नई दिल्ली (हेल्थ डेस्क): गर्मियां आते ही और खासकर मानसून के मौसम में मच्छरों का आतंक हर घर की सबसे बड़ी समस्या बन जाता है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए लोग अपने घरों में मच्छर भगाने वाले कॉइल, लिक्विड वेपोराइज़र और विशेष रूप से सस्ती 'मच्छर अगरबत्तियों' (Mosquito Repellent Agarbatti) का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो धुआं मच्छरों को मार रहा है, वह आपके और आपके मासूम बच्चों के फेफड़ों के साथ क्या कर रहा है?Read also:-गूगल का सबसे बड़ा दांव: Android 17, 'गूगलबुक' और जेमिनी AI से बदल जाएगी आपके स्मार्टफोन की दुनिया, 'एंड्रॉइड शो 2026' में हुए 5 बड़े ऐलान!
\r\n\r\n\r\n\r\n
हाल ही में 'नेशनल डेंगू डे' (National Dengue Day) के अवसर पर एक ऐसी सर्वे रिपोर्ट सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि हर प्रोडक्ट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, और अनजाने में हम मच्छरों से बचने के चक्कर में अपने ही घर में 'जहर' घोल रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
HICA और Kantar का सर्वे: क्या खुलासे हुए हैं?
\r\n\r\nमच्छर भगाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (HICA - Home Insect Control Association) ने मार्केट रिसर्च की जानी-मानी कंपनी Kantar (कांतार) के साथ मिलकर एक व्यापक स्तर का सर्वे किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
यह कोई छोटा-मोटा सर्वे नहीं था। इसे भारत के 12 प्रमुख शहरों में आयोजित किया गया, जिसमें 1,264 परिवारों और 405 अनुभवी डॉक्टरों को शामिल किया गया। इस विस्तृत सर्वे की रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए, वे डराने वाले हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n फेफड़ों के लिए बड़ा खतरा: सर्वे में शामिल 70 प्रतिशत डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कहा कि अवैध और बिना मान्यता वाली मच्छर अगरबत्तियां श्वसन तंत्र (Respiratory System) के लिए एक बहुत बड़ा और गंभीर खतरा हैं।\r\n \r\n
- \r\n सिगरेट जितना नुकसानदायक: सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि 67 प्रतिशत डॉक्टरों ने इन सस्ती और अवैध अगरबत्तियों के धुएं को 'सिगरेट के धुएं' जितना ही खतरनाक और नुकसानदायक माना है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि देश के लाखों परिवार लंबे समय से रोजाना इन जहरीले उत्पादों का इस्तेमाल बंद कमरों में कर रहे हैं, जिससे वे गंभीर बीमारियों को सीधा बुलावा दे रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
साइलेंट किलर: कौन से मच्छर रिपेलेंट हैं सबसे ज्यादा जोखिम वाले?
\r\n\r\nविशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में दो तरह के मच्छर रिपेलेंट मिलते हैं— एक वो जो सरकारी मानकों पर खरे उतरते हैं, और दूसरे वो जो किसी स्थानीय फैक्ट्री में बिना किसी नियम-कानून के धड़ल्ले से बनाए जा रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
असली समस्या इन अवैध, बिना लेबल वाले और अनब्रांडेड (Unbranded) उत्पादों से है। बाजार में 10-20 रुपये में मिलने वाली ये अगरबत्तियां सबसे बड़ा जोखिम पैदा करती हैं। इन उत्पादों पर सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स रजिस्ट्रेशन (CIR - Central Insecticides Registration) नंबर नहीं लिखा होता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
CIR नंबर क्यों है जरूरी? भारत सरकार का संबंधित विभाग किसी भी कीटनाशक या मच्छर भगाने वाले उत्पाद को तभी CIR नंबर देता है, जब वह इंसानों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित साबित हो जाए। जिन उत्पादों पर यह नंबर नहीं है, उसका सीधा मतलब है कि उनमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों (Chemicals) की कोई जांच नहीं हुई है। निर्माता मच्छरों को तुरंत मारने के लिए इनमें प्रतिबंधित और अत्यधिक जहरीले रसायनों का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी जानकारी पैक पर नहीं दी जाती।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सेहत पर क्या पड़ता है असर? (Health Impacts of Toxic Smoke)
