सोशल मीडिया पर 44 सेकेंड के एक वीडियो ने रविवार को पूरे मेरठ शहर और प्रशासन की सांसें अटका दीं। वीडियो में एक खतरनाक झूले का दरवाजा हवा में खुलते और लोगों की चीख-पुकार मचते हुए दिखाई दे रही थी। इसे मेरठ के ऐतिहासिक नौचंदी मेले का बताया गया। लेकिन जब पुलिस और प्रशासन की टीम सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंची और जांच की, तो एक ऐसा सच सामने आया जिसने सबको चौंका दिया। यह वीडियो 100% फेक और भ्रामक निकला। जानिए कैसे एक अफवाह ने मचाया हड़कंप और क्या है इस वायरल वीडियो का असली सच। READ ALSO:-मौसम महा-अलर्ट 18 मई: दिल्ली-NCR में 43 डिग्री का 'टॉर्चर', लू से झुलसेंगे लोग; वहीं 15 राज्यों में आंधी-तूफान और भारी बारिश की भयंकर चेतावनी
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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की शान और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक ऐतिहासिक 'नौचंदी मेला' इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है। दूर-दराज से लाखों की संख्या में लोग अपने परिवारों और बच्चों के साथ इस मेले का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। मेले का सबसे बड़ा आकर्षण वहां लगने वाले विशालकाय और रोमांचक झूले होते हैं। लेकिन रविवार का दिन इस मेले के लिए एक बड़ा 'पैनिक डे' (Panic Day) बन गया। सोशल मीडिया पर अचानक एक रूह कंपा देने वाला वीडियो वायरल होने लगा, जिसने मेले में जाने की तैयारी कर रहे लोगों के दिलों में दहशत भर दी।
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क्या था उस 44 सेकेंड के खौफनाक वीडियो में? (The Viral Video)

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रविवार की सुबह से ही फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और व्हाट्सएप (WhatsApp) के अनगिनत ग्रुप्स में एक 44 सेकेंड का वीडियो आग की तरह फैलने लगा। इस वीडियो के साथ कैप्शन दिया गया था— "मेरठ के नौचंदी मेले में लाइव एक्सीडेंट, जीरो ग्रेविटी झूले में फंसे लोग।"
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वीडियो का खौफनाक मंजर: वीडियो में एक गोल आकार का विशालकाय झूला (जिसे जीरो ग्रेविटी मिक्चर कहा जाता है) तेज गति से घूमता हुआ दिखाई दे रहा है। झूले के अंदर दर्जनों लोग बैठे हैं और झूला हवा में है। तभी अचानक उस चलते हुए झूले का एक भारी-भरकम लोहे का दरवाजा बाहर की तरफ खुल जाता है। दरवाजा खुलते ही झूले के अंदर बैठे लोगों में मौत का खौफ छा जाता है और चीख-पुकार मचने लगती है। खुला हुआ दरवाजा बाहर लगे एक लोहे के खंभे (Pillar) से जोर से टकराता है, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचता है। आनन-फानन में झूले के ऑपरेटर द्वारा मशीन को रोका जाता है।
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 मेला नौचंदी में जो झूला है, उसका दरवाजा अंदर की तरफ खुलता है। जबकि वायरल वीडियो में दरवाजा बाहर दिखाई दे रहा है।

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सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा: कुछ ही घंटों में इस वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका था (Millions of views)। लोग बिना सच्चाई जाने इस वीडियो पर अपनी कड़ी प्रतिक्रियाएं देने लगे। कोई कमेंट में इस तरह के खतरनाक झूलों को तुरंत बैन करने की मांग कर रहा था, तो कोई मेरठ जिला प्रशासन और मेला समिति की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठा रहा था। चारों तरफ से पुलिस और प्रशासन पर दबाव बढ़ने लगा था।
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सायरन बजाती पहुंची पुलिस, सीओ ने खुद संभाला मोर्चा

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जैसे ही यह खौफनाक वीडियो मेरठ पुलिस और जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, महकमे में हड़कंप मच गया। चूंकि मामला लाखों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए बिना एक पल गंवाए पुलिस-प्रशासन की टीम हरकत में आ गई।
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क्षेत्राधिकारी (CO) सिविल लाइन, शुचिता सिंह भारी पुलिस बल के साथ तुरंत नौचंदी मेला मैदान पहुंच गईं। पुलिस ने सीधे उस स्थान को घेरा जहां 'जीरो ग्रेविटी' (Zero Gravity) झूला लगा हुआ था। मेला प्रभारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर तलब कर लिए गए। झूले को रुकवाया गया और उसकी एक-एक चीज की बारीकी से तकनीकी जांच (Technical Inspection) शुरू की गई।
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जांच में खुला चौंकाने वाला राज: वीडियो मेरठ का है ही नहीं!

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जब सीओ शुचिता सिंह और मेला प्रभारी ने वायरल वीडियो का मिलान मौके पर लगे असली झूले से किया, तो एक बहुत बड़ी सच्चाई सामने आई। पुलिस और प्रशासनिक जांच में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया कि यह वीडियो मेरठ के नौचंदी मेले का है ही नहीं!
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किसी अज्ञात शरारती तत्व (Mischievous element) ने जानबूझकर मेले की छवि खराब करने और लोगों में दहशत फैलाने के उद्देश्य से इस पुराने या किसी अन्य स्थान के वीडियो को 'मेरठ का लाइव एक्सीडेंट' बताकर सोशल मीडिया पर डाल दिया था। सच्चाई सामने आते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने एक लंबी राहत की सांस ली।
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क्या है 'जीरो ग्रेविटी मिक्चर' झूला और कैसे खुली वीडियो की पोल?

