खबरीलाल डेस्क
खबरीलाल (Khabreelal) विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: लखनऊ/मेरठ: उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून पूरी तरह से मेहरबान होने के साथ-साथ अब जानलेवा भी साबित होने लगा है। पिछले 15 दिनों से प्रदेश भर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने अब 'जलप्रलय' का रूप लेना शुरू कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि गांवों से लेकर शहरों तक हाहाकार मचा हुआ है।READ ALSO:-मेरठ में गरजा बुलडोजर: हापुड़ अड्डे की मशहूर 'जगन छोले भटूरे' की दुकान का आधा हिस्सा जमींदोज, भाजपाइयों और व्यापारियों का भारी हंगामा
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लगातार हो रही इस आसमानी आफत के कारण प्रदेश की जीवनदायिनी नदियां—गंगा और यमुना समेत 10 से ज्यादा छोटी-बड़ी नदियां उफान पर आ गई हैं। सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की 4 प्रमुख नदियां 'खतरे के निशान' (Danger Mark) को पार कर चुकी हैं। बांधों और बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कई जिलों में बाढ़ का पानी गांवों और खेतों में घुस गया है।
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गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। तरबगंज में अब तक 50 बीघा जमीन नदी में समा चुकी है।

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आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में जानते हैं कि यूपी के किस जिले में बाढ़ ने कितनी तबाही मचाई है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का क्या आदेश है और मौसम विभाग का अगला अलर्ट क्या है।
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बांधों के खुले गेट: 3.20 लाख क्यूसेक पानी ने मचाई तबाही

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पहाड़ी राज्यों (उत्तराखंड और हिमाचल) के साथ-साथ तराई इलाकों में हो रही लगातार बारिश का सीधा असर यूपी के बांधों और बैराजों पर पड़ा है। जलस्तर बढ़ने के कारण प्रशासन को मजबूरी में बांधों के गेट खोलने पड़ रहे हैं, जिसका खामियाजा निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
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    सोनभद्र में कनहर बांध का अलर्ट: पूर्वांचल के सोनभद्र जिले में कनहर बांध (Kanhar Dam) का जलस्तर अचानक से खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया और इसके 3 गेट खोल दिए हैं। इससे निचले इलाकों में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया है और तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है।
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    सीतापुर में जलप्रलय की आहट: सबसे बुरे हालात सीतापुर और लखीमपुर के तराई बेल्ट में देखने को मिल रहे हैं। बनबसा, गिरिजा और घाघरा बैराजों से एक साथ 3.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इतनी भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से शारदा और घाघरा नदियां रौद्र रूप धारण कर चुकी हैं। इन दोनों नदियों का पानी उफन कर सीतापुर के दर्जनों गांवों में घुस गया है।
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    नाव ही बनी सहारा: सीतापुर के कई गांवों में पक्की और कच्ची सड़कें पूरी तरह से पानी में डूब चुकी हैं। एक गांव का मंजर तो यह है कि कच्ची रोड के ऊपर से पानी बह रहा है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर दैनिक जरूरतों के लिए नावों (Boats) का सहारा ले रहे हैं। बच्चों का स्कूल जाना और बीमारों का अस्पताल पहुंचना पूरी तरह से ठप हो गया है।
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खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं ये 4 नदियां

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केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के कई जिलों में नदियां 'लाल निशान' यानी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे तटवर्ती इलाकों में कभी भी बाढ़ का पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है:
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    हिंडन नदी (Hindon River) का खौफ: पश्चिमी यूपी के बागपत और दिल्ली-एनसीआर से सटे नोएडा (Noida) में हिंडन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हिंडन के खादर इलाकों (Floodplains) में बने अवैध फार्म हाउस और कॉलोनियों में पानी भरना शुरू हो गया है। प्रशासन ने लोगों से इलाका खाली करने की अपील की है।
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    बदायूं में गंगा (Ganga) का रौद्र रूप: पवित्र गंगा नदी भी इस समय उफान पर है। बदायूं जिले में गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जिससे कछला घाट और आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
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    घाघरा (Ghaghra) की लहरों का तांडव: रामनगरी अयोध्या, गोंडा और पूर्वांचल के बलिया में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर है। इन जिलों में हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है और किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
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    कुशीनगर में गंडक (Gandak): बिहार सीमा से सटे कुशीनगर जिले में नारायणी (गंडक) नदी भी लाल निशान पार कर गई है। नेपाल से आ रहे पानी ने यहां के तटबंधों पर भारी दबाव बना दिया है।
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बस्ती में कटान का खौफ, लखीमपुर में मगरमच्छ की दहशत

