उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से अक्सर पंचायत के ऐसे फरमान सामने आते रहते हैं, जो न केवल हैरान करते हैं, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन जाते हैं। मेरठ और बिजनौर से सटे आसपास के जिलों में ऐसी घटनाएं अक्सर सुर्ख़ियों में रहती हैं। ऐसा ही एक ताजा और बेहद अजब-गजब मामला रामपुर जिले के दढ़ियाल चौकी क्षेत्र से सामने आया है। खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस पूरी घटना की तह तक लेकर जाएंगे, जहां बेटे की चाहत, दो शादियां, आर्थिक तंगी, पंचायत का अजीबोगरीब न्याय और अंततः एक पत्नी के फरार होने की पूरी फिल्मी कहानी छिपी है।
\r\n\r\nविवाद की जड़: बेटे की चाहत और दो शादियों का भंवर
\r\n\r\nइस पूरी कहानी की शुरुआत आज से 14 साल पहले हुई थी। रामपुर के रहने वाले एक युवक की शादी उत्तराखंड की निवासी एक युवती के साथ हुई थी। शुरुआती सालों में सब कुछ ठीक चल रहा था। इस दौरान दंपती को दो बेटियां हुईं। भारतीय समाज के एक बड़े हिस्से में आज भी बेटे की चाहत को लेकर एक गहरा रूढ़िवादी नजरिया मौजूद है। इसी चाहत के चलते इस शख्स के मन में भी बेटे की लालसा जाग उठी।
\r\n\r\nशादी के करीब 10 साल बीत जाने के बाद, युवक ने अपनी पहली पत्नी को बिना बताए या उसकी बिना स्पष्ट सहमति के एक दूसरी महिला से शादी रचा ली। जानकारी के मुताबिक, पहली पत्नी ने उस समय अपने परिवार और बेटियों के भविष्य को देखते हुए इस दूसरी शादी का कोई खास विरोध नहीं किया। उसने हालात से समझौता कर लिया। लेकिन विडंबना देखिए, जिस बेटे की चाहत में शख्स ने दूसरा घर बसाया था, वह मुराद दूसरी पत्नी से भी पूरी नहीं हुई। दूसरी पत्नी के साथ 4 साल रहने के दौरान उसे भी दो बेटियां ही पैदा हुईं। अब उस शख्स के पास कुल चार बेटियां और दो पत्नियां थीं।
\r\n\r\nपक्षपात, उपेक्षा और आर्थिक तंगी से गहराया विवाद
\r\n\r\nदूसरी शादी के कुछ समय बाद ही परिवार में असल कलह की शुरुआत हो गई। पहली पत्नी का आरोप है कि पति धीरे-धीरे पूरी तरह से दूसरी पत्नी के प्रभाव में आ गया और उसी के साथ रहने लगा। सबसे बड़ी समस्या तब खड़ी हुई जब पति ने पहली पत्नी और उसकी दोनों बेटियों का आर्थिक खर्च उठाना पूरी तरह से बंद कर दिया।
\r\n\r\nमहंगाई के इस दौर में बिना किसी आर्थिक सहारे के अपने और अपनी बच्चियों का पेट पालना पहली पत्नी के लिए पहाड़ जैसा हो गया। जब उसने अपने हक और बेटियों के भरण-पोषण के लिए आवाज उठाई, तो घर में रोज-रोज के झगड़े शुरू हो गए। आर्थिक तंगी, पति की उपेक्षा और सौतन के साथ रहने की खीझ ने इस पारिवारिक विवाद को सड़क पर ला दिया। बात इतनी बढ़ गई कि घर की चारदीवारी से निकलकर यह मसला समाज के बीच पहुंच गया।
\r\n\r\nपंचायत की एंट्री और '3-3 दिन' का अनोखा फॉर्मूला
\r\n\r\nजब रोज-रोज के झगड़ों से कोई समाधान नहीं निकला, तो एक सप्ताह पहले दढ़ियाल इलाके में गांव के संभ्रांत लोगों और बिरादरी की एक पंचायत बुलाई गई। पंचायत में दोनों पत्नियों के पक्ष और पति को आमने-सामने बिठाया गया। घंटों तक चली बहस और पंचायत के पंचों के विचार-विमर्श के बाद एक ऐसा फैसला सुनाया गया, जिसने सबको हैरान कर दिया।
\r\n\r\nपंचायत ने दोनों पत्नियों को आर्थिक और भावनात्मक सुरक्षा देने के इरादे से पति का ही बंटवारा कर दिया। पंचायत का फरमान यह था:
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- \r\n पति सप्ताह के पहले 3 दिन अपनी पहली पत्नी और उसकी बेटियों के साथ रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n अगले 3 दिन वह अपनी दूसरी (छोटी) पत्नी और उसकी बेटियों के साथ बिताएगा।\r\n \r\n
