देश की राजधानी दिल्ली से देवभूमि उत्तराखंड का सफर हमेशा से ही आस्था, शांति और रोमांच का केंद्र रहा है। लेकिन, वीकेंड पर नेशनल हाईवे (NH-334) पर लगने वाला भारी जाम, 6 से 7 घंटे की थका देने वाली ड्राइविंग और टोल प्लाजा की लंबी लाइनें अक्सर इस सफर के मजे को किरकिरा कर देती हैं। लेकिन अब, दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही 'नमो भारत' (Namo Bharat RRTS) ट्रेन की सफलता के बाद, इस कॉरिडोर को आगे बढ़ाते हुए मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश तक ले जाने की जो योजना तैयार की जा रही है, वह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल कर रख देगी।READ ALSO:-मौसम का खतरनाक यू-टर्न: उत्तर भारत में अचानक 10 डिग्री तक चढ़ेगा पारा, पूर्वोत्तर में भारी बारिश; IMD ने जारी किया बड़ा अलर्ट
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यह सिर्फ एक ट्रेन परियोजना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' बनने जा रहा है, जो व्यापार, रियल एस्टेट, पर्यटन और जीवनशैली में ऐसे क्रांतिकारी बदलाव लाएगा जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर नमो भारत का यह विस्तार क्यों एक 'गेम चेंजर' साबित होने वाला है।
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दिल्ली से ऋषिकेश: 6 घंटे का थकाऊ सफर अब मात्र 2.5 से 3 घंटे में
\r\n\r\nवर्तमान में अगर आप दिल्ली से ऋषिकेश के लिए अपनी कार से निकलते हैं, तो आपको कम से कम 5 से 6 घंटे का समय लगता है। त्योहारों या वीकेंड पर यह समय 8 घंटे तक भी पहुंच जाता है। लेकिन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली नमो भारत रैपिड रेल इस पूरी दूरी और समय के गणित को ध्वस्त कर देगी।
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जब यह कॉरिडोर पूरी तरह से ऋषिकेश तक बनकर तैयार हो जाएगा, तब दिल्ली के आनंद विहार या सराय काले खां से बैठकर कोई भी यात्री वातानुकूलित और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस इस ट्रेन के जरिए मात्र 2.5 से 3 घंटे में सीधे ऋषिकेश पहुंच सकेगा। सफर के समय में यह 50% से अधिक की कटौती एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाएगी। जो ऋषिकेश अभी तक 'प्लान्ड वेकेशन' (पहले से तय की गई छुट्टियां) का हिस्सा होता था, वह अब दिल्ली-NCR वालों के लिए एक साधारण 'डे-ट्रिप' या 'क्विक वीकेंड गेटअवे' में तब्दील हो जाएगा। आप सुबह दिल्ली से निकलकर गंगा स्नान कर सकते हैं, पहाड़ों की ताजी हवा ले सकते हैं और शाम को वापस अपने घर लौट सकते हैं।
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होटलों का युग होगा सीमित, होमस्टे और रेंटल विला का आएगा स्वर्णिम काल
\r\n\r\nनमो भारत के इस कनेक्टिविटी विस्तार का सबसे सीधा और बड़ा असर पर्यटन के तौर-तरीकों पर पड़ेगा। हरिद्वार और ऋषिकेश में दशकों से होटलों का दबदबा रहा है, लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदलने वाला है। जब सफर इतना आसान और सुलभ हो जाएगा, तो लोग सिर्फ एक रात रुकने के बजाय लंबे समय तक या बार-बार वहां जाना पसंद करेंगे।
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- \r\n रेंटल विला की बढ़ती मांग: दिल्ली-NCR की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर लोग अब शांति और प्राइवेसी की तलाश में हैं। कनेक्टिविटी बेहतर होने से लोग ऋषिकेश के शांत इलाकों में पूरे-पूरे रेंटल विला (Rental Villas) बुक करना ज्यादा पसंद करेंगे, जहां वे अपने परिवार या दोस्तों के साथ एक घर जैसा माहौल पा सकें।\r\n \r\n
- \r\n होमस्टे (Homestay) कल्चर में महा-विस्फोट: एयरबीएनबी (Airbnb) और ओयो (Oyo) जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए होमस्टे का चलन पहले से ही बढ़ रहा है। 3 घंटे की दूरी होने पर 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) करने वाले पेशेवर लोग ऋषिकेश के होमस्टे में महीनों तक रहकर 'वर्केशन' (Workation) करना पसंद करेंगे। होटलों के बंद कमरों के बजाय लोग पहाड़ों की तलहटी में बने स्थानीय घरों में रहना ज्यादा सुखद मानेंगे।\r\n \r\n
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पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि नमो भारत के शुरू होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश में पारंपरिक होटलों के मुकाबले होमस्टे और सर्विस अपार्टमेंट की मांग में 200 से 300 प्रतिशत तक का जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।
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प्रॉपर्टी मार्केट में भूचाल: दिल्ली-NCR वालों का नया 'वीकेंड होम'
