गाजियाबाद (Ghaziabad), 24 मार्च 2026: प्यार, धोखा, और फिर बेइंतहा नफरत... गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी (Tronica City) स्थित खुशहाल पार्क इलाके में घटी यह वारदात किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। एक हंसता-खेलता परिवार, 7 बच्चे और लकड़ी का काम कर मेहनत-मजदूरी से घर चलाने वाला एक पति। बाहर से सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन इस परिवार की नींव में 'अवैध संबंधों' (Extramarital Affairs) की ऐसी दीमक लग चुकी थी, जिसने पूरे घर को श्मशान में तब्दील कर दिया।READ ALSO:-मेरठ शर्मसार: टीपीनगर में कलयुगी 'दादा' की हैवानियत; 4 साल की मासूम को टॉफी का लालच देकर बनाया हवस का शिकार, इलाके में भारी तनाव
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सोमवार रात करीब 12 बजे जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब खुशहाल पार्क के एक नए बने मकान में मौत का खूनी खेल खेला जा रहा था। पति राशिद (38) ने अपनी 36 वर्षीय पत्नी शबनम और 32 वर्षीय फहीम (पत्नी का प्रेमी और राशिद का पूर्व सहकर्मी) की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी। इस डबल मर्डर (Double Murder) ने पूरे गाजियाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। यह वारदात समाज में टूटते पारिवारिक रिश्तों और 'क्राइम ऑफ पैशन' का एक बेहद डरावना उदाहरण है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nरात्रि मे 12:40 बजे डायल 112 पर सूचना आई थी कि थाना ट्रोनिका सिटी अंतर्गत बुद्ध बाजार नामक मोहल्ले में एक झगड़ा हुआ है, जिसमें दो लोग घायल हुए हैं । इस सूचना पर थाना ट्रोनिका सिटी पुलिस मौके पर पहुँची, तो राशिद नामक व्यक्ति के मकान में शबनम नामक महिला जिसकी उम्र लगभग 36 वर्ष है… pic.twitter.com/VLrLun0rkR
\r\n— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) March 24, 2026
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कहानी के मुख्य किरदार: कौन थे राशिद, शबनम और फहीम?
\r\n\r\nइस खौफनाक वारदात की गहराई को समझने के लिए इसके तीनों मुख्य किरदारों की पृष्ठभूमि को समझना बेहद जरूरी है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सालों के विश्वासघात का खूनी अंजाम है।
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- \r\n राशिद (38 वर्ष) - आरोपी पति: राशिद पेशे से एक बढ़ई (कारपेंटर) है और लकड़ी का काम करता है। वह दिन-रात मेहनत करके अपने 7 बच्चों का पेट पाल रहा था। हाल ही में उसने खुशहाल पार्क इलाके में अपना एक नया मकान भी बनवाया था, जो उसकी मेहनत का प्रतीक था। लेकिन अपनी पत्नी की बेवफाई ने उसे एक खूंखार कातिल बना दिया।\r\n \r\n
- \r\n शबनम (36 वर्ष) - मृतक पत्नी: शबनम राशिद की पत्नी थी और 7 बच्चों की मां थी। इतनी बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी होने के बावजूद, वह अपने पति के ही सहकर्मी और दोस्त फहीम के प्यार में पड़ गई। दो साल तक उसने इस रिश्ते को अपने पति से छिपाए रखा।\r\n \r\n
- \r\n फहीम (32 वर्ष) - मृतक प्रेमी: फहीम लोनी इलाके में अल्फालह मस्जिद के पास रहता था। उसका घर राशिद के घर से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर था। फहीम और राशिद एक साथ लकड़ी का काम करते थे। इसी काम के सिलसिले में उसका राशिद के घर आना-जाना शुरू हुआ, जो बाद में शबनम के साथ उसके 'अवैध प्रेम प्रसंग' में बदल गया।\r\n \r\n
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बेवफाई का बीज: कैसे शुरू हुआ शबनम और फहीम का अफेयर?
\r\n\r\nपुलिस की प्रारंभिक जांच और पड़ोसियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस खूनी खेल की पटकथा आज से लगभग दो साल पहले लिखी जानी शुरू हो गई थी।
\r\n\r\nदोस्ती से धोखे तक का सफर: राशिद और फहीम एक साथ काम करते थे, इसलिए फहीम का राशिद के घर आना-जाना एक आम बात थी। राशिद फहीम पर अपने छोटे भाई की तरह भरोसा करता था। लेकिन इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए फहीम और शबनम के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।
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रोजमर्रा की मुलाकातों ने धीरे-धीरे 'सीक्रेट अफेयर' का रूप ले लिया। पिछले दो सालों से यह दोनों छिप-छिप कर एक-दूसरे से मिल रहे थे। शबनम के 7 बच्चे थे, फिर भी वह इस रिश्ते में इतनी अंधी हो चुकी थी कि उसे अपने परिवार और बच्चों के भविष्य की कोई परवाह नहीं रही। फहीम अक्सर राशिद की गैरमौजूदगी में उसके घर आने लगा था। पड़ोसियों को भी इस रिश्ते की भनक लग चुकी थी, लेकिन किसी ने राशिद को बताने की हिम्मत नहीं की।
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4. शक, सच और टकराव: जब राशिद को चला बेवफाई का पता
\r\n\r\nअपराध शास्त्र (Criminology) कहता है कि अवैध संबंध कभी लंबे समय तक नहीं छिपते। कुछ दिन पहले ही राशिद को अपनी पत्नी शबनम और अपने ही दोस्त फहीम के बीच चल रहे इस अनैतिक रिश्ते की पक्की भनक लग गई।
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घर में मचा था क्लेश: जैसे ही राशिद को सच पता चला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस दोस्त के साथ वह रोजी-रोटी कमाता था और जिस पत्नी के साथ उसने 7 बच्चे पैदा किए थे, दोनों ने मिलकर उसकी पीठ में छुरा घोंपा था। इसे लेकर कुछ दिन पहले राशिद के घर में भारी हंगामा हुआ था। राशिद का शबनम और फहीम दोनों के साथ भयंकर झगड़ा हुआ था।
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इस खुलासे और टकराव के बाद फहीम ने राशिद के घर आना बिल्कुल बंद कर दिया था। ऐसा लग रहा था कि शायद बात यहीं खत्म हो जाएगी और फहीम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाएगा। लेकिन राशिद के दिल में सुलग रही प्रतिशोध की आग अभी बुझी नहीं थी। वह अंदर ही अंदर घुट रहा था और एक खौफनाक साजिश रच रहा था।
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5. मौत का बुलावा: सोमवार रात की वह 'आखिरी कॉल'
\r\n\r\nसोमवार का दिन था। राशिद ने तय कर लिया था कि वह इस रोज-रोज के मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक बेइज्जती को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। उसने एक ठंडी और सोची-समझी साजिश (Pre-meditated Murder Plot) रची।
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फहीम के भाई फैसल का बयान: मृतक फहीम के भाई फैसल ने पुलिस को दिए अपने बयान में इस खौफनाक रात का खुलासा किया है। फैसल ने बताया, "फहीम और राशिद कई सालों से साथ काम करते थे। उनके बीच ऐसा क्या हुआ, हमें इसकी पूरी जानकारी नहीं थी। सोमवार रात राशिद ने खुद फोन करके फहीम को अपने नए घर पर बुलाया था। फहीम बिना किसी अनहोनी की आशंका के वहां चला गया। लेकिन जैसे ही वह वहां पहुंचा, कुछ देर बाद ही उसे गोली मार दी गई। हत्या की असली वजह क्या है, यह पुलिस की जांच के बाद ही साफ होगा।"
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इस बयान से स्पष्ट है कि राशिद ने फहीम को किसी बहाने से फुसलाकर (ललित करके) अपने घर बुलाया था। फहीम को लगा होगा कि शायद राशिद समझौते के लिए या काम के सिलसिले में बुला रहा है, लेकिन वह अपनी मौत की तरफ कदम बढ़ा रहा था।
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6. खूनी मंजर: बंद कमरे में मौत का नंगा नाच
\r\n\r\nजब फहीम राशिद के नए मकान पर पहुंचा, तो वहां पत्नी शबनम भी मौजूद थी। पुलिस थ्योरी के मुताबिक, फहीम के घर में दाखिल होते ही तीनों के बीच एक बार फिर से जोरदार बहस शुरू हो गई।
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अवैध संबंधों, धोखे और पुरानी रंजिश को लेकर यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि राशिद का खुद पर से नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो गया।
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दो गोलियां, दो लाशें: गाली-गलौज और हाथापाई के बीच, राशिद ने अचानक अपने पास छिपा कर रखी एक अवैध पिस्टल निकाल ली। हथियार देखते ही कमरे में दहशत फैल गई। इससे पहले कि शबनम या फहीम कुछ समझ पाते या भागने की कोशिश करते, राशिद ने ट्रिगर दबा दिया।
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- \r\n पहली गोली (शबनम की मौत): पुलिस को घटनास्थल के मुआयने से आशंका है कि शबनम उस वक्त कमरे में रखे सोफे पर बैठी थी। राशिद ने सबसे पहले अपनी पत्नी शबनम को निशाना बनाया। गोली सीधे उसे जा लगी और सोफा खून से लाल हो गया। शबनम तड़पते हुए फर्श पर गिर पड़ी।\r\n \r\n
- \r\n दूसरी गोली (फहीम का कत्ल): शबनम को खून से लथपथ देखकर फहीम बचने के लिए भागा होगा, लेकिन कमरे के भीतर भागने की कोई जगह नहीं थी। राशिद ने दूसरी गोली फहीम पर दाग दी। फहीम भी शबनम से थोड़ी ही दूरी पर खून से लथपथ होकर गिर पड़ा।\r\n \r\n
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दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। कमरे में चारों तरफ सिर्फ खून ही खून बिखरा था। वारदात को अंजाम देने के बाद, खूंखार कातिल राशिद ने पिस्टल अपने पास रखी और कमरे का दरवाजा खुला छोड़कर अंधेरे में फरार हो गया।
