उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे प्रदेश (Expressway State) के रूप में नई पहचान दिलाने के बाद, अब राज्य सरकार कनेक्टिविटी के एक और महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश के दो सबसे प्रमुख एक्सप्रेसवे—यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway)—को आपस में जोड़ने के लिए गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे (Ganga Yamuna Link Expressway) का निर्माण किया जा रहा है।READ ALSO:-यूपी का 'टेक-अवतार': बजट 2026-27 में AI, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर्स के लिए खुला खजाना, 'सिलिकॉन वैली' बनने की राह पर उत्तर प्रदेश
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इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने खजाना खोल दिया है। सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA - यीडा) को भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए 1204 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट जारी कर दिया है। इस गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे के बन जाने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच न केवल दूरियां कम होंगी, बल्कि जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) तक मालवाहक वाहनों और यात्रियों का पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
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1204 करोड़ रुपये का बजट और शासन की मंजूरी
\r\n\r\nनोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सरकार योजना बनाकर युद्धस्तर पर काम कर रही है। राज्य सरकार ने जमीन खरीदने के लिए यमुना प्राधिकरण (YEIDA) को 1204 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर दिया है।
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इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव निर्मष कुमार शुक्ल ने यीडा के सीईओ (CEO) डॉ. अरुणवीर सिंह को आधिकारिक पत्र भेज दिया है। यह पत्र 17 फरवरी 2026 को जारी किया गया है। यीडा के सीईओ ने बताया कि प्राधिकरण सबसे पहले अपने क्षेत्र की भूमि खरीद की प्रक्रिया पूरी करेगा और फिर इसे निर्माण के लिए यूपीडा (UPEIDA) को सौंप देगा। इस पूरी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 4000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से लगभग 1200 करोड़ रुपये केवल जमीन अधिग्रहण पर खर्च किए जा रहे हैं।
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क्या होगा गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे का रूट?
\r\n\r\nयह लिंक एक्सप्रेसवे अपने आप में एक मास्टरपीस होने वाला है। अधिकारियों द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, इसका रूट और अलाइनमेंट कुछ इस प्रकार होगा:
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- \r\n कुल लंबाई: गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 74.3 किलोमीटर होगी।\r\n \r\n
- \r\n शुरुआती बिंदु: यह लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर जिले के स्याना इलाके के पास बन रहे गंगा एक्सप्रेसवे के 44.3 किलोमीटर पॉइंट (माइलस्टोन) से शुरू होगा।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम बिंदु: यह यमुना सिटी के सेक्टर-21 (फिल्म सिटी के पास) में मौजूद यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किलोमीटर पॉइंट पर आकर जुड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n एलिवेटेड रोड: 74.3 किलोमीटर की कुल लंबाई में से लगभग 20 किलोमीटर का हिस्सा यमुना प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र से होकर गुजरेगा। घनी आबादी और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए इस 20 किलोमीटर में से 9 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह से एलिवेटेड (Elevated) बनाया जाएगा।\r\n \r\n
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56 गांवों की जमीन अधिग्रहण: किसानों को मिलेगा लाभ
\r\n\r\nगंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कुल 56 गांवों की भूमि पर किया जाएगा। इन 56 गांवों में से 8 गांव गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिले के हैं, जबकि बाकी 48 गांव बुलंदशहर जिले के अंतर्गत आते हैं।
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भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले ये गांव मुख्य रूप से खुर्जा, बुलंदशहर, स्याना और शिकारपुर तहसीलों में आते हैं। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किया जाए और उन्हें बाजार दर से बेहतर मुआवजा (Compensation) दिया जाए।
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यीडा क्षेत्र के इन 16 गांवों में होगी जमीन की खरीद
\r\n\r\nयमुना प्राधिकरण (YEIDA) अपने 20 किलोमीटर के हिस्से के लिए 16 गांवों की लगभग 740 एकड़ (या कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 754 एकड़) जमीन खरीदेगा। प्राधिकरण ने जमीन खरीद के लिए अपना सर्वेक्षण (Survey) पूरा कर लिया है। जिन प्रमुख गांवों की जमीन का अधिग्रहण होना है, उनमें शामिल हैं:
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- \r\n जेवर का मेहंदीपुर बांगर\r\n \r\n
- \r\n भाईपुर ब्रह्मनान\r\n \r\n
- \r\n रबूपुरा\r\n \r\n
- \r\n भुन्नाटगा\r\n \r\n
- \r\n म्याना\r\n \r\n
- \r\n फाजिलपुर\r\n \r\n
- \r\n कल्लूपुरा\r\n \r\n
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जमीन खरीद की प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू होने वाली है, जिससे इन गांवों के किसानों को सीधे तौर पर 1204 करोड़ रुपये के बजट का फायदा मिलेगा।
