बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन अहम विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव की मतगणना के नतीजे सामने आ गए हैं। जहां गुजरात में भाजपा ने अपना गढ़ बचाया है, वहीं बिहार और एमपी में उसे करारे झटके लगे हैं।
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राष्ट्रीय डेस्क: देश के तीन प्रमुख राज्यों—बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात—की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे भारतीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहे हैं। 30 जुलाई को इन तीनों सीटों पर मतदान हुआ था और अब वोटों की गिनती के बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई बड़े राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है।READ ALSO:-NEET पेपर लीक: 'छात्रों पर नहीं होगी FIR, सरकार अपने वादे पर कायम'— सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा खुलासा, जानिए कोर्ट की 5 बड़ी बातें
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\r\n\r\nइन नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर सीट पर देखने को मिला है, जहां चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर अपनी नई राजनीतिक पारी में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने जा रहे हैं। वहीं, मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया सीट पर कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीन ली है। दूसरी ओर, गुजरात की मंजलपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना दबदबा कायम रखते हुए एकतरफा जीत हासिल की है। आइए, एक-एक करके इन तीनों सीटों के समीकरण और नतीजों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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बिहार का बांकीपुर: प्रशांत किशोर और 'जन सुराज' का ऐतिहासिक उदय
\r\n\r\nबिहार की राजनीति में यह उपचुनाव एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है। पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट, जिसे भारतीय जनता पार्टी का सबसे सुरक्षित और अभेद्य किला माना जाता था, वहां जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने तहलका मचा दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\nताजा आंकड़ों के अनुसार, 31वें राउंड की मतगणना तक प्रशांत किशोर 18,953 वोटों की विशाल बढ़त बनाए हुए हैं।
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- \r\n प्रशांत किशोर (जनसुराज): 63,203 वोट\r\n \r\n
- \r\n नीरज कुमार (भाजपा): 39,794 वोट\r\n \r\n
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फिलहाल सिर्फ एक राउंड की गिनती बाकी है और प्रशांत किशोर की जीत पूरी तरह से सुनिश्चित हो चुकी है।
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क्यों अहम है यह जीत? बांकीपुर सीट कोई साधारण विधानसभा क्षेत्र नहीं है। यह वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिग्गज नेता नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है। नितिन नवीन यहां से लगातार 5 बार विधायक चुने गए हैं। हाल ही में उनके राज्यसभा जाने के कारण यह सीट खाली हुई थी। भाजपा ने यहां से नीरज कुमार को मैदान में उतारा था, लेकिन प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' लहर ने भाजपा के इस पारंपरिक किले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अपने पहले ही सीधे चुनाव में इतनी बड़ी जीत हासिल करना प्रशांत किशोर के राजनीतिक कद को रातों-रात राष्ट्रीय फलक पर स्थापित कर रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\nमध्य प्रदेश की दतिया सीट: नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना भाजपा को पड़ा भारी
\r\n\r\nमध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। वीआईपी सीट मानी जाने वाली दतिया विधानसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा को करारी शिकस्त दी है। घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों के स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज कर कांग्रेस पार्टी में नई ऊर्जा भर दी है।
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क्या रही भाजपा की हार की वजह? दतिया सीट पर भाजपा की हार के पीछे पार्टी के आंतरिक समीकरणों और स्थानीय असंतोष को बड़ा कारण माना जा रहा है।
