भोपाल/चेन्नई: मध्य प्रदेश में 24 मासूम जिंदगियों को निगलने वाले 'मौत के सिरप' कांड के मुख्य आरोपी को आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, जहरीला 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को तमिलनाडु के चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया है। 20 हजार रुपये का इनामी रंगनाथन अपनी पत्नी के साथ लंबे समय से फरार चल रहा था।READ ALSO:-कफ सिरप से बच्चों की मौत पर केंद्र सरकार का 'एक्शन', अब हर दवा की होगी बैच-टू-बैच टेस्टिंग, राज्यों को सख्त निर्देश जारी
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जांच में दिल दहला देने वाला खुलासा: दवा या धीमा ज़हर?
\r\n\r\nइस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हैरान करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि यह जानलेवा सिरप दवा बनाने के लिए अनुपयुक्त, यानी नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड के केमिकल से तैयार किया गया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n#WATCH | कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला | मध्य प्रदेश: छिंदवाड़ा के SP अजय पांडे ने कहा, "छिंदवाड़ा से रवाना हुई SIT ने श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया है। देर रात उन्हें घेरा गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया... चेन्नई में उनकी मेडिकल जाँच और आगे की प्रक्रिया… pic.twitter.com/mFaBEkzqOo
\r\n— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 9, 2025
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- \r\n 486 गुना ज़्यादा ज़हर: लैब जांच में सिरप के सैंपल में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) जैसे घातक रसायनों की मात्रा तय सीमा से 486 गुना अधिक पाई गई। एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह मात्रा इतनी घातक है कि यह एक हाथी जैसे विशाल जानवर के गुर्दे (Kidney) और मस्तिष्क (Brain) को भी नष्ट कर सकती है।\r\n \r\n
- \r\n बिना बिल के खरीदी 100 किलो ज़हरीला केमिकल: कंपनी के मालिक ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने चेन्नई की सनराइज बायोटेक से 100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था। इस खरीद का न तो कोई बिल है और न ही कोई रिकॉर्ड में एंट्री। भुगतान कभी कैश तो कभी G-Pay के माध्यम से किया गया, ताकि कोई सबूत न बचे।\r\n \r\n
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सबूत मिटाने की शातिर कोशिश
\r\n\r\nजांच अधिकारियों ने पाया कि कंपनी ने इस घटिया और ज़हरीले केमिकल की गुणवत्ता की कभी जांच ही नहीं कराई। जैसे ही मामला सामने आया, कंपनी ने केमिकल के स्टॉक को तेजी से खत्म कर दिया और दस्तावेजों को छिपाने की पूरी कोशिश की, ताकि जांच को भटकाया जा सके।
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मौत का वो बैच, जो छिंदवाड़ा जाने वाला था
\r\n\r\nSIT को कंपनी में बैच नंबर SR-13 की 589 बोतलें मिलीं, जो छिंदवाड़ा भेजे जाने के लिए तैयार थीं। यह वही बैच है जिसके सिरप को पीकर बच्चों की किडनी फेल हुई और ब्रेन में सूजन आई, जो अंततः उनकी मौत का कारण बनी। इन बोतलों को मई 2025 में बनाया गया था और इनकी एक्सपायरी डेट अप्रैल 2027 थी।
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प्रशासनिक अमले पर भी गिरी गाज
\r\n\r\nइस हृदय विदारक घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कदम उठाए हैं। मध्य प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उपसंचालक शोभित कोष्टा और छिंदवाड़ा व जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टरों को भी निलंबित कर दिया गया है।