खबरीलाल डेस्क
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश): दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के प्रमुख औद्योगिक शहर गाजियाबाद से बुधवार को एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। यहां के भीड़भाड़ वाले बुलंदशहर इंडस्ट्रियल एरिया (Bulandshahr Industrial Area) में स्थित एक केमिकल बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल और भयंकर थी कि फैक्ट्री के अंदर रखे केमिकल से भरे ड्रम एक-एक कर तेज धमाकों के साथ फटने लगे। आसमान में काले और जहरीले धुएं का इतना विशाल गुबार उठा कि वह घटनास्थल से 3 किलोमीटर दूर से ही साफ नजर आ रहा था।READ ALSO:-बिजनौर में खौफनाक रहस्य: 'बेटी आईसीयू में है' कहकर पूरा ससुराल हुआ फरार, मायके वालों का कांपता आरोप- "पिंकी की हत्या कर लाश ठिकाने लगा दी!"
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गनीमत यह रही कि इस भयंकर अग्निकांड में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। दमकल विभाग की त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई के चलते एक बहुत बड़ी औद्योगिक त्रासदी होने से टल गई। आइए इस पूरे अग्निकांड की ग्राउंड रिपोर्ट और बचाव अभियान की बारीकियों को विस्तार से समझते हैं।
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कैसे भड़की आग: एक छोटी सी चूक और विकराल हो गई लपटें प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा बुधवार शाम के वक्त हुआ। उस समय फैक्ट्री के अंदर कुल 11 कर्मचारी अपने दैनिक काम में जुटे हुए थे। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री परिसर के अंदर ज्वलनशील सॉल्वेंट (Solvent) और अन्य खतरनाक रसायनों का भारी स्टॉक मौजूद था।
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कर्मचारियों और अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की शुरुआत उस वक्त हुई जब एक बड़े ड्रम से दूसरे ड्रम में केमिकल ट्रांसफर किया जा रहा था। केमिकल ट्रांसफर की प्रक्रिया अक्सर बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि इस दौरान 'स्टेटिक एनर्जी' (Static Energy) या किसी भी छोटी सी चिंगारी से तुरंत आग भड़कने का खतरा रहता है। इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक एक तेज चिंगारी उठी और देखते ही देखते केमिकल ने आग पकड़ ली। जब तक कर्मचारी कुछ समझ पाते या अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल कर पाते, आग ने पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया।
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मौके पर पहुंचे फायर ब्रिगेड के कर्मचारी आग बुझाने में जुटे हैं।

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बम जैसे फटे केमिकल के ड्रम, मची भारी अफरा-तफरी आग जैसे-जैसे फैल रही थी, फैक्ट्री के अंदर रखा केमिकल का स्टॉक उबलने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह मंजर किसी हॉलीवुड की डिजास्टर फिल्म जैसा था। गर्मी और दबाव बढ़ने के कारण केमिकल से भरे सॉल्वेंट के ड्रम एक-एक करके तेज धमाकों के साथ फटने लगे।
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इन धमाकों की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी दहशत में आ गए। पूरी इंडस्ट्रियल बेल्ट में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे। धमाकों के कारण आग की लपटें कई मीटर ऊंचाई तक उठ रही थीं।
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3 किलोमीटर दूर से दिखा खौफनाक मंजर, फ्लाईओवर पर लगा जाम गाजियाबाद के बुलंदशहर इंडस्ट्रियल एरिया के पास से ही मुख्य फ्लाईओवर गुजरता है। आग का धुआं इतना घना और काला था कि यह 3 किलोमीटर दूर से ही आसमान में छा गया था। जब फ्लाईओवर से गुजर रहे वाहन चालकों ने आग की इन खौफनाक लपटों और धुएं के गुबार को देखा, तो कई लोगों ने अपनी गाड़ियां रोक लीं।
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आज के डिजिटल युग में, दर्जनों लोग अपने मोबाइल फोन निकालकर इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का वीडियो बनाने लगे। सड़क पर राहगीरों के रुकने और घटना को देखने की उत्सुकता के कारण फ्लाईओवर और आसपास की मुख्य सड़कों पर कुछ देर के लिए यातायात धीमा हो गया और जाम की स्थिति बन गई।
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दमकल विभाग का मेगा ऑपरेशन: 12 गाड़ियां और 3 शहरों की फोर्स आग की भयावहता की सूचना मिलते ही गाजियाबाद फायर विभाग तुरंत हरकत में आ गया। गाजियाबाद के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) राहुल पाल ने इस बचाव अभियान की कमान संभाली।
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केमिकल फैक्ट्री में आग लगने के बाद केमिकल से भरे ड्रम फट गए।

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CFO राहुल पाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, "शाम ठीक 4:02 बजे फायर विभाग के कंट्रोल रूम को बुलंदशहर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगने की इमरजेंसी सूचना मिली थी। मामले की संवेदनशीलता (केमिकल फायर) को देखते हुए बिना एक भी पल गंवाए, तुरंत घंटाघर कोतवाली फायर स्टेशन से 5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गईं।"
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लेकिन जब दमकल की पहली टीम मौके पर पहुंची, तो आग का रौद्र रूप देखकर उन्हें अतिरिक्त कुमुक की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद गाजियाबाद के वैशाली और मोदीनगर फायर स्टेशनों के साथ-साथ पड़ोसी शहर नोएडा (Noida) से भी दमकल की अतिरिक्त गाड़ियां मंगवाई गईं। कुल मिलाकर, 12 फायर टेंडर्स ने मिलकर आग बुझाने के इस विशाल ऑपरेशन को अंजाम दिया।
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पानी नहीं, 'फोम' ने किया कमाल: आग बुझाने की वैज्ञानिक रणनीति केमिकल की आग सामान्य आग से बिल्कुल अलग होती है। पानी डालने से केमिकल (विशेषकर तेल और सॉल्वेंट बेस) फैल सकता है और आग और ज्यादा भड़क सकती है। इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम ने 'वाटर ब्राउजर' (Water Bowsers) के साथ-साथ भारी मात्रा में 'फोम टैंकर' (Foam Tankers) का इस्तेमाल किया।
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केमिकल पर फोम (झाग) का छिड़काव करने से आग को ऑक्सीजन मिलना बंद हो गई। दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर चारों तरफ से फैक्ट्री को घेरा और लगातार फोम और पानी की बौछार करते रहे। करीब 1 घंटे की बेहद कड़ी और थका देने वाली मशक्कत के बाद आखिरकार फायर ब्रिगेड इस भयंकर आग पर पूरी तरह से काबू पाने में सफल रही।
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घटनाक्रम की टाइमलाइन (एक नज़र में)

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समय
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घटनाक्रम का विवरण
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शाम 4:00 बजे के आसपास
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ड्रमों में केमिकल ट्रांसफर करते वक्त भड़की आग।
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शाम 4:02 बजे
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गाजियाबाद फायर ब्रिगेड कंट्रोल रूम को मिली पहली सूचना।
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शाम 4:10 बजे
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घंटाघर कोतवाली से 5 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, रेस्क्यू शुरू।
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शाम 4:25 बजे
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स्थिति की गंभीरता देख नोएडा, वैशाली और मोदीनगर से 7 और गाड़ियां बुलाई गईं।
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शाम 5:15 बजे
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करीब एक घंटे के फोम और वाटर ऑपरेशन के बाद आग पर पाया गया नियंत्रण।
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देर शाम तक
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कूलिंग का काम (Cooling Process) जारी रहा ताकि आग दोबारा न भड़के।
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सबसे बड़ी राहत: 11 कर्मचारियों की बची जान इस पूरी खौफनाक घटना में सबसे बड़ी और राहत भरी खबर यह रही कि किसी भी इंसान की जान नहीं गई। घटना के वक्त फैक्ट्री के अंदर जो 11 कर्मचारी मौजूद थे, आग लगते ही उन्होंने सूझबूझ का परिचय दिया और समय रहते सुरक्षित रूप से फैक्ट्री से बाहर निकल आए। यदि कोई कर्मचारी अंदर फंस जाता या जहरीले धुएं की चपेट में आ जाता, तो यह एक बड़ी औद्योगिक त्रासदी बन सकती थी। आग बुझने के बाद दमकल कर्मियों ने काफी देर तक फैक्ट्री में 'कूलिंग' (Cooling) का काम किया, ताकि ड्रमों और मलबे में छिपी कोई भी चिंगारी दोबारा आग न भड़का सके।
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औद्योगिक सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर उठते सवाल आग भले ही बुझ गई हो, लेकिन इसने दिल्ली-एनसीआर के इंडस्ट्रियल एरिया में 'फैक्ट्री सेफ्टी नियमों' (Industrial Safety Norms) की कड़ाई से पालन होने पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दमकल विभाग अब इस बात की गहन जांच कर रहा है कि:
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    क्या फैक्ट्री के पास फायर विभाग की वैध 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मौजूद थी?
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    क्या फैक्ट्री के अंदर केमिकल ट्रांसफर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था?
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    क्या परिसर में आग बुझाने के पर्याप्त और काम करने योग्य उपकरण (Fire Hydrant System) मौजूद थे?
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फिलहाल, अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रसायनों के साथ थोड़ी सी भी लापरवाही एक पूरे इलाके के लिए तबाही का कारण बन सकती है। प्रशासन को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान चलाने की आवश्यकता है।