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- \r\n भाजपा आलाकमान ने इस बार दतिया से पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया था।\r\n \r\n
- \r\n उनकी जगह पार्टी ने आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया था।\r\n \r\n
- \r\n टिकट कटने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी थी। इस नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी स्वयं नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी जीत हासिल नहीं कर पाए।\r\n \r\n
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कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के इस असंतोष का बखूबी फायदा उठाया और दतिया में कांग्रेस का परचम लहरा दिया। मध्य प्रदेश भाजपा के लिए यह हार एक बड़ा चेतावनी संकेत है।
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गुजरात की मंजलपुर सीट: भाजपा के लिए राहत की खबर, बंपर जीत
\r\n\r\nजहां बिहार और मध्य प्रदेश में भाजपा को झटके लगे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात से पार्टी के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का एकतरफा राज बरकरार रहा है।
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- \r\n विजेता: सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल (भाजपा)\r\n \r\n
- \r\n उपविजेता: भिखाभाई रबारी (कांग्रेस)\r\n \r\n
- \r\n जीत का अंतर: 30,630 वोट\r\n \r\n
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सतीश पटेल ने कांग्रेस उम्मीदवार को किसी भी राउंड में टिकने नहीं दिया और 30,630 वोटों के भारी भरकम अंतर से जीत दर्ज की। मंजलपुर की यह बंपर जीत दर्शाती है कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का जमीनी नेटवर्क और मतदाताओं पर पकड़ आज भी अजेय है। यह जीत पार्टी कैडर के लिए एक बड़े मनोबल बूस्टर का काम करेगी।
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एक नज़र में: तीनों विधानसभा सीटों के नतीजे
\r\n\r\n| \r\n राज्य \r\n | \r\n \r\n विधानसभा सीट \r\n | \r\n \r\n विजेता (पार्टी) \r\n | \r\n \r\n उपविजेता (पार्टी) \r\n | \r\n \r\n जीत/बढ़त का अंतर \r\n | \r\n \r\n परिणाम \r\n | \r\n
|---|---|---|---|---|---|
| \r\n बिहार \r\n | \r\n \r\n बांकीपुर \r\n | \r\n \r\n प्रशांत किशोर (जनसुराज) \r\n | \r\n \r\n नीरज कुमार (भाजपा) \r\n | \r\n \r\n 18,953 वोट (आगे) \r\n | \r\n \r\n PK की जीत लगभग तय \r\n | \r\n
| \r\n मध्य प्रदेश \r\n | \r\n \r\n दतिया \r\n | \r\n \r\n घनश्याम सिंह (कांग्रेस) \r\n | \r\n \r\n आशुतोष तिवारी (भाजपा) \r\n | \r\n \r\n 6,016 वोट \r\n | \r\n \r\n कांग्रेस की जीत \r\n | \r\n
| \r\n गुजरात \r\n | \r\n \r\n मंजलपुर \r\n | \r\n \r\n सतीश पटेल (भाजपा) \r\n | \r\n \r\n भिखाभाई रबारी (कांग्रेस) \r\n | \r\n \r\n 30,630 वोट \r\n | \r\n \r\n भाजपा की बड़ी जीत \r\n | \r\n
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इन नतीजों के राजनीतिक मायने क्या हैं?
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- \r\n प्रशांत किशोर अब पूर्ण राजनेता: बांकीपुर की जीत साबित करती है कि प्रशांत किशोर अब केवल कमरों में बैठकर चुनावी रणनीति बनाने वाले मैनेजर नहीं रह गए हैं। वे जमीन पर उतरकर जनमत जीतने वाले एक मजबूत राजनेता बन चुके हैं। बिहार के आगामी चुनावों के लिए यह सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों के लिए खतरे की घंटी है।\r\n \r\n
- \r\n भाजपा के लिए आत्ममंथन का समय: दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने का प्रयोग बुरी तरह विफल हुआ। यह दर्शाता है कि स्थानीय क्षत्रपों की अनदेखी पार्टी को भारी पड़ सकती है। वहीं बांकीपुर जैसे अभेद्य किले का ढहना यह बताता है कि केवल पार्टी के नाम पर वोट मिलना अब आसान नहीं रहा।\r\n \r\n
- \r\n कांग्रेस के लिए संजीवनी: मध्य प्रदेश में दतिया की जीत कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह भरेगी। पार्टी को यह विश्वास मिला है कि यदि वह स्थानीय मुद्दों और भाजपा की अंतर्कलह का सही फायदा उठाए, तो मजबूत वापसी की जा सकती है।\r\n \r\n
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कुल मिलाकर, 30 जुलाई को हुए इन उपचुनावों के नतीजे आगामी विधानसभा और आम चुनावों के लिए कई नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे चुके हैं। देश की जनता अब नए विकल्पों को आजमाने से हिचक नहीं रही है।


