गाजियाबाद 4 साल की बच्ची रेप-मर्डर (Ghaziabad 4 Year Old Girl Rape-Murder): उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। महानगर के सिहानीगेट थाना क्षेत्र में एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने पहले दुष्कर्म (Rape) किया और फिर राज खुलने के डर से ईंट-पत्थरों से कूंचकर उसकी निर्मम तरीके से हत्या (Murder) कर दी। यह गाजियाबाद 4 साल की बच्ची रेप-मर्डर मामला न केवल कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि हमारे समाज के उस नैतिक पतन को भी दर्शाता है जहां एक मासूम बच्ची अपने ही घर के बाहर, अपने ही पड़ोसियों के बीच सुरक्षित नहीं है।READ ALSO:-13 साल से कोमा में कैद जिंदगी, अब एम्स में अन्न-जल बंद; सुप्रीम कोर्ट की इजाजत से शुरू हुआ गाजियाबाद के हरीश राणा का 'अंतिम सफर'
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पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पड़ोसी को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन जांच की जा रही है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, पुलिस की कार्रवाई, आरोपी की मानसिकता और इस घटना से उपजे सामाजिक सवालों पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
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घटना का खौफनाक घटनाक्रम: कैसे रची गई हैवानियत की साजिश?
\r\n\r\nयह रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सोमवार शाम की है। सिहानीगेट थाना क्षेत्र की एक पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले इलाके में बच्ची का परिवार रहता है। परिवार के अनुसार, सोमवार शाम करीब 7 बजे बच्ची अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी।
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उसी समय पड़ोस में रहने वाला 24 वर्षीय युवक गौरव प्रजापति वहां आया। वह बच्ची और उसके परिवार से पहले से परिचित था और उसका बच्ची के घर अक्सर आना-जाना लगा रहता था। बच्चे भी उससे काफी घुले-मिले थे, इसलिए बच्ची को उस पर जरा भी शक नहीं हुआ। आरोपी गौरव ने पहले बच्ची के साथ कुछ देर खेलने का नाटक किया और फिर उसे टॉफी दिलाने का लालच दिया।
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टॉफी के बहाने वह उस 4 साल की मासूम को गोद में उठाकर घर से करीब 300 मीटर की दूरी पर स्थित एक सुनसान और खाली पड़े प्लॉट में ले गया। अंधेरे और सुनसान जगह का फायदा उठाकर इस हैवान ने बच्ची के साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
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राज न खुले इसलिए ईंट-पत्थरों से कूंचा मासूम का चेहरा
\r\n\r\nजब आरोपी गौरव प्रजापति ने बच्ची के साथ दरिंदगी की, तो मासूम बच्ची दर्द से कराह उठी और रोने लगी। आरोपी को यह डर सताने लगा कि बच्ची घर जाकर अपने पिता को सब कुछ बता देगी और उसकी इस घिनौनी करतूत का राज खुल जाएगा।
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खुद को बचाने और सबूत मिटाने की खौफनाक मंशा से उसने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। उसने पास ही पड़े ईंट-पत्थरों को उठाया और उस 4 साल की मासूम के सिर और चेहरे पर तब तक वार किए, जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं। इस नृशंस वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया, मानो कुछ हुआ ही न हो।
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खून से लथपथ मिला शव और पिता की दर्दनाक बेबसी
\r\n\r\nइधर घर पर, जब काफी देर तक बच्ची दिखाई नहीं दी तो पिता परेशान हो उठा। उसने आसपास के इलाकों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहां बच्ची की तलाश शुरू की। जब बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं मिला, तो घबराए हुए पिता ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
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पुलिस और परिवार मिलकर बच्ची की तलाश कर ही रहे थे कि रात करीब 9 बजे किसी ने सूचना दी कि घर से कुछ दूरी पर स्थित एक खाली प्लॉट के कोने में एक बच्ची खून से लथपथ पड़ी है। जब पिता और स्थानीय लोग वहां पहुंचे, तो मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। 4 साल की वह मासूम बच्ची अर्द्धनग्न अवस्था में पड़ी थी और उसका सिर पूरी तरह से कुचला हुआ था। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचित किया।