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बाढ़ के पानी के साथ-साथ अब नदियों का कटान (River Erosion) और जंगली जानवरों का खौफ भी लोगों की नींद उड़ा रहा है।
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    बस्ती में सरयू नदी लील रही है जमीन: बस्ती जिले में सरयू नदी के किनारे तेजी से कटान हो रहा है। नदी की तेज धाराएं उपजाऊ कृषि भूमि को अपने अंदर समा रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते कई बड़े और पुराने पेड़ जड़ से उखड़ कर नदी की तेज धार में बह गए। ग्रामीण अपनी आंखों के सामने अपनी जमीनों को नदी में समाते हुए देखने को मजबूर हैं।
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    लखीमपुर खीरी में सड़क पर दौड़ा मगरमच्छ: दुधवा नेशनल पार्क से सटे लखीमपुर खीरी जिले में बाढ़ के पानी के साथ जंगली जानवर भी रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। जिले के एक गांव में उस वक्त दहशत फैल गई, जब एक विशालकाय मगरमच्छ (Crocodile) बाढ़ के पानी से निकलकर मुख्य सड़क पर दौड़ता हुआ नजर आया। ग्रामीणों ने बमुश्किल अपनी जान बचाई और वन विभाग को इसकी सूचना दी। प्रशासन ने लोगों को रात के समय घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है।
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लखीमपुर के रकेहटी कस्बे में सड़क पर मगरमच्छ दौड़ता नजर आया। इससे ग्रामीणों में दहशत है।

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मौसम विभाग (IMD) का ताज़ा अलर्ट: 54 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश के मौसम को लेकर नया और सख्त अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 52 शहरों में औसतन 5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, लेकिन असली आफत अभी बाकी है।
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    54 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट: मौसम विभाग ने आज (शुक्रवार को) प्रदेश के 54 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं शनिवार के लिए भी 30 जिलों में बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है।
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    बिजली गिरने और तेज हवाओं का खतरा: बारिश के साथ-साथ आसमान से आफत (आकाशीय बिजली) गिरने की भी भारी आशंका है। मौसम विभाग ने बताया है कि प्रदेश के कई हिस्सों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं।
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शहरों के मौसम का हाल:

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    गाजियाबाद: शुक्रवार सुबह 11 बजे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। करीब 10 मिनट की झमाझम बारिश के बाद मौसम ठंडा हो गया और उमस से राहत मिली। सुबह न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 34 डिग्री रहने का अनुमान है। दिनभर बादल और हल्की धूप की आंख-मिचौली चलती रहेगी।
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    मेरठ और बरेली: शुक्रवार दोपहर को मेरठ (Meerut) और बरेली (Bareilly) में भी अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। काले बादलों के साथ बारिश शुरू हो गई और हल्की ठंडी हवाएं चलने लगीं, जिससे मौसम बेहद सुहाना हो गया। मौसम विभाग का कहना है कि इन दोनों शहरों में पूरे दिन रुक-रुककर हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा।
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सीएम योगी का सख्त आदेश: 'फील्ड में उतरें अफसर'

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हालात की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने भी सख्त रुख अपना लिया है। सीएम ने प्रशासन और सभी संबंधित विभागों के आला अफसरों को सीधे 'फील्ड में उतरने' के आदेश दिए हैं।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि, "अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलें और बारिश, बाढ़ तथा बिजली गिरने से प्रभावित लोगों के बीच जाकर उनकी हरसंभव मदद करें। राहत और बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" NDRF और SDRF की टीमों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। आम जनता से अपील की गई है कि वे नदियों, उफनते नालों और जर्जर इमारतों से दूरी बनाकर रखें।
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