गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) में 'हीरो' से 'विलन' बनने में कितनी देर लगती है, इसका जीता-जागता उदाहरण गाजियाबाद में देखने को मिला है। 4 महीने पहले एक बदमाश के पैर में गोली मारकर और उसे अपने कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाने वाली 'लेडी सिंघम' के नाम से मशहूर हुई महिला दरोगा भुवनेश्वरी सिंह (SI Bhuvaneshwari Singh) को एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-Cold Wave Alert: यूपी में 'बर्फीली आफत' के बीच प्रशासन की नई गाइडलाइन; हीटर जलाकर सोने और ओवरलोडिंग पर चेतावनी, पशुओं-फसलों के लिए 'सुरक्षा चक्र'
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मंगलवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) की टीम ने साहिबाबाद थाने की रिपोर्टिंग पुलिस चौकी में छापा मारकर भुवनेश्वरी सिंह को 45,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के वक्त वर्दी का रौब झाड़ने वाली दरोगा अपना चेहरा दुपट्टे से छिपाती नजर आई। यह वही दरोगा हैं, जिन्हें 23 सितंबर 2025 को पुलिस कमिश्नर ने एनकाउंटर के लिए सम्मानित किया था।
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दहेज केस रफा-दफा करने के लिए मांगी थी घूस

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जानकारी के मुताबिक, मामला साहिबाबाद थाने का है। यहाँ तैनात महिला दरोगा भुवनेश्वरी सिंह के पास दहेज प्रताड़ना से जुड़ा एक मामला जांच के लिए आया था। आरोप है कि इस मामले में नाम निकालने और कार्रवाई में ढील देने के नाम पर उन्होंने पीड़ित पक्ष से भारी रकम की मांग की थी। बाद में सौदा 45,000 रुपये में तय हुआ।
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पीड़ित ने इसकी शिकायत मेरठ स्थित एंटी करप्शन सेल से कर दी। शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही साहिबाबाद थाने की रिपोर्टिंग पुलिस चौकी में भुवनेश्वरी ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, एंटी करप्शन की टीम ने उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया। उनके पास से केमिकल लगे हुए नोट बरामद किए गए हैं।
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23 सितंबर 2025: जब बनी थीं 'पोस्टर गर्ल'

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महज 4 महीने पहले, 23 सितंबर 2025 को भुवनेश्वरी सिंह की तस्वीर पूरे उत्तर प्रदेश में वायरल हुई थी।
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    घटना: उस वक्त महिला थाने में तैनात रहते हुए उन्होंने अपनी टीम (4 पुलिसकर्मियों) के साथ मिलकर एक इनामी बदमाश को घेरा था।
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    एनकाउंटर: मुठभेड़ के दौरान भुवनेश्वरी ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाश के पैर में गोली मारी थी।
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    वायरल वीडियो: गोली लगने के बाद घायल बदमाश को वह खुद अपने कंधे पर लादकर जीप तक ले गई थीं।
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इस बहादुरी के लिए पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने पूरी टीम को सम्मानित किया था। इस टीम में थाना प्रभारी रितु त्यागी, दरोगा विनीता यादव, हेड कॉन्स्टेबल ममता सिंह और नीतू सिंह भी शामिल थीं। इस घटना के बाद ही उन्हें ईनाम के तौर पर साहिबाबाद थाने की रिपोर्टिंग चौकी और पिंक बूथ की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन किसे पता था कि यह 'बहादुरी' भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी थी।
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इतिहास: 'आदतन' रिश्वतखोर हैं भुवनेश्वरी! (कानपुर कनेक्शन)

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भुवनेश्वरी सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। यह पहली बार नहीं है जब वे रिश्वत लेते पकड़ी गई हैं। उनका पुराना रिकॉर्ड बताता है कि वे 'आदतन अपराधी' की तरह वर्दी का गलत इस्तेमाल करती रही हैं।
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साल 2022 का कानपुर कांड: जब भुवनेश्वरी सिंह कानपुर में एडीसीपी पूर्वी (ADCP East) के ऑफिस में तैनात थीं, तब उन्होंने वर्दी को दागदार करने वाला एक बड़ा कांड किया था।
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    सेक्स रैकेट रेड: उन्होंने एक होमगार्ड के साथ मिलकर पनकी इलाके में चल रहे एक सेक्स रैकेट पर छापा मारा।
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    वसूली का प्लान: मौके से जालौन के दो व्यापारियों और दो महिलाओं को पकड़ा। उन्हें थाने ले जाने के बजाय एक कमरे में बंधक बना लिया।
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    15 लाख की डिमांड: छोड़ने के एवज में व्यापारियों से 15 लाख रुपये की मांग की।
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    गिरफ्तारी: इस बात की भनक एडीसीपी राहुल मिठास और एसीपी कोतवाली अशोक सिंह को लग गई। अधिकारियों ने सिविल ड्रेस में एक रेस्टोरेंट में जाल बिछाया और भुवनेश्वरी को 50,000 रुपये की टोकन मनी लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
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सवाल: दागी होने के बावजूद मलाईदार पोस्टिंग कैसे?

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भुवनेश्वरी सिंह की गिरफ्तारी ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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    2022 में रिश्वत लेते पकड़े जाने के बावजूद उन्हें नौकरी में बहाल कैसे किया गया?
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    एक दागी दरोगा को गाजियाबाद जैसे संवेदनशील जिले में साहिबाबाद थाने की रिपोर्टिंग चौकी की जिम्मेदारी क्यों दी गई?
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    क्या 23 सितंबर का एनकाउंटर सिर्फ पिछली छवि को सुधारने का एक 'स्टंट' था?
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फिलहाल, एंटी करप्शन टीम भुवनेश्वरी सिंह को थाने ले गई है, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) करने की संस्तुति कर दी है।
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खाकी वर्दी सुरक्षा का प्रतीक है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम जनता का विश्वास डगमगा जाता है। भुवनेश्वरी सिंह का मामला यह सबक़ है कि केवल एक 'एनकाउंटर' किसी अधिकारी के चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं हो सकता। गाजियाबाद पुलिस के आला अधिकारियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि दागी पुलिसकर्मियों को पब्लिक डीलिंग वाली पोस्टिंग से दूर रखा जाए।
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