खबरीलाल डेस्क
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले में बुधवार का दिन एक बड़े हादसे का गवाह बना। गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र के सिकन्दरपुर इलाके में स्थित अशोक वाटिका, गरिमा गार्डन (Garima Garden) में उस वक्त भारी अफरातफरी मच गई, जब वहां मौजूद एक अगरबत्ती और केमिकल बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई।READ ALSO:-मेरठ की सड़कों पर आधी रात का खौफ: 'बचाओ-बचाओ' चीखती रही लड़की, 3 KM तक हुआ पीछा... जानिए किडनैपिंग की इस थ्रिलर कहानी का असली सच
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देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और फैक्ट्री से उठने वाले धुएं के काले गुबार ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दूर से ही आसमान में काला धुआं देखा जा सकता था। गनीमत यह रही कि समय रहते दमकल विभाग (Fire Brigade) ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लिया, अन्यथा एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था।
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आइए, इस भीषण अग्निकांड के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
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बुधवार दोपहर का वो खौफनाक मंजर: जब अचानक भड़कीं लपटें

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जानकारी के अनुसार, गरिमा गार्डन के इस घनी आबादी वाले इलाके में यह फैक्ट्री पिछले काफी समय से संचालित हो रही थी। बुधवार दोपहर का वक्त था और हमेशा की तरह फैक्ट्री के अंदर मजदूर अपने काम में लगे हुए थे। कोई मशीनों पर काम कर रहा था, तो कोई पैकिंग में व्यस्त था। तभी फैक्ट्री के एक हिस्से में अचानक आग की चिंगारी उठी।
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मजदूर जब तक कुछ समझ पाते या आग बुझाने के प्राथमिक उपकरण तलाशते, तब तक आग ने पूरी फैक्ट्री को अपनी आगोश में ले लिया। आग लगते ही अंदर काम कर रहे मजदूरों में चीख-पुकार मच गई। अपनी जान को खतरे में देख मजदूर सारा काम छोड़कर बदहवास हालत में बाहर की तरफ भागे। 'आग-आग' की आवाजें सुनकर आसपास के स्थानीय लोग भी अपने घरों से बाहर निकल आए।
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केमिकल और ज्वलनशील पदार्थों ने आग में डाला 'घी' का काम

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इस आग के इतनी तेजी से फैलने के पीछे का सबसे बड़ा कारण फैक्ट्री के अंदर मौजूद कच्चा माल था। स्थानीय लोगों और प्रशासन के अनुसार, इस फैक्ट्री में मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजों का निर्माण होता था:
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    मच्छर मारने वाली अगरबत्ती (Mosquito Repellent Agarbatti)
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    कॉकरोच और कीड़े मारने वाला स्प्रे (Cockroach Killer Sprays)
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    अन्य जहरीले और ज्वलनशील रसायन (Highly Flammable Chemicals)
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चूंकि इन उत्पादों को बनाने के लिए अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल्स, सॉल्वेंट्स और गैस का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए जैसे ही आग ने इन केमिकल के ड्रमों और डिब्बों को अपनी चपेट में लिया, वहां छोटे-छोटे धमाके होने लगे और आग बेकाबू हो गई। केमिकल की वजह से आग ने चंद मिनटों में ही पूरी इमारत को स्वाहा करना शुरू कर दिया।
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दम घोंटू धुआं और स्थानीय लोगों की परेशानी

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फैक्ट्री में सिर्फ आग ही नहीं लगी, बल्कि वहां जल रहे रसायनों के कारण एक बेहद जहरीला और काला धुआं पैदा हुआ। यह धुआं इतना घना था कि गरिमा गार्डन और अशोक वाटिका के आसपास के इलाकों में आसमान काला पड़ गया।
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    सांस लेने में तकलीफ: केमिकल युक्त धुएं के कारण आसपास रहने वाले छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में भारी परेशानी (Breathing Issues) का सामना करना पड़ा।
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    आंखों में जलन: कई लोगों ने शिकायत की कि इस जहरीले धुएं की वजह से उनकी आंखों में तेज जलन हो रही थी और विजिबिलिटी (Visibility) बिल्कुल कम हो गई थी।
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    फैलने का डर: यह इलाका रिहायशी और कमर्शियल का मिला-जुला क्षेत्र है। ऐसे में स्थानीय लोगों को सबसे बड़ा डर यह सता रहा था कि अगर आग की लपटें बगल के मकानों या अन्य कारखानों तक पहुंच गईं, तो पूरी कॉलोनी तबाह हो सकती है।
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फायर ब्रिगेड का 'ऑपरेशन रेस्क्यू': 1 घंटे की कड़ी मशक्कत

