खबरीलाल डेस्क
गोरखपुर (विशेष रिपोर्ट): बीते कुछ वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के क्षेत्र में जो कीर्तिमान स्थापित किए हैं, उसने पूरी दुनिया का ध्यान हमारी ओर खींचा है। चंद्रयान की सफलता, मंगलयान का ऐतिहासिक सफर, और सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य एल-1 जैसे मिशनों ने न केवल देश का मान बढ़ाया है, बल्कि भारत के युवाओं और स्कूली छात्र-छात्राओं के मन में ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को जानने की तीव्र जिज्ञासा भी पैदा की है। आज का युवा आसमान की ओर देखकर सिर्फ तारों को नहीं निहारता, बल्कि उन तारों के बीच अपना भविष्य और करियर तलाशता है।READ ALSO:-कृष्ण जन्माष्टमी पर बालैनी में होगा ऐतिहासिक दही हांडी उत्सव, 1 लाख जीतने का मौका; रालोद नेता अभयवीर यादव ने गांव-गांव जाकर दिया न्यौता
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छात्रों की इसी असीम ऊर्जा और जिज्ञासा को एक सही दिशा और वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक बेहद खास और राष्ट्रीय स्तर के 'डिजिटल वेबिनार' का आयोजन किया जा रहा है। अगर आप या आपका बच्चा अंतरिक्ष विज्ञान में अपना भविष्य संवारना चाहता है, तो यह खबर आपके लिए किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है।
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3 सितंबर 2026: एक ऐतिहासिक वेबिनार का दिन

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आगामी 3 सितंबर 2026 को भारत के युवाओं के लिए एक विशेष ऑनलाइन वेबिनार आयोजित होने जा रहा है। इस भव्य राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का आयोजन 'डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन, गोरखपुर' और उनके विभिन्न सहयोगी संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
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इस वेबिनार का सबसे प्रमुख और आकर्षक पहलू यह है कि इसमें मुख्य वक्ता और मुख्य मार्गदर्शक के रूप में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक और इंजीनियर श्री जयंत पी० जोशी उपस्थित रहेंगे। श्री जोशी अपने वर्षों के गहन अनुसंधान, अंतरिक्ष यानों की डिजाइनिंग, और इसरो के भीतर अपने व्यावहारिक अनुभवों का अमूल्य खजाना देश के युवाओं के साथ साझा करेंगे। एक ऐसे व्यक्ति से सीधे मार्गदर्शन प्राप्त करना, जिसने भारत के अंतरिक्ष मिशनों को अपनी आंखों से बनते और परवान चढ़ते देखा है, किसी भी युवा के लिए एक जीवन बदल देने वाला अनुभव हो सकता है।
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'डिजिटल भारत स्पेस यात्रा' का भव्य समापन और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस

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इस वेबिनार की पृष्ठभूमि बेहद खास है। भारत सरकार द्वारा देश में विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस' मनाने की शुरुआत की गई थी। इस वर्ष 2026 में मनाए जा रहे 'तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस' के उपलक्ष्य में, देश भर में एक 15 दिवसीय 'डिजिटल भारत स्पेस यात्रा' महा-अभियान चलाया गया है।
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इस 15 दिवसीय महा-अभियान का मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से भारत के सुदूर गांवों, छोटे कस्बों और महानगरों के छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की नवीनतम जानकारियों से जोड़ना था। 3 सितंबर को दोपहर 12:10 बजे से आयोजित होने वाला यह वेबिनार इसी ऐतिहासिक 15 दिवसीय यात्रा का भव्य समापन समारोह (Valedictory Session) है। आयोजकों का मानना है कि यह समापन सत्र देश में एक नई वैज्ञानिक क्रांति का सूत्रपात करेगा।
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वेबिनार के मुख्य विषय: क्या-क्या सीखेंगे छात्र?

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इस कार्यक्रम को विशेष रूप से छात्रों की करियर संबंधी दुविधाओं को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वेबिनार के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा, वे इस प्रकार हैं:
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    अंतरिक्ष विज्ञान की मूलभूत समझ: ब्रह्मांड की उत्पत्ति, उपग्रहों (Satellites) की कार्यप्रणाली, और रॉकेट साइंस के बुनियादी सिद्धांत।
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    ISRO के ऐतिहासिक और आगामी मिशन: गगनयान जैसे भविष्य के मानव मिशन, अंतरिक्ष स्टेशन की योजनाएं, और चंद्रयान सीरीज़ की इनसाइड स्टोरी।
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    करियर के विविध अवसर: अंतरिक्ष विज्ञान केवल रॉकेट उड़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, एस्ट्रोफिजिक्स, सैटेलाइट डेटा एनालिसिस, स्पेस मेडिसिन, और स्पेस लॉ (Space Law) जैसे अनगिनत क्षेत्र शामिल हैं।
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    तैयारी का सही रोडमैप: 10वीं और 12वीं कक्षा के बाद छात्रों को कौन से विषय चुनने चाहिए? IIST (Indian Institute of Space Science and Technology) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की प्रक्रिया क्या है? इसरो और अन्य वैश्विक स्पेस एजेंसियों (जैसे NASA, ESA) में नौकरी पाने के लिए खुद को कैसे तैयार करें?
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शिक्षकों के लिए 'स्टेम' (STEM) शिक्षा पर विशेष जोर

