मुंबई। आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलती उन्नत तकनीकों का युग है। इस डिजिटल और एआई (AI) क्रांति ने न केवल हमारे जीवन जीने के तरीके को बदला है, बल्कि करियर और रोजगार की परिभाषा को भी पूरी तरह से नया रूप दे दिया है। ऐसे चुनौतीपूर्ण और तेजी से बदलते समय में उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल छात्रों को एक निश्चित नौकरी के लिए तैयार करना नहीं रह गई है। असली चुनौती उन्हें ऐसे कौशल (Skills) देना है, जो उन्हें जीवन भर बदलती परिस्थितियों में प्रासंगिक और सफल बनाए रखें। इसी आधुनिक और दूरदर्शी सोच को केंद्र में रखते हुए, डब्लूपीयू गोवा (WPU Goa) ने अपने अभूतपूर्व ‘ट्रांसडिसिप्लिनरी’ (Transdisciplinary) शिक्षा मॉडल के माध्यम से भविष्य की शिक्षा का एक नया और स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में 'सफेदपोश' ठगों का बड़ा भंडाफोड़: 60 लाख की बीमा राशि हड़पने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश, PNB कर्मचारी और डॉक्टर गिरफ्तार
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हाल ही में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में डब्लूपीयू गोवा द्वारा एक विशेष 'ओपन हाउस' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत के कई दिग्गजों और विचारकों ने हिस्सा लिया और एआई के युग में शिक्षा के गिरते और उभरते प्रतिमानों पर गहन मंथन किया।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बदलता जॉब मार्केट
\r\n\r\nपिछले एक दशक में, विशेष रूप से जेनेरेटिव एआई (Generative AI) के आने के बाद से, पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदला है। कई ऐसे काम जो पहले इंसान करते थे, अब मशीनें और एल्गोरिदम सेकंडों में कर रहे हैं। ऐसे में अगर छात्र केवल किताबी ज्ञान या किसी एक विषय की रटी-रटाई जानकारी लेकर कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रखते हैं, तो उनके लिए अपनी जगह बनाए रखना बेहद मुश्किल होगा। डब्लूपीयू गोवा का मानना है कि रटने की विद्या का अंत हो चुका है और अब समय 'क्रिटिकल थिंकिंग' (Critical Thinking) और 'प्रॉब्लम सॉल्विंग' (Problem Solving) का है। संस्थान का लक्ष्य छात्रों को उन नौकरियों के लिए तैयार करना है, जिनका आज शायद अस्तित्व ही नहीं है।
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डब्लूपीयू गोवा का 'ट्रांसडिसिप्लिनरी' (Transdisciplinary) शिक्षा मॉडल
\r\n\r\nशिक्षा के क्षेत्र में 'मल्टीडिसिप्लिनरी' (बहु-विषयक) शब्द बहुत आम है, लेकिन डब्लूपीयू गोवा ने एक कदम आगे बढ़कर 'ट्रांसडिसिप्लिनरी' मॉडल को अपनाया है।
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- \r\n क्या है ट्रांसडिसिप्लिनरी मॉडल? इसका अर्थ है विषयों के बीच खींची गई पारंपरिक सीमाओं को पूरी तरह से मिटा देना। एक इंजीनियर को समाजशास्त्र की समझ होनी चाहिए और एक कला के छात्र को तकनीक की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n व्यावहारिक समाधान: इस मॉडल के तहत छात्र विज्ञान, मानविकी, कला और तकनीक के ज्ञान को एक साथ जोड़कर वास्तविक दुनिया की जटिल समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं।\r\n \r\n
- \r\n भविष्य की जरूरत: जब एआई और मानव बुद्धिमत्ता (Human Intelligence) एक साथ काम करेंगे, तब ऐसे ही छात्रों की आवश्यकता होगी जो केवल कोड लिखना नहीं, बल्कि उस कोड का समाज पर पड़ने वाला प्रभाव भी समझ सकें।\r\n \r\n
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मुंबई 'ओपन हाउस' में शिक्षाविदों का महामंथन
