खबरीलाल डेस्क
सावन का पावन महीना अपने पूरे चरम पर है और देश भर की सड़कें 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंज रही हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले लाखों कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। लेकिन इस वर्ष की कांवड़ यात्रा-2026 में कुछ ऐसा देखने को मिल रहा है, जो न केवल चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि समाज में एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत भी दे रहा है। इस्लाम की कुछ कट्टरपंथी कुरीतियों का शिकार हुए और खुद को 'एक्स-मुस्लिम' (Ex-Muslim) बताने वाले कई लोग इस बार पूरे भक्ति-भाव के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम तीन तलाक और हलाला की पीड़िता अनीसा बानो, संभल की तमन्ना मलिक और गाजियाबाद के चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक का है। ये सभी फतवों और धमकियों की परवाह किए बिना हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद की ओर बढ़ रहे हैं।READ ALSO:-बिजनौर में राशन कार्ड धारकों के लिए बड़ी खुशखबरी: 18 अगस्त तक बंटेगा फ्री राशन, जानिए प्रति यूनिट अनाज का पूरा गणित
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अनीसा बानो का दर्द: तीन तलाक से लेकर हलाला के खौफनाक दबाव तक

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कांवड़ लेकर लौट रहीं अनीसा बानो की कहानी किसी को भी झकझोर कर रख सकती है। यह कहानी केवल एक महिला के उत्पीड़न की नहीं, बल्कि एक व्यवस्था द्वारा दिए गए गहरे घावों की है। अनीसा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनका निकाह 19 मई 2012 को राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना निवासी इरफान राव के साथ हुआ था। उनकी गृहस्थी में दो बच्चे हैं—एक 12 साल की बेटी और एक सात साल का बेटा।
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शादी के शुरुआती कुछ साल तो ठीक रहे, लेकिन उसके बाद ससुराल में विवाद और प्रताड़ना का एक अंतहीन दौर शुरू हो गया। बात इतनी बिगड़ गई कि दिसंबर 2024 में एक पारिवारिक विवाद के दौरान उनके पति ने अमानवीय क्रूरता दिखाते हुए उन्हें 'तीन तलाक' देकर घर से बेदखल कर दिया। अनीसा के लिए असली मानसिक प्रताड़ना तब शुरू हुई, जब उन पर अपने ही ससुर के साथ 'हलाला' (एक विवादित प्रथा जिसमें तलाकशुदा महिला को दोबारा पति के पास जाने के लिए किसी अन्य पुरुष से विवाह कर शारीरिक संबंध बनाने होते हैं) करने का घिनौना दबाव बनाया गया।
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इस मुश्किल और अंधकारमय दौर में अनीसा ने हार नहीं मानी। उन्हें इंसाफ के लिए एक लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अनीसा ने बेबाकी से कहा, "मेरे साथ जो कुछ भी अमानवीय व्यवहार हुआ, वह केवल इसलिए हुआ क्योंकि मैं मुस्लिम थी। यहाँ के बड़े-बड़े मौलाना अपनी दाढ़ी बढ़ाकर घूमते हैं, लेकिन महिलाओं को इंसाफ दिलाने की बात कोई नहीं करता। जब मैं टूट चुकी थी, तब मेरे हिंदू भाइयों ने मुझे इंसाफ दिलाने के लिए मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी।"
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'भोलेनाथ का भक्त किसी फतवे से नहीं डरता'

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अनीसा का कहना है कि इस्लाम में रहकर उन्होंने बहुत कुछ सहन किया है और अब उनकी आस्था पूरी तरह से भगवान भोलेनाथ में है। गले में भगवा पटका और कांधे पर कांवड़ उठाए अनीसा के चेहरे पर अब कोई खौफ नहीं है। कट्टरपंथियों द्वारा जारी किए जाने वाले फतवों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, "ऐसे फतवे जारी होते रहते हैं। मुझे कांवड़ यात्रा में शामिल होने से कोई डर नहीं लगता। जो शिव का भक्त हो जाता है, वह दुनिया में किसी से नहीं डरता।"
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संभल की तमन्ना मलिक की बेबाकी: सनातन धर्म में है महिलाओं का सम्मान

