लखनऊ/उत्तर प्रदेश: आधुनिक और विकसित उत्तर प्रदेश की नींव को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास से प्रदेश में 'जनगणना-2027' के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ कर दिया है। इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा डेटा संग्रह अभियान माना जा रहा है।READ ALSO:-यूपी में मौसम का यू-टर्न: झुलसाती गर्मी के बीच झमाझम बारिश की एंट्री, 50 KM/H की आंधी और बिजली गिरने का खौफनाक अलर्ट!
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मुख्यमंत्री ने ‘हमारी जनगणना, हमारा विकास’ की मूल भावना के साथ मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के कार्य को हरी झंडी दिखाई। यह केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य की उन नीतियों का ब्लूप्रिंट है, जिन पर आने वाले दशकों का विकास निर्भर करेगा।
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"जनगणना सिर्फ गिनती नहीं, सुनियोजित विकास का हथियार है"
\r\n\r\nलॉन्च कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि जनगणना के वास्तविक मायने क्या हैं। उन्होंने कहा, "जनगणना केवल जनसंख्या के आंकड़ों को रजिस्टर में दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र, समावेशी और सुनियोजित विकास का सबसे सशक्त आधार है।"
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सीएम योगी ने 21वीं सदी की आवश्यकताओं पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान युग पूरी तरह से 'डेटा आधारित निर्णयों' (Data-driven decisions) का है। सरकार जो भी योजनाएं बनाती है—चाहे वह आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास हो, शिक्षा के लिए नए स्कूलों का निर्माण हो, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पतालों की स्थापना हो, या गरीब कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पेंशन और राशन योजनाएं हों—उन सबका प्रभावी क्रियान्वयन सटीक आंकड़ों पर ही निर्भर करता है। मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा कि, "जनगणना ही वह एकमात्र माध्यम है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि विकास की मुख्यधारा से समाज का अंतिम व्यक्ति भी जुड़े और उसे संसाधनों का समान हिस्सा मिल सके।"
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देश में पहली बार: भारत की पहली पूरी तरह 'डिजिटल जनगणना'
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश की यह जनगणना कई मायनों में अनूठी और ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन और मार्गदर्शन में, देश में पहली बार पूर्ण रूप से डिजिटल जनगणना कराई जा रही है। इसका मतलब है कि पुरानी कागजी फाइलों और लेजर बुक का झंझट अब खत्म हो गया है। यह प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी:
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प्रथम चरण (मकान सूचीकरण और स्व-गणना की सुविधा): पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना से संबंधित कार्य संपादित होंगे। सबसे बड़ी और नई सुविधा जो इस बार आम जनता को दी गई है, वह है स्व-गणना (Self-Enumeration)।
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- \r\n 7 मई से 21 मई तक विशेष विंडो: प्रशासन ने आम नागरिकों को 7 मई से लेकर 21 मई तक स्व-गणना का एक बेहतरीन विकल्प उपलब्ध कराया है।\r\n \r\n
- \r\n इसके माध्यम से कोई भी नागरिक स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिए एक निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म (जनगणना पोर्टल) पर अपने परिवार और मकान की सटीक जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n जो लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, उनके लिए फील्ड कार्य के अंतर्गत जनगणना कार्मिक (प्रगणक) घर-घर जाकर सूचीकरण का कार्य करेंगे।\r\n \r\n
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द्वितीय चरण (व्यक्तिगत गणना): प्रथम चरण के डेटा के आधार पर, द्वितीय चरण में प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत और सटीक गणना की जाएगी, जिसमें उनकी आयु, शिक्षा, पेशा और अन्य आवश्यक विवरण डिजिटल टैबलेट्स के माध्यम से दर्ज किए जाएंगे।
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इस जनगणना का सबसे बड़ा 'गेम चेंजर': जातीय गणना और वन ग्रामों की एंट्री
\r\n\r\nराजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखें, तो इस जनगणना-2027 में दो सबसे बड़े ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं, जो दशकों से लंबित थे:
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- \r\n जातीय गणना को मिली हरी झंडी: समाज के हर वर्ग के सटीक सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का पता लगाने के लिए इस बार जनगणना में 'जातीय गणना' (Caste Census) को भी सम्मिलित किया गया है। यह कदम विभिन्न जातियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और उनके अनुपात में सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।\r\n \r\n
- \r\n वन ग्रामों (Forest Villages) का समावेश: देश की आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि वन क्षेत्रों और सुदूर जंगलों में रहने वाले समुदायों (जैसे वनटांगिया, थारू आदि) को भी मुख्यधारा की जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। अब तक ये ग्राम तकनीकी और भौगोलिक बाधाओं के कारण सटीक गणना से अछूते रह जाते थे।\r\n \r\n
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टेक्नोलॉजी से लैस 'रियल टाइम डेटा पोर्टल'
\r\n\r\nमुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में नीतियां बनाने के लिए 'रियल टाइम डेटा' (Real-time data) अत्यंत आवश्यक है। जब तक फाइलें शासन तक पहुंचती थीं, तब तक जमीनी हकीकत बदल जाती थी। इस समस्या को खत्म करने के लिए डिजिटल तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है।
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जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, प्रभावी और त्वरित बनाने के लिए सरकार ने एक 'विशेष जनगणना पोर्टल' विकसित किया है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लखनऊ में बैठे उच्चाधिकारी भी प्रदेश के किसी भी सुदूर ग्राम पंचायत या शहरी वार्ड स्तर तक हो रहे गणना कार्य की पल-पल की सतत निगरानी (Continuous Monitoring) कर सकेंगे। इससे आंकड़ों में फर्जीवाड़ा या लापरवाही की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
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आंकड़ों का महासागर: 25.70 करोड़ आबादी और 5.47 लाख कर्मचारियों की फौज
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश की जनसंख्या दुनिया के कई बड़े देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। मुख्यमंत्री योगी ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या लगभग 25 करोड़ 70 लाख तक पहुंच चुकी है। इतनी बड़ी आबादी का घर-घर जाकर डेटाबेस तैयार करना किसी महाभियान से कम नहीं है।
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इस विशाल कार्य को बिना किसी त्रुटि के संपन्न कराने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। यह जनगणना कार्य प्रदेश के भौगोलिक और प्रशासनिक तंत्र के हर कोने तक पहुंचेगा:
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- \r\n 18 मंडल\r\n \r\n
- \r\n 75 जनपद (जिले)\r\n \r\n
- \r\n 350 तहसीलें\r\n \r\n
- \r\n 17 नगर निगम\r\n \r\n
- \r\n 745 अन्य नगरीय निकाय (नगर पालिका/नगर पंचायत)\r\n \r\n
- \r\n 21 छावनी परिषद (Cantonment Boards)\r\n \r\n
- \r\n 57,694 ग्राम पंचायतें\r\n \r\n
- \r\n लगभग 1 लाख 4 हजार राजस्व ग्राम\r\n \r\n
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मानव संसाधन की ताकत: इस अभूतपूर्व और व्यापक कार्य के सफल संचालन के लिए प्रदेश भर में लगभग 5.47 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों की फौज तैनात की जा रही है।
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- \r\n इनमें घर-घर जाने वाले 4.50 लाख प्रगणक (Enumerators) शामिल हैं।\r\n \r\n
- \r\n इनकी निगरानी के लिए 85 हजार सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n संपूर्ण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 12 हजार राज्य एवं जनपद स्तरीय अधिकारी नोडल के रूप में काम करेंगे।\r\n \r\n
- \r\n सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेटा दर्ज करने में कोई तकनीकी खामी न हो, इसके लिए दोनों चरणों से जुड़े लगभग 5.35 लाख कार्मिकों को सघन प्रशिक्षण (Training) प्रदान किया जा चुका है।\r\n \r\n
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सीएम योगी की प्रदेशवासियों से खास अपील: "राष्ट्रीय दायित्व निभाएं, सही जानकारी दें"
\r\n\r\nकार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ से अधिक जनता से सीधा संवाद करते हुए एक भावुक और सख्त अपील की। उन्होंने इस जनगणना को केवल सरकारी काम न मानकर इसे एक 'राष्ट्रीय दायित्व' (National Duty) मानने का आह्वान किया।
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सीएम योगी ने दो टूक शब्दों में कहा कि, "प्रत्येक व्यक्ति और परिवार यह सुनिश्चित करे कि वे केवल एक ही स्थान पर अपनी गणना कराएं।" दोहरी गणना (गांव और शहर दोनों जगह नाम लिखवाना) से डेटा खराब होता है और योजनाओं का बजट प्रभावित होता है।
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उन्होंने जनता से आग्रह किया कि पोर्टल पर या प्रगणक के घर आने पर बिल्कुल सही और तथ्यात्मक जानकारी ही उपलब्ध कराएं। यदि आम जनता अपनी शिक्षा, आय के साधन, मकान की स्थिति और सदस्यों की संख्या की सही जानकारी देगी, तभी सरकार भविष्य में गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे की सटीक एवं प्रभावी रूपरेखा तैयार कर सकेगी।
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अंत में, मुख्यमंत्री ने इस चुनौतीपूर्ण और राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे सभी अधिकारियों, कर्मचारियों (विशेषकर शिक्षकों और फील्ड वर्करों) के साथ-साथ प्रदेश के सभी नागरिकों को इस महाभियान की सफलता के लिए अपनी अग्रिम शुभकामनाएं दीं और दोहराया कि "हर प्रदेशवासी इस राष्ट्रीय जनगणना में अपनी 100 प्रतिशत सहभागिता दे।"
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इस डिजिटल जनगणना के पूरे होने के बाद, उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जिसके पास अपनी एक चौथाई अरब आबादी का सटीक, डिजिटल और पारदर्शी रियल-टाइम डेटाबेस मौजूद होगा।