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निर्माण की जिम्मेदारी यूपीडा (UPEIDA) के पास
\r\n\r\nजमीन खरीदने का काम भले ही यमुना प्राधिकरण कर रहा हो, लेकिन गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा किया जाएगा। यूपीडा वही संस्था है जिसने सफलतापूर्वक पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है।
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स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के इलाकों के लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ 24 मीटर चौड़ी सर्विस रोड (Service Road) का भी निर्माण किया जाएगा। इससे स्थानीय लोग बिना टोल दिए भी सुरक्षित रूप से अपनी रोजमर्रा की यात्रा कर सकेंगे।
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को मिलेगा सीधा फायदा
\r\n\r\nइस लिंक एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिलेगा।
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- \r\n कार्गो मूवमेंट में तेजी: नोएडा एयरपोर्ट पर भारी मात्रा में मालवाहक (Cargo) विमानों को उतारने की तैयारी है। लिंक एक्सप्रेसवे बन जाने से पूर्वी यूपी, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर के औद्योगिक उत्पाद सीधे और कम समय में एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n यात्री कनेक्टिविटी: पश्चिमी और पूर्वी यूपी के लोग गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे, जिससे दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट पर निर्भरता कम होगी।\r\n \r\n
- \r\n समय की बचत: अभी मेरठ या प्रयागराज से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में कई घंटे लगते हैं और भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे इस यात्रा के समय को आधे से भी कम कर देगा।\r\n \r\n
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औद्योगिक विकास और रियल एस्टेट में आएगा उछाल
\r\n\r\nकनेक्टिविटी बढ़ने से सबसे ज्यादा असर उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इस लिंक एक्सप्रेसवे के बन जाने से यमुना सिटी के इंडस्ट्रियल सेक्टर 28, 29, 32 और 33 सीधे तौर पर इससे जुड़ जाएंगे। यहां देश-विदेश की बड़ी कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां लगा रही हैं। लॉजिस्टिक्स (Logistics) और सप्लाई चेन मजबूत होने से इन कंपनियों को अपना माल बंदरगाहों और एयरपोर्ट तक पहुंचाने में आसानी होगी।
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इसके अलावा, गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर जिले में रियल एस्टेट (Real Estate) सेक्टर में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है। जिन 56 गांवों से यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां की जमीनें अब 'सोना' बन रही हैं। नए आवासीय प्रोजेक्ट्स, कमर्शियल हब और वेयरहाउसिंग (Warehousing) के लिए निवेशक इन इलाकों में भारी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी की ओर बढ़ता कदम
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर (1 Trillion Dollar Economy) बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का होना बहुत जरूरी है।
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वर्तमान में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिम से पूर्व को जोड़ रहे हैं। अब इन सभी बड़े हाईवेज को इंटरकनेक्ट (Interconnect) किया जा रहा है ताकि एक मजबूत 'ग्रिड' (Grid) तैयार हो सके। गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे इसी दिशा में उठाया गया एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। 594 किलोमीटर लंबे मुख्य गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का मेन कैरिजवे का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और इस पर जल्द ही ट्रैफिक शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही जब यह लिंक एक्सप्रेसवे भी चालू हो जाएगा, तो यह पूरा क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बन जाएगा।
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विकास की नई रफ्तार
\r\n\r\nअंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि 1204 करोड़ रुपये की लागत से अधिग्रहित की जाने वाली जमीन पर बनने वाला गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे केवल दो सड़कों को नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य को जोड़ेगा। 74.3 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और नोएडा एयरपोर्ट की उपयोगिता कई गुना बढ़ जाएगी। अब सभी की निगाहें जनवरी-फरवरी से शुरू हो रहे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की रफ्तार और यूपीडा द्वारा इसके जल्द निर्माण पर टिकी हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले 74.3 किलोमीटर लंबे गंगा यमुना लिंक एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दे दी है। सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए यमुना प्राधिकरण (YEIDA) को 1204 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के लिए बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के 56 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसमें से यीडा क्षेत्र के 16 गांवों की 740 एकड़ जमीन खरीदने का सर्वे पूरा हो चुका है। करीब 4000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे (जिसमें 9 किमी एलिवेटेड रोड शामिल है) यूपीडा द्वारा बनाया जाएगा। इसके बनने से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच बेहद आसान और तेज हो जाएगी।