उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले से खाद्य सुरक्षा और आम जनमानस के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आई है। शहर और ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर (Door-to-Door) दूध बेचने वाले विक्रेताओं यानी दूधियों के लिए अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस (License for milk vendors) लेना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। बिना लाइसेंस के दूध बेचना अब गैर-कानूनी माना जाएगा।READ ALSO:-आधार कार्ड धारकों के लिए बड़ा झटका: सरकारी योजनाओं में अब जन्मतिथि (DOB) का प्रमाण नहीं होगा 'Aadhaar', केंद्र सरकार ने लागू किया नया नियम
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस कदम का मुख्य उद्देश्य दूध की गुणवत्ता को बनाए रखना, मिलावटखोरी (Adulteration) पर लगाम लगाना और उपभोक्ताओं (Consumers) के हितों की रक्षा करना है। मेरठ में वर्तमान में हजारों दूधिये ऐसे हैं जो बिना किसी सरकारी पंजीकरण के अपना कारोबार चला रहे हैं। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि मेरठ में दूध कारोबार की मौजूदा स्थिति क्या है, दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया क्या है, इसका आम जनता को क्या फायदा होगा और जिले के दुग्ध उत्पादन के ताजा आंकड़े क्या कहते हैं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

मेरठ में दूध विक्रेताओं की वर्तमान स्थिति: 15 हजार दूधिये बिना लाइसेंस के

\r\n\r\n
मेरठ जिला उत्तर प्रदेश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां पशुपालन (Animal Husbandry) और डेयरी उद्योग बड़े पैमाने पर फैला हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के आंकड़ों के अनुसार, मेरठ में वर्तमान में लगभग 21 हजार दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस पहले से ही जारी किए जा चुके हैं। लेकिन ये वे दूध विक्रेता हैं जो मुख्य रूप से पराग, अमूल या अन्य बड़ी कोऑपरेटिव सोसाइटी (Cooperative Societies) से जुड़े हुए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
चिंता का विषय वे 15,000 दूधिये हैं जो व्यक्तिगत स्तर पर साइकिल, मोटरसाइकिल या छोटी गाड़ियों से डोर-टू-डोर जाकर दूध की सप्लाई करते हैं। इन 15 हजार विक्रेताओं के पास कोई वैध FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) पंजीकरण या लाइसेंस नहीं है। इसी असंगठित क्षेत्र को व्यवस्थित करने और जवाबदेही तय करने के लिए शासन ने अब इन सभी छोटे-बड़े दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस प्राप्त करना सख्त रूप से अनिवार्य कर दिया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जो भी दूध विक्रेता इस नियम का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस क्यों किया गया अनिवार्य? (Why is it Mandatory?)

\r\n\r\n
घर-घर जाकर दूध बेचने वालों के लिए अचानक लाइसेंस अनिवार्य करने के पीछे कई बड़े कारण हैं, जो सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और आर्थिक हितों से जुड़े हुए हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
1. मिलावटखोरी पर पूर्ण लगाम (Curbing Adulteration): त्योहारों के मौसम में या आम दिनों में भी दूध में यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक दूध और पानी की मिलावट की खबरें अक्सर आती रहती हैं। जब दूध विक्रेता पंजीकृत नहीं होते, तो उन्हें पकड़ना या ट्रेस करना मुश्किल होता है। दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य होने से हर विक्रेता का डेटाबेस सरकार के पास होगा, जिससे मिलावट करने वालों में कानून का खौफ पैदा होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
2. दूध की गुणवत्ता और स्वच्छता (Quality & Hygiene): FSSAI लाइसेंस प्राप्त करने के लिए विक्रेताओं को स्वच्छता के कुछ बुनियादी मानकों का पालन करना होता है। जिस बर्तन में दूध रखा जाता है, वह साफ होना चाहिए। लाइसेंसिंग प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि दूध निकालने से लेकर उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचने की प्रक्रिया में हाइजीन (Hygiene) का पूरा ध्यान रखा जाए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
3. जवाबदेही और ट्रैकिंग (Accountability and Tracking): लाइसेंस में विक्रेता का आधार कार्ड, नाम और स्थायी पता दर्ज होता है। यदि किसी इलाके से किसी विशेष दूधिये के दूध को लेकर बार-बार शिकायतें आती हैं, तो फूड इंस्पेक्टर आसानी से उसका लाइसेंस नंबर ट्रैक करके उस पर छापा मार सकते हैं और उसका लाइसेंस रद्द कर सकते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

उपभोक्ताओं को होंगे सीधे और बड़े फायदे (Direct Benefits to Consumers)

