पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में मंगलवार की रात कानून व्यवस्था के नाम पर एक काला अध्याय जुड़ गया। अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने का दावा करने वाली 'मित्र पुलिस' के साथ मवाना थाना क्षेत्र में जो हुआ, उसने पूरे विभाग को झकझोर कर रख दिया है। गोकशी की सूचना पर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम पर न केवल जानलेवा हमला किया गया, बल्कि भीड़ ने कानून के रक्षकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। हद तो तब हो गई जब एक सिपाही की वर्दी फाड़कर उसे निर्वस्त्र (न्यूड) कर दिया गया और उसकी सरकारी पिस्टल लूट ली गई। इस दुस्साहसिक वारदात ने पुलिस के खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-पुलिस कस्टडी में मेरठ के कुख्यात गैंगस्टर विनय त्यागी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, दो पुलिसकर्मियों समेत त्यागी गंभीर रूप से घायल
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1. वो काली रात: कैसे बिछाया गया पुलिस के लिए जाल?

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यह घटना मंगलवार देर रात की है। मेरठ पुलिस की क्राइम ब्रांच और मवाना थाने की संयुक्त टीम को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि सठला गांव में बड़े पैमाने पर गोकशी (Cow Slaughter) की तैयारी चल रही है। सूचना सटीक थी, इसलिए पुलिस ने बिना समय गंवाए कार्रवाई का मन बनाया।
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लक्ष्य था पशु तस्करी और गोकशी में वांछित तीन शातिर अपराधी— तल्हा, कादिर और गुलाब। पुलिस टीम पूरी तैयारी के साथ गांव की ओर बढ़ी, लेकिन उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि अपराधी उनसे दो कदम आगे हैं।
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पेट्रोल पंप पर एंबुश (Ambush): पुलिस की गाड़ियां जैसे ही मवाना क्षेत्र के सठला और रामनगर गांव के बीच स्थित एक पेट्रोल पंप के पास पहुंचीं, वहां का नजारा देखकर पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। वहां पहले से ही सैकड़ों की संख्या में भीड़ जमा थी। ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों को पुलिस की दबिश की भनक लग चुकी थी और उन्होंने ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को ढाल बनाकर पुलिस को घेरने की योजना बना रखी थी।
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2. मंजर: जब भीड़ बन गई 'भेड़िया'

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जैसे ही पुलिस की गाड़ी रुकी, भीड़ ने 'हमला' बोल दिया। यह कोई साधारण विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि पुलिस को जान से मारने की नीयत से किया गया हमला था।
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    गाड़ियों में तोड़फोड़: उपद्रवियों ने सबसे पहले पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया। लाठी-डंडों और पत्थरों की बरसात कर दी गई। पुलिस जीप के शीशे चकनाचूर हो गए। ड्राइवर और आगे बैठे अधिकारियों ने किसी तरह झुककर खुद को कांच के टुकड़ों से बचाया।
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    सिपाहियों को घेरा: भीड़ ने पुलिसकर्मियों को गाड़ियों से खींचना शुरू कर दिया। जो पुलिसकर्मी कानून की रक्षा के लिए गए थे, वे खुद अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करने लगे।
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3. सिपाही सुनील के साथ बर्बरता की हदें पार

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इस पूरे घटनाक्रम का सबसे शर्मनाक और रूह कंपा देने वाला पहलू सिपाही सुनील के साथ हुई दरिंदगी थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, भीड़ ने सिपाही सुनील को चारों तरफ से घेर लिया।
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    निर्वस्त्र कर घुमाया: उन्मादी भीड़ ने सिपाही की वर्दी फाड़ डाली। उसे पूरी तरह से निर्वस्त्र (न्यूड) कर दिया गया। इसके बाद उसे लाठी-डंडों और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया। एक पुलिसकर्मी का यह अपमान न केवल उसकी व्यक्तिगत गरिमा पर हमला था, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य की सत्ता और कानून व्यवस्था को चुनौती थी।
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    हथियार लूट: इस हाथापाई के दौरान उपद्रवियों ने सिपाही की कमर से उसकी सरकारी पिस्टल (Service Pistol) भी छीन ली। एक लोडेड सरकारी हथियार का गायब होना पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इसका इस्तेमाल किसी बड़ी वारदात में किया जा सकता है।
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4. अन्य पुलिसकर्मियों की हालत और रेस्क्यू ऑपरेशन