\r\n\r\nइस कॉरिडोर का सबसे दिलचस्प पहलू रियल एस्टेट (Real Estate) सेक्टर में होने वाला बदलाव है। अब तक दिल्ली-नोएडा और गाजियाबाद के निवेशक जब 'सेकंड होम' या 'वीकेंड होम' की तलाश करते थे, तो उनकी नजरें जेवर एयरपोर्ट के आसपास, यमुना एक्सप्रेसवे, या फिर अधिकतम मेरठ और मुजफ्फरनगर के बाहरी इलाकों तक सीमित रह जाती थीं।
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- \r\n मेरठ-मुजफ्फरनगर के बजाय सीधे हरिद्वार-ऋषिकेश: लेकिन, नमो भारत की महा-रफ्तार इस निवेश की दिशा को पूरी तरह से मोड़ देगी। जब दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी मात्र 3 घंटे की रह जाएगी, तो एक निवेशक मेरठ की भीड़भाड़ में अपना वीकेंड होम बनाने के बजाय सीधे पवित्र गंगा के किनारे, हरिद्वार या ऋषिकेश की शांत वादियों में अपना घर बनाना क्यों नहीं पसंद करेगा?\r\n \r\n
- \r\n वेलनेस और स्पिरिचुअल हाउसिंग: ऋषिकेश को 'योग कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड' कहा जाता है। स्वास्थ्य और अध्यात्म के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण, दिल्ली के अमीर और उच्च-मध्यम वर्ग के लोग यहां अपने रिटायरमेंट होम या हॉलिडे होम में जमकर निवेश करेंगे। बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स भी इस ट्रेंड को भांप चुके हैं और हरिद्वार-ऋषिकेश हाईवे के आसपास लग्जरी टाउनशिप, कॉटेज और विला प्रोजेक्ट्स के लिए जमीनें तलाशने लगे हैं।\r\n \r\n
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कनेक्टिविटी से बढ़कर, यह है एक महा 'इकोनॉमिक कॉरिडोर'
\r\n\r\nमेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश RRTS कॉरिडोर को सिर्फ एक यात्री ट्रेन के नजरिए से देखना एक बहुत बड़ी भूल होगी। यह एक पूर्ण विकसित 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' (Economic Corridor) के रूप में कार्य करेगा, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्थाओं को आपस में मजबूती से जोड़ देगा।
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- \r\n मुजफ्फरनगर और रुड़की का औद्योगिक विकास: इस रूट पर पड़ने वाले मुजफ्फरनगर और रुड़की जैसे शहरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। मुजफ्फरनगर पहले से ही अपनी कृषि मंडी और उद्योगों के लिए जाना जाता है। RRTS कॉरिडोर के साथ-साथ यहां वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए एमएसएमई (MSME) क्लस्टर विकसित होंगे।\r\n \r\n
- \r\n रुड़की में एजुकेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम: रुड़की, जो अपने IIT और शिक्षण संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है, दिल्ली से सीधे और तेज जुड़ने के कारण स्टार्टअप्स और नए उद्योगों के लिए एक नया हब बन सकता है।\r\n \r\n
- \r\n रोजगार के नए अवसर: स्टेशन के आसपास के इलाकों (Transit Oriented Development - TOD) का वाणिज्यिक विकास होगा। नए शॉपिंग मॉल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, अस्पताल और शिक्षण संस्थान खुलेंगे, जिससे पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के युवाओं के लिए हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।\r\n \r\n
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पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित यात्रा
\r\n\r\nNH-334 पर हर दिन गुजरने वाले हजारों पेट्रोल-डीजल वाहनों के कारण जो प्रदूषण होता है, उसे कम करने में यह नमो भारत ट्रेन एक 'संजीवनी' का काम करेगी। पूरी तरह से बिजली पर चलने वाली यह रैपिड रेल न केवल कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी कमी लाएगी। वीकेंड पर हरिद्वार-ऋषिकेश जाने वाले लाखों कांवड़ यात्रियों और पर्यटकों के लिए यह एक सुरक्षित, साफ-सुथरा और तनावमुक्त विकल्प साबित होगा।
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भविष्य की एक सुनहरी तस्वीर
\r\n\r\nकुल मिलाकर कहा जाए तो, दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का ऋषिकेश तक जाना सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह एक नए युग की शुरुआत है। यह उन तमाम भौगोलिक और मानसिक दूरियों को मिटा देगा जो दिल्ली और पहाड़ों के बीच थीं।
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जहां एक ओर पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर बंपर मुनाफे की ओर बढ़ेंगे, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक को एक विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव मिलेगा। रेंटल विला में सुकून भरे वीकेंड की चाहत हो, या फिर गंगा किनारे अपने घर का सपना, नमो भारत ट्रेन की रफ्तार इन सभी सपनों को बहुत जल्द हकीकत में बदलने वाली है। यह तय है कि जिस दिन यह कॉरिडोर पूरी तरह से शुरू होगा, उस दिन से हरिद्वार और ऋषिकेश सिर्फ तीर्थस्थल नहीं रहेंगे, बल्कि वे दिल्ली-NCR के सबसे प्रीमियम और सुलभ 'एक्सटेंडेड नेबरहुड' (विस्तारित पड़ोस) बन जाएंगे।