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नौचंदी मेले में लगे इस झूले का असल नाम 'जीरो ग्रेविटी मिक्चर' (Zero Gravity Mixture) है। यह मुख्य रूप से चाइनीज तकनीक (Chinese Technology) पर आधारित है और हवा के भारी दबाव (Air Pressure) के सिद्धांत पर काम करता है। यह झूला हाल ही में ग्वालियर के मेले में भी काफी लोकप्रिय हुआ था और अब मेरठ लाया गया है।
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झूले के मुख्य संचालक (Operator) अनुज बंसल ने वायरल वीडियो की धज्जियां उड़ाते हुए उन तकनीकी अंतरों को गिनाया, जिनसे यह साबित हुआ कि वीडियो फेक है। अनुज बंसल ने बताया:
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    दरवाजे के खुलने की दिशा (Gate Direction): सबसे बड़ा सबूत झूले का दरवाजा है। वायरल वीडियो में झूले का गेट 'बाहर' की तरफ खुला है, जबकि मेरठ के नौचंदी मेले में लगे उनके झूले का गेट 'अंदर' की तरफ (Inward) खुलता है।
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    जमीन की सतह (Surface Area): वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि झूला किसी पक्के फर्श (Concrete Floor/Tiles) पर लगा हुआ है, जबकि नौचंदी मेले में यह झूला पूरी तरह से मिट्टी के कच्चे मैदान पर स्थापित किया गया है।
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    पेंटिंग और डिजाइन (Tent Painting): वायरल वीडियो वाले झूले के चारों ओर जो पर्दा/कवर लगा है, उस पर कई तरह की रंग-बिरंगी पेंटिंग (Art) बनी हुई है। जबकि नौचंदी में लगे असली झूले के बाहरी हिस्से पर ऐसी कोई भी पेंटिंग या डिजाइन नहीं है।
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अनुज बंसल ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिख रहा झूला उनके ओरिजिनल झूले की महज एक घटिया 'नकल' (Copy) प्रतीत होता है और वह वीडियो किसी और शहर का है।
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अफवाहों का बाजार: क्या यह वीडियो गढ़ मुक्तेश्वर मेले का है?

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इस घटना के बाद जब मीडिया टीमों ने नौचंदी मेले में मौजूद आम जनता और दुकानदारों से बात की, तो सभी ने एक स्वर में पुष्टि की कि यहां ऐसा कोई भी हादसा नहीं हुआ है। कई स्थानीय लोगों ने ऑफ-कैमरा बताया कि यह वीडियो दरअसल कई महीने पुराना है। लोगों के अनुसार, यह हादसा हापुड़ जिले में लगने वाले प्रसिद्ध 'गढ़ मुक्तेश्वर के मेले' (Garh Mela) में हुआ था। शरारती तत्वों ने उसी पुराने वीडियो को डाउनलोड किया और उस पर 'मेरठ नौचंदी मेला' लिखकर वायरल कर दिया।
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मेला समिति और पुलिस का सख्त एक्शन: "अफवाह फैलाई तो खैर नहीं"

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वायरल वीडियो की हकीकत सामने आने के बाद, नौचंदी मेला समिति ने तुरंत एक आधिकारिक प्रेस नोट (Press Note) जारी कर इस भ्रामक खबर का कड़ा खंडन किया। अपर मुख्य अधिकारी (जिला पंचायत) व सहायक नोडल अधिकारी (मेला) वी.एस. कुशवाहा ने अपने बयान में कहा: "यह वीडियो मेरठ का नहीं है। किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर फेक न्यूज (Fake News) फैलाई जा रही है। मेले में लगे सभी झूलों की फिटनेस रिपोर्ट चेक की गई है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।"
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वहीं, सीओ सिविल लाइन शुचिता सिंह ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "वायरल वीडियो पूरी तरह भ्रामक है। नौचंदी मेले में लगाए गए सभी झूले नियमों के अनुसार स्थापित हैं और पूर्ण रूप से सुरक्षित (Fully Safe) हैं। हम उस शख्स की तलाश कर रहे हैं जिसने सबसे पहले इस फेक वीडियो को मेरठ के नाम से वायरल किया था। साइबर सेल (Cyber Cell) की मदद ली जा रही है। अफवाह फैलाने वाले को बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त आईटी एक्ट (IT Act) के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
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मेरठ के नौचंदी मेले का यह 'फेक वीडियो प्रकरण' इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे किए गए शेयर से पूरे शहर का माहौल खराब हो सकता है और प्रशासन को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। आम जनता से यह अपील की जाती है कि जब तक किसी खबर या वीडियो की प्रामाणिकता (Authenticity) सिद्ध न हो जाए, उसे किसी भी ग्रुप में फॉरवर्ड न करें। नौचंदी मेला पूरी तरह सुरक्षित है और आप बेखौफ होकर सपरिवार इस ऐतिहासिक मेले का आनंद ले सकते हैं।
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