देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में बुधवार का दिन गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े पुलिस कस्टडी में चल रहे एक हाई-प्रोफाइल अपराधी पर जानलेवा हमला बोल दिया। निशाना था- पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात गैंगस्टर और 50 से अधिक संगीन मामलों का आरोपी विनय त्यागी।READ ALSO:-यूपी में ठंड का 'टॉर्चर': जौनपुर, मेरठ और सोनभद्र समेत कई जिलों में स्कूल बंद; लखनऊ-प्रयागराज में बदली टाइमिंग, देखें अपने जिले की लिस्ट
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लक्सर के व्यस्त फ्लाईओवर पर जो मंजर देखने को मिला, वह किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर फिल्म के सीन जैसा था। बाइक सवार हमलावर, हाथों में हथियार, पुलिस वैन पर ताबड़तोड़ फायरिंग और चारों तरफ मचती भगदड़। इस खूनी खेल में गैंगस्टर विनय त्यागी को दो गोलियां लगी हैं, जबकि उसकी सुरक्षा में तैनात खाकी वर्दी भी खून से लाल हो गई है।
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वारदात की आंखों देखी: फ्लाईओवर पर 'मौत' का तांडव

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घटनाक्रम बुधवार दोपहर का है। रुड़की जेल में बंद मेरठ के कुख्यात अपराधी विनय त्यागी को लक्सर कोर्ट में पेशी के लिए लाया जा रहा था। पुलिस की वज्र वाहन (सुरक्षा गाड़ी) अपनी रफ्तार में थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मौत रास्ते में ही घात लगाए बैठी है।
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प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही पुलिस की गाड़ी लक्सर फ्लाईओवर के पास पहुंची, वहां पहले से रेकी कर रहे 4 बाइक सवार हमलावरों ने गाड़ी को घेरने की कोशिश की। इससे पहले कि सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते, हमलावरों ने ऑटोमेटिक हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी।
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"गोलियों की आवाज से पूरा बाजार थम गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए दुकानों के शटर गिराने लगे और राहगीर अपनी गाड़ियां छोड़कर भागने लगे," एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
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हमलावरों का मकसद साफ था- विनय त्यागी को किसी भी कीमत पर खत्म करना। ताबड़तोड़ फायरिंग में विनय त्यागी को दो गोलियां लगीं। वहीं, उसे बचाने और जवाबी कार्रवाई की कोशिश में दो पुलिस कांस्टेबल भी गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर हवा में हथियार लहराते हुए फरार होने में कामयाब रहे।
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कौन है विनय त्यागी? जुर्म की दुनिया का 'बैड कैरेक्टर'

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इस हमले ने एक बार फिर विनय त्यागी के नाम को सुर्खियों में ला दिया है। आखिर कौन है यह शख्स जिसके लिए बदमाशों ने पुलिस से भिड़ने का जोखिम उठाया? आइए जानते हैं उसकी 'क्राइम कुंडली':
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    मूल निवास: विनय त्यागी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी का रहने वाला है, लेकिन उसका 'वर्क फील्ड' मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश रहा है।
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    50+ मुकदमों का इतिहास: विनय त्यागी कोई साधारण अपराधी नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण और रंगदारी जैसे 50 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
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    माफिया घोषित: योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस ने विनय त्यागी को आधिकारिक तौर पर 'अपराध माफिया' (Crime Mafia) घोषित कर रखा है। वह एक समय 50,000 रुपये का इनामी बदमाश भी रह चुका है।
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    हाई-प्रोफाइल कनेक्शन: पुलिस सूत्रों की मानें तो विनय त्यागी के तार पश्चिमी यूपी के सबसे खतरनाक गैंग्स से जुड़े रहे हैं। उसका नाम कुख्यात बदन सिंह बद्दो (जो पुलिस कस्टडी से फरार होने के लिए कुख्यात है) और भूपेंद्र बाफर गैंग के साथ भी जोड़ा जाता रहा है। यह कनेक्शन बताता है कि विनय त्यागी अंडरवर्ल्ड की कितनी गहरी जड़ों तक पहुंच रखता है।
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2024 की गिरफ्तारी और साजिश की आशंका

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साल 2024 में विनय त्यागी की गिरफ्तारी एक बड़ी खबर बनी थी। मेरठ पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक सटीक सूचना के आधार पर उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया था। वह गाजियाबाद के एक बड़े ठेकेदार के माल चोरी और रंगदारी के मामले में वांटेड था।
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गिरफ्तारी के बाद से ही उसे अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया जाता रहा, लेकिन उसके दुश्मनों की संख्या कम नहीं थी। जेल की सलाखों के पीछे भी उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था।
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परिवार का डर हुआ सच: पत्नी ने पहले ही जताई थी आशंका

