ओस्लो/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक, नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान कर दिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को ओस्लो में यह घोषणा की कि इस वर्ष का शांति पुरस्कार वेनेजुएला की प्रभावशाली विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) को दिया जाएगा।READ ALSO:-तेजस्वी के 'नौकरी वाले' वादे का X-Ray: 3.5 करोड़ नौकरी, 10 लाख करोड़ का सालाना बोझ... बिहार का खजाना देगा साथ?
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मचाडो को यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता की बहाली के लिए उनके अथक संघर्ष के सम्मान में प्रदान किया गया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो स्वयं को इस पुरस्कार का प्रबल दावेदार बता रहे थे, एक बार फिर खाली हाथ रह गए।
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मारिया कोरिना मचाडो: संघर्ष और सम्मान
\r\n\r\nनोबेल समिति ने वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक नेता मारिया कोरिना मचाडो के चुनाव को 'साहस और प्रतिबद्धता की मिसाल' बताया है।
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पुरस्कार का कारण
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- \r\n लोकतंत्र और स्वतंत्रता: मचाडो को वेनेजुएला में तानाशाही से लोकतंत्र की ओर न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए संघर्ष करने हेतु सम्मानित किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n अथक संघर्ष: वह कई वर्षों से अपने देश में सत्तावाद और राजनीतिक दमन के खिलाफ एक प्रमुख आवाज रही हैं। नोबेल समिति के अनुसार, वह एक ऐसी महिला हैं जो बढ़ते अंधकार के बीच भी लोकतंत्र की लौ जलाए रखती हैं।\r\n \r\n
- \r\n एकजुटता: वह लंबे समय तक विभाजित रहे विपक्षी दलों को स्वतंत्र चुनाव और प्रतिनिधि सरकार की मांग पर एकजुट करने वाली प्रमुख शख्सियत रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n प्रेरणास्रोत: पिछले एक साल से उन्हें छिपकर रहना पड़ रहा है, लेकिन जीवन पर गंभीर खतरों के बावजूद उन्होंने देश में रहने का जो चुनाव किया है, उसने लाखों लोगों को प्रेरित किया है।\r\n \r\n
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मारिया कोरिना मचाडो को अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में दिए गए शांति पुरस्कार के तीनों मानदंडों पर खरा पाया गया है।
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डोनाल्ड ट्रंप का टूटा सपना
\r\n\r\nनोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से ठीक पहले तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पुरस्कार जीतने की उम्मीद पाले हुए थे। उन्होंने खुद कई बार सार्वजनिक रूप से इस बात पर जोर दिया था कि वह अपने विदेश नीतिगत हस्तक्षेपों, खासकर गाजा संघर्ष में संघर्ष विराम की योजना को मंजूरी देने के कारण इस पुरस्कार के हकदार हैं।
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ट्रंप की दावेदारी
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- \r\n दावे और नामांकन: ट्रंप को कई देशों और रिपब्लिकन सांसदों द्वारा विभिन्न समझौतों और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के लिए नामांकित किया गया था। यहाँ तक कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सार्वजनिक रूप से उन्हें नोबेल का हकदार बताया था।\r\n \r\n
- \r\n विशेषज्ञों की राय: हालांकि, नोबेल इतिहास विशेषज्ञों ने पहले ही आशंका व्यक्त की थी कि ट्रंप के जीतने की संभावना कम है। उनका मानना है कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' जैसी नीतियां नोबेल पुरस्कार के व्यापक वैश्विक शांति और भाईचारे के आदर्शों के विपरीत हैं।\r\n \r\n
- \r\n परिणाम: घोषणा होते ही ट्रंप की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। उन्हें इस बार नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला है, जिससे उनका इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने का इंतजार अगले साल तक के लिए बरकरार रहेगा।\r\n \r\n
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इस वर्ष शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 व्यक्ति या संस्थाओं के नामांकन प्राप्त हुए थे।
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FAQ: नोबेल शांति पुरस्कार
\r\n\r\nसवाल 1: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 किसे मिला है? जवाब: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) को मिला है।
\r\n\r\nसवाल 2: उन्हें यह पुरस्कार क्यों दिया गया है? जवाब: उन्हें यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता की बहाली के लिए उनके अथक संघर्ष और तानाशाही से लोकतंत्र में शांतिपूर्ण परिवर्तन के प्रयासों के लिए दिया गया है।
\r\n\r\nसवाल 3: क्या डोनाल्ड ट्रंप इस बार नामांकित थे? जवाब: हाँ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को विभिन्न देशों और रिपब्लिकन सांसदों द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।
\r\n\r\nसवाल 4: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कहाँ की जाती है? जवाब: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा की जाती है। अन्य नोबेल पुरस्कारों की घोषणा स्वीडन के स्टॉकहोम में होती है।
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