मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले में तैनात महिला सिपाही संध्या भारद्वाज (Sandhya Bhardwaj) के कथित अपहरण मामले में एक फिल्मी ट्विस्ट आ गया है। जिसे पुलिस और परिवार अब तक अपहरण (Kidnapping) मान रहे थे, वह असल में एक 'प्रेम कहानी' (Love Story) निकली। अपनी शादी वाले दिन, मंडप सजने के बाद महिला सिपाही संध्या खुद अपनी मर्जी से कुख्यात हिस्ट्रीशीटर अंकित चौहान (History Sheeter Ankit Chauhan) के साथ भाग गई थी।READ ALSO:-मेरठ में सनसनी: रिटायर्ड दरोगा और पत्नी का शव फंदे पर झूलता मिला, सुबह काम करने पहुंची मेड की चीख से दहला रक्षापुरम
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इस हाई-प्रोफाइल मामले में पिछले 48 घंटों में तेजी से घटनाक्रम बदले हैं। पहले 9 फरवरी को महिला सिपाही ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए, जिसमें उसने अंकित के साथ अपनी मर्जी से जाने की बात कबूली। इसके बाद 10 फरवरी को मुख्य आरोपी और उसके प्रेमी अंकित चौहान ने नाटकीय ढंग से कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको इस पूरी लव स्टोरी, शादी वाले दिन के ड्रामे और कोर्ट में हुए खुलासों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
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शादी के दिन का वो हाई-वोल्टेज ड्रामा
\r\n\r\n7 फरवरी की रात, जब पूरा परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था, तभी बहसूमा (Bahsuma) इलाके के अकबरपुर सादात (Akbarpur Sadat) गांव में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको सन्न कर दिया।
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क्या हुआ था उस रात?
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- \r\n तारीख: 7-8 फरवरी की दरमियानी रात।\r\n \r\n
- \r\n समय: रात के करीब 2 बजे।\r\n \r\n
- \r\n सीन: संध्या के घर के बाहर ढोलक बज रही थी, महिलाएं गीत गा रही थीं। तभी एक बाइक आकर रुकी। बाइक पर हिस्ट्रीशीटर अंकित चौहान सवार था।\r\n \r\n
- \r\n कार्रवाई: अंकित ने संध्या को फोन किया। कुछ ही देर में संध्या बाहर आ गई। परिवार वाले भी पीछे-पीछे आए। वहां बहस शुरू हो गई। अंकित ने चिल्लाते हुए कहा, "जब मैंने कहा था कि संध्या की शादी मुझसे होगी, तो आप लोग क्यों कहीं और उसकी शादी कर रहे हो?"\r\n \r\n
- \r\n फरार: इससे पहले कि परिवार वाले कुछ समझ पाते या रोक पाते, संध्या अंकित की बाइक पर बैठकर वहां से फरार हो गई।\r\n \r\n
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संध्या की शादी 8 फरवरी को अलीगढ़ (Aligarh) के बन्नादेवी थाने में तैनात सिपाही अतुल शर्मा (Atul Sharma) के साथ होनी थी। लेकिन मंडप सजने से पहले ही दुल्हन अपने पुराने प्रेमी के साथ चली गई। इस घटना से सदमे में आए पिता सुभाष शर्मा की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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कोर्ट में संध्या का कबूलनामा: "मैं अपनी मर्जी से गई थी"
\r\n\r\nपुलिस ने जब घेराबंदी तेज की और मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, तो संध्या खुद ही मवाना थाने पहुंच गई। इसके बाद कोर्ट में 164 के तहत उसके बयान दर्ज किए गए।
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संध्या ने कोर्ट में क्या कहा? संध्या ने जज के सामने साफ शब्दों में कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"मैं अंकित के साथ अपनी मर्जी से गई थी। मेरा कोई अपहरण नहीं हुआ था। हम दोनों कोर्ट मैरिज करना चाहते थे, लेकिन ऐन वक्त पर मेरी मां वहां पहुंच गईं, इसलिए हम शादी नहीं कर सके।"\r\n
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संध्या ने बताया कि वह बालिग है और अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकती है। हालांकि, पुलिस ने अंकित चौहान के खिलाफ दर्ज अपहरण के मुकदमे में कानूनी प्रक्रिया जारी रखी।
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12 साल पुरानी लव स्टोरी: 9वीं क्लास से शुरू हुआ प्यार
\r\n\r\nयह बगावत अचानक नहीं हुई। इसकी नींव 12 साल पहले पड़ी थी जब संध्या 9वीं कक्षा में पढ़ती थी।