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पुलिस की एंट्री: डायल-112 की कॉल और खुला दरवाजा
\r\n\r\nइस खौफनाक वारदात का खुलासा तब हुआ जब रात के सन्नाटे में गोलियों की तेज आवाज ने पड़ोसियों की नींद उड़ा दी।
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एडिशनल पुलिस कमिश्नर (Addl. CP) का बयान: गाजियाबाद के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (Additional Police Commissioner) राज करन नैय्यर ने मीडिया को घटना की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया:
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\r\n\r\n\r\n"सोमवार रात ठीक 12 बजे के करीब पुलिस कंट्रोल रूम (डायल-112) पर एक अज्ञात युवक की कॉल आई। कॉलर ने घबराई हुई आवाज में बताया कि उसके मकान के ठीक सामने वाले घर में, जहां शबनम नाम की महिला रहती है, वहां से भयानक झगड़े और फायरिंग (गोली चलने) की आवाजें आ रही हैं।"\r\n
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क्राइम सीन का खौफनाक दृश्य: सूचना मिलते ही ट्रोनिका सिटी थाना पुलिस और पीआरवी की गाड़ियां सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंचीं। पुलिस की टीम जब नए मकान के अंदर दाखिल हुई, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था।
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- \r\n मकान के कमरे का मुख्य दरवाजा खुला हुआ था।\r\n \r\n
- \r\n कमरे के अंदर जाते ही फर्श पर 36 वर्षीय शबनम की लाश पड़ी थी।\r\n \r\n
- \r\n उससे कुछ ही दूरी पर 32 वर्षीय फहीम का शव खून से लथपथ पड़ा था।\r\n \r\n
- \r\n कमरे में रखा सोफा पूरी तरह खून से सना हुआ था, जो इस बात की तस्दीक कर रहा था कि शबनम को सोफे पर बैठे हुए ही गोली मारी गई थी।\r\n \r\n
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पुलिस ने तुरंत पूरे क्राइम सीन (Crime Scene) को सील कर दिया। दोनों शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया है।
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सबसे बड़ी त्रासदी: 7 मासूम बच्चों का क्या होगा भविष्य?
\r\n\r\nइस 'डबल मर्डर' केस का सबसे दुखद और हृदयविदारक पहलू वे 7 मासूम बच्चे हैं, जिनका इस पूरी दुश्मनी और अफेयर से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन वे जिंदगी भर के लिए अनाथ हो गए हैं।
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दो मकानों की कहानी: पड़ोसियों के अनुसार, राशिद एक मेहनती इंसान था। उसने हाल ही में अपने परिवार के लिए कुछ ही दूरी पर एक नया मकान बनवाया था। इस नए मकान में वह अपनी पत्नी शबनम के साथ रहता था, जबकि उसका पुराना मकान वहां से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है।
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वारदात के वक्त कहां थे बच्चे? जिस वक्त (रात 12 बजे) यह दिल दहला देने वाली वारदात हुई, उस समय राशिद और शबनम का केवल एक छोटा बेटा उनके साथ उस नए मकान में सो रहा था। बाकी के 6 बच्चे थोड़ी दूरी पर स्थित उनके पुराने मकान में थे।
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सोचिए उन मासूमों पर क्या गुजरी होगी जब सुबह उन्हें पता चला होगा कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं है और उनका पिता एक खूंखार कातिल बन चुका है जो अब ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे रहेगा। इन 7 बच्चों के सिर से एक ही रात में मां की ममता और पिता का साया, दोनों छिन गए। समाज कल्याण विभाग (Child Welfare Committee) को अब इन बच्चों के सुरक्षित भविष्य और पुनर्वास के लिए आगे आना होगा।
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फोरेंसिक जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई
\r\n\r\nपुलिस ने घटनास्थल से कई अहम साक्ष्य (Evidences) जुटाए हैं। एडिशनल सीपी राज करन नैय्यर के निर्देश पर:
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- \r\n फोरेंसिक टीम की पड़ताल: डॉग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स (Forensic Team) ने घटनास्थल की बारीकी से जांच की है। सोफे पर मिले खून के धब्बे, फर्श पर पड़े जूतों के निशान और खाली कारतूस (Bullet shells) को कब्जे में ले लिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR): पुलिस फहीम, शबनम और राशिद तीनों के मोबाइल फोन जब्त कर उनकी कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाल रही है। इससे यह पता चलेगा कि सोमवार रात राशिद और फहीम के बीच कितनी बार और क्या बात हुई थी।\r\n \r\n
- \r\n सीसीटीवी फुटेज: पुलिस नए मकान और आसपास की गलियों में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि राशिद के भागने का रूट (Escape Route) पता किया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n आरोपी की तलाश: राशिद को पकड़ने के लिए पुलिस की 4 विशेष टीमें (SOG और सर्विलांस) गठित की गई हैं। उसके रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।\r\n \r\n
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मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: 'क्राइम ऑफ पैशन' और अवैध संबंध
\r\n\r\nगाजियाबाद की यह घटना समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के लिए भी एक चिंता का विषय है। 'क्राइम ऑफ पैशन' (Crime of Passion) तब होता है जब कोई व्यक्ति अचानक आए अत्यधिक गुस्से या दिल टूटने के कारण हिंसक अपराध कर बैठता है।
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क्यों बन जाते हैं कातिल?