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बच्ची की सांसे धीमी चल रही थीं या लोगों को उसके बचने की एक आखिरी उम्मीद थी, इसलिए उसे तुरंत पास के एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया।
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पुलिस और फोरेंसिक टीम (FSL) की त्वरित कार्रवाई
\r\n\r\nइस गाजियाबाद 4 साल की बच्ची रेप-मर्डर की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रात में ही डीसीपी सिटी धवल जायसवाल और एडिशनल पुलिस कमिश्नर (Additional Police Commissioner) दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए।
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डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, "घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत बच्ची को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान (या अस्पताल लाते ही) बच्ची की मौत हो गई। सभी उच्चाधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है।"
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पुलिस ने जांच को वैज्ञानिक और पुख्ता बनाने के लिए तुरंत फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम और डॉग स्क्वायड (Dog Squad) को मौके पर बुलाया। एफएसएल की टीम ने खाली प्लॉट से खून के नमूने, ईंट-पत्थर, और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य (Evidence) जुटाए हैं।
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आरोपी गौरव प्रजापति की गिरफ्तारी
\r\n\r\nपुलिस जांच और स्थानीय लोगों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि बच्ची को आखिरी बार पड़ोस में रहने वाले गौरव प्रजापति के साथ देखा गया था। कुछ चश्मदीदों ने बताया कि गौरव ही बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने गोद में उठाकर ले जा रहा था।
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चूंकि गौरव का बच्ची के घर आना-जाना था, इसलिए किसी ने उसे रोक-टोक नहीं की। शुरुआती साक्ष्यों और परिजनों के बयानों के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए 24 साल के आरोपी गौरव प्रजापति को हिरासत में ले लिया है। पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही है। बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के स्पष्ट कारणों और दुष्कर्म की आधिकारिक पुष्टि हो सके।
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परिवार की दुखद पृष्ठभूमि: बिना मां के बच्चों को पाल रहा था पिता
\r\n\r\nइस गाजियाबाद 4 साल की बच्ची रेप-मर्डर मामले में जब पुलिस ने परिवार की पृष्ठभूमि की जांच की, तो एक और दर्दनाक कहानी सामने आई। बच्ची का पिता पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर है और रंगाई-पुताई (Painting) का काम करके अपने परिवार का पेट पालता है।
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उसकी शादी 12 साल पहले हुई थी और उसके कुल तीन बच्चे हैं। पीड़ित बच्ची अपने दो बड़े भाइयों में सबसे छोटी और पूरे घर की लाडली थी। दुर्भाग्य से, पारिवारिक विवाद या किसी अन्य कारण से बच्ची की मां करीब तीन साल पहले अपने पति और तीनों बच्चों को छोड़कर कहीं चली गई थी।
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मां के जाने के बाद से पिता ही अकेले मां और बाप दोनों का फर्ज निभा रहा था। वह दिन भर कड़ी मेहनत करता और घर आकर अपने बच्चों की देखभाल करता था। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस पड़ोसी पर वह भरोसा करता है, वही एक दिन उसकी सबसे छोटी और प्यारी बेटी का काल बन जाएगा। यह घटना दर्शाती है कि समाज के गरीब और कमजोर तबके के बच्चे कितने असुरक्षित माहौल में जीने को मजबूर हैं।
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भरोसे का कत्ल: जब रक्षक ही बन जाए भक्षक
\r\n\r\nयह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि समाज में 'भरोसे के कत्ल' का सबसे खौफनाक उदाहरण है। आरोपी गौरव प्रजापति कोई अजनबी नहीं था। वह उसी मोहल्ले का रहने वाला था, परिवार के दुख-सुख का साथी था और बच्चों के साथ खेलता था।
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अपराध मनोविज्ञान (Criminal Psychology) के अनुसार, बाल यौन शोषण (Child Sexual Abuse) के अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अनजान व्यक्ति नहीं, बल्कि पीड़ित का कोई परिचित, रिश्तेदार या पड़ोसी ही होता है। ऐसे अपराधी बच्चों के भोलेपन का फायदा उठाते हैं। वे पहले बच्चों के साथ खेलते हैं, उन्हें टॉफी, चॉकलेट या खिलौने का लालच देते हैं, उनका विश्वास जीतते हैं और फिर मौका पाकर उनके साथ दरिंदगी करते हैं। गौरव ने भी ठीक इसी 'ग्रूमिंग' (Grooming) तकनीक का इस्तेमाल किया और एक बेबस पिता के भरोसे का गला घोंट दिया।