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हमले में सिर्फ सुनील ही नहीं, बल्कि पूरी टीम घायल हुई। एक अन्य सिपाही के हाथ की हड्डी टूट गई है, जबकि एक के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। खून से लथपथ पुलिसकर्मी भीड़ के बीच फंसे हुए थे।
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सीओ की एंट्री और बचाव: स्थिति हाथ से निकलती देख वायरलेस सेट पर "SOS" कॉल दी गई। सूचना मिलते ही सीओ मवाना पंकज लवानिया (CO Pankaj Lavaniya) भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर दौड़े। जब तक अतिरिक्त फोर्स वहां पहुंची, वहां का माहौल युद्ध के मैदान जैसा हो चुका था। सीओ और उनकी टीम ने लाठियां फटकार कर भीड़ को तितर-बितर किया और घिरे हुए पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है।
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5. पुलिस का एक्शन: 3 हिरासत में, गांव छावनी में तब्दील

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अपने साथियों पर हुए इस जानलेवा हमले के बाद मेरठ पुलिस अब 'एक्शन मोड' में आ गई है। एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।
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    गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से और बाद में दबिश देकर तीन मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनके नाम हैं:
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      अब्दुल कादिर
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      ताल्हा (पुत्र अब्दुल गफ्फार)
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      गुलाब (पुत्र नवाब)
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    सीसीटीवी जांच: पुलिस ने पेट्रोल पंप और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की DVR को अपने कब्जे में ले लिया है। फुटेज के जरिए उन चेहरों की पहचान की जा रही है जिन्होंने सिपाही को पीटा और पिस्टल छीनी।
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    पिस्टल की तलाश: लूटी गई पिस्टल की बरामदगी के लिए पुलिस की कई टीमें सठला और रामनगर के जंगलों और घरों में छापेमारी कर रही हैं।
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6. दूसरा पहलू: आरोपी पक्ष के गंभीर आरोप

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हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इस मामले में भी आरोपी पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हिरासत में लिए गए आरोपी गुलाब की बहन समरीन ने थाने पहुंचकर हंगामा किया और अपनी बात रखी।
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समरीन का बयान:

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"पुलिस वाले रात के अंधेरे में बिना वर्दी (Civil Dress) के आए थे। हमें लगा कोई बदमाश हैं। उन्होंने बिना किसी वारंट या कारण बताए मेरे भाई और अन्य लड़कों को जबरन उठाना शुरू कर दिया। जब हमने विरोध किया तो झड़प हुई। पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए हम पर झूठे आरोप लगा रही है।"
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हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्दी में होना या न होना, भीड़ द्वारा जानलेवा हमला करने और हथियार लूटने का लाइसेंस नहीं देता। क्राइम ब्रांच की टीमें अक्सर ऑपरेशनल गोपनीयता के लिए सादे कपड़ों में होती हैं, लेकिन उनके साथ वर्दीधारी पुलिस भी मौजूद थी।
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7. अधिकारी क्या कहते हैं?

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एसएसपी मेरठ, डॉ. विपिन ताड़ा:
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"यह घटना अक्षम्य है। पुलिस टीम गोकशी के आरोपियों को पकड़ने गई थी। भीड़ द्वारा पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, अभद्रता और हथियार छीनने की घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया है। आरोपियों पर रासुका (NSA) और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकारी पिस्टल की बरामदगी हमारी प्राथमिकता है।"
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सीओ मवाना, पंकज लवानिया:
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"घटना को लेकर गांव में कुछ अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं। हम तथ्यों की जांच कर रहे हैं। जिसने भी कानून हाथ में लिया है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सठला, रामनगर और आसपास के गांवों में गश्त बढ़ा दी गई है।"
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8. विश्लेषण: आगे क्या होगा?

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इस घटना ने पुलिस के 'इकबाल' को सीधी चुनौती दी है। योगी सरकार में पुलिस पर हमले को 'रेड लाइन' माना जाता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में मवाना क्षेत्र में बड़ी पुलिस कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
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    बुलडोजर एक्शन की संभावना: जिस तरह से यूपी में माफियाओं और पुलिस पर हमला करने वालों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलता है, सठला कांड के आरोपियों की संपत्तियों की जांच भी शुरू हो सकती है।
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    कड़ी धाराएं: आरोपियों पर आईपीसी (अब बीएनएस) की धाराओं के तहत हत्या का प्रयास, डकैती (पिस्टल लूट), सरकारी कार्य में बाधा और 7-क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट जैसी संगीन धाराएं लगनी तय हैं।
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    खुफिया तंत्र की विफलता: यह घटना पुलिस के लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की विफलता भी दर्शाती है। इतनी बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई और पुलिस को भनक तक नहीं लगी, यह जांच का विषय है।
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मेरठ का सठला कांड सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता का परिचायक है जो अपराध को बचाने के लिए कानून को कुचलने से भी गुरेज नहीं करती। एक सिपाही का निर्वस्त्र होना पूरे पुलिस महकमे के लिए शर्मिंदगी का सबब है। अब देखना यह होगा कि मेरठ पुलिस कितनी जल्दी अपनी खोई हुई पिस्टल और सम्मान वापस हासिल करती है। फिलहाल, गांव में सन्नाटा है और पुलिस के बूटों की आवाज गूंज रही है।
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