\r\n\r\nजब आप एक बंद कमरे में ऐसी अवैध अगरबत्ती जलाते हैं, तो वह कमरा एक गैस चैंबर में तब्दील हो जाता है। इसके लगातार संपर्क में आने से शरीर पर कई गंभीर प्रभाव पड़ते हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सांस की गंभीर समस्याएं: लगातार धुआं वाली अगरबत्ती जलाने से सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी आना, सीने में भारीपन और जलन, तथा गले में भयंकर खराश की शिकायत हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n आंखों और सिर पर असर: कई लोगों ने शिकायत की है कि इस धुएं के कारण उनकी आंखों से पानी आता है, जलन होती है और सुबह उठने पर भारी सिरदर्द (Migraine/Headache) महसूस होता है।\r\n \r\n
- \r\n मरीजों के लिए 'जहर': जिन लोगों को पहले से अस्थमा (Asthma), एलर्जी (Allergy) या सीओपीडी (COPD - Chronic Obstructive Pulmonary Disease) जैसी बीमारियां हैं, उनके लिए यह धुआं ट्रिगर का काम करता है और उनके लक्षणों को कई गुना बढ़ा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों और बुजुर्गों पर खतरा: बच्चों के फेफड़े विकासशील अवस्था में होते हैं और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में उनके सेंसिटिव फेफड़ों पर इस जहरीले धुएं का असर सबसे अधिक और लंबे समय तक रहने वाला होता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
डॉक्टर्स की चेतावनी: सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
\r\n\r\nइस गंभीर विषय पर एस.एल. रहेजा अस्पताल (S.L. Raheja Hospital) के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीत ससीधरन ने कड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि लोगों को अपनी आदतों में तुरंत बदलाव करने की जरूरत है। डॉ. ससीधरन के अनुसार, "हमें केवल उन्हीं उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें सरकारी मंजूरी मिली हो और जिन्होंने सभी सुरक्षा परीक्षण (Safety Tests) पास किए हों।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए बचाव के कुछ अचूक उपाय (Safety Tips):
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n CIR नंबर जरूर चेक करें: मेडिकल स्टोर या किराना दुकान से मच्छर रिपेलेंट, कॉइल या अगरबत्ती खरीदते समय उसके पैकेट के पीछे CIR (Central Insecticides Registration) नंबर जरूर खोजें। यदि नंबर नहीं है, तो उस उत्पाद को बिल्कुल न खरीदें।\r\n \r\n
- \r\n हवा का प्रवाह (Ventilation) बनाए रखें: यदि आप कॉइल या अगरबत्ती जला रहे हैं, तो कभी भी कमरे के सभी दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह बंद न करें। ताजी हवा के आने-जाने के लिए थोड़ी जगह (Cross Ventilation) जरूर छोड़ें।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों से रखें दूर: बच्चों और बुजुर्गों के कमरे में रात भर लगातार धुआं करने वाले उत्पादों को जलाने से सख्त परहेज करें।\r\n \r\n
- \r\n प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्पों को अपनाएं: रसायनों पर निर्भर रहने के बजाय पुराने और सुरक्षित तरीकों पर वापस लौटें। सोते समय मच्छरदानी (Mosquito Net) का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित उपाय है। इसके अलावा, शाम होने से पहले घर के दरवाजे बंद कर दें और खिड़कियों पर जाली (Window Meshes) लगवाएं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मच्छर भगाना जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत अपने परिवार की सेहत और फेफड़ों को दांव पर लगाकर नहीं चुकाई जा सकती। चंद रुपये बचाने के चक्कर में बिना ब्रांड और बिना CIR नंबर वाली मच्छर अगरबत्तियां खरीदना आपके घर में बीमारियों को न्योता देने जैसा है। HICA का यह सर्वे हमारे लिए एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up call) है। आज ही जागरूक बनें, सही उत्पादों का चुनाव करें और अपने घर की हवा को सांस लेने लायक बनाए रखें।
\r\n\r\n\r\n\r\n
(डिस्क्लेमर: यह खबर HICA और Kantar के हालिया सर्वे रिपोर्ट पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से उचित परामर्श लें।)