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सिहानीगेट और पूरे गाजियाबाद में दहशत और आक्रोश का माहौल
\r\n\r\nइस बर्बर हत्याकांड के बाद सिहानीगेट थाना क्षेत्र और पूरे गाजियाबाद में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों में पुलिस गश्त और खाली पड़े प्लॉटों की सुरक्षा को लेकर भी भारी नाराजगी है।
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आसपास की महिलाओं और माता-पिताओं में खौफ बैठ गया है। उनका कहना है कि जब घर के बाहर खेलते हुए बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों को कहां भेजें? मोहल्ले के लोगों ने आरोपी गौरव प्रजापति के लिए फांसी की सजा की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे दरिंदों को बीच चौराहे पर सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इंसान ऐसी घिनौनी हरकत करने की सोच भी न सके।
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कानूनी प्रक्रिया: पॉक्सो एक्ट (POCSO) और सख्त सजा का प्रावधान
\r\n\r\nभारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) लागू है। गाजियाबाद 4 साल की बच्ची रेप-मर्डर के इस मामले में पुलिस आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या (Murder), अपहरण (Kidnapping), सबूत मिटाने और पॉक्सो एक्ट की सबसे सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर रही है।
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कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या के मामलों को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' (Rarest of Rare) की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) के जरिए जल्द सुनवाई की जाती है और दोषी पाए जाने पर आरोपी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) या सीधे फांसी (Death Penalty) की सजा का स्पष्ट प्रावधान है। समाज और परिवार को अब न्यायपालिका से जल्द से जल्द न्याय की उम्मीद है।
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माता-पिता के लिए सबक: बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें?
\r\n\r\nइस तरह की हृदयविदारक घटनाएं हर माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा अलार्म (चेतावनी) हैं। कामकाजी माता-पिता, विशेषकर सिंगल पैरेंट्स (Single Parents) को अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है:
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- \r\n अजनबियों और परिचितों से सावधानी: बच्चों को सिखाएं कि वे किसी भी पड़ोसी, रिश्तेदार या परिचित के साथ अकेले न जाएं, भले ही वे उन्हें कितना भी लालच क्यों न दें।\r\n \r\n
- \r\n गुड टच और बैड टच की शिक्षा: 3 से 4 साल की उम्र से ही बच्चों को 'गुड टच' और 'बैड टच' (Good Touch & Bad Touch) के बारे में आसान भाषा में समझाना शुरू कर दें।\r\n \r\n
- \r\n 'ना' कहना सिखाएं: बच्चों को यह आत्मविश्वास दें कि अगर कोई उन्हें जबरन छूने या ले जाने की कोशिश करे, तो वे जोर से 'ना' कहें और चिल्लाएं।\r\n \r\n
- \r\n खाली प्लॉट और सुनसान जगहें: अपने घर के आसपास खाली प्लॉट, खंडहर या सुनसान जगहों पर बच्चों को अकेले खेलने के लिए कभी न भेजें। स्थानीय प्रशासन से भी मांग करें कि ऐसे प्लॉटों की बाउंड्रीवॉल कराई जाए।\r\n \r\n
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गाजियाबाद 4 साल की बच्ची रेप-मर्डर की यह घटना हमारे समाज के माथे पर एक गहरा कलंक है। टॉफी के लालच में एक 4 साल की मासूम का अपहरण, उसके साथ दुष्कर्म और फिर ईंटों से कुचलकर उसकी हत्या कर देना यह साबित करता है कि समाज में कुछ लोग किस कदर मानसिक विकृति का शिकार हो चुके हैं। पुलिस ने आरोपी गौरव प्रजापति को गिरफ्तार कर अपना काम तेजी से शुरू कर दिया है, लेकिन अब जिम्मेदारी हमारी न्याय व्यवस्था की है कि वह इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कर दरिंदे को जल्द से जल्द फांसी के फंदे तक पहुंचाए। एक बिना मां की बच्ची, जिसे उसके दिहाड़ी मजदूर पिता ने बड़ी मुश्किलों से पाला था, उसका ऐसा खौफनाक अंत हर संवेदनशील इंसान की आंखों में आंसू ला देता है। हमें बतौर समाज जागना होगा, ताकि फिर किसी और मासूम को ऐसी दरिंदगी का शिकार न होना पड़े।