मेरठ सेंट्रल मार्केट पर सुप्रीम कोर्ट की सीलिंग का कहर! 70 करोड़ रुपये का शमन शुल्क जमा करने के बावजूद व्यापारियों में हाहाकार। न्याय के लिए 'पैदल न्याय यात्रा' लेकर अमित शाह से मिलने जा रहे
Published at : 15 Apr 2026, 09:09 AM
Updated at : 08 Sep 2026, 10:46 AM
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Meerut Police Detains Sachin Sirohi Ahead of March Against Central Market Sealing
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इन दिनों प्रशासन और व्यापारियों के बीच भारी तनाव का माहौल है। बुधवार को व्यापारियों के समर्थन में 'पैदल न्याय यात्रा' की शुरुआत करने पहुंचे हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही को पुलिस ने भारी फोर्स के साथ हिरासत में ले लिया है। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की भी देखने को मिली। यह पूरा विवाद मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग से जुड़ा है, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश जारी किए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में बदमाशों का बेखौफ तांडव: नूरपुर में स्कूटी सवार युवकों पर जानलेवा हमला, दहशत फैलाने के लिए की हवाई फायरिंग
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व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए देश के गृहमंत्री अमित शाह से गुहार लगाने दिल्ली जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस यात्रा को बीच में ही रोक दिया। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और क्यों मेरठ के व्यापारियों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
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पैदल न्याय यात्रा और पुलिस का एक्शन
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हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वह 15 अप्रैल (बुधवार) को सुबह 10:30 बजे व्यापारियों के एक बड़े जत्थे के साथ दिल्ली के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे। मंगलवार रात से ही पुलिस उनकी तलाश में थी, लेकिन वह पुलिस को चकमा देने में सफल रहे। बुधवार सुबह ठीक 10:00 बजे सचिन अपने समर्थकों के साथ सेंट्रल मार्केट स्थित विवादित स्थल 661/6 पर पहुंच गए।
वहां पहले से ही पुलिस बल तैनात था। जैसे ही सचिन ने यात्रा शुरू करने का प्रयास किया, डिप्टी एसपी (LIU) प्रदीप कुमार और सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने भारी फोर्स के साथ उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। सचिन सिरोही का कहना था कि वह व्यापारियों के भविष्य और रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं और गृहमंत्री अमित शाह के सामने उनका दर्द बयां करना चाहते हैं। जब पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया, तो उन्होंने एसीएम सिविल लाइन प्रभाकर त्रिपाठी को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मुख्य रूप से सेंट्रल मार्केट को बचाने के लिए जल्द कानून बनाने, सुप्रीम कोर्ट में व्यापारियों का पक्ष रखने के लिए भाजपा की ओर से एक बड़े वकील की व्यवस्था करने और गृहमंत्री से मुलाकात का समय दिलाने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपते ही पुलिस ने सचिन सिरोही और उनके साथी धर्मेंद्र सिंह को हिरासत में लिया और थाने भेज दिया। महिलाओं ने भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने रात में आकर उन पर धरना खत्म करने का दबाव बनाया था।
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मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग का सुप्रीम कोर्ट कनेक्शन
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यह पूरा विवाद रातों-रात खड़ा नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई है। हाल ही में, 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त आदेश पारित किया। कोर्ट ने 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक (इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह) में किए गए निर्माण को दो महीने के भीतर तोड़ने का फरमान सुनाया।
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि बिना इजाजत और अवैध रूप से बनी इन इमारतों में स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी बैंकों को चलने की अनुमति कैसे दी गई? इसी कड़ी में, 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया था। यह संपत्तियां आवासीय क्षेत्र (Residential Area) में व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial Activities) के संचालन के कारण सील की जा रही हैं। कोर्ट ने 15 दिन के भीतर सभी व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कर सेटबैक का रास्ता खोलने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग की यही वह कार्रवाई है जिसने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है।
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70 करोड़ का विवाद: क्या व्यापारियों के साथ हुआ धोखा?
