उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कई जिलों से इन दिनों एक बेहद हैरान करने वाली, लेकिन व्यवस्था को आईना दिखाने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। आमतौर पर जब गांव में सड़क नहीं बनती या पानी भरता है, तो बड़े-बुजुर्ग ग्राम प्रधान या अधिकारियों को कोस कर शांत हो जाते हैं। लेकिन आज की पीढ़ी, जिसे 'जेन-अल्फा' (Gen-Alpha) कहा जा रहा है, वह चुप बैठने वालों में से नहीं है।
\r\n\r\nबस्ती (Basti), हमीरपुर (Hamirpur) और उन्नाव (Unnao) जिलों में स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी बुनियादी सुविधाओं (पक्की सड़क और साफ-सफाई) के लिए सीधे सत्ता और प्रशासन को चुनौती दे दी है। कीचड़ में सने जूते, भीगी हुई यूनिफॉर्म और भारी स्कूल बैग के साथ ये बच्चे अब सड़कों पर उतर आए हैं और अधिकारियों से लेकर विधायकों तक को जवाबदेह बना रहे हैं। आइए, अलग-अलग जिलों से आई इस छात्र-क्रांति की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।
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बस्ती: जब नौनिहालों ने रोका विधायक का काफिला
\r\n\r\nबस्ती जिले के रुधौली विधानसभा क्षेत्र में बच्चों के गुस्से का एक अनूठा नजारा देखने को मिला। यहाँ के मुड़ाडिहा उर्फ भोपालपुर हनुमानगंज की तरफ जाने वाले सरयू नहर खंड चार नहर मार्ग पर भयंकर जलभराव की समस्या है।
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nहनुमानगंज नहर मार्ग से होकर हर दिन इंटर कॉलेज, पूर्व माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालयों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं गुजरते हैं। हल्की सी बारिश में भी यह कच्चा रास्ता दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाता है। साइकिल से जाने वाले बच्चे अक्सर इस कीचड़ में गिरकर चोटिल हो जाते हैं और उनके कपड़े व जूते स्कूल पहुंचने से पहले ही गंदे हो जाते हैं।
\r\n\r\nबुधवार को जब स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चे अपने घरों की ओर लौट रहे थे, तभी वहां से स्थानीय समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक राजेंद्र चौधरी का काफिला गुजर रहा था। कीचड़ और जलभराव से त्रस्त इन स्कूली बच्चों (Gen Alpha) ने बिना किसी डर के सीधे विधायक के काफिले के सामने आकर गाड़ियां रोक दीं।
\r\n\r\nविधायक का एक्शन:
\r\n\r\nबच्चों के इस अप्रत्याशित कदम से एक बार तो सुरक्षाकर्मी भी हैरान रह गए। बच्चों ने विधायक राजेंद्र चौधरी को अपनी समस्या दिखाई और दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, वे पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति को समझते हुए विधायक ने गाड़ी रोकी, बच्चों की बात सुनी और वहीं से मौके पर ही संबंधित विभाग के बड़े अधिकारियों को फोन लगाया। विधायक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इस जलभराव का तत्काल निराकरण किया जाए। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही बच्चों ने विधायक का काफिला वहां से जाने दिया।
\r\n\r\nहमीरपुर: कलेक्ट्रेट तक बच्चों का पैदल मार्च और वायरल वीडियो
\r\n\r\nहमीरपुर जिले में भी छात्र लगातार आंदोलित हैं। यहां के बच्चों ने तो अपनी मांगों को मनवाने के लिए 'गांधीवादी' तरीके से पैदल मार्च से लेकर डिजिटल स्ट्राइक (Social Media) तक का सहारा लिया है।
\r\n\r\nकलेक्ट्रेट पर धरना:
\r\n\r\nबुधवार को कुरारा क्षेत्र के भौली और बचरौली गांव के स्कूली बच्चों ने स्कूल जाने के बजाय सीधे कलेक्ट्रेट (DM Office) का रुख कर लिया। बच्चों का कहना था कि स्कूल जाने वाली सड़क इतनी बदहाल है कि वहां से निकलना मौत को दावत देने जैसा है। जब पुलिस को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने सिटी फॉरेस्ट के पास इन बच्चों को रोकने की कोशिश की। लेकिन ये होनहार बच्चे पुलिस को चकमा देकर गलियों और कच्चे रास्तों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए और बाहर धरने पर बैठ गए। इसके बाद एडीएम (ADM) राकेश कुमार ने आनन-फानन में स्थानीय अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजा।
\r\n\r\nअतरैया डेरा का वायरल वीडियो:
\r\n\r\nहमीरपुर के ही सुमेरपुर क्षेत्र की अतरैया ग्राम पंचायत के मजरा अतरैया डेरा के बच्चों ने एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाते हुए अपना एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
\r\n\r\nदरअसल, अतरैया डेरा में सिर्फ कक्षा 5 तक का स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को अतरैया के उच्च प्राथमिक विद्यालय जाना पड़ता है, लेकिन गांव से स्कूल तक कोई पक्की सड़क नहीं है। बच्चों ने वीडियो में अपील की है कि उन्हें कीचड़ से आजादी दिलाई जाए।
\r\n\r\nग्राम प्रधान का जवाब:
\r\n\r\nइस मामले में ग्राम प्रधान प्रीति यादव ने सफाई देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके कारण मार्ग की नाप-जोख नहीं हो पा रही थी। अब चकबंदी पूरी हो चुकी है और जैसे ही शासन से बजट मिलेगा, सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा।
\r\n\r\n(गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले हमीरपुर के ही चंदपुर गांव के बच्चों ने भी ऐसा ही वीडियो वायरल किया था, जिसके बाद वहां काम शुरू हो गया। इसी से प्रेरित होकर अतरैया डेरा के बच्चों ने भी आवाज उठाई है।)
\r\n\r\nउन्नाव: सर्वोदय विद्यालय के छात्रों का सड़क जाम
\r\n\r\nबस्ती और हमीरपुर की तरह ही उन्नाव (Unnao) में भी स्कूली छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। यहाँ के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय (न्योतनी-मोहन) के विद्यार्थियों ने सीधे विद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
\r\n\r\nबुधवार को विद्यालय की आंतरिक अव्यवस्थाओं और प्रशासन की अनदेखी से नाराज सैकड़ों छात्र स्कूल परिसर से बाहर आ गए और उन्होंने महत्वपूर्ण मोहन तिराहा (Mohan Tiraha) को पूरी तरह जाम कर दिया। छात्रों की नारेबाजी और सड़क जाम की खबर मिलते ही जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
\r\n\r\nमामले को शांत कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) कृतिराज और अपर जिलाधिकारी (ADM) सुशील कुमार गोंड भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घंटों तक बच्चों की समस्याएं सुनीं और उन्हें हर संभव सुधार का भरोसा दिलाया। हालांकि, छात्र अपनी मांगों को लेकर काफी देर तक अड़े रहे और लिखित आश्वासन के बाद ही जाम खोला।
\r\n\r\nक्या कह रही है 'Gen-Alpha' की यह गूंज?
\r\n\r\nयूपी के इन तीन अलग-अलग जिलों की घटनाएं कोई साधारण बात नहीं हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आज की नई पीढ़ी (Gen Alpha) अपने अधिकारों (Right to Education and basic infrastructure) को लेकर बेहद जागरूक है। स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच ने इन बच्चों को यह सिखा दिया है कि अगर सिस्टम काम न करे, तो आवाज कैसे उठानी है।
\r\n\r\nअब समय आ गया है कि पंचायत से लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार तक सभी अपनी जिम्मेदारी समझें। जो बच्चे देश का भविष्य हैं, उन्हें कीचड़ भरे रास्तों में संघर्ष करने के बजाय, एक सुरक्षित और बेहतर माहौल मिलना चाहिए। अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो आने वाले समय में बच्चों के ये छुटपुट प्रदर्शन एक बड़े जन-आंदोलन का रूप भी ले सकते हैं।