\r\n\r\nमुंबई में आयोजित ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम में डब्लूपीयू गोवा के वरिष्ठ शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों के साथ सीधा संवाद किया। इस चर्चा में इस बात पर सबसे अधिक जोर दिया गया कि आने वाला समय केवल सीमित 'विषय विशेषज्ञों' (Subject Experts) का नहीं होगा। भविष्य उन लीडर्स का होगा जो विभिन्न क्षेत्रों की समझ को आपस में जोड़कर, एक 'कनेक्टर' के रूप में नई और अज्ञात चुनौतियों का समाधान कर सकेंगे।
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वीसी प्रोफेसर वाल्टर लील का विजन
\r\n\r\nकार्यक्रम को संबोधित करते हुए डब्लूपीयू गोवा के वाइस चांसलर (Vice-Chancellor) प्रोफेसर वाल्टर लील ने संस्थान के मूल विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, "हम छात्रों को केवल एक डिग्री थमाकर दुनिया में नहीं भेजना चाहते। हमारा उद्देश्य उन्हें जीवन भर सीखने (Lifelong Learning), समाज का नेतृत्व करने (Leadership) और हर नई परिस्थिति में खुद को तेजी से ढालने (Adaptability) की क्षमता प्रदान करना है।" उनका यह कथन स्पष्ट करता है कि एआई के इस युग में मानसिक लचीलापन सबसे बड़ा हथियार है।
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प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज के विचार
\r\n\r\nइसी कड़ी में, संस्थान के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज ने भी अपने विचार रखे। उनका मानना है कि पारंपरिक शिक्षा प्रणाली अब आउटडेटेड (Outdated) हो चुकी है। उन्होंने कहा, "भविष्य केवल उन लोगों का है जो लगातार कुछ नया सीख सकते हैं, अपने पुराने विचारों को अनलर्न (Unlearn) कर सकते हैं, नए विचारों को जोड़ सकते हैं और पारंपरिक सोच की सीमाओं से बाहर जाकर 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स' (Out of the box) सोच सकते हैं।"
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तकनीकी ज्ञान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता
\r\n\r\nओपन हाउस की चर्चा में एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया। आज तक यह माना जाता था कि कोडिंग, डेटा साइंस या एआई की तकनीकी जानकारी होना ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। लेकिन डब्लूपीयू गोवा के मंच से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ इंसान के भीतर की मूल प्रवृत्तियां अब कहीं अधिक महत्वपूर्ण बन चुकी हैं।
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- \r\n जिज्ञासा (Curiosity): सवाल पूछने की क्षमता एआई नहीं सिखा सकता। एक जिज्ञासु छात्र ही मशीन से सही प्रॉम्प्ट (Prompt) पूछकर बेहतरीन परिणाम निकाल सकता है।\r\n \r\n
- \r\n अनुकूलन क्षमता (Adaptability): आज जो तकनीक प्रासंगिक है, वह कल पुरानी हो जाएगी। इसलिए तकनीक के साथ खुद को बदलने की क्षमता सबसे जरूरी कौशल है।\r\n \r\n
- \r\n आजीवन सीखना (Lifelong Learning): शिक्षा कॉलेज की डिग्री के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि वहां से असली शिक्षा की शुरुआत होती है।\r\n \r\n
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संक्षेप में कहा जाए तो, उच्च शिक्षा का वास्तविक और अंतिम उद्देश्य छात्रों को केवल आज की कॉर्पोरेट जरूरतों या आज के जॉब मार्केट के लिए तैयार करना नहीं है। डब्लूपीयू गोवा का 'ट्रांसडिसिप्लिनरी' मॉडल छात्रों को उन अवसरों और चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है, जिनकी कल्पना आज के समय में शायद संभव ही नहीं है। मुंबई के ओपन हाउस में प्रस्तुत किया गया यह दृष्टिकोण साबित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में इंसानी मूल्यों, रचनात्मकता और असीमित सोच को तकनीक के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है। डब्लूपीयू गोवा की यह पहल निश्चित रूप से देश की उच्च शिक्षा प्रणाली को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का काम कर रही है।