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अनीसा के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं संभल की तमन्ना मलिक। तमन्ना ने अपने हिंदू पति अमन त्यागी के साथ इस कठिन कांवड़ यात्रा का संकल्प लिया है। तमन्ना शुरुआत से ही महिलाओं के अधिकारों को लेकर मुखर रही हैं। उन्होंने इस्लाम में महिलाओं की स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए और सनातन धर्म को महिलाओं को असल सम्मान देने वाला धर्म बताया।
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 गाजियाबाद की अनीसा और संभल की तमन्ना कांवड़ लेकर मुजफ्फरनगर पहुंचीं। दोनों बुर्के में हैं।

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हाल ही में मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ियों को लेकर एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने हिंसा, नशे और हुड़दंग का आरोप लगाते हुए उन्हें शिवभक्त की जगह 'आतंकवादी' तक कह डाला था। तमन्ना ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना को आड़े हाथों लिया। उन्होंने मौलाना पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि महादेव के सच्चे भक्त किसी की बयानबाजी से न तो विचलित होते हैं और न ही किसी से डरते हैं।
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यूट्यूबर सलीम वास्तिक: मौत के मुंह से निकलकर शिव की शरण में

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इस विशेष कांवड़ जत्थे में गाजियाबाद निवासी और खुद को खुलकर 'एक्स-मुस्लिम' कहने वाले चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक भी शामिल हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले सलीम लगभग 20 साल पहले गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में आकर बस गए थे। शुरुआत में वे कंस्ट्रक्शन (निर्माण) का काम करते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी रुचि धार्मिक बहसों और तार्किक विश्लेषण में बढ़ने लगी।
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बाद में उन्होंने इस्लाम की कुरीतियों, मदरसों की शिक्षा व्यवस्था, तीन तलाक और हलाला जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर वीडियो बनाने शुरू किए। उनका यूट्यूब चैनल 'सलीम वास्तिक 0007' काफी लोकप्रिय हुआ। जून 2026 में तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद उनके कई नए वीडियो सामने आए, जिनमें उन्होंने मुस्लिम समाज को रूढ़िवादिता छोड़कर आधुनिक शिक्षा और तरक्की की ओर बढ़ने का कड़ा संदेश दिया था। अपने इन्हीं विचारों के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार कट्टरपंथियों के भारी विरोध और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ा।
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फरवरी 2026 का वह खौफनाक और जानलेवा हमला

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सलीम वास्तिक के लिए उनके विचार व्यक्त करना आसान नहीं रहा है; इसके लिए उन्हें लगभग अपनी जान गंवानी पड़ी थी। 27 फरवरी 2026 का दिन उनके जीवन का सबसे भयानक दिन था। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दिन सलीम अपने ऑफिस में बैठे थे, तभी बिना नंबर प्लेट की एक बाइक पर सवार होकर कुछ नकाबपोश हमलावर वहां पहुंचे।
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हमलावरों ने पूरी योजना के साथ सलीम पर चाकुओं से ताबड़तोड़ कई वार किए और उनका गला रेतने की खौफनाक कोशिश की। हमलावर उन्हें खून से लथपथ और मरणासन्न हालत में छोड़कर मौके से फरार हो गए थे। परिजनों ने उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें दिल्ली के जीटीबी (GTB) अस्पताल रेफर किया गया। सलीम के शरीर पर चाकू के अनगिनत वार थे और वे जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए करीब एक महीने तक अस्पताल के बिस्तर पर रहे।
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इस जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने सघन जांच करते हुए दो सगे भाइयों को मुख्य आरोपी बनाया था। हालांकि, सलीम के खिलाफ भी एक आपराधिक मामले में उम्रकैद की सजा से जुड़े कुछ दावे इंटरनेट पर सामने आए हैं, लेकिन पुलिस या न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड से इस स्थिति की पूर्ण पुष्टि होना अभी बाकी है।
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आस्था का नया रूप और निडरता का संदेश

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अनीसा बानो, तमन्ना मलिक और सलीम वास्तिक का हरिद्वार से कांवड़ लेकर आना महज एक धार्मिक यात्रा नहीं है। यह उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो धर्म के नाम पर महिलाओं का शोषण करते हैं या वैचारिक स्वतंत्रता को हथियारों के बल पर दबाने की कोशिश करते हैं। इन सभी का एक स्वर में यह कहना कि "हम किसी से नहीं डरते," भारत की उस सनातनी परंपरा को पुष्ट करता है जो सबको स्वीकार करने और भयमुक्त जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करती है। पुलिस प्रशासन ने भी इन विशिष्ट कांवड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर कड़ी निगरानी रखी हुई है।