट पर लगातार तीन दिनों तक वेद मंत्रों की ध्वनि, रुद्राभिषेक और हवन के धुएं ने पूरे हरिद्वार के वातावरण को शिवमय कर दिया।
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इस महाआयोजन की गरिमा और दिव्यता तब और बढ़ गई जब देश के मूर्धन्य संतों और धर्माचार्यों ने वहां पधारकर अपना आशीर्वाद प्रदान किया। समारोह में उपस्थित प्रमुख आध्यात्मिक विभूतियों में शामिल थे:
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- \r\n जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज\r\n \r\n
- \r\n श्री सुधांशु जी महाराज\r\n \r\n
- \r\n जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज\r\n \r\n
- \r\n स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज\r\n \r\n
- \r\n स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज\r\n \r\n
- \r\n वात्सल्य ग्राम की संस्थापिका साध्वी ऋतंभरा जी\r\n \r\n
- \r\n आचार्य मनीष जी\r\n \r\n
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संतों के अतिरिक्त राजनीतिक और सामाजिक जगत से भी कई बड़ी हस्तियों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद राघव चड्ढा, श्री गंगा सभा (हरिद्वार) के अध्यक्ष नितिन गौतम सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण आयाम प्रदान किया।
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4. उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल का अद्वितीय समर्पण
\r\n\r\nइतने विशाल और भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारना कोई सामान्य कार्य नहीं था। इस विराट आयोजन की सफलता के पीछे प्रसिद्ध उद्योगपति एवं जाने-माने समाजसेवी राजीव बंसल का समर्पण, अथक परिश्रम और सक्रिय योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
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पूरे आयोजन की रूपरेखा तैयार करने से लेकर, देश भर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन (भंडारे) की व्यवस्था और संतों के सत्कार के समन्वय में राजीव बंसल ने एक प्रमुख स्तंभ की भूमिका निभाई। इस अभूतपूर्व सफलता पर भावुक होते हुए राजीव बंसल ने कहा:
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\r\n\r\n\r\n"यह सब केवल और केवल श्री साईं बाबा की असीम कृपा और भगवान शिव के आशीर्वाद का परिणाम है। इतने बड़े और दिव्य कार्य का हिस्सा बनना, और संतों व श्रद्धालुओं की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। यह आयोजन मेरे लिए आत्मिक शांति का एक बड़ा अवसर लेकर आया है।"\r\n
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5. आध्यात्मिकता से आगे: समाज सेवा और सशक्तिकरण का महाभियान
\r\n\r\nश्री साई शिव गंगा धाम और ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी का व्यक्तित्व केवल ध्यान, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है। वे भारतीय समाज की जमीनी हकीकत और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए भी लगातार काम कर रहे हैं। उनके कार्य यह साबित करते हैं कि सच्ची आध्यात्मिकता समाज सेवा के बिना अधूरी है।
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ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी कई नवाचार आधारित सामाजिक अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं:
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- \r\n दिव्यांग आत्मनिर्भरता: गुरुजी 'दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' (DICCI) के माध्यम से दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n महिला किसान सशक्तिकरण: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को कृषि में आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें नई तकनीक सिखाने की दिशा में उनके प्रकल्प निरंतर कार्य कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति को ईश्वर का रूप मानकर गुरुजी पर्यावरण की रक्षा और वृहद वृक्षारोपण अभियानों से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।\r\n \r\n
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उनकी यह सामाजिक प्रतिबद्धता इस बात का प्रमाण है कि पारद शिवलिंग की स्थापना का उद्देश्य केवल एक मंदिर बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जो आर्थिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त हो।
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"ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण"
\r\n\r\nसमारोह के अंतिम दिन जब पूर्णाहुति हुई और संतों ने अपना अंतिम उद्बोधन दिया, तो पूरे प्रांगण में एक ही मंत्र गूंज रहा था— "ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण।"
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हरिद्वार के श्री साई शिव गंगा धाम में उपस्थित हर एक श्रद्धालु ने इसे मात्र एक धार्मिक कर्मकांड के रूप में नहीं, बल्कि मानवता, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल के रूप में अनुभव किया।
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आज जब दुनिया युद्ध, तनाव और मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही है, तब हरिद्वार के तट पर स्थापित यह 5211 किलो का विशाल पारद शिवलिंग एक प्रकाश स्तंभ (Lighthouse) की तरह कार्य करेगा। आने वाले कई वर्षों, दशकों और सदियों तक हरिद्वार का यह ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह भारत की आध्यात्मिक शक्ति, वैज्ञानिक प्राचीनता और सकारात्मक चेतना के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। यह स्थान अब न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के आध्यात्मिक साधकों के लिए शोध, ध्यान और ऊर्जा प्राप्ति का एक नया महातीर्थ बन चुका है।