खबरीलाल डेस्क
रिपोर्ट: अनिल कुमार शर्मा, विशेष संवाददाता
\r\nस्थान: धामपुर, बिजनौर

\r\nधामपुर: मोहल्ला बन्दूकचियान स्थित हज़रत बाबा हक़दाद अली शाह रहमतुल्लाह अलैहि का 221वां दो दिवसीय सालाना उर्स इस वर्ष भी अकीदत, मोहब्बत और धार्मिक उल्लास के माहौल में मनाया गया। उर्स के दोनों दिनों में दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शिरकत की।
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\r\nसालाना उर्स के दौरान महफ़िल-ए-मिलाद शरीफ़, गुलपोशी, चादरपोशी, फ़ातिहाख़्वानी, ख़ुसूसी दुआ और लंगर सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। दरगाह परिसर में पूरे आयोजन के दौरान रूहानी और नूरानी माहौल बना रहा। अकीदतमंदों ने बारगाह में हाज़िरी देकर अपनी मुरादों के साथ-साथ मुल्क और कौम की सलामती, अम्न-ओ-अमान और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
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\r\nमहफ़िल-ए-मिलाद से हुआ दो दिवसीय उर्स का आगाज़
\r\nउर्स के पहले दिन 1 सितंबर को महफ़िल-ए-मिलाद शरीफ़ का आयोजन किया गया। इसी के साथ दो दिवसीय सालाना उर्स का विधिवत आगाज़ हुआ।
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\r\nमहफ़िल की शुरुआत हाफ़िज़ आसिफ़ कुरैशी ने बारगाह-ए-इलाही में तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से की। पवित्र कुरआन की तिलावत के बाद महफ़िल में नात-ए-पाक का सिलसिला शुरू हुआ।
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\r\nहाफ़िज़ मोहम्मद फ़ैज़ान ने बारगाह-ए-सरवर-ए-कौनैन ﷺ में नात-ए-पाक पेश की। उनकी नात ने महफ़िल में मौजूद अकीदतमंदों को रूहानी एहसास से भर दिया। इसके बाद अलग-अलग वक्ताओं और नातख्वानों ने मिलाद शरीफ़ पेश कर महफ़िल को इश्क़-ए-रसूल ﷺ की कैफ़ियत से सराबोर कर दिया।
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\r\nनात और मिलाद के कलाम पर झूमे हाज़िरीन
\r\nमहफ़िल के दौरान नासिर अकरमी, हबीब हसन सक़लैनी, फ़रमान अली, नूर मोहम्मद, इस्तेखार और हाफ़िज़ शाह आलम ने हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का मिलाद पढ़ा।
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\r\nइस दौरान महफ़िल में मौजूद शायरों और छोटे बच्चों ने भी अपने खूबसूरत कलाम पेश किए। बच्चों और शायरों की प्रस्तुतियों को सुनकर हाज़िरीन ने उत्साह व्यक्त किया और पूरी महफ़िल का माहौल रूहानी रंग में रंग गया।
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\r\nनात और मिलाद के दौरान अकीदतमंदों में विशेष उत्साह देखने को मिला। दरगाह परिसर में इश्क़-ए-रसूल ﷺ की कैफ़ियत के साथ लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
\r\nदूसरे दिन मज़ार-ए-मुबारक पर हुई गुलपोशी और चादरपोशी
\r\nउर्स के दूसरे दिन 2 सितंबर को बाद नमाज़-ए-असर हज़रत बाबा हक़दाद अली शाह रहमतुल्लाह अलैहि के मज़ार-ए-मुबारक पर गुलपोशी और चादरपोशी की गई।
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\r\nअकीदतमंदों ने पूरी अकीदत के साथ मज़ार-ए-मुबारक पर चादर पेश की और गुलपोशी की। इसके बाद फ़ातिहाख़्वानी का आयोजन हुआ।
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\r\nइस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अकीदतमंद मौजूद रहे। लोगों ने बारगाह में हाज़िरी देकर अपने परिवार, समाज और देश की सलामती के लिए दुआएं कीं।
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\r\nमुल्क में अम्न और भाईचारे के लिए हुई खास दुआ
\r\nउर्स के अवसर पर मौलाना शान मोहिउद्दीन ने ख़ुसूसी दुआ कराई। दुआ में मुल्क में अम्न-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, खुशहाली और समाज में शांति बनाए रखने की कामना की गई।
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\r\nअकीदतमंदों ने भी दुआ में शामिल होकर देश और समाज की तरक्की तथा लोगों की सलामती के लिए दुआ की।
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\r\nउर्स जैसे धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं और ऐसे अवसरों पर आपसी भाईचारे तथा सौहार्द का संदेश भी देखने को मिलता है। धामपुर में आयोजित इस उर्स के दौरान भी यही रूहानी और भाईचारे वाला माहौल नजर आया।
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\r\nलंगर में सैकड़ों लोगों ने हासिल किया तबर्रुक
\r\nदो दिवसीय उर्स के दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों लोगों ने शिरकत की और तबर्रुक हासिल किया।
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\r\nदरगाह परिसर में आने वाले अकीदतमंदों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी। लोगों ने लंगर में शामिल होकर तबर्रुक हासिल किया और आयोजन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
\r\nउर्स के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ लंगर का आयोजन भी प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
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\r\nबड़ी संख्या में अकीदतमंद रहे मौजूद
\r\nउर्स के मौके पर दरगाह के खादिम रईस अल्वी, हज़रत सय्यद नमक शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह के सज्जादा नशीन मोहम्मद आबिद सक़लैनी, हैदर अली आढ़ती, काला कुरैशी, नज़ाकत हुसैन अल्वी, आसिफ़, मोहम्मद जावेद, हाफ़िज़ अहमद रज़ा, मोनिस अल्वी, अहमद रज़ा, ऐजाज़ धामपुरी और नईम सैफ़ी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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\r\nआयोजन के दौरान लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और दरगाह पर हाज़िरी देकर दुआएं मांगीं।
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\r\nरूहानी माहौल में संपन्न हुआ 221वां सालाना उर्स
\r\nदो दिवसीय सालाना उर्स के दौरान मोहल्ला बन्दूकचियान स्थित दरगाह परिसर में लगातार रूहानी और नूरानी माहौल बना रहा। महफ़िल-ए-मिलाद से शुरू हुआ उर्स गुलपोशी, चादरपोशी, फ़ातिहाख़्वानी, ख़ुसूसी दुआ और लंगर के साथ आगे बढ़ा।
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\r\nअकीदतमंदों ने हज़रत बाबा हक़दाद अली शाह रहमतुल्लाह अलैहि की बारगाह में हाज़िरी देकर अपनी मुरादों के लिए दुआ की। साथ ही मुल्क में अम्न, भाईचारे, खुशहाली और समाज में आपसी सौहार्द कायम रहने की कामना की गई।
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\r\nइस तरह हज़रत बाबा हक़दाद अली शाह रहमतुल्लाह अलैहि का 221वां सालाना उर्स अकीदत और मोहब्बत के साथ संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में धार्मिक श्रद्धा के साथ आपसी भाईचारे और शांति का संदेश भी प्रमुख रूप से दिखाई दिया।