शकील अहमद
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पहाड़ों पर हो रही लगातार झमाझम बारिश और नदियों के बढ़े हुए जलस्तर ने मैदानी इलाकों में तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। विशेष तौर पर चाँदपुर थाना क्षेत्र के खादर क्षेत्र में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि बाढ़ जैसे संकट ने लोगों की नींद उड़ा दी है। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है, और इस कुदरती कहर ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। आइए जानते हैं इस आपदा की ज़मीनी हक़ीक़त और इससे जुड़े हर एक पहलू को विस्तार से।
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​पहाड़ों की बारिश और मैदानी तबाही: कैसे बिगड़े हालात?

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​अक्सर जब पर्वतीय अंचलों में भारी बारिश होती है, तो उसका सीधा दबाव मैदानी नदियों और निचले इलाकों पर पड़ता है। बिजनौर का खादर इलाका भौगोलिक रूप से जलभराव और बाढ़ के प्रति बेहद संवेदनशील माना जाता है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी नालों और स्थानीय नदियों का पानी ओवरफ्लो होकर रिहायशी बस्तियों और कृषि भूमि की तरफ बहने लगा है।
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​प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद प्रकृति के इस रौद्र रूप के आगे फिलहाल हर कोई लाचार नजर आ रहा है। पानी के तेज बहाव ने निचले इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे अचानक आई इस स्थिति से निपटने के लिए ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
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​किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी: फसलें हुईं पूरी तरह चौपट

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​इस तबाही का सबसे बड़ा और दर्दनाक शिकार बना है जिले का अन्नदाता—किसान। चांदपुर खादर क्षेत्र के खेतों में इस समय कई-कई फीट पानी भरा हुआ है। धान और अन्य मौसमी फसलें जो पकने की कगार पर थीं या बढ़वार के चरण में थीं, पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं।
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    आर्थिक बर्बादी: पानी में डूबी फसलें सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी बर्बाद हो गई है।
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    मुआवजे की आस: किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर और अपनी जमा-पूंजी लगाकर खेती की थी, लेकिन इस तबाही ने उन्हें आर्थिक रूप से सड़क पर ला दिया है। अब वे सरकार और प्रशासन से विशेष मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।
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सड़कें बनीं तालाब, आधा दर्जन गांवों का मुख्य मार्ग से कटा संपर्क

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​भारी जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। चांदपुर खादर क्षेत्र की मुख्य सड़कें किसी विशाल तालाब या झील में तब्दील हो चुकी हैं। सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी बह रहा है, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही भी रोकनी पड़ी है।
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​इस भयंकर जलभराव के कारण आधा दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग और शहरी इलाकों से पूरी तरह कट गया है। दूध, सब्जी और अन्य जरूरी चिकित्सीय आपूर्तियों के लिए भी इन गांवों के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीज या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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​जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर मुसाफिर

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​हालात इतने जोखिम भरे हैं कि सड़कें पानी में डूब चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद रोजमर्रा के काम-धंधे और मजबूरी के चलते मुसाफिर और ग्रामीण अपनी जान को हथेली पर रखकर सफर करने को विवश हैं।
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    ​उफनते पानी और तेज धार के बीच लोग पैदल, साइकिल और मोटरसाइकिल से पार पाने की कोशिश कर रहे हैं।
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    ​कई जगहों पर बाइक सवार पानी के तेज बहाव में संतुलन खोकर गिरते-गिरते बचे हैं।
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    ​स्थानीय गोताखोरों या प्रशासन की तरफ से अभी तक हर मार्ग पर पुख्ता बैरिकेडिंग या रेस्क्यू टीम तैनात न होने के कारण किसी भी वक्त कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
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प्रशासन की पैनी नजर: क्या उठ रहे हैं कदम?

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​घटना की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। चांदपुर थाना क्षेत्र की पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें खादर इलाके के जलमग्न गांवों का जायजा लेने में जुटी हैं।
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​प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। जैसे ही पानी का स्तर कम होगा, नुकसान का आधिकारिक आंकलन (Survey) कराया जाएगा ताकि प्रभावित किसानों और परिवारों को सरकारी नियमों के तहत राहत पहुंचाई जा सके। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी राहत और बचाव कार्यों की रफ्तार तेज होने का इंतजार ग्रामीण बेसब्री से कर रहे हैं।
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​एहतियात है सबसे बड़ा बचाव

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​प्रकृति के इस तांडव के आगे इंसानी इंतजाम अक्सर छोटे पड़ जाते हैं। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि खादर क्षेत्र के लोग अनावश्यक रूप से उफनते रास्तों पर निकलने से बचें। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों को मिलकर इस आपदा का सामना करना होगा ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके। आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज क्या रुख लेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।