लखनऊ (खबरीलाल शिक्षा डेस्क): उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और संस्कारवान बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद (UP Basic Education Council) ने प्रदेश के सभी बेसिक स्कूलों के लिए नया शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया है। नए सत्र (अप्रैल) से लागू होने वाले इस कैलेंडर में पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा (Digital Education) और बच्चों के नैतिक विकास पर विशेष जोर दिया गया है।Read also:-यूपी में मौसम का रौद्र रूप: आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से 13 की मौत; मेरठ, बिजनौर और गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी में अलर्ट
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इस बार के कैलेंडर की सबसे खास बात यह है कि अब यूपी के सरकारी स्कूलों के बच्चे 'खान एकेडमी' (Khan Academy) के डिजिटल संसाधनों के माध्यम से पढ़ाई करेंगे। इसके अलावा, बच्चों को तकनीकी दुष्प्रभावों से बचाने के लिए प्रार्थना सभा में मोबाइल फोन के नुकसान (Harmful effects of Mobile Phones) के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नए शैक्षणिक कैलेंडर में क्या-क्या बड़े बदलाव किए गए हैं।
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कैलेंडर को बनाया गया अधिक व्यावहारिक और लक्ष्य-आधारित
\r\n\r\nबेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी किया गया नया कैलेंडर पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक व्यावहारिक (Practical) और लक्ष्य-आधारित है। पहले जहां सिर्फ छुट्टियां और परीक्षा की तारीखें तय होती थीं, वहीं अब हर महीने की पढ़ाई का पूरा खाका तैयार किया गया है। नए कैलेंडर में यह स्पष्ट रूप से तय कर दिया गया है कि शिक्षकों को हर महीने पाठ्यक्रम (Syllabus) का कितना प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। इससे न केवल शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि बच्चों का सिलेबस भी समय पर पूरा हो सकेगा। इससे वार्षिक परीक्षाओं के समय छात्रों पर पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
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डिजिटल शिक्षा क्रांति: 'खान एकेडमी' की हुई एंट्री
\r\n\r\nयूपी के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के परिषदीय स्कूलों को हाई-टेक बनाने के लिए इस कैलेंडर में ICT (Information and Communication Technology) संसाधनों के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया गया है। अब परिषदीय स्कूलों में विश्व प्रसिद्ध 'खान एकेडमी' (Khan Academy) के डिजिटल संसाधनों की मदद ली जाएगी। खान एकेडमी के ई-लर्निंग टूल्स, वीडियो लेक्चर और इंटरैक्टिव क्विज के माध्यम से बच्चों को गणित, विज्ञान और अन्य विषय बेहद रोचक तरीके से पढ़ाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की तरह आधुनिक तकनीक से जुड़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। स्मार्ट क्लास और टैबलेट के माध्यम से इस डिजिटल शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।
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प्रार्थना सभा का बदला स्वरूप: अब 'मोबाइल के नुकसान' पर होगी चर्चा
\r\n\r\nनए शैक्षणिक कैलेंडर में केवल किताबी ज्ञान पर ही नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण और नैतिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। स्कूलों में सुबह होने वाली प्रार्थना सभा (Morning Assembly) के स्वरूप में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए गए हैं। अब से प्रार्थना सभा में निम्नलिखित गतिविधियां अनिवार्य रूप से की जाएंगी:
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- \r\n आज का सुविचार (Thought of the Day): बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा भरने के लिए रोज एक नया सुविचार साझा किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n समाचार पत्र पढ़ना: देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रखने के लिए बच्चों से हेडलाइंस पढ़वाई जाएंगी।\r\n \r\n
- \r\n लैंगिक समानता और नैतिक शिक्षा: लड़के-लड़कियों के बीच भेदभाव खत्म करने और अच्छे संस्कार देने के लिए नैतिक शिक्षा के पाठ पढ़ाए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n मोबाइल फोन के नुकसान: आज के समय में बच्चे मोबाइल फोन के अत्यधिक आदी हो रहे हैं, जिसका असर उनकी आंखों, मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ रहा है। इसलिए, नए कैलेंडर में यह अनिवार्य किया गया है कि शिक्षकों द्वारा प्रार्थना सभा में बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में नियमित रूप से जागरूक किया जाए।\r\n \r\n
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'स्कूल चलो अभियान': 1 से 15 अप्रैल तक चलेगा महा-अभियान
\r\n\r\nबच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन (Enrollment) सुनिश्चित करने के लिए हर साल की तरह इस साल भी 'स्कूल चलो अभियान' की शुरुआत की जा रही है। कैलेंडर के अनुसार, इस अभियान का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होकर 15 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को स्कूल लाने और उनका दाखिला कराने पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा। शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और शिक्षा विभाग के अधिकारी घर-घर जाकर अभिभावकों को अपने बच्चों (विशेषकर बालिकाओं) को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। जो बच्चे किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं (ड्रॉपआउट), उन्हें भी वापस स्कूल लाने का लक्ष्य रखा गया है।
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सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी के सख्त निर्देश: 'हर स्कूल की दीवार पर लगा हो कैलेंडर'
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने इस नए कैलेंडर को लेकर प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को एक सख्त पत्र भेजा है।
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- \r\n पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि अप्रैल महीने से प्रदेश के सभी परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में इस नए शैक्षणिक कैलेंडर को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n सचिव ने यह भी निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि यह शैक्षणिक कैलेंडर हर स्कूल की दीवार या नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा (लगा) हो, ताकि सभी शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को इसकी जानकारी रहे।\r\n \r\n
- \r\n यदि किसी भी स्कूल में इस कैलेंडर के पालन में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।\r\n \r\n
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शिक्षा की तस्वीर बदलने की एक मजबूत पहल
\r\n\r\nशिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी सरकार का यह नया शैक्षणिक कैलेंडर प्रदेश की बेसिक शिक्षा की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। एक तरफ जहां 'खान एकेडमी' के माध्यम से डिजिटल शिक्षा ग्रामीण भारत के बच्चों की नींव को मजबूत करेगी, वहीं दूसरी तरफ प्रार्थना सभा में मोबाइल के नुकसान और नैतिक शिक्षा जैसी पहल बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करेगी। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक इस कैलेंडर को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।
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