नई दिल्ली (खबरीलाल न्यूज़ डेस्क):
\r\n\r\nराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में हर साल सर्दियों के दस्तक देते ही वायु प्रदूषण की समस्या भयावह रूप धारण कर लेती है। जहरीली हवा से करोड़ों लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। इस जानलेवा वायु प्रदूषण पर स्थायी रूप से लगाम लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया है।
\r\n\r\nआयोग ने दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन और कमर्शियल थ्री-व्हीलर्स को पूरी तरह से इको-फ्रेंडली यानी 'जीरो एमिशन' में बदलने का खाका तैयार किया है। इसके तहत अब सीएनजी (CNG) से चलने वाले ऑटोरिक्शा के नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से बंद किया जाएगा और उनकी जगह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा (E-Auto) को बढ़ावा दिया जाएगा।
\r\n\r\nचरणबद्ध समयसीमा: जानें किस शहर में कब से लागू होगी पाबंदी?
\r\n\r\nCAQM ने इस बदलाव को अचानक लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है, ताकि वाहन चालकों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में कोई बाधा न आए।
\r\n\r\n| \r\n क्षेत्र/शहर \r\n | \r\n \r\n नियम लागू होने की तिथि \r\n | \r\n \r\n व्यवस्था \r\n | \r\n
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| \r\n दिल्ली (Delhi) \r\n | \r\n \r\n 1 जनवरी 2027 \r\n | \r\n \r\n केवल इलेक्ट्रिक ऑटो का नया रजिस्ट्रेशन \r\n | \r\n
| \r\n हाई व्हीकल डेंसिटी NCR जिले (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत) \r\n | \r\n \r\n 1 जनवरी 2028 \r\n | \r\n \r\n सीएनजी ऑटो रजिस्ट्रेशन पर रोक, सिर्फ EV को मंजूरी \r\n | \r\n
| \r\n शेष NCR जिले (मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, मुजफ्फरनगर आदि) \r\n | \r\n \r\n 1 जनवरी 2029 \r\n | \r\n \r\n पूरे NCR में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन \r\n | \r\n
दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति 2.0 (EV Policy 2.0) में भी इसी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है, जिससे दिल्ली में 2027 की शुरुआत से ही सड़कों पर केवल शून्य-उत्सर्जन वाले नए ऑटो ही उतर सकेंगे।
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\r\n\r\nCNG ऑटो पर ही क्यों चला CAQM का चाबुक? चौंकाने वाले आंकड़े
\r\n\r\nअक्सर माना जाता है कि सीएनजी (CNG) डीजल और पेट्रोल की तुलना में एक स्वच्छ ईंधन है, लेकिन आयोग के हालिया आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। CAQM के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा के पीछे सूक्ष्म धूल कणों यानी PM2.5 प्रदूषण की बड़ी भूमिका है।
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- \r\n बिक्री की तुलना में प्रदूषण 9 गुना ज्यादा: आंकड़ों के मुताबिक, NCR में बिकने वाली कुल नई गाड़ियों में तीन पहिया वाहनों (थ्री-व्हीलर्स) की हिस्सेदारी महज 2.2 प्रतिशत है।\r\n \r\n
- \r\n प्रदूषण में भारी हिस्सेदारी: लेकिन हैरानी की बात यह है कि सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से होने वाले कुल PM2.5 उत्सर्जन में इन तीन पहिया वाहनों का योगदान करीब 19 प्रतिशत है।\r\n \r\n
\r\n\r\nआयोग का वैज्ञानिक अनुमान है कि यदि पूरे NCR में तीन पहिया वाहनों के बेड़े को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक (EV) कर दिया जाए, तो क्षेत्र की हवा में हर साल लगभग 5.5 टन हानिकारक PM2.5 उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। यही वजह है कि आयोग ने सीएनजी ऑटो को हटाकर ई-ऑटो को लाने की कड़ा फैसला लिया है।
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\r\n\r\nमालवाहक वाहनों (Goods Carriers) पर भी कसेगा शिकंजा
\r\n\r\nआयोग का यह मास्टर प्लान सिर्फ सवारी ऑटो तक ही सीमित नहीं है। सड़कों पर माल ढोने वाले हल्के कमर्शियल वाहनों (Light Commercial Goods Vehicles) को भी इस बदलाव के दायरे में लाया जा रहा है।
\r\n\r\nदिल्ली और अधिक वाहन घनत्व वाले एनसीआर के प्रमुख जिलों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले छोटे मालवाहक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर भी चरणबद्ध तरीके से रोक लगाई जाएगी। भविष्य में डिलीवरी वैन और हल्के लॉजिस्टिक्स के लिए भी केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) के इस्तेमाल को ही अनिवार्य किया जाएगा।
\r\n\r\nचार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी चुनौती: CAQM का स्पष्टीकरण
\r\n\r\nदिल्ली में यह नियम 2027 से और एनसीआर के बाकी जिलों में 2028 से क्यों लागू हो रहा है? इस सवाल का जवाब देते हुए सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तन्मय कुमार पिथोडे ने बताया कि दिल्ली की तुलना में एनसीआर के अन्य प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Stations) और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क तैयार करने में थोड़ा समय लगेगा।
\r\n\r\nउन्होंने कहा, "एनसीआर के बाकी हिस्सों में ईवी चार्जिंग की मजबूत व्यवस्था स्थापित करने के लिए समय की आवश्यकता है। इसी वजह से एनसीआर के जिलों में इस नई व्यवस्था को दिल्ली के ठीक एक साल बाद लागू करने का व्यावहारिक फैसला लिया गया है, ताकि आम चालकों को चार्जिंग की समस्याओं का सामना न करना पड़े।"
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\r\n\r\nमौजूदा सीएनजी ऑटो चालकों और आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
\r\n\r\nइस नए आदेश को लेकर ऑटो चालकों के मन में कई सवाल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
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- \r\n पुराने/मौजूदा सीएनजी ऑटो पर तत्काल रोक नहीं: यह आदेश मुख्य रूप से 'नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन' पर लागू होगा। जो सीएनजी ऑटो पहले से सड़कों पर चल रहे हैं, उनके लिए अलग से नियम और समयसीमा निर्धारित की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n ई-ऑटो से घटेगी रनिंग कॉस्ट: इलेक्ट्रिक ऑटो अपनाने से चालकों की दैनिक ईंधन लागत में भारी कमी आएगी। सीएनजी के मुकाबले ई-ऑटो को चार्ज करके चलाना काफी सस्ता पड़ता है, जिससे ऑटो चालकों की शुद्ध कमाई बढ़ेगी।\r\n \r\n
- \r\n आम जनता को राहत: प्रदूषण मुक्त परिवहन मिलने से जहां एक तरफ वायु गुणवत्ता में सुधार होगा, वहीं यात्रियों को आधुनिक और शांत ई-ऑटो में सफर करने का बेहतर अनुभव मिलेगा।\r\n \r\n
दिल्ली-एनसीआर को 'गैस चैंबर' बनने से बचाने के लिए सीएक्यूएम का यह फैसला एक क्रांतिकारी मोड़ साबित हो सकता है। यद्यपि ई-ऑटो के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन और किफायती बैटरी समाधान उपलब्ध कराना सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन स्वच्छ पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह कदम समय की सबसे बड़ी जरूरत है।