- \r\n सप्ताह का 7वां दिन (रविवार) पति के लिए 'फ्री डे' यानी विशेषाधिकार वाला दिन होगा। उस दिन वह अपनी मर्जी से किसी भी पत्नी के पास रहने के लिए स्वतंत्र होगा।\r\n \r\n
हैरानी की बात यह रही कि भरी पंचायत में पति और उसकी दोनों पत्नियों ने इस 'टाइम-शेयरिंग' समझौते पर अपनी रजामंदी दे दी। ऐसा लगा जैसे इस जटिल पारिवारिक समस्या का एक बेहद आसान और शांतिपूर्ण समाधान निकल आया हो।
\r\n\r\nएक हफ्ते में ही हवा हुआ फैसला, छोटी बीवी कर गई कांड
\r\n\r\nसमझौते के बाद लोग मान बैठे थे कि अब इस परिवार में शांति लौट आएगी। 3-3 दिन का रूटीन शुरू भी हो गया था, लेकिन यह शांति एक तूफान से पहले की खामोशी साबित हुई। पंचायत के फैसले को अभी बमुश्किल सात दिन ही गुजरे थे कि रविवार को इस कहानी में एक नया और चौंकाने वाला ट्विस्ट आ गया।
\r\n\r\nछोटी पत्नी अचानक घर से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई। उसने जाते समय अपनी दो बेटियों में से छोटी बेटी को तो अपने साथ ले लिया, लेकिन अपनी बड़ी बेटी को घर पर ही छोड़ दिया। जब काफी देर तक वह नजर नहीं आई, तो परिवार में हड़कंप मच गया। पति ने बदहवासी में अपनी दूसरी पत्नी की तलाश शुरू कर दी। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और संभावित ठिकानों पर पूछताछ की गई, लेकिन छोटी पत्नी और मासूम बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। वह पूरी तरह से रहस्यमयी ढंग से गायब हो चुकी थी।
\r\n\r\nपुलिस का रुख: शिकायत का है इंतजार
\r\n\r\nइस मामले ने पूरे दढ़ियाल चौकी क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। हर चौक-चौराहे पर बस इसी अजब-गजब पंचायत और पत्नी के भागने की चर्चा हो रही है। जब यह मामला पुलिस के संज्ञान में आया, तो उन्होंने भी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कदम बढ़ाने की बात कही है।
\r\n\r\nदढ़ियाल पुलिस चौकी के प्रभारी (इंचार्ज) ब्रजेश कुमार जैसवाल ने इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि, "हमें मौखिक रूप से इस घटना की जानकारी मिली है, लेकिन फिलहाल पति या किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायत (तहरीर) नहीं दी गई है। बिना किसी औपचारिक शिकायत के पुलिस अपनी तरफ से कोई मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती। यदि पति या परिजनों की तरफ से महिला के गुमशुदा होने की कोई लिखित तहरीर आती है, तो हम तुरंत मामला दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे और महिला की तलाश शुरू कर दी जाएगी।"
\r\n\r\nखोखले साबित होते हैं ऐसे सामाजिक समझौते
\r\n\r\nरामपुर का यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि किस तरह रूढ़िवादी सोच (बेटे की लालसा) इंसान को जटिल परिस्थितियों में धकेल देती है। इसके अलावा, यह घटना इस बात की भी तस्दीक करती है कि भावनाओं और कानूनी अधिकारों से जुड़े संवेदनशील पारिवारिक मामलों का समाधान केवल पंचायत के फरमानों या 'टाइम-शेयरिंग' फॉर्मूले से नहीं किया जा सकता।
\r\n\r\nअब देखना यह होगा कि पति पुलिस में शिकायत दर्ज कराता है या फिर छोटी पत्नी खुद ही वापस लौटती है। फिलहाल, घर में छोड़ी गई बच्चियों के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है, जो इस पूरे ड्रामे की सबसे बड़ी और निर्दोष भुक्तभोगी हैं। खबरीलाल की टीम इस मामले से जुड़े हर नए अपडेट पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय और राज्य स्तर की ऐसी ही प्रामाणिक व विस्तृत खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।