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- \r\n मुलाकात: संध्या अपने गांव से 6 किलोमीटर दूर अपनी बुआ के गांव ढकौल (Dhakoul) में रहकर पढ़ाई करती थी। उसी गांव में अंकित चौहान भी रहता था।\r\n \r\n
- \r\n दोस्ती से प्यार तक: अंकित उस समय 10वीं में था। उसका संध्या की बुआ के घर आना-जाना था। पहले दोस्ती हुई, फिर मुलाकातें बढ़ने लगीं। दोनों को पता ही नहीं चला कि कब यह दोस्ती प्यार में बदल गई।\r\n \r\n
- \r\n रास्ते अलग, मंजिल एक: 2021 में संध्या ने यूपी पुलिस की परीक्षा पास की और सिपाही बन गई। उसकी तैनाती साइबर क्राइम थाने में हो गई। दूसरी तरफ, अंकित चौहान अपराध की दुनिया में कदम रख चुका था। उसके खिलाफ धीरे-धीरे 11 मुकदमे दर्ज हो गए और वह थाने का हिस्ट्रीशीटर बन गया।\r\n \r\n
एक तरफ कानून की रक्षक 'सिपाही' और दूसरी तरफ कानून तोड़ने वाला 'हिस्ट्रीशीटर'। यह विरोधाभास ही इस प्रेम कहानी को और जटिल बनाता है।
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कैसे मिली संध्या? दो कहानियां आईं सामने
\r\n\r\nसंध्या की बरामदगी को लेकर दो अलग-अलग वर्जन सामने आ रहे हैं।
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वर्जन 1 (पुलिस और मां की थ्योरी): संध्या और अंकित कोर्ट मैरिज के लिए कोर्ट पहुंचने वाले थे। लेकिन संध्या की मां, जो लगातार फोन पर उसे समझा रही थीं, वहां पहुंच गईं। मां ने संध्या को सामाजिक बदनामी और वर्दी की इज्जत का वास्ता दिया। संध्या मान गई और अंकित पुलिस के डर से वहां से भाग गया।
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वर्जन 2 (भाई प्रिंस का दावा): संध्या के भाई प्रिंस का कहना है कि संध्या ने उसे फोन करके गंगानगर बक्सर के पास बुलाया था। उसने कहा था, "मुझे आकर ले जाओ।" लेकिन जब प्रिंस वहां पहुंचता, उससे पहले ही पुलिस ने संध्या को अपने कब्जे में ले लिया और भाई से मिलने नहीं दिया।
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पिता का दर्द: "मेरी बेटी को धमकाया गया होगा"
\r\n\r\nसंध्या के पिता सुभाष शर्मा अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनकी बेटी अपनी मर्जी से गई होगी।
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- \r\n पिता का तर्क: उनका कहना है कि संध्या अपनी शादी को लेकर बहुत खुश थी। उसने सारी शॉपिंग खुद की थी। उसके चेहरे पर कोई तनाव नहीं था। अगर उसे भागना होता तो वह ड्यूटी से ही भाग सकती थी, शादी के दिन का इंतजार क्यों करती?\r\n \r\n
- \r\n धमकी का आरोप: पिता का मानना है कि अंकित ने उसे हथियारों के बल पर डराया-धमकाया होगा और ब्लैकमेल करके ले गया होगा।\r\n \r\n
- \r\n दूल्हे पक्ष का रिएक्शन: पिता ने बताया कि वर पक्ष ने 5 फरवरी की सगाई में लाखों रुपये और दहेज का सामान स्वीकार किया था। घटना के बाद उन्होंने मदद का भरोसा दिया था, लेकिन अब उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।\r\n \r\n
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हिस्ट्रीशीटर का सरेंडर और जेल यात्रा
\r\n\r\nइस पूरे ड्रामे का पटाक्षेप 10 फरवरी को हुआ। पुलिस के बढ़ते दबाव और कुर्की की आशंका को देखते हुए हिस्ट्रीशीटर अंकित चौहान ने सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत (Jail) में भेज दिया गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ अपहरण और धमकी देने की धाराओं में कार्रवाई की है। हालांकि, संध्या के बयानों ने अंकित के पक्ष को मजबूत किया है, लेकिन उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड उसके लिए मुसीबत बना हुआ है।
\r\n\r\nमेरठ का यह मामला साबित करता है कि प्यार न तो कानून देखता है और न ही सामाजिक प्रतिष्ठा। एक महिला सिपाही ने अपनी वर्दी और परिवार की परवाह किए बिना एक हिस्ट्रीशीटर का साथ चुना। हालांकि, सामाजिक दबाव और कानूनी पचड़ों ने फिलहाल उन्हें अलग कर दिया है। अंकित जेल में है और संध्या पुलिस लाइन या अपने ननिहाल में। अब देखना यह होगा कि क्या यह 'वर्दी और जुर्म' की प्रेम कहानी अंजाम तक पहुंच पाती है या फिर समाज की दीवारों में दम तोड़ देती है।
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