\r\n\r\n
इस नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा उस आम उपभोक्ता (End Consumer) को होने वाला है जो हर सुबह अपने परिवार के पोषण के लिए दूध खरीदता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपभोक्ताओं को निम्नलिखित रूप से सशक्त किया जाएगा:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    आर्थिक धोखाधड़ी से बचाव: कई बार ऐसा होता है कि दूधिये महीने की शुरुआत में एडवांस (Advance Payment) पैसा ले लेते हैं और फिर अचानक दूध देना बंद कर देते हैं या समय पर नहीं आते। बिना किसी पहचान पत्र के उपभोक्ता उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते। अब लाइसेंस होने से उपभोक्ता सीधे एफएसडीए (FSDA) या पुलिस में नामजद शिकायत कर सकेंगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    क्वालिटी कंट्रोल की शिकायत: यदि उपभोक्ता को लगता है कि दूध में पानी मिला है या वह सिंथेटिक है, तो वे टोल-फ्री नंबर पर उस लाइसेंस धारक दूधिये के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण: उपभोक्ता की शिकायत सही पाए जाने पर एफएसडीए तुरंत विभागीय कार्रवाई करेगा। मिलावट साबित होने पर जुर्माना लगाया जाएगा और बार-बार गलती करने पर दूधिये का लाइसेंस हमेशा के लिए कैंसिल (Cancel) कर दिया जाएगा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

FoSCoS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)

\r\n\r\n
प्रशासन ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि छोटे दूधियों को लाइसेंस बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के धक्के न खाने पड़ें। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन (Online) और बेहद सरल बनाया गया है। दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अब FSSAI के आधिकारिक पोर्टल 'FoSCoS' (Food Safety Compliance System) के माध्यम से आसानी से बनाया जा सकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आवेदन कैसे करें?

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले दूध विक्रेता को अपने मोबाइल या जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से foscos.fssai.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    रजिस्ट्रेशन का विकल्प चुनें: होमपेज पर 'Apply for License/Registration' के विकल्प पर क्लिक करें और 'Petty Retailer/Snacks/Milk Vendor' की श्रेणी (Category) का चुनाव करें।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    व्यक्तिगत विवरण भरें: फॉर्म में दूध विक्रेता को अपना पूरा नाम, घर का पता, और दूध बेचने का क्षेत्र (Area of Operation) भरना होगा।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    दस्तावेज अपलोड करें: इस प्रक्रिया के लिए बहुत सारे कागजातों की जरूरत नहीं है। केवल आवेदक का आधार कार्ड (Aadhaar Card) और एक नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो (Photo) की आवश्यकता होगी।
    \r\n
  8. \r\n
  9. \r\n
    फीस का भुगतान: जानकारी भरने के बाद फीस जमा करने का विकल्प आएगा।
    \r\n\r\n
      \r\n
    • \r\n
      एक साल (1 Year) के लाइसेंस की फीस मात्र 100 रुपये है।
      \r\n
    • \r\n
    • \r\n
      पांच साल (5 Years) के लाइसेंस के लिए 500 रुपये की फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी।
      \r\n
    • \r\n
    \r\n
  10. \r\n
  11. \r\n
    लाइसेंस की प्राप्ति: फीस जमा होने के कुछ ही दिनों के भीतर डिजिटल लाइसेंस जेनरेट हो जाएगा और आवेदक की ई-मेल आईडी (E-mail ID) और मोबाइल पर लिंक के माध्यम से भेज दिया जाएगा।
    \r\n
  12. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कोऑपरेटिव सोसाइटी (Cooperative Societies) की भूमिका और छूट

\r\n\r\n
मेरठ में दूध की सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा बड़ी कोऑपरेटिव सोसाइटियों द्वारा भी प्रबंधित किया जाता है। अमूल (Amul), पराग (Parag), मधुसूदन (Madhusudan), और आनंदा (Ananda) जैसी बड़ी डेयरियां हजारों किसानों और दूधियों से दूध इकट्ठा करती हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
शासन ने इन कोऑपरेटिव सोसाइटियों को एक विशेष छूट दी है। जो दूध विक्रेता सीधे तौर पर इन सोसाइटियों में अपना दूध बेचते हैं और उनके पंजीकृत (Registered) सदस्य हैं, उन्हें अलग से जाकर व्यक्तिगत रूप से FSSAI के पोर्टल पर माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एफएसडीए (FSDA) करेगा मान्य: नियमों के अनुसार, ये कोऑपरेटिव सोसाइटी खुद अपने स्तर पर अपने पंजीकृत दूधियों को दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस या अधिकृत प्रमाण पत्र जारी कर सकती हैं। एफएसडीए विभाग इस सोसाइटी द्वारा जारी किए गए लाइसेंस को पूरी तरह से वैध मानेगा। हालांकि, एक शर्त यह भी है कि इन कोऑपरेटिव सोसाइटियों को अपने द्वारा लाइसेंस प्राप्त सभी दूधियों का पूरा ब्यौरा (डेटाबेस) नियमित रूप से एफएसडीए विभाग में जमा कराना अनिवार्य होगा। इससे सरकारी रिकॉर्ड भी दुरुस्त रहेगा और किसानों को भी परेशानी नहीं होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मेरठ में दुग्ध उत्पादन: 1114 हजार मीट्रिक टन का विशाल आंकड़ा