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इस मामले में सबसे बड़ा पेंच और व्यापारियों का गुस्सा 'शमन शुल्क' (Compounding Fee) के रूप में जमा कराए गए 70 करोड़ रुपये को लेकर है। 27 जनवरी को जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी, तब भी आवासीय जमीन पर चल रही कमर्शियल गतिविधियों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था। उस समय व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था।
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स्थिति को शांत करने के लिए, आवास विकास के अधिकारियों ने एक विकल्प दिया। उन्होंने कहा कि 36,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से शमन शुल्क जमा करके आवासीय प्लॉट का भू-उपयोग (Land Use) कमर्शियल में बदला जा सकता है। अपनी दुकानों को बचाने की आस में, व्यापारियों ने लगभग 70 करोड़ रुपये आवास विकास विभाग में जमा कर दिए।
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व्यापारियों का आरोप है कि आवास विकास ने सुप्रीम कोर्ट से यह बात छिपाई कि उन्होंने व्यापारियों से भू-उपयोग बदलने के नाम पर 70 करोड़ रुपये ले लिए हैं। जब बुधवार को सीलिंग की टीम पहुंची, तो व्यापारियों ने सवाल उठाया कि अगर सीलिंग ही करनी थी, तो करोड़ों रुपये क्यों वसूले गए? इस पर एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि सीलिंग की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है, जो कि अलग मामला है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो व्यापारी अपना भू-उपयोग नहीं बदलवाना चाहते और पैसा वापस चाहते हैं, प्रशासन उन्हें पैसा वापस दिलाने में मदद करेगा।
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1990 से 2026 तक: कैसे शुरू हुआ यह पूरा बवाल?
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इस पूरे विवाद की जड़ें साल 1990 से जुड़ी हैं। उस समय मेरठ में आवास-विकास को सूचना मिली थी कि आवासीय भूखंड (661/6) पर अवैध रूप से कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। जब तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार निर्माण कार्य रुकवाने पहुंचे, तो स्थानीय व्यापारियों ने हंगामा कर दिया और बात इतनी बिगड़ी कि व्यापारियों ने अधिकारी को थप्पड़ मार दिया।
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इस घटना की नौचंदी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद आवास-विकास ने कई बार इस अवैध निर्माण को गिराने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक और स्थानीय दबाव के कारण कार्रवाई रुकती रही। थक हारकर आवास-विकास ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की। साल 2014 में हाईकोर्ट ने 2 महीने के भीतर अवैध इमारत गिराने का आदेश दिया।
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व्यापारियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। करीब 10 साल चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 17 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कॉम्प्लेक्स नंबर 661/6 सहित सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का अंतिम आदेश दिया। जिसके अनुपालन में 25 अक्टूबर 2025 को 22 दुकानों वाले इस कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया था। उसी क्रम में अब बाकी 44 दुकानों पर गाज गिर रही है।
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वर्तमान में मेरठ का यह व्यापारी वर्ग दोतरफा मार झेल रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश हैं, जिनका पालन प्रशासन के लिए अनिवार्य है; तो दूसरी तरफ व्यापारियों की जीवन भर की कमाई और रोजी-रोटी का संकट है। प्रशासन द्वारा भू-उपयोग बदलने के नाम पर पैसे लेना और फिर सीलिंग की कार्रवाई होना व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग का यह मामला अब केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह है कि सचिन सिरोही की गिरफ्तारी के बाद व्यापारियों का यह आंदोलन क्या दिशा लेता है और क्या राज्य सरकार या गृह मंत्रालय इस मामले में कोई हस्तक्षेप करता है।
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मेरठ के सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 44 कमर्शियल दुकानों की सीलिंग का विरोध हो रहा है। व्यापारियों के समर्थन में दिल्ली जाकर गृहमंत्री अमित शाह से न्याय मांगने के लिए 'पैदल न्याय यात्रा' निकाल रहे हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। व्यापारियों का आरोप है कि आवास विकास ने संपत्तियों का कमर्शियल उपयोग करने के लिए 70 करोड़ रुपये शुल्क वसूल लिया, फिर भी कोर्ट के आदेश की आड़ में दुकानें सील की जा रही हैं। यह विवाद 1990 से चला आ रहा है जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख देखने को मिल रहा है।
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