मेरठ: क्रांतिधरा मेरठ (Meerut) में आज यानी 23 जनवरी की शाम एक विशेष घटनाक्रम देखने को मिलेगा. अगर आज शाम ठीक 6 बजे आपके घर की बत्ती गुल हो जाए और बाहर जोर-जोर से सायरन बजने लगे, तो आपको घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. यह कोई वास्तविक आपदा या हवाई हमला नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और सिविल डिफेंस (Civil Defense) द्वारा आयोजित एक मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल (Meerut Blackout Mock Drill) है.READ ALSO:-Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (पराक्रम दिवस) और उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर शासन ने प्रदेश के कई जनपदों में हवाई हमले से बचाव की तैयारियों को परखने के लिए इस मॉक ड्रिल के निर्देश दिए हैं. मेरठ में आज शाम 6 बजे से 6:10 बजे तक, यानी कुल 10 मिनट के लिए पूरे शहर की विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी और ब्लैकआउट का अभ्यास किया जाएगा.
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इस महत्वपूर्ण आयोजन का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों, विशेषकर युद्ध या हवाई हमले के दौरान जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. आइए विस्तार से जानते हैं कि आज शाम मेरठ में क्या होने वाला है, मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के नियम क्या हैं और एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए.
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आज शाम 6 बजे क्या होगा?

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जिला प्रशासन और नागरिक सुरक्षा विभाग (Civil Defense) ने इस ड्रिल की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है.
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    समय: शाम 6:00 बजे.
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    संकेत: शहर में लगे सिविल डिफेंस के सायरन बजना शुरू होंगे.
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    कार्रवाई: सायरन बजते ही बिजली विभाग (Electricity Department) शहर की स्ट्रीट लाइट्स और घरेलू सप्लाई बंद कर देगा.
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    अवधि: यह अंधेरा ठीक 10 मिनट तक रहेगा.
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    समापन: 10 मिनट बाद एक लंबा सायरन (ऑल क्लियर) बजेगा, जिसके बाद बिजली बहाल कर दी जाएगी.
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डीएन इंटर कॉलेज (DN Inter College) को इस मॉक ड्रिल का मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहाँ से अधिकारी पूरी गतिविधि की निगरानी करेंगे. सायरन की आवाज 'ऊंची-नीची' (Wailing Sound) होगी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई हमले की चेतावनी (Air Raid Warning) का संकेत मानी जाती है.
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ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है?

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अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि शांति काल में इस तरह के मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की क्या आवश्यकता है? एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ब्लैकआउट एक महत्वपूर्ण 'आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था' है.
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    हवाई हमलों से बचाव: युद्ध की स्थिति में दुश्मन के लड़ाकू विमान रात के समय रोशनी को निशाना बनाकर हमला करते हैं. शहरों की रोशनी (City Lights) उनके लिए टारगेट पहचानना आसान बना देती है. ब्लैकआउट करके शहर को अंधेरे में छिपा दिया जाता है ताकि दुश्मन सटीक निशाना न लगा सके.
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    तैयारियों का जायजा: इस ड्रिल के जरिए प्रशासन यह परखना चाहता है कि सायरन बजने के कितनी देर बाद शहर अंधेरे में डूबता है और जनता की प्रतिक्रिया (Response Time) क्या रहती है.
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    जागरूकता: नई पीढ़ी को यह पता होना चाहिए कि अगर कभी वास्तव में ऐसी स्थिति बनी, तो उन्हें पैनिक करने के बजाय क्या कदम उठाने चाहिए.
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जनता के लिए गाइडलाइंस: ब्लैकआउट के दौरान क्या करें?

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मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की सफलता पूरी तरह से आम जनता के सहयोग पर निर्भर करती है. प्रशासन ने नागरिकों के लिए कुछ विशेष निर्देश (Dos and Don'ts) जारी किए हैं. शाम 6 बजे सायरन बजते ही आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
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1. घर की लाइटें तुरंत बंद करें

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जैसे ही सायरन की आवाज सुनाई दे, अपने घर, दुकान या प्रतिष्ठान की सभी लाइटें तुरंत बंद कर दें. स्विच ऑफ करने में देरी न करें. याद रखें, एक छोटी सी लाइट भी अंधेरे में दुश्मन के लिए 'गाइड' का काम कर सकती है (ड्रिल में यह अनुशासन का प्रतीक है).
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2. खिड़कियों को ढक लें

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अगर आपको घर के अंदर किसी बहुत जरूरी काम के लिए मोमबत्ती या टॉर्च जलानी भी पड़े, तो यह सुनिश्चित करें कि रोशनी बाहर न जाए. इसके लिए अपनी खिड़कियों और दरवाजों को मोटे पर्दों (Curtains) या काले कागज से पूरी तरह ढक दें. इसे 'लाइट अनुशासन' कहा जाता है.
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3. वाहन चालक दें विशेष ध्यान

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अगर आप शाम 6 बजे सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं और मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का सायरन बज जाए, तो:
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    अपनी गाड़ी को तुरंत सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर रोक दें.
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    गाड़ी की हेडलाइट (Headlight) और टेललाइट तुरंत बंद कर दें.
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    सड़क के बीच में गाड़ी न रोकें ताकि इमरजेंसी वाहनों (एम्बुलेंस/फायर ब्रिगेड) को रास्ता मिल सके.
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4. अफवाहों से बचें

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यह केवल एक अभ्यास (Drill) है. इसलिए डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं कि "शहर पर हमला हो गया है" या "बिजली संकट आ गया है". अपने आस-पास के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों को समझाएं कि यह एक सुरक्षा ड्रिल है.
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प्रशासन की तैयारियां: नोडल अधिकारी का बयान

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मेरठ में इस ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के सफल संचालन के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सूर्यकांत त्रिपाठी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्होंने बताया कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
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एडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी ने कहा, "यह मॉक ड्रिल शासन के निर्देशों पर की जा रही है. इसमें सिविल डिफेंस के साथ-साथ दमकल विभाग (Fire Brigade), स्वास्थ्य विभाग (Health Department), पुलिस और विद्युत विभाग का समन्वय रहेगा. हमारा उद्देश्य है कि रिस्पांस टाइम को न्यूनतम किया जाए. डीएन इंटर कॉलेज में कंट्रोल रूम बनाया गया है."
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विभागों की भूमिका:

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    विद्युत विभाग: सायरन बजते ही ग्रिड से सप्लाई काटेगा.
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    सिविल डिफेंस: वार्डन सड़कों पर घूमकर लोगों को लाइट बंद करने के लिए प्रेरित करेंगे और हूटर बजाएंगे.
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    पुलिस: ट्रैफिक व्यवस्था संभालेगी ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई अप्रिय घटना न हो.
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    अस्पताल: अस्पतालों को अपनी इमरजेंसी लाइट और जनरेटर को 'ब्लैकआउट मोड' (पर्दे लगाकर) में चलाने का अभ्यास करना होगा.
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ब्लैकआउट का इतिहास और महत्व

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भारत में ब्लैकआउट का अभ्यास नया नहीं है. 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान मेरठ समेत उत्तर भारत के कई शहरों ने हफ्तों तक 'ब्लैकआउट' का जीवन जिया है. उस समय लोग अपनी खिड़कियों के शीशों पर काला पेंट कर दिया करते थे और गाड़ियों की हेडलाइट के ऊपरी आधे हिस्से को काले रंग से रंग दिया जाता था.
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आज के दौर में भले ही युद्ध की तकनीक बदल गई हो और रडार सिस्टम आ गए हों, लेकिन 'विजुअल टारगेटिंग' (Visual Targeting) से बचने के लिए ब्लैकआउट आज भी एक कारगर रणनीति मानी जाती है. मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल हमें उस अनुशासन की याद दिलाता है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है.
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सायरन के प्रकार और उनका अर्थ

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आम जनता को सायरन की आवाज के फर्क को समझना चाहिए. मॉक ड्रिल में दो तरह के सायरन बज सकते हैं:
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    चेतावनी सायरन (Warning Siren): यह रुक-रुक कर, ऊंची-नीची आवाज में बजता है. इसका मतलब है 'खतरा है' या 'हमला होने वाला है'. आज शाम 6 बजे यही सायरन बजेगा.
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    ऑल क्लियर सायरन (All Clear): यह एक लंबी और सपाट आवाज होती है जो बिना रुके बजती है. इसका मतलब है 'खतरा टल गया है'. यह ड्रिल खत्म होने (6:10 बजे) पर बजाया जाएगा.
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सिविल डिफेंस

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आज का दिन इसलिए चुना गया है क्योंकि आज 'पराक्रम दिवस' है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन कर देश को सैन्य अनुशासन का पाठ पढ़ाया था. सिविल डिफेंस का मोटो भी "सर्व जन हिताय" और राष्ट्र की रक्षा है. मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल एक तरह से नेताजी को श्रद्धांजलि भी है, जो यह संदेश देती है कि हम अपनी सुरक्षा के लिए सदैव सतर्क हैं.
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नागरिकों से अपील

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मेरठ प्रशासन ने सभी व्यापार संगठनों, आरडब्ल्यूए (RWA) और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इस मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल को सफल बनाने में सहयोग करें.
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    दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिरा दें या लाइट बंद रखें.
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    फैक्ट्री मालिक 10 मिनट के लिए भारी मशीनरी और रोशनी बंद रखें.
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    सोसाइटी के गार्ड्स सीटी बजाकर निवासियों को अलर्ट करें.
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सुरक्षा केवल सेना या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास है. आज शाम होने वाला मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आपकी और हमारी जागरूकता की परीक्षा है. 10 मिनट का यह अंधेरा हमारे भविष्य को सुरक्षित रखने की तैयारी का हिस्सा है. तो याद रखें, आज शाम 6 बजे जैसे ही सायरन गूंजे, अपनी उंगलियां स्विच बोर्ड की तरफ बढ़ाएं और अंधेरा करके यह साबित करें कि मेरठ का हर नागरिक देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है.
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मेरठ में आज (23 जनवरी) शाम 6:00 बजे से 6:10 बजे तक 'ब्लैकआउट मॉक ड्रिल' आयोजित की जाएगी. नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर आयोजित इस ड्रिल के दौरान पूरे शहर की बिजली काट दी जाएगी और सायरन बजाए जाएंगे. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस दौरान अपने घरों की लाइटें बंद रखें, वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रोकें और घबराएं नहीं.
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