ऋषिकेश/देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन ने अभी से बड़ी और सख्त तैयारियों का शंखनाद कर दिया है। साल 2026 की यात्रा सीजन में आने वाले श्रद्धालुओं को एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए अब मंदिर परिसरों (Temple Premises) के भीतर मोबाइल फोन और कैमरों की एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।READ ALSO:-UP बोर्ड का ऐतिहासिक 'गेम चेंजर' कदम: अब रटने से नहीं, हुनर से मिलेगी पहचान; 2026 से कक्षा 9 और 11 में व्यावसायिक शिक्षा हुई अनिवार्य
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यह फैसला पिछले कुछ सालों में मंदिरों के भीतर बढ़ती रील बनाने की होड़ और उससे दर्शन व्यवस्था में उत्पन्न हो रही बाधाओं को देखते हुए लिया गया है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इन नए नियमों की घोषणा की।
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क्यों लिया गया 'No Mobile' का फैसला?
\r\n\r\nपिछले यात्रा सीजन (2025) में चार धामों में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ी थी। आंकड़ों के मुताबिक, 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। हालांकि, इस दौरान यह देखा गया कि कई श्रद्धालु दर्शन कतारों और मंदिर परिसर के अंदर वीडियो बनाने, रील शूट करने और फोटोग्राफी में व्यस्त रहते हैं।
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गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए:
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- \r\n दर्शन में बाधा: मोबाइल के इस्तेमाल से कतारें धीमी हो जाती हैं और पीछे खड़े श्रद्धालुओं को दर्शन में देरी होती है।\r\n \r\n
- \r\n पवित्रता और मर्यादा: चार धाम एक पवित्र तीर्थ है, पर्यटन स्थल नहीं। मंदिर के भीतर ध्यान और प्रार्थना की जगह सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन ने ले ली थी, जिससे तीर्थ की गरिमा प्रभावित हो रही थी।\r\n \r\n
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कमिश्नर ने स्पष्ट किया, "चार धाम यात्रा राज्य का एक पवित्र तीर्थ है, जहां भक्तजन श्रद्धा के साथ आते हैं। दर्शन के दौरान इन उपकरणों की अनुमति से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरे पूरी तरह वर्जित कर दिए गए हैं।"
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श्रद्धालुओं के लिए क्या होगी व्यवस्था?
\r\n\r\nप्रशासन जानता है कि मोबाइल आज की जरूरत है, इसलिए प्रतिबंध के साथ-साथ सुविधा का भी ध्यान रखा गया है।
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- \r\n लॉकर और क्लोक रूम: बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और संबंधित प्रशासनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन और कैमरे सुरक्षित रखने के लिए मंदिर परिसरों के बाहर अलग से उचित व्यवस्था (क्लॉक रूम या लॉकर) सुनिश्चित करें।\r\n \r\n
- \r\n फोटो कहां खींच सकेंगे?: प्रतिबंध केवल 'मंदिर परिसर' के भीतर लागू है। दर्शन करके मंदिर से बाहर निकलने के बाद श्रद्धालु परिसर की पृष्ठभूमि (Background) में फोटो और वीडियो ले सकते हैं। यानी यादों को कैद करने पर रोक नहीं है, बस पूजा में विघ्न डालने पर रोक है।\r\n \r\n
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मिशन मोड में प्रशासन: 7 दिन में टेंडर, 1 महीने में सड़कें चकाचक
\r\n\r\nचार धाम यात्रा 2026 को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन 'फास्ट ट्रैक मोड' में आ गया है। गढ़वाल आयुक्त ने जिलाधिकारियों (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तैयारियों का रोडमैप तैयार किया।
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बैठक के प्रमुख निर्देश:
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- \r\n 7 दिन का अल्टीमेटम: चार धाम यात्रा से जुड़े सभी आवश्यक कार्यों के टेंडर प्रक्रिया को स्क्रूटनी करते हुए अगले एक सप्ताह (07 दिन) के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n सड़कों की मरम्मत: पिछले साल अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन के कारण यात्रा मार्गों पर कई जगह मलबा आ गया था और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। एनएच (National Highway), लोक निर्माण विभाग (PWD) और बीआरओ (BRO) को निर्देश दिया गया है कि एक माह के भीतर मलबे का निस्तारण कर सड़कों को गड्ढा मुक्त और सुचारू किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n बजट की कमी नहीं: आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जिलों की मांग के अनुरूप सरकार शीघ्र ही बजट उपलब्ध कराएगी, ताकि काम में कोई रुकावट न आए।\r\n \r\n
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सुविधाओं पर विशेष फोकस
\r\n\r\nआयुक्त ने जोर देकर कहा कि इस वर्ष यात्रा को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक सुगम और सरल बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया है:
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- \r\n पार्किंग क्षमता: धामों और यात्रा पड़ावों पर वाहनों के दबाव को देखते हुए पार्किंग क्षमता बढ़ाई जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n पैदल मार्ग: केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे धामों के पैदल मार्गों का सुधारीकरण किया जाएगा ताकि यात्रियों को चलने में कठिनाई न हो।\r\n \r\n
- \r\n स्वास्थ्य सुविधाएं: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर काम होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।\r\n \r\n
- \r\n हेली सेवाएं: हेलीकॉप्टर सेवाओं की अग्रिम तैयारियां और टिकट बुकिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।\r\n \r\n
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यात्रा कब से शुरू होगी? (Expected Dates)
\r\n\r\nयद्यपि चारों धामों के कपाट खुलने की आधिकारिक तिथियां अभी घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार:
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- \r\n गंगोत्री और यमुनोत्री: कपाट अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर खुलते हैं।\r\n \r\n
- \r\n केदारनाथ धाम: कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के दिन तय की जाती है।\r\n \r\n
- \r\n बद्रीनाथ धाम: कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी के अवसर पर राजमहल में तय होती है।\r\n \r\n
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गढ़वाल आयुक्त ने संकेत दिए हैं कि इस वर्ष यात्रा अप्रैल माह से प्रारंभ होने की प्रबल संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को समय से पहले तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
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उत्तराखंड सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि चार धाम यात्रा में अब 'आस्था' को 'मनोरंजन' पर तरजीह दी जाएगी। मोबाइल बैन का फैसला कठोर लग सकता है, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की पवित्रता के लिए यह समय की मांग थी। जो श्रद्धालु 2026 में चार धाम आने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इन नए नियमों के लिए मानसिक रूप से तैयार होकर आना होगा।