नई दिल्ली (ब्यूरो): भारत क्लीन एनर्जी (Clean Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने की तैयारी में है। देश में पहली बार हाइड्रोजन से चलने वाली कार (Hydrogen Fuel Cell Car) की टेस्टिंग शुरू होने जा रही है। यह कदम भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हाइड्रोजन को भविष्य का सबसे स्वच्छ और भरोसेमंद ईंधन माना जा रहा है, जो न केवल प्रदूषण को शून्य करेगा बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
टोयोटा मिराई: भारत की पहली हाइड्रोजन कार
\r\n\r\nजापानी ऑटोमोबाइल दिग्गज टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (Toyota Kirloskar Motor) और भारत सरकार मिलकर इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके तहत टोयोटा की मशहूर हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) 'मिराई' (Mirai) को भारतीय सड़कों पर उतारा जाएगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इसकी टेस्टिंग के लिए टोयोटा ने भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि भारत की विविध जलवायु और ड्राइविंग स्थितियों में हाइड्रोजन कार कितनी कारगर साबित होती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सिर्फ कार ही नहीं, इन क्षेत्रों में भी बजेगा हाइड्रोजन का डंका
\r\n\r\nआम तौर पर लोग हाइड्रोजन को सिर्फ कारों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इसका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल सेक्टर से कहीं आगे तक फैला हुआ है। आइए जानते हैं कि कारों के अलावा हाइड्रोजन ईंधन भविष्य में कहां-कहां अपनी ताकत दिखाएगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
1. पब्लिक ट्रांसपोर्ट: बस, ट्रक और ट्रेन
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n बसें और ट्रक: यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक पहले से ही बड़ी संख्या में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। भारत में भी दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में हाइड्रोजन बसों के ट्रायल शुरू हो चुके हैं।\r\n \r\n
- \r\n रेलवे: भारतीय रेलवे भी अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) के ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार है, जो डीजल इंजनों का एक स्वच्छ विकल्प बनेगी।\r\n \r\n
- \r\n जल परिवहन: वाराणसी में देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली बोट (Boat) का संचालन शुरू हो चुका है, जो बिना किसी प्रदूषण और शोर के गंगा में तैरती है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
2. भारी उद्योग: स्टील और सीमेंट हाइड्रोजन का उपयोग भारी उद्योगों को 'डीकार्बोनाइज' (Decarbonize) करने में क्रांतिकारी साबित हो रहा है। स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योग कोयले और गैस पर निर्भर हैं, जो भारी प्रदूषण फैलाते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n ग्रीन स्टील: अब कई ग्लोबल कंपनियां 'ग्रीन हाइड्रोजन' का इस्तेमाल कर 'ग्रीन स्टील' बना रही हैं। भारत के इस्पात मंत्रालय ने भी इस दिशा में कई प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है।\r\n \r\n
- \r\n रिफाइनरी: रिफाइनरी और केमिकल सेक्टर में हाइड्रोजन का इस्तेमाल पहले से होता है, लेकिन अब जोर इसे ग्रीन सोर्स से बनाने पर है ताकि लागत और प्रदूषण दोनों कम हो सकें।\r\n \r\n
\r\n\r\n
3. भविष्य की उड़ान: हवाई जहाज और शिपिंग एविएशन सेक्टर दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में से एक है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n हवाई जहाज: एयरबस (Airbus) और बोइंग (Boeing) जैसी दिग्गज कंपनियां हाइड्रोजन आधारित विमानों की तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं, जो भविष्य में उड़ानों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बना देंगी।\r\n \r\n
- \r\n शिपिंग: बड़े मालवाहक जहाजों (Cargo Ships) के लिए भी हाइड्रोजन और उससे बनने वाले अमोनिया को भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जा रहा है।\r\n \r\n
भारत में हाइड्रोजन कार की टेस्टिंग की शुरुआत एक स्वच्छ और हरित भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है। यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी सड़कों पर पेट्रोल-डीजल नहीं, बल्कि हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियां दौड़ेंगी और हवा साफ-सुथरी होगी।