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- \r\n विश्वासघात का सदमा (Betrayal Trauma): जब एक पति को पता चलता है कि उसकी पत्नी उस व्यक्ति के साथ संबंध में है जिस पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करता था (उसका सहकर्मी), तो यह दोहरा विश्वासघात होता है।\r\n \r\n
- \r\n सामाजिक बदनामी का डर: हमारे समाज में अवैध संबंधों को लेकर भारी 'स्टिग्मा' (Stigma) है। राशिद को जब पता चला कि पड़ोसियों को भी इस बात की भनक है, तो उसकी मर्दानगी और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरी ठेस पहुंची होगी, जिसने उसके गुस्से को जानलेवा बना दिया।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों की अनदेखी: शबनम द्वारा 7 बच्चों की जिम्मेदारी को भूलकर 2 साल तक अफेयर चलाना यह दर्शाता है कि वह मानसिक रूप से अपने परिवार से पूरी तरह कट चुकी थी।\r\n \r\n
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इस तरह के मामलों में अक्सर देखा गया है कि काउंसलिंग (Marriage Counseling) की कमी के कारण पारिवारिक विवाद खूनी रूप ले लेते हैं।
\r\n\r\nकानूनी परिप्रेक्ष्य: आरोपी राशिद को क्या सजा मिलेगी?
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भारतीय न्याय प्रणाली के तहत राशिद ने एक जघन्य अपराध किया है। हालांकि उसने यह हत्या पत्नी के अफेयर से आहत होकर की है, लेकिन कानून किसी को भी जान लेने का अधिकार नहीं देता।
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पुलिस ने आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
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- \r\n हत्या (Murder): भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (पूर्व में IPC 302) के तहत डबल मर्डर का केस चलेगा। चूँकि उसने फहीम को फोन करके बुलाया था, यह दर्शाता है कि यह एक सोची-समझी साजिश (Pre-meditated) थी। इसके लिए उसे आजीवन कारावास (Life Imprisonment) या मृत्युदंड (Death Penalty) हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n आर्म्स एक्ट (Arms Act): अवैध हथियार (पिस्टल) रखने और उससे फायरिंग करने के जुर्म में आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत भी कार्रवाई होगी।\r\n \r\n
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कोर्ट में अभियोजन पक्ष (Prosecution) राशिद की उस मानसिक स्थिति का फायदा नहीं लेने देगा जिसे 'सडन प्रोवोकेशन' (Sudden Provocation) कहा जाता है, क्योंकि उसने सोच-समझकर फहीम को घर बुलाया था।
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एक सबक, एक चेतावनी
\r\n\r\nगाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी की यह खून से सनी रात समाज के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। अवैध संबंध (Extramarital Affairs) केवल दो लोगों की जिंदगी बर्बाद नहीं करते, बल्कि वे पूरे परिवार, बच्चों और समाज को एक गहरे अंधकार में धकेल देते हैं। शबनम और फहीम के क्षणिक आकर्षण ने न केवल उनकी जान ले ली, बल्कि राशिद को एक अपराधी बना दिया और 7 बेगुनाह बच्चों को जीवन भर के लिए अनाथ कर दिया।
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अब देखना यह है कि गाजियाबाद पुलिस कितनी जल्दी फरार हत्यारे राशिद को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजती है। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि यदि पारिवारिक विवादों को समय रहते सामाजिक स्तर पर या फैमिली कोर्ट के माध्यम से न सुलझाया जाए, तो उनका अंजाम कितना खौफनाक हो सकता है।
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