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इस हमले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और खुफिया तंत्र (Intelligence Network) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विनय त्यागी के परिवार को इस हमले का पहले से अंदेशा था।
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विनय त्यागी की पत्नी, जो खुद एक राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं और पूर्व में ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं, ने कई बार पुलिस प्रशासन और कोर्ट में अर्जी देकर अपने पति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि विनय की जान को खतरा है और पेशी के दौरान उन पर हमला हो सकता है। आज लक्सर फ्लाईओवर पर हुआ खून-खराबा साबित करता है कि परिवार का डर बेबुनियाद नहीं था।
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सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस ने इन इनपुट्स को गंभीरता से नहीं लिया? या फिर बदमाशों का सूचना तंत्र पुलिस से ज्यादा मजबूत था? हमलावरों को कैसे पता चला कि विनय त्यागी को किस गाड़ी से, किस रास्ते और किस समय ले जाया जाएगा? यह 'लीक' कहां से हुआ, इसकी जांच अब सबसे अहम मुद्दा है।
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वेस्ट यूपी की रंजिश, उत्तराखंड की जमीन

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जानकार बताते हैं कि यह हमला 'गैंगवार' (Gang War) का नतीजा हो सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गैंग्स के बीच वर्चस्व की लड़ाई दशकों पुरानी है। अक्सर देखा गया है कि जब अपराधी यूपी में पुलिस की सख्ती (एनकाउंटर के डर) से भागते हैं, तो वे उत्तराखंड या दिल्ली में शरण लेते हैं या वहां सरेंडर करते हैं। लेकिन दुश्मनी पीछा नहीं छोड़ती।
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विनय त्यागी ने अपने आपराधिक जीवन में कई दुश्मन बनाए हैं। चाहे वह रंगदारी को लेकर व्यापारियों से दुश्मनी हो या फिर दूसरे गैंग्स के साथ वर्चस्व की लड़ाई। पुलिस की शुरुआती जांच दो एंगल्स पर टिकी है:
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    पुरानी रंजिश: क्या यह हमला किसी पुराने शिकार ने बदला लेने के लिए करवाया है?
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    गैंगवॉर: क्या यह बदन सिंह बद्दो या किसी विरोधी गैंग का काम है जो विनय त्यागी को रास्ते से हटाना चाहता है?
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पुलिस का एक्शन: बॉर्डर सील, CCTV की स्कैनिंग

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वारदात के तुरंत बाद उत्तराखंड पुलिस हरकत में आ गई है। एसएसपी हरिद्वार और अन्य उच्च अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया।
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    नाकेबंदी: लक्सर से निकलने वाले सभी रास्तों और विशेषकर उत्तर प्रदेश (मुजफ्फरनगर-बिजनौर) से लगने वाले बॉर्डर्स को सील कर दिया गया है। हर आने-जाने वाली गाड़ी की तलाशी ली जा रही है।
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    CCTV फुटेज: पुलिस लक्सर फ्लाईओवर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके और उनकी बाइक का नंबर ट्रेस किया जा सके।
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    घायलों की स्थिति: विनय त्यागी को गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर किया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है। वहीं, घायल पुलिसकर्मियों का उपचार भी जारी है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
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कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान

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यह घटना सिर्फ एक गैंगवार नहीं है, बल्कि सिस्टम के मुंह पर तमाचा है। दिनदहाड़े, पुलिस कस्टडी में, और वह भी भीड़भाड़ वाले इलाके में फायरिंग होना आम जनता के मन में खौफ पैदा करता है।
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    क्या पुलिस वैन में पर्याप्त सुरक्षाकर्मी थे?
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    क्या गैंगस्टर को बुलेटप्रूफ जैकेट या बख्तरबंद गाड़ी में नहीं लाया जाना चाहिए था, खासकर जब वह 'माफिया' घोषित है?
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    हमलावरों के पास ऑटोमेटिक हथियार कहां से आए?
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ये वो सवाल हैं जिनका जवाब उत्तराखंड और यूपी पुलिस को जनता को देना होगा।
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आगे क्या?

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फिलहाल, विनय त्यागी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। अगर वह बच भी जाता है, तो यह हमला इस बात का संकेत है कि उसके दुश्मन आखिरी सांस तक उसका पीछा नहीं छोड़ेंगे। दूसरी तरफ, पुलिस के लिए यह साख का सवाल है। हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना और इस साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचना अब पुलिस की प्राथमिकता होगी।
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यह घटना याद दिलाती है कि अपराध की दुनिया में 'एंट्री' अपनी मर्जी से हो सकती है, लेकिन 'एक्जिट' अक्सर गोलियों की तड़तड़ाहट के साथ ही होता है। लक्सर का यह शूटआउट आने वाले दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के क्राइम बुलेटिन में कई नए अध्याय जोड़ेगा।
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