\r\n\r\n
मेरठ जिले की अर्थव्यवस्था में डेयरी और दुग्ध उत्पादन का कितना बड़ा योगदान है, इसे हालिया आंकड़ों से समझा जा सकता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (Chief Veterinary Officer) डॉ. पवित्र सिंह ने जिले में दूध उत्पादन के आंकड़े साझा किए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    2023-24 की रिपोर्ट: पिछले वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ जनपद में रोजाना लगभग 1054 हजार मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वर्तमान स्थिति: पशुपालन विभाग के प्रयासों और उन्नत नस्ल के पशुओं के कारण वर्तमान में (2025 की शुरुआत में) यह उत्पादन बढ़कर लगभग 1114 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2024-25 की आधिकारिक और अंतिम रिपोर्ट अभी वेबसाइट पर अपलोड होने की प्रक्रिया में है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इतने विशाल स्तर पर दूध का उत्पादन और उसकी खपत होने के कारण ही यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि सप्लाई चेन (Supply Chain) में शामिल अंतिम व्यक्ति (यानी डोर-टू-डोर दूधिया) भी सरकारी निगरानी और गुणवत्ता मानकों के दायरे में आए। इसी को सुनिश्चित करने के लिए दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता एक गेम-चेंजर साबित होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बिना लाइसेंस दूध बेचने पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना (Penalties for Non-Compliance)

\r\n\r\n
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ (जिसमें दूध भी शामिल है) का बिना पंजीकरण या लाइसेंस के व्यवसाय करना एक दंडनीय अपराध है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने चेतावनी दी है कि जो भी 15 हजार गैर-पंजीकृत दूधिये निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस नहीं बनवाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    छापेमारी और जब्ती: एफएसडीए की टीमें शहर और ग्रामीण चौराहों पर औचक निरीक्षण (Surprise Checks) करेंगी। यदि कोई दूधिया बिना FSSAI नंबर के दूध बेचता हुआ पाया गया, तो उसका सारा दूध जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    भारी जुर्माना (Fine): बिना लाइसेंस के खाद्य व्यापार करने पर कानून के तहत 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    जेल की सजा: यदि दूध में गंभीर मिलावट पाई जाती है (जैसे यूरिया या सिंथेटिक केमिकल) और विक्रेता के पास लाइसेंस भी नहीं है, तो उसे 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का भी प्रावधान है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मिलावटी दूध की पहचान कैसे करें? (Consumer Awareness: Testing Milk at Home)

\r\n\r\n
जब तक सभी दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी होती है, तब तक उपभोक्ताओं को भी अपनी तरफ से सतर्क रहना चाहिए। आप घर बैठे कुछ आसान तरीकों से अपने दूधिए द्वारा लाए गए दूध की शुद्धता की जांच कर सकते हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    पानी की मिलावट (Water Adulteration): दूध की एक बूंद किसी चिकनी और तिरछी सतह (जैसे स्टील की थाली) पर डालें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे बहेगा और पीछे सफेद निशान छोड़ेगा। यदि पानी मिला है, तो बूंद तेजी से बह जाएगी और कोई निशान नहीं छूटेगा।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    सिंथेटिक दूध (Synthetic Milk): सिंथेटिक दूध का स्वाद हल्का कड़वा होता है। इसे उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसी चिकनाहट (Soapy feel) महसूस होती है। गर्म करने पर सिंथेटिक दूध हल्का पीला पड़ जाता है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    यूरिया की मिलावट (Urea in Milk): एक टेस्ट ट्यूब में आधा चम्मच दूध लें और उसमें आधा चम्मच सोयाबीन का पाउडर मिलाएं। 5 मिनट बाद उसमें लिटमस पेपर (Litmus Paper) डुबोएं। अगर लाल लिटमस नीला हो जाए, तो समझ लें दूध में यूरिया मिला हुआ है।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    स्टार्च/मैदा (Starch): 5 मिलीलीटर दूध में आयोडीन (Iodine) की कुछ बूंदें मिलाएं। यदि दूध का रंग नीला (Blue) हो जाता है, तो उसमें स्टार्च की मिलावट की गई है।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि मेरठ में घर-घर जाकर दूध बेचने वालों के लिए FSSAI द्वारा दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया जाना एक बेहद सराहनीय और बहुप्रतीक्षित कदम है। जहां एक ओर मेरठ रोजाना 1114 हजार मीट्रिक टन दूध उत्पादन के साथ डेयरी सेक्टर में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर 15 हजार गैर-लाइसेंसी दूधियों का संगठित होना जिले में खाद्य सुरक्षा को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। मात्र 100 रुपये सालाना की मामूली फीस और FoSCoS पोर्टल के जरिए आधार कार्ड से होने वाला यह सरल पंजीकरण न केवल दूधियों को एक कानूनी पहचान देगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी मिलावटखोरों और धोखेबाजों के खिलाफ एक मजबूत हथियार प्रदान करेगा। एफएसडीए (FSDA) का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि आम जनता की सेहत से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं को भी जागरूक होना चाहिए और अपने दूध विक्रेता से उसका FSSAI लाइसेंस नंबर अवश्य मांगना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन