Meerut Central Market News: मेरठ के शास्त्री नगर स्थित पॉश इलाके सेंट्रल मार्केट (Central Market) में करीब 40 दिन पहले गरजे बुलडोजर का असर अब साफ होने लगा है। आवास विकास परिषद (Avas Vikas Parishad) द्वारा ध्वस्त की गई 22 दुकानों का मलबा, जो पिछले सवा महीने से सड़क पर पड़ा था, अब उठना शुरू हो गया है।READ ALSO:-लखनऊ: स्कूल में एग्जाम दे रहा था 11 साल का आरव, अचानक सीट से गिरा और थम गईं सांसें; हार्ट अटैक से मौत की आशंका
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खास बात यह है कि यह मलबा सिर्फ कचरा नहीं साबित हुआ, बल्कि इससे भी लाखों रुपये की वसूली हुई है। स्थानीय व्यापारियों ने इस मलबे का सौदा करीब 15 लाख रुपये में किया है। इस कदम से न केवल रास्ता साफ होगा, बल्कि प्रभावित दुकानदारों को कुछ आर्थिक राहत भी मिलेगी।
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15 लाख रुपये में हुआ मलबे का सौदा

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ध्वस्तीकरण की कार्रवाई 25 अक्टूबर को की गई थी। इसके बाद से ही ईंट, पत्थर, लोहे के गटर और शटर का अंबार मौके पर लगा हुआ था। स्थानीय व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक:
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    सौदा: दुकानदारों ने आपसी सहमति से इस मलबे को करीब 15 लाख रुपये में एक ठेकेदार को बेचा है।
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    बंटवारा: मलबे से मिलने वाली यह राशि उन दुकानदारों को उनकी दुकानों के क्षेत्रफल और हिस्सेदारी के आधार पर बांटी जाएगी, जिनका नुकसान हुआ है।
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    सफाई शुरू: ठेका होने के बाद मजदूरों और जेसीबी मशीनों ने मलबा उठाने का काम शुरू कर दिया है। इससे आसपास के दुकानदारों और ग्राहकों को भी धूल-मिट्टी से राहत मिलेगी।
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कुछ दिन पहले ही मलबे के ढेर पर दुकानदारों ने अपनी नई लोकेशन के 'शिफ्टिंग बोर्ड' (Shifting Boards) भी लगा दिए थे, ताकि उनके पुराने ग्राहक उनसे संपर्क कर सकें।
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क्या था पूरा मामला? (Meerut Central Market Dispute)

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यह पूरा विवाद सेंट्रल मार्केट के भूखंड संख्या 661/6 से जुड़ा है। यह जमीन बेशकीमती है और इसका क्षेत्रफल करीब 288 वर्ग मीटर है। आवास विकास परिषद के दस्तावेजों के अनुसार:
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    आवंटन: यह भूखंड मूल रूप से काजीपुर निवासी वीर सिंह को 'आवास' (Residential Purpose) के लिए आवंटित किया गया था।
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    अवैध निर्माण: नियमों को ताक पर रखकर विनोद अरोड़ा नामक व्यक्ति ने पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) के जरिए इस आवासीय भूखंड पर एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया।
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    कब्जा: देखते ही देखते यहां 22 दुकानें बन गईं और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं।
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1990 से चल रही थी कानूनी लड़ाई

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प्रशासन और अवैध निर्माणकर्ताओं के बीच यह लड़ाई कोई नई नहीं थी। इसकी नींव 35 साल पहले पड़ चुकी थी।
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    पहला नोटिस: आवास एवं विकास परिषद ने इस अवैध निर्माण के खिलाफ 19 सितंबर, 1990 को पहला नोटिस जारी किया था।
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    कार्रवाई: इसके बाद फाइलों का पेट भरने और लंबे पत्राचार का दौर चला। आखिरकार, प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और 25 अक्टूबर 2025 को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। दो दिन तक चले इस अभियान में पूरी इमारत को जमींदोज कर दिया गया।
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आवास विकास की सख्त संदेश

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इस कार्रवाई के जरिए आवास विकास परिषद ने साफ संदेश दिया है कि आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सेंट्रल मार्केट मेरठ का दिल माना जाता है और यहां इस तरह की कार्रवाई ने अन्य अवैध निर्माणकर्ताओं में भी खौफ पैदा कर दिया है।
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मलबा हटने के बाद अब यह भूखंड पूरी तरह खाली हो जाएगा। परिषद के नियमों के अनुसार, अब इसका उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य के लिए ही किया जा सकेगा। स्थानीय लोगों ने भी मलबा उठने पर राहत की सांस ली है, क्योंकि इससे ट्रैफिक जाम और गंदगी की समस्या हो रही थी।
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मेरठ के सेंट्रल मार्केट में 22 दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने का काम शुरू होना एक बड़े अध्याय का अंत है। 15 लाख रुपये में मलबे का बिकना यह दर्शाता है कि व्यापारियों ने नुकसान की भरपाई का कुछ रास्ता निकाल लिया है। हालांकि, यह घटना उन सभी लोगों के लिए सबक है जो आवासीय जमीनों पर अवैध रूप से बाज़ार खड़ा कर देते हैं।
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