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यह कार्यक्रम केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए भी अत्यधिक महत्व रखता है। आज के तकनीकी युग में STEM (Science, Technology, Engineering, and Mathematics) शिक्षा की मांग सबसे अधिक है।
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पूर्व वैज्ञानिक जयंत जोशी जी शिक्षकों को यह बताएंगे कि वे अपनी कक्षाओं में किस प्रकार का माहौल बनाएं जिससे बच्चों में शुरुआत से ही 'वैज्ञानिक दृष्टिकोण' (Scientific Temperament) विकसित हो सके। बच्चों को रटाने के बजाय उन्हें प्रयोग करने, सवाल पूछने और तार्किक रूप से सोचने (Logical Thinking) के लिए कैसे प्रेरित किया जाए, इस पर विशेष चर्चा की जाएगी। एक सशक्त शिक्षक ही एक महान वैज्ञानिक की नींव रख सकता है, और यह वेबिनार इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
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सीधा संवाद: 'प्रश्नोत्तर सत्र' (Live Q&A)

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वेबिनार का सबसे रोमांचक हिस्सा इसका इंटरैक्टिव सेशन होगा। व्याख्यान समाप्त होने के बाद एक लाइव प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र रखा गया है। इसमें देश भर से जुड़े छात्र, शिक्षक, शोधार्थी और अंतरिक्ष प्रेमी पूर्व इसरो वैज्ञानिक जयंत जोशी से सीधे अपने मन की बात पूछ सकेंगे। अपने करियर, अंतरिक्ष के रहस्यों या इसरो की कार्यप्रणाली से जुड़े किसी भी सवाल का सीधा और प्रामाणिक उत्तर पाने का यह एक दुर्लभ मंच होगा।
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कार्यक्रम में कैसे शामिल हों? (महत्वपूर्ण नियम)

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आयोजकों ने शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से इस पूरे कार्यक्रम को पूर्णतः निःशुल्क (100% Free) रखा है।
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    तारीख और समय: 3 सितंबर 2026, कार्यक्रम दोपहर 12:10 बजे प्रारंभ होगा।
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    जुड़ने की अंतिम समय सीमा: सभी प्रतिभागियों को दोपहर 12:05 बजे तक अनिवार्य रूप से जुड़ना होगा।
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    ऑनलाइन लिंक: इस ऑनलाइन वेबिनार से गूगल मीट (Google Meet) के जरिए जुड़ा जा सकता है। लिंक है: https://meet.google.com/bfj-wxjo-ywa
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चेतावनी / आयोजक का संदेश: डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन, गोरखपुर की टीम ने स्पष्ट किया है कि गूगल मीट प्लेटफॉर्म की तकनीकी सीमाओं के कारण इसमें जुड़ने वालों की संख्या सीमित रहेगी। इसलिए, यह वेबिनार पूरी तरह से 'पहले आओ, पहले पाओ' (First Come, First Serve) के आधार पर कार्य करेगा। जो प्रतिभागी समय से पहले लिंक पर क्लिक करके जुड़ जाएंगे, केवल उन्हें ही प्रवेश मिल सकेगा।
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भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने का सपना केवल सरकार या इसरो का नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक और युवा का होना चाहिए। डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन की यह पहल इसी सपने को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। अगर आप भी आसमान की अनंत गहराइयों में अपना भविष्य देखते हैं, तो 3 सितंबर के इस वेबिनार का हिस्सा बनना न भूलें।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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यह समाचार रिपोर्ट डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन, गोरखपुर द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। कार्यक्रम की समय-सीमा, गूगल मीट लिंक की सक्रियता, तकनीकी उपलब्धता और वक्ता की उपस्थिति से जुड़े सभी अंतिम निर्णय और अधिकार आयोजक संस्था के अधीन हैं। वेबिनार में सीटों की सीमित उपलब्धता के कारण प्रवेश न मिलने की स्थिति में प्रकाशक या न्यूज़ पोर्टल की कोई तकनीकी या कानूनी जिम्मेदारी नहीं होगी। प्रतिभागियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तकनीकी असुविधा से बचने के लिए दिए गए समय (12:05 PM) से पहले ही लिंक के माध्यम से जुड़ने का प्रयास करें। यह आयोजन पूरी तरह से निःशुल्क है; कृपया किसी भी बाहरी व्यक्ति को इस कार्यक्रम के नाम पर कोई शुल्क न दें।