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आग लगने की सूचना तुरंत स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम और दमकल विभाग (Fire Department) को दी गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए दमकल विभाग की एक टीम तुरंत सायरन बजाती हुई घटनास्थल की ओर रवाना हो गई।
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बचाव अभियान का घटनाक्रम:

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    शुरुआती संघर्ष: जब दमकल की पहली गाड़ी मौके पर पहुंची, तो टीम ने देखा कि आग का दायरा बहुत बड़ा है। केमिकल के कारण पानी का असर कम हो रहा था।
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    बैकअप की मांग: लीडिंग फायरमैन ने तुरंत कंट्रोल रूम को वायरलेस पर संदेश भेजा और आग की भयानकता को देखते हुए फायर स्टेशन से दमकल की दो अतिरिक्त गाड़ियां (Fire Tenders) और फोम टेंडर (Foam Tender) मंगाए गए।
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    चारों तरफ से घेराबंदी: दमकल कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए फैक्ट्री को चारों तरफ से घेर लिया। एक टीम ने आसपास के घरों को खाली कराया और दूसरी टीम ने हाई-प्रेशर पाइप से पानी और केमिकल फोम का छिड़काव शुरू किया।
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    एक घंटे बाद मिली सफलता: दमकल कर्मियों की लगभग 1 घंटे की कड़ी मेहनत और सूझबूझ के बाद इस खतरनाक आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। आग बुझने के बाद कूलिंग (Cooling) का काम शुरू किया गया ताकि अंदर सुलग रही चिंगारी फिर से न भड़क उठे।
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लाखों का माल जलकर खाक, मालिक हुआ फरार

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इस अग्निकांड में किसी भी प्रकार की जनहानि (Casualty) की कोई खबर नहीं है, जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है। समय रहते मजदूरों के बाहर निकल जाने से एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, आर्थिक रूप से इस घटना में भारी नुकसान हुआ है।
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    फैक्ट्री के अंदर रखा लाखों रुपये का तैयार माल (मच्छर मारने की अगरबत्ती और स्प्रे के डिब्बे) पूरी तरह जलकर राख हो गया है।
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    कच्चा माल, केमिकल के ड्रम, मशीनें और फैक्ट्री का शेड बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।
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    सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आग लगने के तुरंत बाद, जिम्मेदारी लेने के बजाय फैक्ट्री में मौजूद प्रबंधन के लोग और फैक्ट्री का मालिक मौके से फरार (Absconding) हो गए।
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पुलिस और फायर विभाग की जांच शुरू: उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

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आग तो बुझ गई है, लेकिन अपने पीछे कई सुलगते हुए सवाल छोड़ गई है। थाना टीला मोड़ (Tila Mor Police Station) की पुलिस और दमकल विभाग अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं।
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जांच के मुख्य बिंदु:

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    आग का कारण: फिलहाल आग लगने का स्पष्ट कारण पता नहीं चल सका है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) या किसी केमिकल रिएक्शन की आशंका जताई जा रही है।
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    अवैध संचालन: सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रिहायशी इलाके (Residential Area) के इतने करीब इस खतरनाक केमिकल और ज्वलनशील पदार्थों की फैक्ट्री को चलाने की अनुमति (NOC) थी?
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    सुरक्षा मानकों की अनदेखी: क्या फैक्ट्री के अंदर आग बुझाने के पर्याप्त उपकरण (Fire Extinguishers) मौजूद थे? क्या मजदूरों को ऐसी किसी आपात स्थिति से निपटने की कोई ट्रेनिंग दी गई थी?
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पुलिस अब फरार फैक्ट्री मालिक की सरगर्मी से तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मालिक की गिरफ्तारी और दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह फैक्ट्री वैध रूप से चल रही थी या नहीं। यदि इसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई, तो मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (Legal Action) की जाएगी।
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गाजियाबाद के गरिमा गार्डन की यह घटना एक बार फिर से इस बात की चेतावनी देती है कि रिहायशी इलाकों के बीच चल रही अवैध या असुरक्षित फैक्ट्रियां किसी 'टाइम बम' से कम नहीं हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे कारखानों का समय-समय पर फायर ऑडिट (Fire Audit) करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि आम जनता की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।